नेपोलियन बोनापार्ट और उनकी पहली पत्नी जोसफ़ीन की प्रेम कहानी में प्रेम था भी या नहीं

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    • Author, कैथरीन एस्टबरी
    • पदनाम, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वार्विक में प्रोफ़ेसर

पिछले दिनों रिलीज़ हुई रिडले स्कॉट की फ़िल्म 'नेपोलियन' फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट और उस महिला पर केंद्रित है, जिसे नेपोलियन जोसफ़ीन कहकर बुलाते थे.

स्कॉट कहते हैं इस फ़िल्म में नेपोलियन को ऐसी शख़्सियत के तौर पर दिखाया गया है, जिसने जोसफ़ीन का प्यार जीतने की कोशिश में दुनिया फ़तह कर ली.

और जब जोसफ़ीन का प्यार नहीं जीत सके तो उन्हें तबाह करने के लिए दुनिया फ़तह कर ली, और इस पूरी प्रक्रिया में ख़ुद को तबाह कर लिया.

जब ख़बर आई कि जोसफ़ीन की भूमिका वैनेसा किर्बी निभाएंगी तो इतिहासकार दंग रह गए. ऐसा इसलिए क्योंकि किर्बी नेपोलियन की भूमिका निभा रहे वाकिन फ़ीनिक्स की तुलना में काफ़ी छोटी (14 साल) हैं, जबकि जोसफ़ीन वास्तव में नेपोलियन से छह साल बड़ी थीं.

स्कॉट ने 'द न्यूयॉर्कर' से बात करते हुए उन इतिहासकारों को कुछ ढंग का काम करने की सलाह दी जो फ़िल्म में की गई ग़लतियों पर सवाल उठा रहे थे.

लेकिन जोसफ़ीन और नेपोलियन की उम्र के फ़र्क़ का उनकी ज़िंदगी और प्यार पर गहरा असर रहा था.

फ्रांसीसी क्रांति के दौरान विधवा हुईं जोसफ़ीन का नाम 'मैरी जोसफ़ी-रोज़ द ब्यूहानै' था. उनके दो बच्चे थे और उनका भविष्य अनिश्चितताओं में घिरा हुआ था.

उस समय उनकी उम्र 30 से 40 के बीच थी. उन्हें युवा तो नहीं माना जा सकता, लेकिन उन्होंने पेरिस के फ़ैशन पसंद समाज का हिस्सा बनने की हर संभव कोशिश की, और जान-पहचान का इस्तेमाल करते हुए पॉल बर्रास नाम के राजनेता के साथ दोस्ती की थी.

नेपोलियन से शादी

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उन्हें कोर्सिका के युवा जनरल नेपोलियन बोनापार्ट से शादी करने के लिए मनाया गया, जो उनपर फ़िदा थे.

जोसफ़ीन से मिलने के कुछ ही महीनों बाद और मार्च 1976 में उनकी शादी के तुरंत बाद, नेपोलियन को इटली में क्रांतिकारी सेना का नेतृत्व करने के लिए भेज दिया गया था.

इटली से उन्होंने जोसफ़ीन को कई प्रेम भरे ख़त लिखे. इनमें इतना ज़्यादा 'इमोशनल ब्लैकमेल' किया हुआ था और इतनी बार प्यार जताया गया था कि इसमें भावनाएं कम, धमकी ज़्यादा नज़र आती है.

एक चिट्ठी में उन्होंने लिखा था, “तुम कभी मुझे ख़त नहीं लिखती. तुम अपने पति का ख़्याल नहीं रखती हो.”

एक में लिखा था, “मुझे तुम्हारी कोई ख़बर नहीं मिली. मुझे यक़ीन हो गया है कि अब तुम मुझे प्यार नहीं करतीं.”

एक में लिखा है, “हर रोज़ मैं तुम्हारी करतूतों को गिनता हूं. मैं अब तुम्हें प्यार न करने के लिए ख़ुद पर बहुत ग़ुस्सा करता हूं. लेकिन क्या मैं तुम्हें अब पहले से ज़्यादा प्यार नहीं करता?"

