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भूकंप आने की क्या है अबूझ पहेली?
- Author, क्रिस बरानिउक
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
ऊपर से शांत दिखती हमारी पृथ्वी के गर्भ में हमेशा उथल-पुथल मची रहती है. धरती के अंदर प्लेटें आपस में टकराती रहती हैं. इनकी वजह से भूकंप आते हैं.
दुनिया भर के भूकंप केंद्र हर साल क़रीब 20 हज़ार भूकंप के झटके दर्ज करते हैं. लेकिन, ऐसा माना जाता है कि धरती पर हल साल लाखों भूकंप के झटके आते हैं. इनमें से ज़्यादातर इतने हल्के होते हैं कि इन्हें रिकॉर्ड ही नहीं किया जा सकता.
15 नवंबर 2017 को दक्षिण कोरिया में अजीब घटना हुई. एक टीवी कार्यक्रम के दौरान स्टूडियो हिलने लगा. कैमरे और स्टूडियो की मेज थरथराने लगे. जिसके बाद स्टूडियो ही नहीं पूरे न्यूज़रूम में भगदड़ मच गई.
ये एक ज़लज़ला था, जिसे टीवी पर लाइव देखा गया था. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई थी. जिसकी वजह से कई इमारतें हिल गई थीं. और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.
ये भूकंप कोई आम भूकंप नहीं था. ये बिल्कुल नई बात थी. क्योंकि इस भूकंप के पीछे धरती के भीतर की उथल-पुथल नहीं, बल्कि इंसान का हाथ था.
इस साल मार्च में आई रिपोर्ट के मुताबिक़ 15 नवंबर 2017 को दक्षिण कोरिया के पोहांग शहर में आया ये भूकंप इंसानों की करतूत था, जिसमें 135 लोग घायल हुए थे और 1700 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर ले जाना पड़ा था.
हज़ारों इमारतों को इस ज़लज़ले से नुक़सान पहुंचा था. एक मोटे अनुमान के मुताबिक़, पोहांग में आए इस भूकंप से 7.5 करोड़ डॉलर का नुक़सान हुआ था.
मार्च में आई रिपोर्ट के मुताबिक़ पोहांग में जो भूकंप आया, उसकी वजह धरती के भीतर बहुत गहराई में खुदाई का एक प्रोजेक्ट था, जो भूकंप के पास वाली जगह पर ही चल रही थी.
कैसे आता है भूकंप
इंसानी गतिविधियों ने धरती पर बहुत उठा-पटक मचाई हुई है. लेकिन, ये बिल्कुल नई बात है कि अब मानवीय करतूत से भूकंप भी आने लगे हैं.
इसलिए वैज्ञानिकों की नई पौध तैयार हो रही है, जो ऐसे भूकंपों का पता लगा रही है. इन्हें सीज़्मिक डिटेक्टिव कहा जा रहा है.
ये वैज्ञानिक ये पता लगाते हैं कि किसी इलाक़े में आया भूकंप क़ुदरती वजह से आया या फिर इसके पीछे किसी औद्योगिक गतिविधि का हाथ था.
आज धरती के गर्भ से तेल निकालने के लिए कई किलोमीटर की गहराई तक खुदाई की जा रही है. हर साल 10 हज़ार से ज़्यादा तेल के कुएं खोदे जा रहे हैं. इनके लिए जियोथर्मल एनर्जी का इस्तेमाल होता है.
ये धरती के भीतर मौजूद वो ऊर्जा है, जिसे खुदाई के ज़रिए चट्टानों से आज़ाद कराया जाता है. खुदाई का ये काम 2050 तक छह गुना बढ़ने का अंदेशा है.
क्योंकि तेल की तलाश में जगह-जगह धरती के सीने को ज़ख्मी किया जा रहा है. इससे धरती के भीतर बहुत गहराई में चट्टानों का संतुलन बिगड़ रहा है.
असल में ऊपरी परत के बाद हमारी धरती के भीतर चट्टानों, बालू, कंकड़ वग़ैरह की कई परतें हैं. जब बहुत गहराई में ड्रिलिंग होती है, तो इन परतों में उथल-पुथल होती है और इनके बीच बंद ऊर्जा निकलती है. इसकी वजह से भूकंप आते हैं.
बिल एल्सवर्थ, इंसानों की गतिविधियों से आने वाले भूकंप का पता लगाते हैं. वो पोहांग में आए भूकंप को याद कर के कहते हैं, 'लोग क़िस्मतवाले थे कि किसी की जान नहीं गई. भूकंप के झटकों की तस्वीरें तो बहुत डरावनी थीं.'
धरती की ऊर्जा से बिजली
बिल एल्सवर्थ, अमरीका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञान विभाग से जुड़े हुए हैं. जब उन्होंने पोहांग के भूकंप की पड़ताल शुरू की, तो उन्हें डर था कि कहीं जांच में कुछ गड़बड़ न हो. किसी भी ज़लज़ले के पीछे इंसान का हाथ बताना ख़तरे से ख़ाली नहीं था.
हमें कोई भूकंप तभी महसूस होता है जब रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3 से ज़्यादा हो. पोहांग में तो 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था.
भूकंप आने के एक दिन बाद पास ही खुदाई का काम कर रही कंपनी नेक्सजियो ने इस के पीछे अपना हाथ होने से साफ़ इनकार किया था.
लेकिन बिल एल्सवर्थ और उनकी टीम ने बाद में अपनी जांच में पाया था कि इस कंपनी के गहरी खुदाई के दौरान ही चट्टानों का संतुलन बिगड़ा था और भूकंप के झटके आए.
