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क्या टीम इंडिया आईसीसी ख़िताब का सूखा ख़त्म करने के क़रीब है
- Author, विमल कुमार, वरिष्ठ खेल पत्रकार
- पदनाम, एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स स्टेडियम से
बांग्लादेश को सुपर 8 के दूसरे मैच में टीम इंडिया ने एक बार फिर से बड़े अंतर से हरा दिया. टीम इंडिया के लिए इस मैच में जीत हासिल करना लगभग एक औपचारिकता ही थी.
इसकी वजह रही अब तक टूर्नामेंट में टीम इंडिया का शानदार खेल और बांग्लादेश का संघर्ष रहा है.
इस जीत ने टीम इंडिया को टूर्नामेंट जीतने की राह में कई अधूरे सवालों के जवाब दे दिए हैं, जिसके चलते अब कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा कुछ हद तक राहत महसूस कर सकते हैं.
सबसे पहले बात कप्तान रोहित शर्मा की. उन्होंने मैच में सिर्फ 11 गेंदों की बल्लेबाज़ी की लेकिन उनके तेवर वही वन-डे वर्ल्ड कप 2023 वाले ओपनर जैसे ही रहे.
वो रोहित जो अपने विकेट खोने की बात को पीछे छोड़कर टीम को एक तेज़ शुरुआत देने में यकीन करता था.
3 चौके, 1 छक्के और 200 से ज़्यादा की स्ट्राइक रेट ने टीम के बाकी बल्लेबाज़ों को ये संदेश दिया कि अगर उनके पास नंबर 8 तक बल्लेबाज़ है तो हर किसी को खुल कर खेलने की ज़रूरत है.
कोहली से उम्मीद
विराट कोहली भले ही फिर से एक बड़ी पारी नहीं खेल पाए हों लेकिन वो धीरे- धीरे ही सही अपनी लय पकड़ते नज़र आ रहे हैं.
अब अगला मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के साथ है और उसके बाद सब कुछ ठीक रहा तो सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल के मुकाबले में टीम इंडिया दिखाई देगी.
कोहली के अनुभव और बड़े अवसर पर यादगार पारी खेलने की क्षमता से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
अब आखिरी दौर में उनसे इस वर्ल्ड कप की एक यादगार पारी की उम्मीद की जा सकती है.
तीसरे नंबर पर ऋषभ पंत ने 24 गेंदों पर 36 रन बनाकर फिर से आक्रामकता और निरंतरता का परिचय दिया है.
इस टूर्नामेंट से पहले शायद ही किसी ने सोचा होगा कि दिल्ली के इस बल्लेबाज़ को 5वें नंबर के बजाय अचानक तीसरे नंबर की ज़िम्मेदारी दे दी जाएगी.
पंत ने कप्तान और कोच के भरोसे को सही साबित किया है, क्योंकि संजू सैमसन जैसे बल्लेबाज़ को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर उन्हें काफी दबाव से गुज़रना पड़ता है.
दुबे को ख़तरनाक क्यों माना जाता है?
जब बात दबाव की आई है तो इस मैच से पहले अगर किसी एक खिलाड़ी पर सबसे ज़्यादा दबाव था तो वो थे शिवम दुबे.
मैच से पहले इस बात के कयास लगाये जा रहे थे कि दुबे को शायद इस मैच में मौका नहीं मिले क्योंकि जब से उनका चयन वर्ल्ड कप के लिए हुआ है तब से वे रन नहीं बना रहे थे.
एकदम रन बनने तो बंद नहीं हुए थे लेकिन कम से कम उनकी चिर-परिचित आक्रामकता ख़त्म हो गई थी. दुबे ने इस दबाव को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 24 गेंदों पर 3 छक्के लगाकार हवा कर दिया.
उन्होंने यह दिखाया कि आखिर उन्हें स्पिन के ख़िलाफ इतना ख़तरनाक क्यों माना जाता है. अगर कोहली की ही तरह दुबे अगले तीन मैचों में से एक और मैच टीम को जिता देते हैं तो चयनकर्ताओं का ये भरोसा भी सही साबित हो जाएगा.
मैच के हीरो
अगर मैच के हीरो की बात करें, तो वह नाम हार्दिक पांड्या का है. जिस पांड्या को आईपीएल में भारतीय क्रिकेट के बहुत सारे फैंस लगातार घेरे जा रहे थे आज वही पांड्या इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया के लिए तुरुप का इक्का साबित हो रहे हैं.
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पांड्या ने संकट के समय 50 रनों की पारी खेली, जिसमें उन्होंने 4 चौके और 3 छक्के मारे. इससे पहले भी पांड्या संकटमोचक साबित हो चुके हैं.
