गुजरात में चुनाव लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से ग़ायब क्यों

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- Author, रॉक्सी गागेडकर छारा
- पदनाम, बीबीसी गुजराती

भारत जोड़ो यात्रा की अहम बातें
- यह यात्रा सात सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई है
- भारत जोड़ो यात्रा अगले 150 दिनों में देश के 12 राज्यों और दो केंद्र-शासित प्रदेशों से गुजरेगी
- यह यात्रा 3,570 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में समाप्त होगी
- नवंबर के महीने में हिमाचल प्रदेश और दिसंबर में गुजरात में विधानसभा चुनाव है लेकिन इन दोनों राज्यों से यात्रा नहीं गुजरेगी

गुजरात में आगामी नवंबर-दिसंबर महीने में चुनाव होना है. लेकिन यह राज्य राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा नहीं है.
इस बात को सुनकर लोगों को अचरज हो सकता है लेकिन हक़ीक़त यही है कि गुजरात इस यात्रा में शामिल नहीं है. 150 दिनों तक चलने वाली ये यात्रा गुजरात से क्यों नहीं गुजरने वाली है, इसको लेकर आम लोगों के मन में कई सवाल तैर रहे हैं.
दिलचस्प यह है भी कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, गुजरात चुनाव के ख़त्म होने के एक महीने बाद तक चलती रहेगी.
अभी यह माना जा रहा है कि राहुल गांधी यात्रा से कुछ दिनों का ब्रेक लेकर गुजरात के चुनाव प्रचार अभियान में शामिल होंगे. लेकिन अपनी इस यात्रा के दौरान वह गुजरात के चुनाव पर कितना ध्यान दे पाएंगे, इसको लेकर संदेह बना हुआ है.
सितंबर महीने में कन्याकुमारी से शुरू हुई यह यात्रा जनवरी महीने में श्रीनगर पहुंचेगी. यह यात्रा जिन 12 राज्यों से होकर गुजरने वाली है, उनमें महाराष्ट्र तो शामिल है लेकिन गुजरात को शामिल नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, गुजरात के साथ जिस हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव होना है, वह राज्य भी इस यात्रा के मार्ग में शामिल नहीं है.

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कांग्रेस का वोट काटेगी आम आदमी पार्टी
एक तरफ़ तो राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान गुजरात की धरती पर क़दम नहीं रखेंगे वहीं दूसरी ओर राज्य में आम आदमी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों में पूरा दम झोंक दिया है.
आम आदमी पार्टी, राज्य की सभी 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में जुटी है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों की राय यही है कि कांग्रेस कुछ कर नहीं रही है, मानो वह चुनाव मैदान में उतरना ही नहीं चाहती.
आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल नियमित तौर पर गुजरात का दौरा कर रहे हैं और चुनावी वादे कर रहे हैं, जबकि गुजरात प्रदेश कांग्रेस कहीं दिखाई नहीं दे रही है.
हाल ही में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया है कि अगले साल गुजरात के पोरबंदर से अरुणाचल प्रदेश तक की ऐसी ही यात्रा होगी. हालांकि जब यह यात्रा शुरू होगी, उससे काफी पहले ही गुजरात का चुनाव हो चुका होगा.
राहुल गांधी की यात्रा का असर

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बारे में अंग्रेजी अख़बार द हिंदू की पूर्व एसोसिएट एडिटर स्मिता गुप्ता ने बताया, "ऐसी यात्राएं, लोगों से संपर्क करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है. देश ने ऐसी कई सफल यात्राएं देखी हैं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के परिणाम भी अच्छे हो सकते हैं."
लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में गुजरात क्यों नहीं शामिल है, इस बारे में पूछे जाने पर स्मिता गुप्ता ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस की कोई दिलचस्पी राज्य के चुनाव में नहीं है. लोगों से संपर्क करने का सिलसिला 2017 के विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद शुरू करना चाहिए था. लेकिन इन लोगों ने कुछ नहीं किया. गुजरात कांग्रेस लोगों से संवाद नहीं कर सकी और अब तो काफ़ी देर भी हो चुकी है."
"मौजूदा स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि कांग्रेस गुजरात चुनाव में अच्छा नहीं करेगी और भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त होने के चलते राहुल गांधी को इसके लिए ज़िम्मेदार भी नहीं ठहराया जा सकता."
2022 गुजरात चुनाव के नज़रिए से देखें तो राहुल गांधी के अब तक राज्य में तीन कार्यक्रम हुए हैं. इनमें एक कार्यक्रम में उन्होंने सोमनाथ में कार्यकर्ताओं से संवाद किया था, दाहोद में आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ बैठक के अलावा बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं के साथ अहमदाबाद में बैठक की है. इन कार्यक्रमों के बाद राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं.
गुजरात में पार्टी का हाल

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वहीं दूसरी ओर गुजरात में आम आदमी पार्टी की सक्रियता को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक को तोड़ने में कामयाब हो सकती है.
भारत जोड़ो यात्रा में गुजरात के शामिल नहीं होने की वजह के बारे में एमएस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और राजनीति विज्ञानी अमित ढोलकिया ने बीबीसी गुजराती से बताया, "मौजूदा समय में गुजरात चुनाव बहुत दूर नहीं रह गए हैं. ऐसे में इस यात्रा में अगर गुजरात भी शामिल होता तो पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता. हालांकि गुजरात कांग्रेस के लिए कार्यकर्ताओं को जुटाना हमेशा से ही मुश्किल रहा है. यह चुनौती काफी बड़ी है. तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य में इस यात्रा को काफी लोगों का समर्थन मिला है, ऐसे में अगर गुजरात में लोग नहीं होते तो इसका भी मतदाताओं में ग़लत संदेश जाता. गुजरात को शामिल नहीं करने की, ये भी एक वजह हो सकती है."
हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों सवाल उठा रहे हैं कि अगर भारत जोड़ो यात्रा गुजरात से गुजरती तो क्या इससे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का उत्साह नहीं बढ़ता?
गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बाबरिया ने कहा, "लॉजिस्टिक के लिहाज से यह संभव नहीं है. मौजूदा यात्रा दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ रही है, ऐसे में इस यात्रा में गुजरात को शामिल करना बेहद मुश्किल है. वैसे भारत जोड़ो यात्रा की सबसे अहम बात लोगों से संपर्क और संवाद करना है."

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में गुजरात कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल की अहम भूमिका है. लेकिन उनके अलावा गुजरात कांग्रेस का कोई भी नेता इस यात्रा में नज़र नहीं आया है.
गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन भाई मोढवाडिया ने कहा, "यह स्पष्ट किया जा चुका है कि इस यात्रा का चुनावी अभियान से कोई लेना देना नहीं है. अगर हम ऐसा करते तो इस यात्रा का उद्देश्य ही ख़त्म हो जाता. यह कोई चुनावी यात्रा नहीं है."
गुजरात कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता सीजे चावड़ा ने कहा, "इस यात्रा का कोई चुनावी उद्देश्य नहीं है. इसका उद्देश्य लोगों से संवाद करना है. राहुल जी के चुनावी कार्यक्रम की अलग से योजना है."
भारत जोड़ो यात्रा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश से होते हुए उत्तर भारतीय राज्यों से गुजरेगी. इस यात्रा में राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं, जहां कांग्रेस की सरकारें हैं.
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