बिना कपड़ों के खाली कमरे में रहना और कुत्ते का खाना- 'क्रूर' रियलटी शो की दुनिया

जापान

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इमेज कैप्शन, नासुबी 1998 में जापानी टीवी पर दिखाई दिए थे.
    • Author, स्टीवन मैकिन्टोश
    • पदनाम, एंटरटेनमेंट संवाददाता

साल 1998 में एक रियलटी शो के चैलेंज में एक जापानी व्यक्ति को नग्न अवस्था में खाली अपार्टमेंट में अकेला छोड़ दिया गया था.

तोमोआकी हमात्सु को सिर्फ़ एक पेन, कुछ खाली पोस्टकार्ड, एक टेलिफ़ोन और कुछ मैगज़ीन के साथ अकेला छोड़ा गया था. तोमोआकी हमात्सु को नासुबी के नाम से भी जाना जाता है.

मैगज़ीन तो थीं लेकिन तोमोआकी वहां पढ़ाई के लिए नहीं गए थे. ‘सुसुनु’ नामक इस शो का कॉन्सेप्ट कुछ ऐसा था कि क्या कोई इंसान सिर्फ़ शो के दौरान मिले इनामों पर ज़िंदा रह सकता है?

चैलेंज जीतने के लिए इनामों की क़ीमत का एक निश्चित धनराशि तक पहुंचना ज़रूरी था. जो उस समय क़रीब 10 लाख जापानी येन थी.

भूख और अकेलेपन के कारण नासुबी अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए और उनकी मानसिक स्थिति ख़राब हो चुकी थी. वह 15 महीने तक इन गंभीर चुनौतियों से जूझते रहे.

लगभग तीन दशक बाद नासुबी की उस पीड़ा को एक बार फिर ‘द कंटेस्टेंट’ डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए दिखाया जा रहा है. इस डॉक्यूमेंट्री को हाल ही में शेफ़ील्ड फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिखाया गया है.

बीबीसी

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डॉक्यूमेंट्री का आइडिया कहां से आया?

क्लेयर टिटले 'द कंटेस्टेंट' डॉक्यूमेंट्री की निर्देशक हैं.

वो कहती हैं, ''मैं एक दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, तब मुझे नासुबी की कहानी के बारे में पता चला और फिर मैंने इंटरनेट पर इसके बारे में खोजा.''

''मैंने जो कुछ भी देखा वो मुझे अपमानजनक लगा. वास्तव में नासुबी की कहानी के बारे में गहराई से बात नहीं की गई थी. मेरे मन में कई सवाल थे, जैसे- वहां यह सब क्यों हो रहा है और इसका नासुबी पर क्या प्रभाव पड़ा. इसलिए मैंने यह सोचते हुए उनसे संपर्क किया कि मैं उनके ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहती हूं.''

नासुबी को एक ओपन ऑडिशन के ज़रिए चुना गया था. उन्हें पता था कि उन्हें फ़िल्माया जाएगा लेकिन फ़ुटेज के प्रसारण को लेकर जो उन्हें बताया गया था वो अस्पष्ट था. इससे उन्हें ऐसा लगा था कि शायद इसका प्रसारण नहीं किया जाए.

नासुबी

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इमेज कैप्शन, बाएं से दाएं: डॉक्यूमेंट्री निर्माता एंडी राइडर और मेगुमी इनमिन, नासुबी और निर्देशक क्लेयर टिटले.

धीरे-धीरे यह 22 वर्षीय युवा देश के बड़े सेलिब्रिटी के रूप में अपनी जगह बना रहा था क्योंकि यह रियलटी शो लगातार लोकप्रिय हो रहा था.

आलोचकों ने इस कार्यक्रम को नापसंद किया, लेकिन इसने युवा दर्शकों का एक बड़ा समूह अपनी ओर खींचा.

यह शो ‘द ट्रूमैन शो’ के रिलीज़ होने से पहले प्रसारित होना शुरू हुआ था, जिसमें जिम कैरी ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई थी जो यह नहीं जानता था कि उसकी ज़िंदगी एक टीवी सिरीज़ के रूप में प्रसारित हो रही है.