इतना ही नहीं जो पांड्या आईपीएल में करीब 11 की इकॉनोमी रेट से रन लुटा रहे थे और विकेट के लिए तरस रहे थे वही पांड्या अब टीम इंडिया के अब शानदार खेल रहे हैं. अगर विकेट और इकॉनोमी- दोनों को आधार माना जाए तो वे जसप्रीत बुमराह से भी प्रभावशाली साबित हुए हैं.
लेकिन, उससे भी बेहतर बात ये रही है कि जिस अंदाज़ में कप्तान रोहित शर्मा के साथ उन्होंने अपना तालमेल बिठाया है.
मैंने लगभग 10 नेट प्रैक्टिस सत्र में इन दोनों खिलाड़ियों को लगातार क्रिकेट पर बातचीत करते देखा, हंसते-मुस्कुराते और मज़ाक करते देखा है. इस बात पर यकीन करना आसान हो गया है कि मौजूदा समय में टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम सबसे खुश ड्रेसिंग रूम हैं.
सिर्फ एक महीने पहले ही इस टीम के आधे खिलाड़ी मुंबई इंडियंस के लिए खेल रहे थे और वो एक बिखरा हुआ घर दिखता था.
अगर गेंदबाज़ी आक्रमण की बात की जाए तो इस मैच में फिर से बुमराह और अर्शदीप सिंह ने अपना जलवा बिखेर रखा है.
दोनों ने मिलकर 8 ओवर की गेंदबाज़ी में 43 रन देकर 4 विकेट हासिल किए और बांग्लादेश के लिए इस दबाव को झेलना आसान नहीं रहा.
कुछ भी तय नहीं है
अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा की लेफ्ट आर्म स्पिन जोड़ी ने 5 ओवर की गेंदबाज़ी में 50 रन खर्च किए और कोई भी विकेट हासिल नहीं किया. ये शायद टीम इंडिया के लिए एक मायूसी वाली बात रही.
लेकिन कुलदीप यादव जो बाएं हाथ से ही स्पिन गेंदबाज़ी करते हैं. वे अलग किस्म के चाइनामैन गेंदबाज़ हैं, जो बांग्लादेश के लिए परेशानी का सबब बने.
कानपुर के कुलदीप ने 4 ओवर में 19 रन देकर 3 विकेट लिए. ऐसा कभी लगा ही नहीं कि इस शानदार गेंदबाज ने अमेरिका में पहले दौर का एक भी मैच नहीं खेला.
दरअसल, इस टीम की ख़ासियत ये है कि हर एक खिलाड़ी को ये बता दिया गया है कि हर मैच, हर विरोधी और हर पिच के लिहाज़ से प्लेइंग इलेवन में बदलाव किये जाएंगे.
यही वजह है कि अमेरिका लीग में कुलदीप के बदले तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज को मौके मिले.
चूंकि, रोहित और विराट की जोड़ी इस टूर्नामेंट में अलग होने वाली है, नहीं तो यशस्वी जायसाव जो कि तीसरे ओपनर हैं, उन्हें भी कोई मौका नहीं मिलने वाला है.
यही हाल अब सैमसन का होगा क्योंकि दुबे इस मैच में अच्छा कर गए हैं.
युजवेंद्र चहल को क्या मिलेगा मौका
लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल आज तक कभी भी टी20 वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं खेले हैं.
उन्हें शायद इस बार मलाल भी ना हो क्योंकि जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी जो ऑलराउंडर की हैसियत से खेलते हैं उन्हें टीम बाहर नहीं कर सकती है.
अक्षर पटेल भी कामयाब ऑलराउंडर की भूमिका इस टूर्नामेंट में निभा रहे हैं. ऐसे में चहल को ही शायद बेंच पर बैठना पड़े.
ये सभी फैसले तभी सही साबित होंगे अगर टीम इंडिया अपनी जीत के अश्वमेध को एक हफ्ते तक बरकरार रखे और बारबाडोस में शनिवार को फाइनल में ट्रॉफी जीतने के लिए उतरे.
टीम इंडिया ने 2013 में आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी अपने नाम की थी. इसके बाद से भारत कोई भी आईसीसी खिताब नहीं जीत पाया है.
भारत ने 2015, 2019 के वन-डे वर्ल्ड कप में सेमीफ़ाइनल का सफर तय किया था, वहीं 2023 के वन-डे वर्ल्ड कप में टीम इंडिया फाइनल तक पहुंच गई थी.
2016 और 2022 में खेले गए 20-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया सेमीफाइनल तक ही पहुंच पाई थी. 2017 चैंपियन ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को हराया था.
2021 और 2023 की टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत को मात मिली थी, लेकिन अब जिस तरह से टीम इंडिया के बल्लेबाजों, गेंदबाजों और ऑलराउंडर्स के बीच तालमेल दिखाई दे रहा है उससे भारत के खिताब का सूखा खत्म होने की संभावनाएं बढ़ती हुई नजर आ रही हैं.
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