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अफ़ग़ानिस्तान: हफ़्ते में तीसरी बार भूकंप के झटके, 6.3 मापी गई तीव्रता, किस हाल में हैं लोग
अफ़ग़ानिस्तान में रविवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए. कुछ दिन पहले ही यहां दो बड़े भूकंप में क़रीब एक हज़ार लोगों की मौत हो गई थी.
हेरात शहर के पास आए इस ताज़ा भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.3 मापी गई.
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इस ताज़ा भूकंप में कम से कम एक व्यक्ति की जान गई है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 100 घायल लोगों का यहां के क्षेत्रीय अस्पताल में इलाज चल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनिसेफ के मुताबिक पहले के दो भूकंप में मारे गए लोगों में 90 फ़ीसद महिलाएं और बच्चे थे.
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने जानकारी दी कि ताज़ा भूकंप अफ़ग़ानिस्ताने के हेरात से 30 किलोमीटर पश्चिमोत्तर में था, जो कि ईरान की सीमा से लगा अफ़ग़ानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा शहर है.
हेरात में गई थी सैकड़ों की जान
हेरात में ही बीते शनिवार (08 अक्टूबर, 2023) को ही आए विनाशकारी भूकंप में एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई. ख़बर ये भी है कि भूकंप में 10,000 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं.
यह भूकंप हेरात से 40 किलोमीटर दूर ग्रामीण ज़िले ज़िंदाजान में आया था.
इससे वहां संचार माध्यम पूरी तरह ध्वस्त हो गए, सड़कें टूट गईं और ज़िंदाजान के कई गांव बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए.
भूकंप में कई ऐसे मकान जो उसकी तीव्रता को सहन नहीं कर सके, मलबे में तब्दील हो गए.
तब गांव वालों ने कुदाल और खाली हाथों से भूकंप में दबे अपने गुमशुदा लोगों की तलाश की थी.
सबसे अधिक प्रभावित गांवों में अधिकतर मकान मिट्टी के बने हुए थे.
हेरात के निवासी बशीर अहमद का परिवार भी इन्हीं में से एक गांव में रहता था. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि भूकंप के पहले झटके में ही सारे घर ज़मींदोज़ हो गए.
उन्होंने कहा, “जो घर के अंदर थे वो वहीं दफ़्न हो गए. वहां के परिवारों की हमें कोई ख़बर नहीं है.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि कम से कम 465 घर ज़मींदोज़ हो गए.
राहत पहुंचाने में मुश्किल
आपदा प्रबंधन मंत्रालय के प्रवक्ता मुल्ला जानान सैयद ने काबुल में पत्रकारों को बताया, “घायलों के इलाज़ की हर संभव व्यवस्था की जा रही है.”
हालांकि ख़बरों में बताया गया कि राहत और बचाव कर्मियों को संचार और सड़कें टूटने के कारण दूर दराज़ के इलाकों में पहुंचने के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ा.
भूकंप के बाद मलबे में तब्दील हुए और चरमराए मकानों में रहने वाले कई लोगों को आसमान के नीचे अपनी रात गुज़ारने के लिए मजबूर होना पड़ा.
अफ़ग़ानिस्तान पर 2021 से शासन कर रहे तालिबान ने बताया कि उनमें से कई लोगों को अब टेंट में भेज दिया गया है क्योंकि वहां ठंड बढ़ गई है.
तालिबान ने यह भी कहा कि वो उन्हें एक महीने से अधिक के लिए वहां नहीं रख सकेगा.
देश की ख़स्ता आर्थिक स्थिति बनी बाधा
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान को गंभीर आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि तब से उसे मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता बंद कर दी गई है.
साथ ही यह देश हिंदुकुश के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूकंप के झटके झेलता रहता है, क्योंकि यह इलाका यूरेशिया और इंडियन टेक्टोनिक प्लेट जहां एक दूसरे से मिलती हैं वहां पर स्थित है.
बीते साल जून में पक्तिका प्रांत में 5.9 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें एक हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी और दस हज़ार से अधिक लोग बेघर हो गए थे.
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