यूपी पुलिस में भर्ती परीक्षा आज से, जानिए क्या हैं बदलाव और पेपर लीक पर कैसी सख़्ती

उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही की नौकरी के लिए 23 अगस्त से परीक्षा शुरू हो रही है.

पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए होने वाली ये परीक्षा 23, 24, 25, 30 और 31 अगस्त को आयोजित होगी.

माना जा रहा है कि यूपी पुलिस में 60 हज़ार 244 पदों के लिए होने वाली इस भर्ती में 40 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं.

परीक्षा के लिए 67 ज़िलो में 1,174 सेंटर बनाए गए हैं. ये परीक्षा इसी साल फ़रवरी में हुई थी लेकिन प्रश्न पत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी.

इसे लेकर उस वक़्त काफ़ी विवाद भी हुआ था.

यूपी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने बताया कि पुलिस ने परीक्षा के मद्देनज़र सभी तरह की तैयारियां कर ली हैं.

क्या है तैयारी?

यूपी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने एक एडवाइज़री जारी करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस भर्ती परीक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की थी."

"मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि परीक्षा को लेकर कोई गड़बड़ी न हो. इसके लिए छोटे-छोटे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए. परीक्षा केंद्र ही नहीं, रास्तों की भी निगरानी रखी जाएगी."

इसके अलावा यूपी पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदेश की अलग-अलग जगहों की पुलिस ने इंतज़ाम को लेकर जानकारी दी है और तैयारियों के बारे में बताया है.

वहीं, यूपी सरकार ने चेतावनी दी है कि पेपर लीक कराने की कोशिश करते हुए पाए जाने वाले व्यक्ति पर उस नए क़ानून के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है.

इसके तहत परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग, नकल करना या नकल कराना और प्रश्न पत्र लीक करना इस अपराध की श्रेणी में आते हैं.

नकल और पेपर लीक रोकने के लिए बदलाव

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता सैयद मोज़िज़ इमाम के अनुसार, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने कई बदलाव किए हैं.

परीक्षा में शामिल होने वालों के लिए फ्री में बस सेवा की सुविधा दी गई है. हालांकि इसके लिए परीक्षार्थी को अपना एडमिट कार्ड दिखाना होगा.

परीक्षा सेंटर में सीसीटीवी की निगरानी और पुलिस की तैनीती के अलावा पेपर लीक से बचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

परीक्षा केंद्र में परीक्षार्थी का केवाईसी वेरिफ़िकेशन कराया जाएगा. परीक्षार्थी का बायोमेट्रिक लिया जाएगा और आधार कार्ड के ज़रिए पहचान की पुष्टि की जाएगी.

इसके अलावा एसटीएफ़ को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है.

परीक्षा केंद्र में निगरानी की ज़िम्मेदारी सेक्टर मैजिस्ट्रेट को दी गई है. सेक्टर मैजिस्ट्रेट की ही निगरानी में ट्रेजरी ऑफिस से सेंटर तक पुलिस की सुरक्षा में प्रश्न पत्र लाए जाएंगे.

दरअसल, यूपी में इस साल फ़रवरी में हुई पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक होने के आरोपों के बाद राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परीक्षा को रद्द करते हुए छह महीने के अंदर परीक्षा कराए जाने की बात कही थी.

पेपर लीक की घटना को लेकर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और मायावती ने सरकार पर निशाना साधा था.

लीक की घटना के बाद छात्रों ने किया था प्रदर्शन

पेपर लीक होने की घटना के बाद, लखनऊ सहित राज्य की कई जगहों पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था.

तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "धांधली मुक्त परीक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख़्शे नहीं जाएंगे. ऐसे अराजक तत्वों के ख़िलाफ़ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है."

लेकिन इसी बीच लोकसभा के चुनाव की गहमागहमी शुरू हो गई.

विपक्ष के आरोप

प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग थी कि पेपर लीक के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया जाना चाहिए.

जब यूपी सरकार ने परीक्षा रद्द की तो समाजवार्दी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे युवाओं की जीत बताया था.

उन्होंने कहा था, "ये भारतीय जनता पार्टी के प्रपंचों की हार है. पहले पेपर लीक ही नहीं हुआ कहने वाली सरकार अब मान गई."

वहीं, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, "यूपी में पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने से संबंधित परीक्षा का रद्द होना अति-गंभीर एवं चिंतनीय.''

उन्होंने कहा था, ''इससे राज्य और सरकार की बड़ी बदनामी के साथ ही युवाओं और बेरोजगारों का भविष्य ख़राब होकर उनका जीवन दांव पर लग जाता है. यूपी आख़िर कब पेपर लीक मुक्त प्रदेश होगा? सरकार इस ओर ध्यान दे."

इस साल पेपर लीक के कई मामले सामने आए. केंद्रीय स्तर पर होने वाली नीट और यूजीसी-नेट परीक्षाएं भी इसका शिकार हुईं.

इस पर बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने बीते जून में पेपर लीक के मामलों को रोकने के लिए बने क़ानून को लागू कर दिया.

नए क़ानून के तहत दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक जेल की सज़ा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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