वडगाम सीट से क्या फिर बाज़ी मार पाएंगे जिग्नेश मेवाणी, कांग्रेस के गढ़ में मुश्किलें बढ़ीं
- 201 2में भाजपा नेता फकीरभाई वाघेला को हराकर वडगाम विधानसभा सीट जीतने वाले कांग्रेस नेता मणिलाल वाघेला इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हैं.
- 2017 में कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने वाले जिग्नेश मेवाणी अब साल 2022 में वडगाम सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.
- आम आदमी पार्टी के वडगाम प्रत्याशी दलपत भाटिया भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं.
- एआईएमआईएम प्रत्याशी कल्पेश सुंधिया खुद को स्थानीय उम्मीदवार बताकर मतदाताओं को आकर्षित करने का दावा करते हैं.
- वडगाम विधानसभा में इन चारों दावेदारों की जीत भी चौधरी और मुस्लिम वोटरों के रुख पर निर्भर है.
- Author, लक्ष्मी पटेल
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए

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गुजरात के बनासकांठा ज़िले की वडगाम विधानसभा सीट पर 2017 के चुनावों से पहले कभी ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया था. लेकिन यह सीट 2017 से सुर्ख़ियों में आई थी.
इसकी वजह यह थी कि इस सीट पर ऊना आंदोलन में हिस्सा लेने वाले दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी ने कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का एलान किया था.
मेवाणी को समर्थन देने के लिए कांग्रेस ने वडगाम के तत्कालीन विधायक मणिभाई वाघेला को ईडर सीट से चुनाव लड़ने के लिए भेजा. कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं दिया और मेवाणी यहां से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.
2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मणिभाई वाघेला ने कांग्रेस छोड़ दी है और वडगाम सीट से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले मेवाणी अब गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दलपत भाटिया और एआईएमआईएम के उम्मीदवार कल्पेश सुंधिया भी यहां से चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एआईएमआईएम और आम आदमी पार्टी की वजह से मुस्लिम वोटों में बिखराव होगा?
अगर ऐसा हुआ तो फिर कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जिग्नेश मेवाणी के लिए चुनाव जीतना काफ़ी मुश्किल होगा.
हालांकि ऐसा जोख़िम बीजेपी की ओर भी है. अगर चौधरी समाज का वोट इस सीट पर बीजेपी से नाराज हुआ तो उसका नुकसान बीजेपी उम्मीदवार को उठाना होगा, क्योंकि 2005 से 2016 तक डेयरी चेयरमैन रहे विपुल चौधरी को हाल में ही भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. इस गिरफ़्तारी के बाद से चौधरी समाज में बीजेपी को लेकर भारी नाराज़गी है.
मणिभाई वाघेला की दावेदारी

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मणिभाई वाघेला ने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में भाजपा के दिग्गज फ़कीरभाई वाघेला को हराया था. 2012 के चुनाव में मणिभाई वाघेला को 90 हज़ार 375 वोट मिले थे, जिसके मुक़ाबले बीजेपी प्रत्याशी फ़कीरभाई वाघेला को 68 हज़ार 536 वोट मिले थे. मणिलाल वाघेला ने 21 हज़ार 839 मतों से जीत हासिल की थी.
ऊना कांड के बाद उठे दलित आंदोलन से सामाजिक कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी सुर्खियों में आए थे. उन्होंने 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में वडगाम विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की.
दूसरी ओर, विजयकुमार चक्रवर्ती को भाजपा से मैदान में उतारा गया था. चुनाव के नतीजे में विजयकुमार चक्रवर्ती को 75 हज़ार 801 वोट मिले, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी जिग्नेश मेवाणी को 95 हज़ार 497 वोट मिले. मेवाणी ने 19 हज़ार 696 मतों से जीत दर्ज की.
वडगाम विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी मणिलाल वाघेला ने बीबीसी गुजराती से बात करते हुए कहा, "मेरे विधानसभा क्षेत्र वडगाम में पानी का सवाल था, लेकिन हाल ही में सरकार ने मुक्तेश्वर बांध और करमावत झील में पानी भरने की घोषणा की है. मुक्तेश्वर बांध में पानी भरने के लिए 192 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है."
उन्होंने कहा, "2012 से 2017 के बीच अपने कार्यकाल में मैंने एक शिकायत नहीं होने दी थी. सभी लोग एक साथ रहते थे. सभी समुदाय एक साथ रहेंगे तभी क्षेत्र का विकास हो सकता है. मतदाताओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. लोग विकास का स्वागत कर रहे हैं. इसलिए भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में वडगाम विधानसभा सीट भारी बहुमत से जीतेगी."
वहीं वडगाम विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार जिग्नेश मेवाणी ने बीबीसी गुजराती से कहा, "मैं पिछली बार एक आंदोलनकारी के रूप में चुनाव में उतरा था. मुझे चुनाव की राजनीति की जानकारी नहीं थी.
लेकिन इस बार कहा जा सकता है कि मैं राजनीतिक रूप से परिपक्व हो गया हूं. इस बार सुनियोजित तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. वडगाम विधानसभा में 110 गांव हैं, हर गांव में जनमित्र हैं और रैलियां भी आयोजित की जा रही हैं."
मेवाणी का 125 सीट जीतने का दावा

