ताइवान के इर्द-गिर्द मिलिट्री ड्रिल को चीन की सेना ने बताया - 'अलगाववादी हरकतों की सख़्त सज़ा'

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    • Author, केली एनजी और ताइपेई से रुपर्ट विंगफ़ील्ड-हेयेस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

चीन ने ताइवान के आस-पास सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है.

दो दिनों तक चलने वाले इस मिलिट्री ड्रिल को चीन की सेना अपनी सरकार ख़ुद चलाने वाले ताइवान को उसकी 'अलगाववादी गतिविधियों' के लिए 'सख़्त सज़ा' बता रही है.

ताइवान में तीन दिन पहले ही नए राष्ट्रपति विलियम लाई ने अपने पद की जिम्मेदारी संभाली थी.

इस मौके पर विलियम लाई ने चीन से कहा था कि वो ताइवान को धमकियां देना बंद करे और उसके लोकतंत्र के अस्तित्व को स्वीकार करे.

चीन ताइवान को ख़ुद से अलग हो गया एक प्रांत मानता है. चीन का ये भी कहना है कि ताइवान को आख़िरकार एक दिन बीजिंग के नियंत्रण में आना ही है.

लेकिन ताइवान चीन की इस दलील से सहमत नहीं है और वो खुद को एक अलग और स्वतंत्र भौगोलिक इकाई के तौर पर देखता है.

चीन के मिलिट्री ड्रिल की ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने आलोचना की है. ताइवान के रक्षा विभाग ने इसे 'बेतुकी उकसावे की कार्रवाई' बताया है.

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ताइवान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए नौसेना, वायुसेना और आर्मी को तैनात किया है.

ताइवान के मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि गुरुवार को शुरू हुआ मिलिट्री ड्रिल इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि आर्थिक नाकाबंदी करने के बजाय पहली बार व्यापक हमले की तैयारी के लिहाज से अभ्यास किया जा रहा है.

चीन ताइवान की मुख्य भूमि के आस-पास सभी जगहों पर ये सैन्य अभ्यास कर रहा है. पहली बार ताइवान के नियंत्रण वाले कुछ द्वीपों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

मिलिट्री ड्रिल का मक़सद

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ये द्वीप हैं- किनमेन, मात्सु, वुकियु और डॉन्गियिन. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर से ज़ारी किए गए नक़्शों के अनुसार, ये द्वीप चीन के सागर तट के क़रीब हैं.

ताइवान के पूर्व में भी सैन्य अभ्यास हुआ. पहाड़ों के दूसरी ओर स्थित पूर्वी तट. द्वीप का ऊबड़-खाबड़ पूर्वी तट लंबे समय से ताइवान की सेना का मजबूत पक्ष रहा है.

ताइवान ने अपना ज़्यादातर मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर अपने पूर्वी तट के पास मजबूत कर रखा है. इसमें एक पहाड़ी के भीतर स्थित अंडरग्राउंड मिलिट्री एयरबेस भी है. ये हुआलीन शहर के पास है.

ये जापान के दक्षिणी द्वीपों के क़रीब पड़ता है जो उस तक कुमुक (सैन्य मदद) पहुंचने का कुदरती रास्ता भी है.

ताइवान के पूरब में अपनी नौसेना और वायुसेना के गश्ती दलों को भेजकर चीन का इरादा ताइपेई को ये संकेत देना है कि उसका पूर्वी इलाका चीनी हमलों से महफूज नहीं रहा है.

वो अमेरिका को भी ये दिखलाना चाहता है कि पूरब के रास्ते ताइवान को किसी भी तरह की सैन्य मदद भेजने की कोशिश को चीनी मिसाइल और नौसैनिक हमलों के ख़तरे का सामना करना होगा.

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ने कहा है कि उसके मिलिट्री ड्रिल का फ़ोकस समंदर और हवा के रास्ते हमला करने में सक्षम गश्त करने, मुख्य लक्ष्यों पर अचूक निशाना लगाने, ताइवान के अंदर और बाहर इंटीग्रेटेड ऑपरेशन चलाने की तैयारियों का जायजा लेना है ताकि उसके सैन्य बलों की एक साथ युद्ध लड़ने की क्षमताओं को परखा जा सके.

ताइवान के मीडिया ने मिलिट्री एक्सपर्ट चीयेह चुंग के हवाले से कहा है कि चीन के इस मिलिट्री ड्रिल का मक़सद "ताइवान पर व्यापक हमले की तैयारी करना है."

बीते पूरे साल चीन ने कई बार ऐसे सैन्य अभ्यास किए जिसमें लड़ाकू विमानों और नौसैनिक जहाजों से ताइवान की घेराबंदी की गई थी.

ताइवान का कहना है कि लाई के कार्यकाल शुरू होने से पहले के दिनों में ताइवान के जल और हवाई क्षेत्र में घुसपैठ में वृद्धि हुई है.

ताइवान की नाकाबंदी

ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई

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इमेज कैप्शन, ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई

अमेरिकी कांग्रेस की तत्कालीन स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइपेई दौरे के बाद चीन ने अगस्त, 2022 में पहली बार ताइवान की घेराबंद वाले सैन्य अभ्यासों की शुरुआत की थी.

इस सैन्य अभ्यास में चीन ने जहाजों, लड़ाकू विमानों और मिसाइल हमलों की मदद से ताइवान की नाकाबंदी कर दी थी.