नीदरलैंड का चर्चित ‘बिग ब्रदर’ रियलटी शो भी जापान के इस शो के एक साल बाद शुरू हुआ था. ‘बिग ब्रदर’ के बाद टेलीविज़न शो का एक नया अध्याय शुरू हुआ था.

बीबीसी से बातचीत में टिटले कहती हैं, “मुझे लगता है कि यूट्यूब की वजह से पिछले एक दशक में लोगों ने इसके बारे में ज़्यादा जाना है. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसे जापान और दक्षिण कोरिया के बाहर नहीं दिखाया जाता था. इसे कभी बाहरी दुनिया में दिखाने के इरादे से नहीं बनाया गया था.”

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इमेज कैप्शन, कमरे के अंदर ज़िदा रहने की जद्दोजहद करते नासुबी.

जब नासुबी को कुत्ते का खाना दिया गया

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एक महत्वाकांक्षी एक्टर-कॉमेडियन, नासुबी को शो शुरू होने से पहले इस बारे में बहुत कम जानकारी थी कि यह असल में क्या होगा.

उन्हें बिना खिड़की वाले कमरे में बिना कपड़े और मूलभूत सुविधाओं जैसे- टॉयेल पेपर के बिना रखा गया था. इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं था.

डॉक्यूमेंट्री में नासुबी और शो के निर्माता तोशिओ त्सुचिया के ताज़ा साक्षात्कारों को शामिल किया गया है.

डॉक्यूमेंट्री के बाक़ी हिस्सों में उन लोगों को भी शामिल किया गया था जो उस समय इसकी कवरेज में शामिल थे. इनमें उस वक़्त जापान में रहने वाले बीबीसी के एक पूर्व संवाददाता भी हैं.

लेकिन डॉक्यूमेंट्री के बड़े हिस्से में उस समय के शो की फ़ुटेज और इनको देखते हुए दर्शकों की वैसे ही प्रतिक्रिया शामिल है, जैसे उस समय इस शो को दर्शक देखते थे.

टिटले का कहना है कि उन्होंने और उनकी टीम ने मूल फ़ुटेज को बहुत मेहनत से खंगाला और इसके अधिकांश हिस्से को हटा दिया.

वो कहती हैं, "सारी फु़टेज में जापानी ग्राफ़िक्स थे, जापानी भाषा में कहानी, बनावटी हंसी, साउंड इफ़ेक्ट्स, शोर और ग्राफ़िक्स भरे पड़े थे. इसलिए हमने अंग्रेज़ी बोलने वाले दर्शकों को यह समझने की छूट दी है कि असल में यह कैसा था."

वीडियो कैप्शन, फ़िल्मों और टीवी शो में हिंसा देखकर क्या सोचते हैं बच्चे

जापानी ग्राफ़िक्स को अंग्रेज़ी के साथ बदला गया. एक अंग्रेज़ी बोलने वाले व्यक्ति ने कहानी को जापानी से अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की ज़िम्मेदारी संभाली थी.

इन कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि डॉक्यूमेंट्री अमेरिका में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म हुलू पर रिलीज़ हो चुकी है. आलोचक जितना इस कहानी से प्रभावित हुए, उतना ही उन्होंने नासुबी की पीड़ा को क़रीब से जाना.

जैसे-जैसे शो आगे बढ़ता नासुबी शो के अंदर कई पुरस्कार जीतते लेकिन कई बार यह कुछ काम के नहीं थे.

इनमें टायर, गोल्फ़ की गेंदें, एक टेंट, एक ग्लोब, एक टेडी बियर और स्पाइस वर्ल्ड: द मूवी के टिकट शामिल थे.

असल में नासुबी शारीरिक तौर पर कमज़ोर होते जा रहे थे लेकिन लेकिन शो के निर्माताओं के लिए यह कोई चिंता का विषय नहीं था.

डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि अगर नासुबी ने इनाम में चावल नहीं जीता होता तो उनकी मृत्यु हो सकती थी.

बाद में उन्होंने मीठा पेय पदार्थ और कुत्ते का खाना भी जीता, जिसे खाकर वे कई सप्ताह तक ज़िंदा रहे.

