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राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर भर्ती का पेपर हुआ था लीक, ढाई साल बाद कैसे खुला राज़
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जयपुर से
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की भर्ती पेपर लीक मामले में गिरफ़्तार 14 ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों को छह मार्च को कोर्ट में पेश किया गया.
कोर्ट के आदेश पर राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को छह दिन की रिमांड मिली है.
प्रदेश में पहली बार है जब जॉइनिंग के बाद ट्रेनिंग ले रहे अभियुक्तों को फर्जी तरीके से नौकरी लगने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
यह परीक्षा सितंबर, 2021 में हुई थी.
जांच एजेंसी एसओजी ने 3 मार्च, 2024 को 40 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ नामजद एफ़आईआर दर्ज कर पांच मार्च को 14 ट्रेनी सब इंस्पेक्टर समेत 16 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया.
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा है, "इस मामले में अभी और गिरफ़्तारियां होंगी. हम जैसे-जैसे वेरिफ़ाई करेंगे उसी आधार पर गिरफ़्तारियां भी करेंगे."
ढाई साल बाद पेपर लीक की बात सामने आई
आरपीएससी ने फ़रवरी, 2021 में 859 पदों पर सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर पदों पर भर्ती निकाली थी.
13 से 15 सितंबर को प्रदेश भर में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई. दो शिफ़्ट में हुई इस भर्ती परीक्षा में लाखों की संख्या में युवा शामिल हुए थे.
परीक्षा में अंतिम चयन के बाद चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग दी गई और पुलिस एकेडमी में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई.
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की भर्ती पेपर लीक मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक जूनियर इंजीनियर पेपर लीक मामले में गिरफ़्तार 'मास्टरमाइंड' जगदीश विश्नोई ने पूछताछ में सब इंस्पेक्टर भर्ती पेपर लीक की बात भी बताई.
पूछताछ के आधार पर एसओजी की टीम ने 40 नामजद अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई.
एसओजी ने 14 ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों को हिरासत में लिया है.
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के एडीजी विजय कुमार के मुताबिक जयपुर के हसनपुर में एक निजी स्कूल में बनाए गए परीक्षा केंद्र के सुप्रिटेंडेंट राजेश खंडेलवाल को भी हिरासत में लिया गया है.
पूछताछ के बाद एसओजी ने सभी को पांच मार्च को गिरफ्तार कर लिया. छह मार्च को कोर्ट में पेश कर बारह मार्च तक के लिए रिमांड पर लिया है.
एडीजी के मुताबिक जिन लोगों पर पेपर लीक और ख़ुद की जगह डमी कैंडिडेट बैठा कर परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है उनमें भर्ती परीक्षा टॉपर नरेश विश्नोई भी शामिल है.
इस घटना के बाद एक बार फिर से भर्ती परीक्षाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
कैसे हुआ पेपर लीक
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप(एसओजी), राजस्थान पुलिस की एक इकाई है. एसओजी के अनुसार भर्ती परीक्षा का एक केंद्र जयपुर के हसनपुर में रविंद्र बाल भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल में था.
एसओजी का कहना है कि परीक्षा केंद्र सुप्रिटेंडेंट राजेश खंडेलवाल के साथ मिलकर जगदीश विश्नोई, यूनिक भाम्बू, शिवरतन मोट ने पेपर लीक का षड्यंत्र रचा था.
भर्ती परीक्षा 13 से 15 सितंबर, 2021 तक आयोजित की गई.
एसओजी के मुताबिक़, अभियुक्त परीक्षा के पहले दिन यानी 13 सितंबर, 2021 को पेपर लीक करने में कामयाब नहीं हो पाए थे, इसके बाद 14 और 15 सितंबर को परीक्षा के दिन सेंटर पर पेपर पहुंचने से पहले ही यूनिक भाम्बू प्रिंसिपल रूम में छिप गया था.
आरोप है कि परीक्षा से करीब दो घंटे पहले ही अभियुक्त भाम्बू पेपर सेंटर पर पहुंच गया, जिसे प्रिंसिपल रूम में रखकर कमरा सील कर दिया गया.
आरोप है कि पहले से कमरे में छिपे यूनिक भाम्बू ने अपने फोन से पेपर की तस्वीर खींच कर जगदीश विश्नोई को भेज दी और पैकेट को पहले की तरह बंद कर दिया.
