अवेक ब्रेन सर्जरी क्या है और कैसे हुआ इस तकनीक से गिटारिस्ट की उंगलियों का इलाज

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरू से
कल्पना कीजिए कि मरीज़ ऑपरेशन टेबल पर है और डॉक्टर उनसे बात भी कर रहे हैं.
इस दौरान मरीज़ की खोपड़ी में 14 एमएम का छेद किया जा रहा है. और इसके ज़रिए एक इलेक्ट्रॉड को मस्तिष्क में डाला जा रहा है, ताकि मस्तिष्क में मौजूद कुछ सर्किट्स को जलाकर नष्ट किया जा सके.
इस बीच, न्यूरोसर्जन लगातार मरीज़ को यह बता रहे हैं कि मरीज़ के मस्तिष्क में कितने सर्किट्स को 'जलाया' जा चुका है.
और मरीज़ से यह भी पूछा जा रहा है कि उनके बाएं हाथ की दोनों उंगलियां (अनामिका और छोटी उंगली) बीते हुए पांच से दस मिनट की तुलना में अब क्या अच्छा महसूस कर रही हैं.

ऑपरेशन के दौरान मरीज़ जोसफ़ डिसूजा कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से गुज़रे थे. वो लॉस एंजिल्स अमेरिका के एक पेशेवर गिटार वादक हैं.
बेंगलुरु के भगवान महावीर जैन हॉस्पिटल में दो घंटे तक उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन किया गया था.
वैसे डिसूजा कोई युवा व्यक्ति नहीं हैं. उनकी उम्र 65 वर्ष हैं, लेकिन वो सेहतमंद दिखते हैं. उनका जन्म गोवा में और परवरिश बहरीन में हुई थी.
इसके बाद साल 1999 में वो अमेरिका जाकर बस गए. छह साल की उम्र से उनको एक जुनून था, जो एक बैंड में लीड गिटारिस्ट बनने का था.
बीबीसी से क्या बोले जोसफ?

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डिसूजा ने बीबीसी हिंदी को बताया, “जब वे मेरे मस्तिष्क में घाव को जला रहे थे ,तो वो मुझसे लगातार कह रहे थे कि मैं अपने हाथ को निरंतर ऊपर उठाता रहूं और खोलता-बंद करता रहूं.”
“साथ में वन-टू, वन-टू बोलता रहूं. दरअसल, यह एक तरह की कोड लैंग्वेज़ थी, जिसका मतलब यह था कि सबकुछ ठीक है. एक पड़ाव पर, मुझे ठीक नहीं लग रहा था और उन्होंने 5 सेकंड में इसे ठीक कर दिया था.”
इसके बाद स्टीरियोटैक्टिक फंक्शनल न्यूरोसर्जन डॉक्टर शरण श्रीनिवासन ने एक पड़ाव पर डिसूजा को गिटार देकर उसको बजाने के लिए कहा, ताकि यह जांचा जा सके कि उनकी उंगलियां ऑपरेशन के दौरान ठीक से काम कर रही हैं या नहीं.
दरअसल, ऑपरेशन के पहले डिसूजा ने जब डॉक्टर से मुलाक़ात की थी, तब वो इस परेशानी से जूझ रहे थे कि जब कभी गिटार बजाते थे, तो उनकी दो उंगलियां अपने आप मुड़ जाती थी. इस कारण वह ठीक से गिटार नहीं बजा पाते थे.
मगर, उनके मस्तिष्क में जब कुछ सर्किट्स को जला दिया गया तो वह यह बात महसूस कर सकते थे कि उनकी उंगलियां नीचे नहीं खींची जा रही थीं, जैसे साल 2004 से जाती रही थी.
उन्होंने एक वाकया याद करते हुए बताया, “मैं संगीत स्कूल में था. गाने का नाम क्रस्टी था. तब अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरी उंगलियां काम नहीं कर रही हैं. जैसे कभी पैर सुन्न पड़ जाते हैं.”
“यह क्या हो रहा था, मैं नहीं जानता था. यह सबकुछ मेरे लिए बहुत ज़्यादा गफ़लत पैदा करने वाला था.”
इसके बाद डिसूजा कई डॉक्टरों से मिले, लेकिन उनको राहत नहीं मिली. और फिर उनको गिटार वादक के रूप में अपना करियर छोड़ना पड़ा.
आख़िरकार लॉस एंजिल्स में एक फ़िजिशियन ने उनको बताया कि वो ‘फोकल डिस्टोनिया’ नाम की समस्या से जूझ रहे थे.
इसे टास्क स्पेसिफ़िक फ़ोकल हैंड डिस्टोनिया या टीएसएफएचडी कहा जाता है. यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो हाथ और उंगलियों की मांसपेशियों के अनायास संकुचन के कारण पैदा हो जाती है.
डॉक्टर श्रीनिवासन ने बीबीसी हिंदी को बताया, “यह एक अजीब बीमारी है. इसमें मरीज़ को उसकी उंगलियां अनायास ही मुड़ी हुई महसूस हो रही होती हैं, जबकि दिमाग में अलग तरह की प्रतिक्रिया चल रही होती है. ऐसे में उंगलियों के बीच अजीब स्थिति बन जाती है.”
डॉक्टर श्रीनिवासन ने बताया कि समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि इसका निदान नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, “एमआरआई करने के बाद भी यह पता नहीं लग पाता है कि मस्तिष्क में किस तरह की हलचल हो रही है. डिसूजा के मस्तिष्क में चल रही हलचल को रोकने के लिए खोपड़ी में 14 एमएम का छेद किया गया. और फिर एक इलेक्ट्रॉड को अंदर डाला गया ताकि कुछ सर्किट्स को जलाकर खत्म किया जा सके.”
जोसफ़ डिसूजा ने डॉक्टर श्रीनिवासन को कैसे ढूंढा?