जब जोसफ़ीन इटली रहने आईं, तब भी नेपोलियन उनके हर क़दम की ख़बर रखते थे और चिट्ठियां चाहते थे.

इस दौरान तक नेपोलियन का जुनून कुछ कम हो गया था, मगर रवैया फिर भी जोसफ़ीन को क़ाबू में रखने जैसा था.

नेपोलियन को अपनी पत्नी की जान-पहचान से होने फ़ायदों का एहसास हो चुका था और वह यह भी स्वीकार कर चुके थे कि एक-दूसरे के लिए दोनों की भावनाओं का स्तर अलग है.

1798 तक किसी उपन्यास की तरह भावनाओं का इज़हार करने का तरीक़ा बदल चुका था और 1780 तक वह कुछ 'ठंडे' से हो गए.

ये चिट्ठियां उनके रिश्ते को समझने के लिए बहुत व्यावहारिक हैं.

शक्तिशाली पति-पत्नी

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एक सम्मानित युद्ध नायक की पत्नी जोसफ़ीन ने अपनी राजनीतिक जान-पहचान का इस्तेमाल अपने फ़ायदे के लिए किया, शायद नेपोलियन के नियंत्रण भरे रवैये से बचने के लिए,

लोग जानते थे कि नेपोलियन और जोसफ़ीन एक टीम के रूप में कितने प्रभावशाली हो सकते हैं. इसलिए उनके आलोचकों, जिनमें नेपोलियन के परिजन भी शामिल थे, ने जोसफ़ीन की छवि बिगाड़ने के लिए अफ़वाहें भी फैलाईं.

जोसफ़ीन ने अपने प्रेमी हिपोलाइट चार्ल्स को जो चिट्ठियां लिखी थीं, उनसे पता चलता था कि उनके लिए हालात कितने परेशान कर देने वाले हो चुके थे.

नेपोलियन मिस्र में एक अभियान पर थे, जब उन्हें यह सबूत सौंपा गया कि जोसफ़ीन का प्रेम प्रसंग चल रहा है. इस बारे में नेपोलियन ने अपने भाई को चिट्ठी भेजी थी, लेकिन बीच में ही यह लीक हो गई ब्रिटेन में छप गई. जल्द ही फ्रांस में भी सभी को इसका पता चल गया.

शुरू में नेपोलियन नाख़ुश हुए थे, लेकिन बाद में जब वह पेरिस गए तो जोसफ़ीन को माफ़ कर दिया.

जोसफ़ीन ने भी अपने पति के राजनीतिक दांवपेंचों में मदद की और 1800 में हुए तख़्लापलट के बाद उन्हें सत्ता मिल गई.

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क्रांतियों से भरे दशक के कारण हुई खेमेबंदी को मिटाने के लिए नेपोलियन को जोसफ़ीन की नरमी भरी कूटनीति और कुलीन वर्ग से आने का फ़ायदा मिला.

जोसफ़ीन को नया फ्रांस बनाने में भूमिका निभाने में ख़ुशी मिल रही थी. 1796 में तो वह इटली जाकर अपने पति के साथ रहने की इच्छुक नहीं थीं, लेकिन बाद में वह हर जगह उनके साथ गई.

यह जोसफ़ीन के लिए बहुत अहम था कि कहीं नेपोलियन किसी और युवा महिला की ओर आकर्षित न हो जाएं.

नेपोलियन 1807 में पोलैंड यात्रा में जोसफ़ीन को अपने साथ नहीं ले गए और वहां उनका एक बड़े परिवार की महिला मारिया वालेव्स्का से लंबा अफ़ेयर चला. लेकिन इस दौरान उनकी चिट्ठियां दिखाती हैं कि वह अभी भी जोसफ़ीन के प्रति अनुराग रख रहे थे. फिर भी, तलाक़ का ख़तरा मंडरा रहा था.

