गुजरात चुनाव में बेअसर लग रही कांग्रेस कैसे कर रही है प्रचार?

गुजरात चुनाव

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    • Author, हिम्मत कटारिया
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में एक बैठक में कहा कि आपको यह मानकर चुनाव में नहीं बैठना चाहिए कि ''कांग्रेस चुप है और कुछ नहीं कर रही है.''

उन्होंने कहा था, "वे प्रेस-कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे हैं या कोई चुनौतीपूर्ण बयान नहीं दे रहे हैं लेकिन मुझे पता चला है कि वे क्या कर रहे हैं. हमें सतर्क रहना होगा."

मोदी ने आगे कहा, "कांग्रेस बहुत शांत है, लेकिन यह मत सोचो कि यह ख़त्म हो गई है. वे चुपचाप गांवों में जा रहे हैं और अपना आधार मज़बूत कर रहे हैं. इस भ्रम में न रहें कि वे (चुनाव के लिए) कुछ नहीं कर रहे हैं."

कांग्रेस के चुनाव प्रचार में मोदी ने क्या देखा? क्या कांग्रेस का मौन अभियान वास्तव में मतदाताओं को आकर्षित करने में सक्षम है?

हमने कांग्रेस के मौन अभियान के बारे में विस्तार से जानने के लिए अंदर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क किया.

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कांग्रेस के आठ वादे

वैसे तो कांग्रेस का प्रचार धरातल पर ज़्यादा दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन अगर आप सोशल मीडिया पर नज़र डालें तो गुजरात में कांग्रेस के प्रचार के केंद्र में ये हैं मुख्य आठ चुनावी वादे:

  • 500 रुपये में घरेलू गैस सिलेंडर, सरकारी कर्मचारियों के लिए 300 यूनिट घरेलू बिजली मुफ़्त, पुरानी पेंशन योजना
  • केजी से पीजी तक लड़कियों के लिए मुफ़्त शिक्षा, 3000 नए सरकारी अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल
  • युवाओं को 10 लाख नौकरी, ठेका व्यवस्था का कुल ख़ात्मा, बेरोज़गारों को 3000 रुपए मासिक भत्ता
  • किसानों का तीन लाख रुपये तक का क़र्ज़ माफ़, किसानों के बिजली बिल माफ़, दुग्ध उत्पादकों को पाँच रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी
  • 10 लाख रुपये तक मुफ़्त इलाज, किडनी, लीवर और हृदय प्रत्यारोपण, हर गुजराती के लिए मुफ़्त दवा
  • नशा माफ़िया के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई, नशा विरोधी क़ानूनों का सख़्ती से पालन, अपराधियों को जेल
  • शहरी क्षेत्र में ज़रूरतमंद लोगों को शहरी रोज़गार गारंटी योजना, सिर्फ़ आठ रुपये में भोजन का प्रावधान
  • सरकारी नौकरियों में भर्ती और सरकारी नौकरियों में ठेका प्रथा को समाप्त किया जाएगा
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युवा कांग्रेस अधिक सक्रिय

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गुजरात यूथ कांग्रेस ज़्यादा सक्रिय नज़र आ रही है. खटला परिषद, पदयात्रा, देर रात मशाल रैलियां, युवा बाइक रैलियां, हज़ारों ट्रैक्टरों के साथ किसानों की रैलियां निकाली जा रही हैं. यहां लोक कथाओं के साथ मनोरंजन के कार्यक्रम होते हैं. गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने बीबीसी से कहा, "मशाल रैली क्रांति का प्रतीक है और युवा इसे आगे ले जा रहे हैं."

बीबीसी से बात करते हुए, युवा कार्यकर्ता और महुवा (भावनगर) तालुका कांग्रेस के अध्यक्ष परेश जिंजाला ने कहा, "प्रत्येक बूथ पर चुनावों पर नज़र रखने के लिए 10 लोगों की एक टीम है और हमने 70 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है."

"पिछले चुनाव की समीक्षा करना और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना जहां हम हार गए, हार के कारण जानने हैं, ऐसे काम है, जैसे महुवा क्षेत्र में जहां हम पीछे थे, वहां कटपर से मढ़िया तक आगे के तटीय गांवों में रात्रिभोज के साथ बैठकें की गईं. निरमा को हटाने के कारण, हम इन गांवों में हार गए. इसलिए हमें यहां ऐसे उद्योगों को लाने की कोशिश के साथ प्रचार करना पड़ा जो प्रदूषण का कारण नहीं बनते हैं और लोगों की ज़्यादा ज़मीन नहीं लेते हैं."

उनके मुताबिक़ पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ग्रामीण इलाक़ों से ज़्यादा सीटें मिली थीं. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक ज़ोर दिया जाता है.

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कांग्रेस के प्रचार मुद्दे

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कांग्रेस अपने अभियान में युवाओं को निशाना बनाकर पेपरलीक का मुद्दा उठा रही है. राज्य में विभिन्न भर्ती प्रक्रिया और लिखित परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं की सूची के साथ, यह दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में गुजरात में 22 पेपर लीक हुए हैं.

गुजरात में कांग्रेस की प्रचार शैली युवा परिवर्तन रैलियों के आयोजन करने और लंबे भाषणों से बचने पर केंद्रित है. वहीं युवा शाखा के सोशल मीडिया पोस्ट पर भाजपा की गौरव यात्रा का मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है.

कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बीजेपी के 27 साल के शासन में महंगाई और बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, सरकारी स्कूलों की बदहाली और निजी स्कूलों में महंगी शिक्षा, कोरोना के समय में ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर की कालाबाज़ारी जैसे मुद्दे उठाए हैं. इंजेक्शन, गैस सिलेंडर की क़ीमतों में बढ़ोतरी के अलावा किसानों पर जीएसटी का बोझ को मुद्द बना रही है.

इतना ही नहीं कांग्रेस गुजरात के हर ज़िले में जीआईडीसी, 30,000 से ज़्यादा स्कूलों के निर्माण, हर ज़िले में कृषि, तकनीकी, इंजीनियरिंग और प्रबंधन विश्वविद्यालयों की स्थापना जैसे अपने 27 साल पुराने शासन की उपलब्धियों को भी गिनवा कर बीजेपी की आलोचना कर रही है.

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कुछ वर्गों को बाहर रखने का निर्देश?

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कांग्रेस समाज के किस वर्ग को निशाना बनाती है? ऐसे ही एक सवाल के जवाब में सौराष्ट्र के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हमें कुछ ख़ास कार्यक्रमों में कुछ वर्गों को एक साथ नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी कोई घोषणा नहीं हुई है लेकिन आंतरिक रूप से बताया गया है कि रथ यात्रा, जन्माष्टमी सहित हर त्योहार कांग्रेस के बैनर के साथ मनाया जाना है. लोगों को यह भी महसूस होना चाहिए कि यह कांग्रेस से प्रेरित कार्यक्रम हैं.

हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप गोहिल कहते हैं, ''गुजरात कांग्रेस पुराने ढंग से प्रचार कर रही है, इसलिए कांग्रेस के पास कोई अभियान नीति या रणनीति नहीं दिखती. लगाए गए पोस्टरों और उठाए गए मुद्दों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस 'कम बोले चे' के तहत पूर्व में किए गए ज़मीनी कार्यों को याद दिलाने का प्रयास है और आठ वादे किए गए हैं."

वो कहते हैं, "नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस खटला में बैठक कर रही है, इसके कई अर्थ हैं. एक कारण भाजपा कार्यकर्ता को सचेत करना है."

इस बार सबसे बड़ी ख़ामी यह है कि गुजरात में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बड़े नेता अक्सर सभाएं कर रहे हैं. इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम गुजरात कांग्रेस द्वारा नहीं किए गए हैं.

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वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की एक क्लिप वायरल हुई जिसमें वह एक बीजेपी कार्यकर्ता को बता रहे थे कि आम आदमी पार्टी के अभियान को सोशल मीडिया पर भाजपा की तुलना में अधिक व्यूज़ क्यों मिल रहे हैं.

दिलीप गोहिल कहते हैं, ''मंडाविया के शब्दों का मतलब है कि सोशल मीडिया के प्रचार में भी बीजेपी कांग्रेस से नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी से मुक़ाबला कर रही है. संक्षेप में कहें तो 27 साल बाद भी कांग्रेस उतना नहीं कर रही है, जितना होना चाहिए. जब एक तीसरा दल मैदान में आया, तो कांग्रेस को दिखते रहने की ज़रूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके विपरीत, कांग्रेस ने उम्मीदवारों की जल्द घोषणा करने की जो बात की थी, वह अभी तक नहीं हुई है."

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गुजरात के सभी ज़िलों को कवर करने वाली पाँच यात्राएं

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हालांकि, गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने निष्क्रियता के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, "सबसे पहले, आदिवासी सम्मेलन ने अंबाजी से उमरगाम तक 40 आदिवासी सीटों को कवर किया, दाहोद से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में शुरू हुआ."

"राहुल गांधी ने पाँच सितंबर को अहमदाबाद में रिवरफ्रंट पर एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कांग्रेस के आठ चुनावी वादे किए थे. फिर हम अपने बूथ, मेरे गौरव के तहत इन वादों के साथ घर-घर जा रहे हैं."

इसके अलावा उनका दावा है कि कई कार्यक्रमों के तहत वो अलग-अलग वर्ग के लोगों से मिल रहे हैं.

आने वाले कार्यक्रमों के बारे में मनीष दोशी कहते हैं, "दिवाली के बाद, हम पाँच चुनावी यात्रा की योजना बना रहे हैं. दो यात्राएं सौराष्ट्र में होगी, एक-एक यात्रा दक्षिण गुजरात, उत्तरी गुजरात और मध्य गुजरात से शुरू होगी. ये सभी यात्राएँ सात दिनों की अवधि की होंगी और उस क्षेत्र के सभी ज़िलों को कवर करेंगी."

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बीजेपी जब पेज कमेटी (पन्ना प्रमुख) लेकर आई तो कांग्रेस 'मारू बूथ, मारू गौरव' लेकर आई है.

उम्मीदवारों की सूची की घोषणा के संबंध में मनीष दोशी कहते हैं, ''19 से 21 स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकें हो रही हैं. उम्मीदवारों की सूची चार चरणों में घोषित की जाएगी. पहले चरण की सूची में 40 से 50 उम्मीदवार होंगे और इसकी घोषणा की जाएगी."

हालांकि, दिलीप गोहिल कहते हैं, ''कांग्रेस के पास समय के अनुरूप नए मतदाताओं को आकर्षित करने की कोई योजना नहीं है, और अगर उसके पास कोई योजना है, तो उसका प्रभावी क्रियान्वयन ज़मीनी स्तर पर प्रचार में नहीं दिखता है.''

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