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डिसूजा सिंगल हैं. दरअसल, उनके दोस्त ने उनको एक वीडियो भेजा था, जिसमें एक व्यक्ति ऐसी ही समस्या से जूझ रहा था, जैसे डिसूजा जूझ रहे थे.
उस व्यक्ति को तीन उंगलियों में ऐसी समस्या थी. यह साल 2017 की बात है. तब डिसूजा को डॉक्टर श्रीनिवासन के बारे में पता लगा था.
वीडियो में दिखाए गए व्यक्ति का नाम अभिषेक प्रसाद था. वह एक आईटी प्रोफेशनल थे. उनको गिटार बजाने का शौक था.
अभिषेक प्रसाद को डॉक्टर श्रीनिवासन के पास हाथों के एक सर्जन ने भेजा था. उन्होंने प्रसाद से कहा था कि आपकी समस्या का हल डॉक्टर श्रीनिवासन के पास है.
प्रसाद ने साल 2016 में डॉक्टर श्रीनिवासन से बात की थी. मगर, फिर 9 महीने तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई.
क्योंकि, प्रसाद का परिवार यह बात जानकर सदमे में था कि, उंगलियों की दिक्कत को दूर करने के लिए मस्तिष्क की सर्जरी करना होगी.
मगर, फिर जुलाई 2017 में प्रसाद को यह महसूस हुआ कि जब वो लैपटॉप का कीबोर्ड चलाते हैं, तो उनकी उंगलियां अपने आप ऊपर उठ जाती हैं.
इसके बाद डॉक्टर श्रीनिवासन ने वही तरीका अपनाया, जो उन्होंने डिसूजा के साथ अपनाया था.
टोक्यो वीमेंस मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ताकाओमी तायरा ‘अवेक ब्रेन सर्जरी’ में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ हैं. डॉक्टर श्रीनिवासन ने उनसे प्रशिक्षण लिया था.
इसके बाद डॉक्टर श्रीनिवासन ने प्रसाद की सर्जरी की थी, जो डॉक्टर श्रीनिवासन का पहला फंक्शनल न्यूरोसर्जरी असाइनमेंट था.
टीएसएफएचडी का सबसे सामान्य प्रकार वो है, जिसे राइटर्स क्रैम्प कहा जाता है. यह कुछ ऐसा है, जिसे पियानो, वायलिन या सेलो वादन करने वालों में देखा जा सकता है.
‘अवेक ब्रेन सर्जरी’ में क्या किया जाता है?