पुलिस ने बताया कि पूछताछ में अभियुक्तों ने जानकारी दी कि इसके एवज में जगदीश विश्नोई ने यूनिक भाम्बू के जरिए परीक्षा केंद्र सुप्रिटेंडेंट राजेश खंडेलवाल को दस लाख रुपए दिए.
‘पेपर को हल कर भेजा’
एफआईआर के मुताबिक परीक्षा केंद्र से यूनिक भाम्बू के ज़रिए व्हाट्सएप पर मिले पेपर को जगदीश विश्नोई ने प्रिंट करवाया और उसको सॉल्व किया.
आरोप है कि हल किए गए पेपर को 14 और 15 सितंबर की परीक्षा से पहले राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में बैठे अपने हैंडलर्स तक व्हाट्सएप के जरिए पहुंचाया गया.
एसओजी की जांच में सामने आया है कि उदयपुर में पंद्रह तारीख की परीक्षा से पहले एक होटल के कमरे में पांच अभ्यर्थियों को फ़ोन पर पेपर पढ़ाया गया. इनमें से अशोक सिंह नाथावत, राजेंद्र यादव और प्रेमसुखी का सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हुआ था.
हालांकि, अशोक सिंह नाथावत और राजेंद्र यादव ने ज्वाइन नहीं किया. जबकि, प्रेमसुखी पुलिस एकेडमी से ट्रेनिंग कर रहीं थीं.
धांधली से बने ट्रेनी सब इंस्पेक्टर?
एफआईआर के अनुसार भर्ती के टॉपर सांचौर ज़िले के नरेश विश्नोई, नारंगी कुमारी विश्नोई, राजेश्वरी, गोपी राम जांगू, श्रवण कुमार विश्नोई, मनोहर विश्नोई, सुरेंद्र कुमार विश्नोई, करणपाल गोदारा, विवेक भाम्बू, एकता कुमारी, रोहिताष कुमार समेत दर्जनों अन्य भी ट्रेनिंग कर रहे हैं.
इनमें से अधिकतर ट्रेनी सब इंस्पेक्टर फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं. जबकि, जांच में कई और नाम सामने आने पर गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.
लाखों रुपए में बिका पेपर
एसओजी के अनुसार जगदीश विश्नोई गैंग के सदस्य अशोक सिंह नाथावत के पास 14 तारीख की परीक्षा का पेपर हर्षवर्धन मीणा के अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए भेजा गया था. लेकिन, अशोक नाथावत ने पंद्रह लाख रुपए में यह पेपर हैंडलर अनिल कुमार मीणा को बेच दिया.
अनिल कुमार मीणा ने ख़ुद के और अपने साइट हैंडलर्स कमलेश मीणा, अरुण शर्मा के ज़रिए कई अभ्यर्थियों को पेपर पढ़वाया. अनिल मीणा ने यही भूपेंद्र सारण को पचास लाख रुपए में बेचने का सौदा कर पच्चीस लाख रुपए लिए.
एफआईआर के मुताबिक भूपेंद्र सारण ने यह सॉल्व पेपर अपने हैंडलर्स सुनील, महेंद्र, सुनील भादू, कमलेश ढाका, सुरेश साहू और दिनेश सारण व अन्य के ज़रिए कई अभ्यर्थियों को पढ़वाया.
इनमें से अभय सिंह, मनोहर लाल, मनोहर सिंह, भगवती विश्नोई समेत कई अन्य का अंतिम रूप से भर्ती में चयन होने के बाद ट्रेनिंग कर रहे हैं. जबकि, कई ने ज्वॉइन ही नहीं किया.
पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे कई अन्य सब इंस्पेक्टर भी अभी एसओजी के संदेह के घेरे में हैं.
एसओजी ने एफआईआर में चालीस नामजद अभियुक्तों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 120बी, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा 1992 की 4, 5, 6 की धाराएं लगाई गई हैं. आईटी एक्ट 2008 की 66डी भी लगाई गई है.
भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग
एसओजी के खुलासे के बाद से ही मीडिया और सोशल मीडिया में इस भर्ती पेपर लीक का मामला लगातार उठ रहा है. लेकिन, इसी बीच भर्ती को रद्द करने की भी मांग उठ रही है.
