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उस जंग की कहानी जिसे इसराइल ने छह दिन में जीत लिया था
जब इसराइल का हमला हुआ तो मिस्र के लगभग सभी विमान ज़मीन पर थे और उनके पायलट नाश्ता कर रहे थे. वो ये मान कर चल रहे थे कि अगर इसराइली हमला भी करेंगे तो सुबह तड़के करेंगे. इसलिए उनके सारे विमान गश्त लगा कर मिस्र के समय के अनुसार 8 बज कर 15 मिनट तक अपने ठिकानों पर लौट आए थे.
इसराइल में उस समय सुबह के सात बज कर 15 मिनट हो रहे थे.
माएकल बी ओरेन अपनी किताब 'सिक्स डेज़ ऑफ़ वॉर' में लिखते हैं, 'उस समय सिर्फ़ चार ट्रेनी पायलट हवा में थे और उनके पास कोई आक्रामक क्षमता नहीं थी. उसी समय अल- माज़ा बेस से दो इल्यूशन - 14 ट्राँसपोर्ट विमानों ने उड़ान भरी. एक विमान में सवार थे फ़ील्ड मार्शल अमेर और एयर कमांडर सिदकी महमूद.'
'दूसरे विमान में आंतरिक ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख हुसैन -अल-शफ़ी, इराकी प्रधानमंत्री और एक वरिष्ठ सोवियत सलाहकार अबू-सुवैर हवाई ठिकाने की तरफ़ बढ़ रहे थे. मिस्र के सारे एयर कमांडर या तो उन दो विमानों में बैठे हुए थे या उनमें बैठे लोगों का नीचे उतरने का इंतज़ार कर रहे थे. इन इल्यूशन विमानों को अपने रडार पर देख कर इसराइली थोड़े चिंतित भी हुए कि वो उनके बढ़ते हुए विमानों को देख लेंगे.'
स्टोरी: रेहान फ़ज़ल
ऑडियो मिक्सिंग: बसंत सिंघल
वीडियो एडिटिंग: देबलिन रॉय
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