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इसमें एक स्टीरियोटैक्टिक फ्रेम मस्तिष्क में डाली जाती है. इससे पहले मरीज़ को लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. दो स्क्रू कपाल वाले हिस्से में लगाए जाते हैं और दो स्क्रू दिमाग के पिछले हिस्से में लगाए जाते हैं.
मरीज़ का एक स्टीरियोटैक्टिक एमआरआई किया जाता है, जो सॉफ्टवेयर में इसकी तस्वीरें भेजता है.
इससे यह जानने में मदद मिल पाती है कि इलेक्ट्रॉड को कहां से मस्तिष्क के अंदर भेजना है, और ‘दुर्व्यवहार’ करने वाले सर्किट्स कहां हैं, जिन्हें ‘जलाए’ जाने की ज़रूरत है.
इसके बाद मरीज़ को ऑपरेशन टेबल पर ले जाया जाता है. और वहां मरीज़ के सिर को इस तरह सुरक्षित कर दिया जाता है कि वो ऑपरेशन के दौरान ‘एक मिलीमीटर’ भी इधर से उधर न हिल पाए.
सर्जरी की तैयारी हो जाने के बाद ऑपरेशन की शुरुआत खोपड़ी में 14 एमएम के छेद करने के साथ होती है. फिर एक इलेक्ट्रॉड को मस्तिष्क में डाला जाता है, ताकि घाव को जलाया जा सके.
हर घाव को नष्ट करने के लिए 70 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान सुनिश्चित किया जाता है और इसे 40 सेकंड तक ऐसा ही रखा जाता है.
प्रसाद के मामले में इसे 8.3 सेंटीमीटर तक और डिसूजा के मामले में इसे 10 सेंटीमीटर तक अंदर डाला गया था.
डॉक्टर श्रीनिवासन ने बताया, “डिसूजा के मामले में जब ‘तीसरा सर्किट जलाया गया था’, तब उनकी उंगलियां अच्छा महसूस कर रही थीं. सामान्य तौर पर हमें ऐसे परिणाम चौथा सर्किट जलाने के बाद मिल सकता है. लेकिन, हम समस्या को दोबारा होने से रोकने के लिए सात बार सर्किट को जलाते हैं.”
लेकिन, क्या यह इस समस्या का स्थाई समाधान है?

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डॉक्टर श्रीनिवासन ने कहा, “यदि एक मरीज़ तीन महीने के अंदर कोई शिकायत लेकर नहीं आता है, तो फिर वो नहीं आएगा. प्रसाद फिर कभी नहीं आए. ना तास्कीन अली आए. वो ढाका, बांग्लादेश के एक पेशेवर गिटार वादक हैं. उनकी बीमारी तो ज़्यादा गंभीर थी.”
मरीज़ों को क्या सलाह है?
डॉक्टर श्रीनिवासन ने कहा कि मरीजों को एक केवल एक सलाह दी जाती है. और वो यह है कि अभ्यास करें.
उन्होंने कहा, “प्रसाद के मामले में यह कुछ सालों की बात थी. डिसूजा के मामले में 20 साल हो चुके थे, जब से वो इस समस्या से जूझ रहे थे. दरअसल, दिमाग को फिर से प्रशिक्षित किये जाने की ज़रूरत होती है”
और डिसूजा कहते हैं, “मैंने हाल ही में रिहैब सेंटर जाना शुरू किया है. ये सिलसिला तीन महीने तक चलेगा. इसमें संयम की ज़रूरत होती है. मैं इस पर और काम करूंगा.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