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मेवाणी दावा करते हुए कहते हैं, "गुजरात के लोग बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहे हैं. बेरोजगारी और महंगाई से पीड़ित लोग कांग्रेस को वोट देंगे और जीतेंगे.
इसलिए इस बार गुजरात में कांग्रेस को 125 सीटें मिलेंगी. वडगाम के मुस्लिम भाइयों को पता है कि जिग्नेश मेवाणी ने मुसलमानों के लिए भी बोला और बिल्किस बानो के लिए भी बोला है."
मेवाणी यह भी दोहराते हैं, "वडगाम के हिंदू भाई जानते हैं कि मैंने ऊना पीड़ितों के लिए बात की है. अगर कांग्रेस गुजरात में सरकार में आती है तो पुरानी पेंशन योजना लागू करेंगे, ठेका प्रथा बंद कर स्थाई नौकरी दी जाएगी.
10 लाख रुपये तक का मेडिकल इंश्योरेंस देंगे. कांग्रेस ने इन योजनाओं को राजस्थान में भी लागू किया है."
वडगाम विधानसभा से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी दलपत भाटिया ने कहा, "वडगाम सीट पर आम आदमी पार्टी की जीत तय है.
इस सीट पर जीत के बाद आम आदमी पार्टी लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों पर जोर देगी. इसके अलावा पेयजल का मुद्दा भी है और उस क्षेत्र में कृषि जल का मुद्दा भी. तो हम वर्षों से चल रहे मुद्दों का समाधान करेंगे."
उन्होंने यह भी बताया, "इस क्षेत्र में जीआईडीसी बनाने का प्रस्ताव कई वर्षों से है ताकि युवाओं को रोज़गार मिल सके. वडगाम में अनुसूचित जाति समुदायों के लिए एक छात्रावास था जिसे बंद कर दिया गया है.
हम केवल अनुसूचित जाति समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि हर समुदाय के लिए छात्रावास और स्कूल बनाएंगे. शिक्षा पर जोर रहेगा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न तो सुविधाएं हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ है. हम स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देंगे."
कांग्रेस के गढ़ में मेवाणी की मुश्किल

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वहीं वडगाम से एआईएमआईएम के उम्मीदवार कल्पेश सुंधिया ने बीबीसी गुजराती को बताया, "वडगाम में हर पार्टी एक आयातित उम्मीदवार लाती है, जबकि हमारी पार्टी ने मुझे स्थानीय उम्मीदवार के रूप में मौका दिया है.
एक स्थानीय उम्मीदवार स्थानीय लोगों के मुद्दों को अच्छी तरह से समझ सकता है. क्या हर पार्टी को ऐसा लगता है कि वडगाम के लोग इस सीट का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते?"
दलित एक्टिविस्ट और लेखक चंदू महेर्या के मुताबिक, चुनाव जीतना कभी आसान नहीं होता.
उन्होंने कहा, "सिर्फ जिग्नेश मेवाणी ही नहीं, किसी भी पार्टी या उम्मीदवार के लिए यहां चुनाव जीतना आसान नहीं है. वडगाम विधानसभा के बीजेपी उम्मीदवार मणिलाल वाघेला कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गए हैं.
वो कांग्रेस में जीते, लेकिन जिन लोगों ने उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर वोट दिया, उन्होंने उन्हें बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर भी नहीं चुना. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वे जीतेंगे ही."
वडगाम विधानसभा सीट के बारे में बात करते हुए स्थानीय पत्रकार एमजी पटेल ने बीबीसी गुजराती से कहा, "वडगाम विधानसभा सीट का इतिहास देखें तो इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार संकेत हैं कि समीकरण बदलेंगे."

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"इस बार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार मणिलाल वाघेला ने 2012 में वडगाम में कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल की थी. वडगाम क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी अच्छी पहचान है, जिससे उन्हें फायदा हो सकता है.
साथ ही, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दलपतभाई भाटिया दलित समुदाय के साथ खड़े हैं. सामाजिक आयोजनों से लेकर हर मौके पर यह लोकप्रिय भी हैं. इसलिए इस बात की भी संभावनाएं हैं कि दलित समुदाय का वोट आम आदमी पार्टी की ओर जा सकता है."
एमजी पटेल के मुताबिक़, वडगाम विधानसभा सीट पर मुस्लिम समुदाय के वोट महत्वपूर्ण हैं. माना जाता है कि वे वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं.
लेकिन इस बार ओवैशी की पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारा है. लिहाज़ा मुस्लिम वोटों के बंटने की भी आशंका है जिसका फ़ायदा बीजेपी को भी मिल सकता है.
वडगाम सीट का जातीय समीकरण
बनासकांठा ज़िले की वडगाम विधानसभा सीट पर दो लाख 94 हज़ार मतदाता हैं. इनमें एक लाख 44 हज़ार महिला मतदाता और एक लाख 49 हज़ार पुरुष मतदाता हैं.
वडगाम विधानसभा सीट के जातीय समीकरण को देखें तो इस सीट पर सबसे ज़्यादा वोट मुस्लिम समुदाय के हैं, जिनके वोटरों की संख्या 82 हज़ार है.
इसके बाद चौधरी समाज के 51 हज़ार, दलित समाज के 42 हज़ार, ठाकोर समाज के 41 हज़ार मतदाता हैं. इसके अलावा प्रजापति और नाई समाज के चार-चार हज़ार और देवीपूजक समाज के 1500 मतदाता हैं.
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