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने गुरुवार को कहा है कि ये मिलिट्री ड्रिल ताइवान इंडीपेंडेंस फोर्सेज़ की अलगाववादी गतिविधियों के लिए एक सख़्त सज़ा और बाहरी ताक़तों द्वारा की जा रही दखलंदाज़ी और उकसावे की कार्रवाई के ख़िलाफ़ कड़ी चेतावनी है.

इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने ये ज़ोर देकर कहा है कि मिलिट्री ड्रिल उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता की सुरक्षा के लिए एक 'ज़रूरी और वैध कदम' है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, "इस बात पर ज़ोर दिए जाने की ज़रूरत है कि ताइवान चीन के भूभाग का एक अविभाज्य अंग है. ये एक ऐतिहासिक तथ्य और यथार्थपरक वास्तविक स्थिति दोनों है. ये भविष्य में भी नहीं बदलेगा. ताइवान की आज़ादी नाकाम होने के लिए अभिशप्त है."

बीते सोमवार को राष्ट्रपति विलियम लाई ने अपने कार्यकाल के पहले संबोधन में कहा कि "चीन ताइवान को धमकी देना बंद करे."

चीन ने इस भाषण की निंदा की. उसके विदेश मंत्री वांग यी ने ताइवान के राष्ट्रपति विलियन लाई को 'शर्मनाक' बताया.

जनवरी में विलियम लाई की चुनावी जीत के बाद बीजिंग ने एक बयान जारी कर इस बात पर ज़ोर दिया कि "ताइवान चीन का हिस्सा है."

इतना ही नहीं ताइवान की तरफ़ बातचीत के लिए विलियम लाई की पेशकश को भी चीन ने ठुकरा दिया था.

चीन ने इससे पहले विलियम लाई को एक 'अलगाववादी' और 'परेशानी पैदा करने वाला' शख़्स करार दिया था. इसकी वजह ये थी कि विलियम लाई अतीत में ताइवान की आज़ादी के समर्थन में बयान देते रहे हैं.

ग्रे ज़ोन

वीडियो कैप्शन, ताइवान में विलियम लाई की जीत से क्या चीन संग बदलेंगे रिश्ते?

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि गुरुवार का सैन्य अभ्यास चीन की लड़ाकू प्रवृति की मिसाल है.

मंत्रालयन ने कहा, "हाल के वर्षों में चीन के विमानों और समुद्री जहाज़ों ने वैश्विक शांति और स्थिरता को नुक़सान पहुँचाया है."

ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी कहा है कि चीन की एकतरफ़ा सैन्य उकसावा ताइवान के लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए ख़तरा है.

इसी बीच ताइवान की मेनलैंड अफ़ेयर्स काउंसिल ने कहा है कि चीन के साथ रिश्तों से जुड़े उसके उद्देश्यों में कोई परिवर्तन नहीं आया है.

ये काउंसिल चीन के साथ ताइवान के संबंधों के लिए ज़िम्मेदार है.

वक्ता लियांग वेन-चीह ने कहा, "चीन को ये समझना चाहिए कि उसकी धमकियों से वो लोगों के दिलो-दिमाग पर जीत हासिल नहीं कर सकता."

हालांकि चीन और ताइवान के बीच व्यापार चालू है लेकिन उनके बीच अब कोई औपचारिक बातचीत नहीं होती है. सारी दुनिया चीन को कूटनयिक मान्यता तो देती है पर ताइवान को नहीं.

विश्लेषकों का कहना है कि शी जिनपिंग के दौर में चीन ने ताइवान पर अपने दावे को जोर-शोर दुनिया के सामने रखा है.

शी जिनपिंग हमेशा कहते रहे हैं कि एक न एक दिन ताइवान का चीन में विलय होगा. ताइवान के चुनावों से पहले, पिछले साल दिसंबर में भी शी ने ये बात दोहराई थी.

अब तक ताइवान के ईर्द-गिर्द चीन का सैन्य अभ्यास ग्रे ज़ोन तक ही सीमित रहा है और इसे ताइवान पर हमला नहीं माना जा सकता.

विश्लेषकों ने बीबीसी को बताया है कि ग्रे ज़ोन में युद्ध अभ्यास का मक़सद अपने विरोधी को लंबे युद्ध में उलझा कर कमज़ोर करना है. उनके अनुसार, चीन ताइवान के साथ यही कर रहा है.

चीन और ताइवान के रिश्तों को समझें

चीन और ताइवान के बीच संबंध इतने ख़राब क्यों हैं?

चीन ताइवान को अपना विद्रोही प्रांत मानता है. उसका कहना है कि ताइवान का चीन में विलय होना चाहिए. और इसके लिए अगर ताक़त का इस्तेमाल भी करना पड़े तो करेंगे.लेकिन ताइवान अपने आप को चीन से अलग मानता है.

ताइवान का प्रशासन कैसे चलता है?

इस द्वीप का अपना संविधान, लोकतांत्रिक तरीक से चुने हुए नेता और करीब तीन लाख सैनिक हैं.

ताइवान को कौन से देश मान्यता देते हैं?

ताइवान को बहुत कम देश मान्यता देते हैं. अधिकतर मुल्क चीन को ही मान्यता देते हैं. अमेरिका के ताइवान के साथ कोई अधिकारिक संबंध नहीं हैं. लेकिन अमेरिका में एक कानून है जिसके तहत उसपर ताइवान की हिफ़ाज़त का जिम्मा है.

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