नेपोलियन ने 1804 में वंश के आधार पर राजशाही चलाने की कोशिश की. उनके परिवार के लोग लगातार उन पर एक वारिस को लेकर दबाव बना रहे थे. जोसफ़ीन उन्हें वारिस नहीं दे पाई थीं.

जोसफ़ीन की एक नौकरानी एवरिलियन ने उस दौर के बारे में लिखा है, जब दोनों तलाक़ के बहुत क़रीब और एक-दूसके से काफ़ी दूर हो चुके थे. 1809 में जब उनका तलाक़ हुआ तो जोसफ़ीन बहुत सदमे में थीं.

'अटूट' रिश्ता

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इस तलाक़ को देश की ज़रूरतों के लिए एक त्याग की तरह दिखाया गया. नेपोलियन ने ऑस्ट्रिया के हैप्सबर्ग की आर्चडचेस मेरी लूई से शादी होने तक जोसफ़ीन के पास जाना और उन्हें चिट्ठियां लिखना जारी रखा था.

जोसफ़ीन ने 1811 में बेटे के जन्म पर नेपोलियन को बधाई दी और कहा कि हमारी नियति कभी अलग नहीं हो सकती, ऐसे में वह उनके लिए हमेशा ख़ुश रहेंगी.

1812 में रूस के लिए अभियान शुरू करने से पहले नेपोलियन पेरिस के बाहर जोसफ़ीन की पसंदीदा जगह मालमेज़ों में उनसे मिलने गए. वह इसके बाद कभी उन्हें नहीं देख पाए क्योंकि 1814 में जोसफ़ीन की मौत हो गई थी.

वॉटरलू में हार के बाद, सेंट हेलेना के लिए देश निकाला दिए जाने से पहले नेपोलियन ने मामेज़ों में समय बिताया था.

इन दोनों का रिश्ता कैसा था, इसे लेकर किसी एक नतीजे पर पहुंचना आसान नहीं है क्योंकि जोसफ़ीन के बहुत कम ऐसे पत्र बचे हैं, जिनसे उनका पक्ष जाना जा सके.

क्या वह शुरू में नेपोलियन को प्यार करती थीं? शायद नहीं.

क्या वह उनसे प्यार करने लगी थीं? शायद हां.

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नेपोलियन ने जोसफ़ीन की उम्र और उनकी आलोचनाओं की परवाह नहीं की और उनके बच्चों की भी अच्छी देखभाल की.

हालांकि, आख़िरकार, जोसफ़ीन और नेपोलियन दोनों ही एक-दूसरे से ज़्यादा प्यार सत्ता से करते थे.

उन्हें एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने के फ़ायदों का पता चल चुका था और बहुत तेज़ी से वे शीर्ष पर भी पहुंचे.

आख़िर में, नेपोलियन को बेटे की ज़रूरत होने के कारण उनकी सत्ता और शादी, दोनों में भूचाल ला दिया.

मगर देश निकाले पर जाने से पहले उनका मालमेज़ों जाना दिखाता है कि जोसफ़ीन की उनके लिए कितनी अहमियत थी.

भले ही वह भरोसेमंद न रही हों, लेकिन वफ़ादार रहीं और नेपोलियन के लिए भाग्यशाली भी साबित हुईं. 1821 में मौत से कुछ समय पहले नेपोलियन को उनका सपना आया था.

नेपोलियन के वफ़ादार मार्शल ने लिखा है, “उन्होंने बताया कि उन्होंने जोसफ़ीन को देखा और बात की.”

नेपोलियन को उम्मीद थी कि वो जल्द ही जोसफ़ीन के साथ होंगे.

(कैथरीन एस्टबरी यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉरिक में फ्रेंच स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर हैं.)

मूल लेख बीबीसी कल्चर पर प्रकाशित है, जिसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं. वह लेख 'द कन्वर्सेशन' में हुई एक बातचीत से लेकर क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत फिर से प्रकाशित किया गया है.

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