सीबीआई की छापेमारी पर सत्यपाल मलिक ने क्या कहा? - प्रेस रिव्यू

सत्यपाल मलिक

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जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि उनके घर पर सीबीआई का छापा नहीं पड़ना चाहिए था क्योंकि जिस मामले को लेकर ये कार्रवाई हुई है, उसमें वो व्हिसलब्लोअर थे.

दिल्ली के एक अस्तपाल में भर्ती सत्यपाल मलिक ने अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पैर में हुए संक्रमण का उनका इलाज चल रहा है.

उन्होंने कहा कि गुरुवार को उनके घर पर सीबीआई ने जो छापा मारा है वो "नहीं होना चाहिए था" क्योंकि जिस किरु हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिलसिले में उनके घर पर छापा डाला गया है उसमें वो असल में "व्हिसलब्लोअर और शिकायतकर्ता" थे.

मलिक ने कहा कि चार दिन पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन शायद सीबीआई को इस बात की जानकारी नहीं थी, इसलिए वो दिल्ली स्थित उनके आवास के साथ-साथ उनके कुछ रिश्तेदारों और परिचितों के यहां पहुंच गई.

उन्होंने कहा, "ये वही किरु मामला है जिसमें मैंने कहा था कि मुझे 150 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की गई थी लेकिन मैंने फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. लेकिन मैंने जिन गुनहगारों के नाम लिए थे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बजाय सीबीआई ने व्हिसलब्लोअर के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई करने का फ़ैसला किया."

मलिक ने सीबीआई के छापों पर कहा कि इसका नाता आगामी लोकसभा चुनावों से है.

वो बोले, "सरकार अपने आलोचकों को चुप कराना चाहती है और बीते एक साल से मैंने किसान आंदोलन को लेकर जिस तरह सरकार से सवाल पूछे हैं, सरकार को वो पसंद नहीं हैं."

उन्होंने कहा कि किरु प्रोजेक्ट के आख़िरी कॉन्ट्रैक्ट पर साल 2019 में उस वक्त हस्ताक्षर हुए थे जिस वक्त वो राज्पाल के पद से जा चुके थे.

सत्यपाल मलिक

'अगर मैं वाकई में भ्रष्ट होता तो क्या.... ?'

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2017 में सत्यपाल मलिक बिहार के राज्यपाल बनाए गए जिसके बाद उन्हें 2018 में जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया.

अक्तूबर 2019 में उन्हें जम्मू कश्मीर छोड़कर बतौर राज्यपाल गोवा जाना पड़ा. इसके बाद उन्हें मेघालय राज्य में नियुक्त किया गया जहां वो अगस्त 2020 से अक्तूबर 2022 तक राज्यपाल रहे.

सत्यपाल मलिक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "मैं चार राज्यों में राज्यपाल रहा, जम्मू कश्मीर के बाद दो राज्यों के राजभवन में कार्यभार संभाला, क्या मैं इस तरह के भ्रष्टाचार का हिस्सा बनूंगा? अगर मैं वाकई में भ्रष्ट होता तो क्या केंद्र सरकार मुझे दो और राज्यों में राज्यपाल बना कर भेजती?"

"कथित तौर पर किसी अधिकारी ने सीबीआई को सबूत दिए हैं कि तत्कालीन राज्यपाल के आदेश पर एक निजी कंपनी को प्रोजेक्ट के लिए चुना गया, लेकिन ये पूरी तरह ग़लत आरोप है. ये निराधार हैं और छापा डालने की कार्रवाई बदले में की गई है."

उन्होंने सीबीआई के छापे में बरामद हुई चीज़ों के बारे में जानकारी दी कि उन्हें उनके कर्मचारियों ने बताया है कि उनके घर से कुछ कागज़ बरामद किए गए हैं लेकिन कोई कम्प्यूटर बरामद नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने कभी कम्प्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया."

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सत्यपाल मलिक ने कहा कि वो इस तरह की कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे और इससे पहले ही उन्होंने अपनी आने वाली क़िताब "द ट्रूथ अबाउट कश्मीर" (कश्मीर के बारे में सच्चाई) की पांडुलिपी को एक सुरक्षित स्थान पर रख दिया है.