राज्य की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस भर्ती में फर्जी तरीके से चयनितों की संख्या चार सौ तक होने का दावा किया है. उन्होंने इस भर्ती को रद्द करने की अपनी ही सरकार से मांग की है.
मंत्री का दावा है कि इस भर्ती में महिला की जगह एक पुरुष ने बतौर डमी कैंडिडेट परीक्षा दी है. फर्जीवाड़े का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है.
एसओजी की कार्रवाई के बाद से ही यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. युवा इस भर्ती को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, अभी एसओजी की जांच जारी है. एडीजी एसओजी विजय कुमार के अनुसार अभी कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव है.
यदि बड़ी संख्या में और गिरफ्तारियां होती हैं तो सरकार भर्ती को रद्द करने का निर्णय भी ले सकती है.
क्या बोले युवा
जोधपुर के शेरगढ़ की रहने वाली 23 साल की सरिता चौधरी ने भी सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा दी थी. दो साल की तैयारी के बाद भी उनका चयन नहीं हुआ.
लेकिन, वह अब खुश हैं कि फर्जी तरीके से उनका हक़ छीनने वालों को सजा तो मिल रही है.
सरिता कहती हैं, "पिता किसान हैं, खेती बाड़ी के काम से ही परिवार चलता है. इसलिए हम शहर जा कर पढ़ाई नहीं कर सकते, गांव से ही मेहनत कर रहे हैं. लेकिन, पेपर लीक की ख़बरें हमारे बुने हुए सपने उधेड़ देती हैं."
इस कार्रवाई के बाद क्या पेपर लीक रुकने की उम्मीद नज़र आ रही है, इस सवाल पर वह कहती हैं, "हमारे पास उम्मीद ही है कि पेपर लीक होना रुक जाएगा. लेकिन, गलत तरीके से लगे लोगों को ट्रेनिंग से पकड़ ला रहे हैं तो कहीं न कहीं सही हो रहा है."
धौलपुर ज़िले के एक गांव से 23 साल के विष्णु कुमार ने भी दो साल की तैयारी कर सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा दी थी. वह धौलपुर से चार सौ किलोमीटर दूर कोटा में परीक्षा देने गए थे.
वह कहते हैं, "खूब तैयारी की लेकिन पेपर लीक हमेशा हम ग्रामीण परिवेश के युवाओं की उम्मीद तोड़ देता है."
"यह भर्ती तीन से चार साल में एक बार आती है. तीन अटेंप्ट दे पाते हैं इतने में अधिकतम उम्र सीमा के पड़ाव तक पहुंच जाते हैं. अब दोबारा एसआई परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं. लेकिन, जब आरपीएससी में ही इस स्तर की धांधली हो रही है तो क्या ही उम्मीद करें."
जयपुर ग्रामीण के बस्सी से जयपुर आ कर रह रहे हनुमान की उम्र 27 साल है. फिजिक्स से एमएससी की हुई है. लेकिन, खुद के बेरोजगार होने का कारण पेपर लीक को मानते हैं.
वे कहते हैं, "रीट में 132 नंबर थे, लेकिन पेपर लीक के कारण भर्ती रद्द हो गई, नहीं तो मैं आज सरकारी सेवाओं में होता."
हनुमान का कहना है, "सब इंस्पेक्टर की भर्ती परीक्षा दी थी, अब परिणाम सामने आ गया है कि हमारा सिलेक्शन क्यों नहीं होता है. मैंने हज़ारों रुपए खर्च कर दो साल कोचिंग की लेकिन हताशा ही हाथ लगी है."
हनुमान कहते हैं, "इस भर्ती में सत्तर प्रतिशत का दावा फर्जी किया जा रहा है. लेकिन, सत्तर प्रतिशत वो बाहर हो गए जो हकदार थे."
हनुमान कहते हैं, "कमी हमारे में नहीं थी, कमी सिस्टम में थी..."
इधर, आरपीएससी सब इंस्पेक्टर की भर्ती आरएएस परीक्षा के माध्यम से करना चाहती है. इस संबंध राजस्थान पुलिस को एक पत्र भी भेजा गया है.
राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) यूआर साहू बीबीसी से कहते हैं, "आरपीएससी से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है. हम उस पर विचार कर रहे हैं. लेकिन, इसमें कई इशू भी हैं. फिलहाल आरपीएससी के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं."
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