असल में नेक्सजियो कंपनी जियोथर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए खुदाई कर रही है. इस प्लांट में धरती के भीतर बंद ऊर्जा से बिजली बनाई जाती है.
कुछ कंपनियां गहराई तक खुदाई कर के वहां से निकलने वाली भाप से बिजली बनाती हैं. वहीं, कुछ कंपनियां चट्टानों को तोड़ कर उन में बंद आग को निकलने देती हैं.
फिर उनकी मदद से बिजली बनाती हैं. नेक्सजियो यही कर रही थी.
इसी दौरान चट्टानें टूटने से भारी तादद में धरती के भीतर एनर्जी रिलीज़ हुई और भूकंप आया.
नेक्सजियो की खुदाई के दौरान एक ऐसी जगह चट्टान टूट गई, जहां धरती की दो परतें आपस में मिलती हैं. इसलिए इतना तेज़ भूकंप आया.
बिल एल्सवर्थ कहते हैं कि ऐसा आम तौर पर नहीं होता. खुदाई करने वालों को ऐसी जगहों के बारे में पता होता है, तो वो ऐसे प्वाइंट पर गहरी खुदाई से बचते हैं.
नेक्सजियो ने ऐसा क्यों किया, ये तो वहीं बता सकते हैं. लेकिन, इस वजह से उन्होंने हज़ारों लोगों की ज़िंदगी ख़तरे में ज़रूर डाल दी.
बिल एल्सवर्थ की रिपोर्ट आने के बाद पोहांग में जियोथर्मल प्लांट बनाने का काम रोक दिया गया है.
बिल एल्सवर्थ और उनके जैसे वैज्ञानिक दुनिया भर में मानवीय गतिविधियों से आने वाले भूकंप के बारे में आंकड़े जुटा रहे हैं.
ऐसे ही एक वैज्ञानिक हैं स्टीफ़न हिक्स. वो इंग्लैंड के सरे शहर के पास एक मशीन के ज़रिए भूकंपीय झटकों के आंकड़े जुटा रहे हैं. स्टीफ़न हिक्स, लंदन के इंपीरियल कॉलेज में भूकंप वैज्ञानिक हैं.
उन्होंने इंग्लैंड के सरे शहर को इसलिए चुना क्योंकि सरे में भूकंप कभी भी नहीं दर्ज किए गए. लेकिन, इस साल 27 फ़रवरी से सरे में भूकंप के कई छोटे-छोटे झटके महसूस किए गए हैं, जो कि आम बात नहीं है.
असल में सरे के पास ही ब्रिटेन की ऑयल ऐंड गैस कंपनी खुदाई का काम कर रही है. ये झटके उसी का नतीजा हैं. अब स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं.
स्टीफ़न हिक्स अब इस इलाक़े में महसूस किए जा रहे भूकंप को डिजिटाइज़र नाम के यंत्र से माप रहे हैं. इस काम में उनकी मदद ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे भी कर रहा है.
पिछले कुछ महीनों में हिक्स की टीम ने सरे काउंटी में जितने भी भूकंप दर्ज किए हैं, वो रिक्टर स्केल पर 1 की तीव्रता से भी कम के हैं. जो आम तौर पर लोगों को महसूस भी नहीं होते.
वैसे हिक्स का कहना है कि ये भूकंप प्राकृतिक कारणों से ही आ रहे हैं. इनके पीछे तेल के लिए हो रही खुदाई का हाथ नहीं है. लेकिन, स्थानीय लोग तेल के लिए हो रही खुदाई बंद करने के लिए ज़ोर-शोर से आवाज़ उठा रहे हैं.
मानवीय वजहों से आने वाले भूकंप को वैज्ञानिक एंथ्रोपोजेनिक सीस्मीसिटी कहते हैं. स्विटज़रलैंड के विशेषज्ञ फ्रांसेस्को ग्रिगोली कहते हैं कि आम लोगों का फ़िक्रमंद होना बिल्कुल जायज़ है.
ग्रिगोली का कहना है कि ऐसे भूकंपों की रोकथाम का कोई स्थायी फॉर्मूला नहीं है. मानवीय ज़रूरतों के लिए खुदाई का काम तो चलेगा ही.
लेकिन, ज़रूरत ये है कि ऐसी गतिविधियों से आने वाले झटकों के आंकड़े जुटाए जाएं. ताकि किसी भी प्रोजेक्ट से जुड़े ख़तरों का पहले से ही हिसाब लगाया जा सके.
आज दुनिया भर में भूकंप के झटकों की निगरानी का काम बहुत बारीक़ी से हो रहा है. ब्रिटेन की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के जेम्स वर्डोन कहते हैं कि आज एक तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया जा रहा है.
हज़ारों की तादाद में ऐसे भूकंप के झटके दुनिया भर में दर्ज किए जा रहे हैं.
अब वैज्ञानिक कहते हैं कि इंसानों को धरती के भीतर खुदाई के दौरान बहुत सावधानी बरतने की ज़रूरत है. जियोथर्मल पावर प्लांट के लिए बहुत गहराई में खुदाई के ऐसे नुक़सान भी हो सकते हैं, जैसे पोहांग में देखे गए.
बेहतर होगा कि आबादी से दूर ही ऐसी खुदाई हो. और भूकंप के डिटेक्टिव से ऐसे आंकड़े साझा किए जाएं, जो ऐसी खुदाई के दौरान जुटाए जाते हैं. ताकि वो भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना को रोकने में मदद कर सकें.
बेहतर होगा कि धरती की आवाज़ सुनी जाए और उसकी चेतावनी के हिसाब से इंसान अपनी हरकतें सुधार ले. वरना, बहुत बड़ा हादसा होते देर नहीं लगेगी.
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