उन्होंने कहा, "एक रैली में मैंने कश्मीर पर अपनी क़िताब का ज़िक्र किया था, इसलिए लोगों को इसके बारे में जानकारी है. मुझे अहसास हुआ कि मुझे 200 पन्नों की ये पांडुलिपी घर पर नहीं रखनी चाहिए. सीबीआई के छापे ने मेरा अंदेशा सही साबित कर दिया."

"एक बार चुनावों की तारीखों की घोषणा हो जाए और चुनावी आचार संहिता लागू हो जाए उसके बाद मैं अपनी किताब छपवाने की कोशिश करूंगा. कश्मीर पर लिखी इस किताब को छापने में कई प्रकाशक दिलचस्पी दिखा रहे हैं और मेरे साथ संपर्क में हैं."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लेकर एस जयशंकर का अहम बयान

एस जयशंकर

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इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बात करते हुए कहा है कि वैश्विक ऑर्डर में "बड़े बदलाव" की ज़रूरत है.

दिल्ली में हो रहे रायसीना डायलॉग में उन्होंने चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसका विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं है.

उन्होंने कहा, "दुनिया आज जिन मुश्किलों का सामना कर रहा है उनमें से अधिकतर पश्चिम की देन हैं लेकिन आज के वक्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का सबसे बड़ा विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं."

जयशंकर ने कहा कि जिस वक्त संयुक्त राष्ट्र बना था उस समय इसमें क़रीब 50 सदस्य थे लेकिन अब ये संख्या बढ़ कर चार गुना हो गई है, तो ये सामान्य बात है कि अब पहले की तरह काम नहीं हो सकता.

बीते साल मई में चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग यी ने सुरक्षा परिषद में सुधारों और इसमें नए सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच सदस्य हैं जिनके पास वीटो पावर है, चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका.

इसके अलावा इसमें 10 और अस्थायी सदस्य हैं जिनका कार्यकाल दो साल का होता है.

सरोगेसी के नियमों में सरकार ने किया बड़ा बदलाव

सरोगेसी

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केंद्र सरकार ने सरोगेसी (रेगुलेशन) रूल्स 2022 में बदलाव किए हैं, जिससे सरोगेसी के ज़रिए माता-पिता बनने की इच्छा रखने वाले निसंतान दंपतियों को मदद मिल सकती है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नए नियमों के अनुसार अगर दोनों में से कोई एक मेडिकल कारणों की वजह से ओवा या स्पर्म (अंडाणु या शुक्राणु) का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो वो डोनर ओवा या स्पर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.

हालांकि इसके लिए राज्य या जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड को इसकी तस्दीक करनी होगी कि पति पत्नी में से कोई एक मेडिकल समस्या से जूझ रहा है.

इसके बाद दंपति किसी एक डोनर की मदद लेकर बच्चा पैदा कर सकते हैं.

नए नियमों के अनुसार, सिंगल महिलाएं, विधवा या तलाकशुदा महिला अगर सरोगेसी का रास्ता चुनती है तो उन्हें अपने ओवा का इस्तेमाल करना होगा. वो डोनर स्पर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं.

वीडियो कैप्शन, भारत में सरोगेसी और कमर्शियल सरोगेसी को लेकर क़ानून जानिए

हरकत में आया संयुक्त किसान मोर्चा, बनाई समिति

किसान

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2021-21 में तीन कृषि बिलों के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर कर महीनों तक विरोध प्रदर्शन करने वाला किसानों का संगठन संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर हरकत में आया है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी एक ख़बर के अनुसार, संगठन ने गुरुवार को छह सदस्यों की एक समिति बनाई है जो इससे पहले हुए किसान आंदोलन में उतरने वाले संगठनों से चर्चा कर बीते दिनों विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांगों को लेकर एक एक्शन प्लान बनाएगी.

इस समिति में हन्नान मुल्ला, जोगिन्दर सिंह उगराहां, बलबीर सिंह राजेवाल, युद्धवीर सिंह, दर्शन पाल और रामिन्दर पटियाला शामिल हैं.

जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अविक साहा ने अख़बार को बताया, "हमने समिति के सदस्यों पर ये छोड़ा है कि वो उन सभी किसान संगठनों से चर्चा करें जो पहले संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा थे और उन्हें एक साथ लाएं."

बीते दिनों संयुक्त किसान मोर्चा के एक धड़े संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनीतिक) ने किसान मज़दूर मोर्चा के साथ मिलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज़ माफी और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और 'दिल्ली चलो' का नारा दिया था.

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