नासुबी

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इमेज कैप्शन, चैलेंज जीतने के बाद नासुबी

शो के लगभग 1.5 करोड़ दर्शकों ने उनकी इस जीत को देखा था और फिर ज़िंदा रहने के लिए उनके संघर्ष को भी देखा था.

नासुबी पूरे शो में नग्न अवस्था में रहे क्योंकि उन्होंने पूरे शो के दौरान पहनने लायक कोई कपड़ा नहीं जीता था.

अपार्टमेंट का दरवाज़ा बंद नहीं था और सैद्धांतिक रूप से नासुबी को जब चाहे तब बाहर जाने की अनुमति थी. तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?

इस बारे में टिटले कहती हैं, "वह बहुत वफ़ादार व्यक्ति हैं. एक कारण यह है कि वह बहुत ही दृढ़ निश्चयी है. वह ख़ुद को मुसीबत में नहीं डालना चाहते थे और उस समय नासुबी जवान और भोले थे."

"वह अब भी अविश्वसनीय रूप से भरोसेमंद हैं. उनमें जापानी समुराई की भावना भी है कि 'मैं जीतूंगा और मैं इससे बचूंगा'."

नासुबी

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तीन दशक बाद भी पीड़ा

लगभग तीन दशक बाद, नासुबी ने इस शो को "क्रूर" बताया और कहा कि इसमें "कोई ख़ुशी और स्वतंत्रता नहीं थी."

एंटरटेनमेंट न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म ‘डेडलाइन’ से बातचीत में नासुबी कहते हैं, "मेरे ज़िंदगी के बारे में शायद हफ़्ते में तीन या पांच मिनट दिखाए जाते थे. लेकिन जब मैं इनाम जीतता था तो मेरी ख़ुशी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए इसे एडिट किया जाता था."

"बेशक, दर्शक कहते थे, 'ओह, देखो, वह कुछ मज़ेदार कर रहा है और कुछ ऐसा कर रहा है जिसका वह आनंद ले रहा है...' लेकिन मेरे जीवन का ज़्यादातर हिस्सा दु:ख में बीता."

हालांकि, डॉक्यूमेंट्री में वह इस अनुभव को लेकर सहज दिखे और टिटले का मानना है कि वह अब काफ़ी सकारात्मक स्थिति में हैं.

वह कहती हैं, "जब लोग उनसे पूछते हैं कि क्या उन्हें इसका अफ़सोस है, तो वे हमेशा यही कहते हैं कि हालांकि वे ऐसा दोबारा नहीं करना चाहेंगे, लेकिन वे ऐसे व्यक्ति नहीं होते जो आज हैं."

वीडियो कैप्शन, वो शख्स जो एक साथ बजा लेता है कई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स

शो के आख़िर में नासुबी को एक नकली कमरे में ले जाया गया और इससे पहले कमरे की दीवारें गिरतीं, वहां मौजूद दर्शक उनका नाम लेकर जय-जयकार करने लगे. इसके बाद नासुबी को रिहा कर दिया गया.

डॉक्यूमेंट्री में नासुबी की रिहाई के बाद की कहानी भी दिखाई जाती है. इसमें नासुबी शो के ज़रिए मिली प्रसिद्धि का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करते हुए दिखाई देते हैं और उन्हें संतुष्टि का अहसास होता है.

टिटले कहती हैं कि नासुबी को लगा कि उनकी कहानी पर दोबारा गौर करने के लिए यह सही समय है, उन्होंने आगे कहा कि "जो कुछ हुआ था, उससे उन्हें शायद कुछ शांति मिली होगी."

1990 के दशक में आज जैसी परिस्थितयां नहीं थीं और अब यह संभावना भी है कि आज दर्शक इस तरह के शो को पसंद नहीं करेंगे.

लेकिन यह डॉक्यूमेंट्री इस बारे में सवाल उठाती है कि मनोरंजन के लिए कोई लकीर हो तो वो कहां खींची जाए. एक सवाल ये भी है कि इसके लिए दर्शकों की रुचि किस हद तक ज़िम्मेदार है.

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