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परीक्षा में नकल रोकने के लिए प्रस्तावित क़ानून कितना कारगर
- Author, निखिला हेनरी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली
संसद के निचले सदन लोकसभा में उस कड़े क़ानून को पारित कर दिया गया है जिसका मक़सद सरकारी नौकरी और कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाओं में चोरी और धोखाधड़ी को रोकना है.
'द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024' छह फरवरी का पारित किया गया है. इसके अनुसार, परीक्षा में चीटिंग में मदद पहुंचाने वालों के लिए तीन से दस साल जेल तक की सज़ा का प्रावधान है.
इतना ही नहीं कसूरवार ठहराए गए व्यक्ति पर दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
इस नए क़ानून में परीक्षा दे रहे उम्मीदवार के लिए किसी दंड का प्रावधान नहीं किया गया है. उनके लिए सज़ा का निर्धारण परीक्षा ले रहे संबंधित प्राधिकरण के अपने नियमों के तहत ही होगा.
ये क़ानून केंद्र सरकार और उसकी टेस्टिंग एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली ज़्यादातर परीक्षाओं पर लागू होगा. इस क़ानून के तहत सभी अपराध ग़ैर ज़मानती होंगे और इनकी जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे.
'पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता'
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कहा है कि इस क़ानून को परीक्षाओं में कदाचार की रोकथाम करने वाला पहला केंद्रीय क़ानून बताया है और कहा है कि इससे परीक्षाओं में 'अधिक पारदर्शिता आएगी और निष्पक्षता और विश्वसनीयता' बढ़ेगी.
लेकिन आलोचकों का कहना है कि सिर्फ़ कड़ी सज़ा के प्रावधान भर से इस समस्या का कोई असरदार हल नहीं निकलने वाला है.
उनकी दलील है कि धोखाधड़ी और वास्तविक उम्मीदवार के बदले परीक्षा देने वालों के लिए भारत के दंड विधान में पहले से ही सज़ा का प्रावधान है.
राज्य सरकार की नौकरियों के लिए भर्ती करने वाले एक सरकारी संगठन के पूर्व चेयरमैन घंटा चक्रपाणि कहते हैं, "नया क़ानून बेअसर हो सकता है क्योंकि कोचिंग सेंटर्स छात्रों के साथ मिलकर उन्हें प्रवेश परीक्षा पास करने में मदद पहुंचा सकते हैं."
साल 2022 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक रूसी हैकर को गिरफ़्तार किया था. उस हैकर पर ये आरोप लगाया गया था कि उसने प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा को कथित तौर पर हैक किया था. इतना ही नहीं, हैकर पर एक कोचिंग संस्था के साथ मिल कर ये काम करने का आरोप भी लगाया गया था.
नकल रोकने के लिए सख़्त क़ानून
सरकारी नौकरियों और बड़े और नामी कॉलेजों में दाखिले के लिए मौके कम होते हैं, ऐसे में जिस तरह की प्रतिस्पर्धा का माहौल रहता है, उसकी वजह से भारत में परीक्षा में चोरी का चलन देखा जाता है.
संघ लोक सेवा आयोग हर साल सिविल सेवा परीक्षा के ज़रिए 1000 नौकरियों के लिए इम्तिहान करवाता है. इस परीक्षा में लाखों लोग बैठते हैं.
इसके अलावा देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली जेईई (मेन्स) परीक्षा में 12 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं.
नकल रोकने के लिए देश के कई राज्यों ने सख़्त कानून बनाए हैं. राजस्थान ने 2022 में, आंध्र प्रदेश ने 1998 और उत्तर प्रदेश ने 1997 में ऐसे ही कानून बनाए थे.
पिछले साल गुजरात और उत्तराखंड ने भी नकल रोकने के लिए कड़े कानून पास किए हैं. लेकिन इन कानूनों के बावजूद राज्यों में नकल बददस्तूर जारी है.
डिजिटल टेक्नोलॉजी
भारत में अक्सर पेपर लीक होने की ख़बरें आती रहती हैं. इसकी वजह से कई परिक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते पांच वर्षों में भारत के 15 राज्यों में नौकरी के लिए होने वाली 41 परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए हैं.
पूर्व आईपीएस अधिकारी जैकब पुनूस कहते हैं कि नकल रोकने का एकमात्र हल सज़ा में बढ़ोतरी नहीं हो सकता.
पुनूस कहते हैं कि नकल रोकने के लिए परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा बढ़ाना सबसे अहम क़दम है.
वे कहते हैं, "परीक्षा देने आए छात्रों पर डिजिटल टेक्नोलॉजी के ज़रिए सर्विलांस संभव है, ये एक कारगर तरीका हो सकता है."
नकल करने के नायाब तरीके
भारत में युवा उम्मीदवार नकल के लिए नित नए तरीके अपना रहे हैं. ये युवक इसके लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल करते हैं.
राजस्थान में कुछ छात्रों ने अपनी चप्पलों में ब्लूटूथ डिवाइस लगाया था जिसके ज़रिए परीक्षा हॉल के बाहर से लोग उन्हें जवाब बता रहे थे.
हाल ही में तमिलनाडु में ब्लूटूथ ईयरफ़ोन के सहारे नकल करने लिए 30 उम्मीदवारों को गिरफ़्तार किया गया था.
ये परीक्षा इंडियन कस्टम सर्विस में नौकरी के लिए करवाई जा रही थी.
नकल रोकने वाले कानून अब तक इसे रोकने में गैर-प्रभावी रहे हैं. इसकी बड़ी वजह है नकल माफ़िया का संगठित होना. इन लोगों के तार कई बार ऊपर तक जुड़े होते हैं.
अदालतों में नकल के मामले
इनमें से कुछ राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे होते हैं. कर्नाटक में पुलिस की भर्ती के लिए हुई परीक्षा में नकल के लिए पिछले साल 65 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इस प्रकरण में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता पर उंगलियां उठी थीं.
अदालतों में परीक्षा में नकल के मामले कई सालों तक चलते रहते हैं. दो साल पहले रेलवे की एक परीक्षा के नतीजों के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए थे.
उम्मीदवारों का दावा था कि रिज़ल्ट में धांधली हुई है. बाद में इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था.
इस परीक्षा में 7 लाख उम्मीदवार थे जो 35,200 पदों के लिए अप्लाई कर रहे थे.
चक्रपाणि कहते हैं, "नया क़ानून नकल करने को मुश्किल नहीं बनाता. ये सिर्फ़ नकल करते पकड़े जाने वालों को सख़्त सज़ा का प्रावधान करता है."
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