वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू की आदत बन गई है रिकॉर्ड तोड़ना

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चार फ़ुट 11 इंच की वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू भारत के लिए भारोत्तलन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं.
वो विश्व चैंपियनशिप में दो मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. राष्ट्रमंडल खेलों में भी दो गोल्ड मेडल उनके नाम हैं. उनके पास नहीं है तो बस एशियन गेम्स का मेडल. और इसी कमी को पूरी करने की कोशिश में हैं इस बार मीराबाई चानू.
रिकॉर्ड तोड़ना और बनाना मीराबाई के लिए आम सी बात हो चुकी है. लेकिन ये वही मीराबाई है जिनके नाम के आगे कभी रियो ओलंपिक में लिखा गया था 'डिड नॉट फ़िनिश'.
ओलपिंक जैसे मुक़ाबले में अगर आप दूसरे खिलाड़ियों से पिछड़ जाएं तो एक बात है, लेकिन अगर आप अपना खेल पूरा ही नहीं कर पाएं तो ये किसी भी खिलाड़ी के मनोबल को तोड़ने वाली घटना हो सकती है.
मीराबाई चानू के बुरे दिन

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
साल 2016 में भारत की वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू के लिए ऐसा ही हुआ था. ओलंपिक में अपने वर्ग में मीरा सिर्फ़ दूसरी खिलाड़ी थीं जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था 'डिड नॉट फ़िनिश'.
जो भार मीरा रोज़ाना प्रैक्टिस में आसानी से उठा लिया करतीं, उस दिन ओलंपिक में जैसे उनके हाथ बर्फ़ की तरह जम गए थे. उस समय भारत में रात थीं, तो बहुत कम भारतीयों ने वो नज़ारा देखा.
सुबह उठ जब भारत के खेल प्रेमियों ने ख़बरें पढ़ीं तो मीराबाई रातों-रात भारतीय प्रशंसकों की नज़र में विलेन बन गईं थीं. नौबत यहां तक आई कि 2016 के बाद वो डिप्रेशन में चली गईं. उन्हें हर हफ़्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़े.
इस असफलता के बाद एक बार तो मीरा ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2017 में ज़बरदस्त वापसी की.
छोटे कद और बुलंद हौसले वाली मीरा

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
वैसे 23 साल की उम्र और चार फ़ुट 11 इंच की मीराबाई चानू को देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि देखने में नन्ही सी मीरा बड़े-बड़ों के छक्के छुड़ा सकती हैं.
48 या 49 किलोग्राम के अपने वज़न से क़रीब चार गुना ज़्यादा वज़न यानी 194 किलोग्राम उठाकर मीरा ने 2017 में साल वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था,
22 साल में ऐसा करने वाली मीराबाई पहली भारतीय महिला बन गई थीं.
48 किलो का वज़न बनाए रखने के लिए मीरा ने उस दिन खाना भी नहीं खाया था. इस दिन की तैयारी के लिए मीराबाई पिछले साल अपनी सगी बहन की शादी तक में नहीं गई थीं. भारत के लिए पदक जीतने वाली मीरा की आंखों से बहते आंसू उस दर्द के गवाह थे जो वो 2016 से झेल रही थीं.
सफलता का सफर
अब तक इतने बड़े मेडल तीज चुकी हैं मीराबाई चानू
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2014- सिल्वर
- विश्व चैंपियनशिप 2017- गोल्ड
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2018- गोल्ड
- एशियन चैंपियनशिप 2020- कांस्य
- टोक्यो ओलंपिक 2021- सिल्वर
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 गोल्ड
- विश्व चैंपियनशिप 2022- सिल्वर
बचपन में ही दिखने लगा था हुनर

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
आठ अगस्त 1994 को जन्मी और मणिपुर के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं. बिना ख़ास सुविधाओं वाला उनका गांव इंफ़ाल से कोई 200 किलोमीटर दूर था.
उन दिनों मणिपुर की ही महिला वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी स्टार थीं और एथेंस ओलंपिक में खेलने गई थीं.
बस वही दृश्य छोटी मीरा के ज़हन में बस गया.
छह भाई-बहनों में सबसे छोटी मीराबाई ने वेटलिफ़्टर बनने की ठान ली. मीराबाई ने बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वूमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड के लिए दिए इंटरव्यू में बताया था, ''गांव में हम सबको पहाड़ी पर से पानी और लकड़ी ढोकर घर लानी पड़ती थी. मेरे भाई कई चक्कर लगाते थे और सामान ढोकर लाते थे. लेकिन मैं एक ही चक्कर में सब कर लेती थी. एक बार मैंने एक वेटलिफ़्टिंग हॉल देखा जहां हर कोई प्रेक्टिस कर रहा था और चिल्ला रहा था. मुझे अच्छा लगा और मेरी रुचि हो गई.''
मीरा की ज़िद के आगे माँ-बाप को भी हार माननी पड़ी. 2007 में जब प्रैक्टिस शुरू की तो पहले-पहल उनके पास लोहे का बार नहीं था तो वो बाँस से ही प्रैक्टिस किया करती थीं.
गांव में ट्रेनिंग सेंटर नहीं था तो 50-60 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थीं. डाइट में रोज़ाना दूध और चिकन चाहिए था, लेकिन एक आम परिवार की मीरा के लिए वो मुमकिन न था. उन्होंने इसे भी आड़े नहीं आने दिया.
11 साल में वो अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन.
तोड़ा अपने आइडल का रिकॉर्ड

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
जिस कुंजुरानी को देखकर मीरा के मन में चैंपियन बनने का सपना जागा था, अपनी उसी आइडल के 12 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को मीरा ने 2016 में तोड़ा- 192 किलोग्राम वज़न उठाकर.
हालांकि सफ़र तब भी आसान नहीं था क्योंकि मीरा के मां-बाप के पास इतने संसाधन नहीं थे. बात यहां तक आ पहुंची थी कि अगर रियो ओलंपिक में क्वालीफ़ाई नहीं कर पाईं तो वो खेल छोड़ देंगी.
ख़ैर यहां तक नौबत नहीं आई. वर्ल्ड चैंपियनशिप के अलावा, मीराबाई ने ओलंपिक और ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते. कभी गांव में चूल्हा जलाने के लिए लड़कियां ढोने वाली मीराबाई अब भारत की ओलंपिक चैपंयिन हैं.
वैसे वेटलिफ्टिंग के अलावा मीरा को डांस का भी शौक़ है. बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, "मैं कभी-कभी ट्रेनिंग के बाद कमरा बंद करके डांस करती हूं और मुझे सलमान खान पसंद हैं."
वेटलिफ़्टिंग में पिछले 25 सालों से एशियन गेम्स में भारत पदक के लिए तरसता रहा है. आख़िरी बार 1998 में करनम मल्लेशवरी ने बैंकॉक एशियन गेम्स में मेडल जीता था. अब मीरा का अगला पड़ाव एशियन गेम्स ही है और उसके बाद पेरिस ओलंपिक.
महिला वेटलिफल्टरों से मीराबाई कुछ ख़ास कहना चाहती हैं . वो कहती हैं, जिन्हें लगता है कि लड़कियां वेटलिफ़्टिंग नहीं कर सकतीं, या जिन्हें लगता है कि इससे लड़कियों का शरीर ख़राब हो जाता है, तो उन्हें बता दूं कि ये सच नहीं है. आप मुझे देख सकते हैं, मुझे कुछ भी नहीं हुआ.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














