ग़ज़ा में स्कूल पर इसराइली हमला, 16 लोगों की मौत

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- Author, रुश्दी अबुलौफ़ और टॉम मैकआर्थर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ग़ज़ा के एक स्कूल पर इसराइली हवाई हमले में कम से कम 16 लोग मारे गए हैं. फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इन मौतों की जानकारी देते हुए कहा हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ नुसरत रिफ्यूजी कैंप में मौजूद इस बिल्डिंग में हजारों शरणार्थी रह रहे थे.
इसराइली सेना का कहना है कि उसने अल-जाउनी स्कूल के इलाके में मौजूद इमारतों से अपनी गतिविधियां चला रहे 'आतंकवादियों' पर हमले किए हैं.
इस बीच, कैंप में मौजूद एक घर पर भी सेना के हमले की ख़बर है. इसमें दस लोगों की मौत हो गई है.
नुसरत कैंप के स्कूल पर हुए हमले के बाद सामने आए वीडियो में बच्चे और बड़े चीखते हुए धुएं से भरी गली में भागते दिख रहे हैं. गली पूरी तरह धूल और मलबे से भरी हुई थी.
चश्मदीदों ने बीबीसी को बताया कि हमले में स्कूल की ऊपरी मंजिल को निशाना बनाया गया. ये स्कूल एक बाज़ार के पास मौजूद है.
बीबीसी का मानना है कि इस बिल्डिंग को सात हजार लोग एक शेल्टर होम की तरह इस्तेमाल कर रहे थे.

'चौथी बार बगैर चेतावनी के स्कूल पर हमला'

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एक महिला ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि जब बिल्डिंग पर हमला हुआ तो उस वक़्त बच्चे कुरान पढ़ रहे थे.
महिला ने बताया, ''ये चौथी बार है जब बगैर चेतावनी के स्कूल पर हमला किया गया है.''
एक स्थानीय सूत्र ने कहा कि एक कमरे को निशाना बनाकर हमला किया गया, जिसे कथित रूप से हमास की पुलिस इस्तेमाल कर रही थी.
हालांकि बीबीसी स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है.
हमास ने कहा है कि शनिवार के इसराइली हमले में पांच स्थानीय पत्रकार भी मारे गए हैं. इन पत्रकारों के परिवार के सदस्यों पर भी हमले की ख़बर है.
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के मुताबिक़ इसराइल पर पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद की जवाबी कार्रवाई में अब तक 100 से ज्यादा पत्रकारों की मौत हो गई है.
हमास ने कहा कि इन पांच पत्रकारों को मिलाकर अब तक मरने वाले पत्रकारों की संख्या 158 हो चुकी है.
हमले को लेकर इसराइल और हमास ने क्या कहा

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इसराइली सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्कूल बिल्डिंगों पर हमले की पुष्टि की है.
हालांकि उसने कहा है कि उसने इस बात का ध्यान रखा कि हमले में नागरिकों को ज्यादा नुकसान न पहुंचे. इसके लिए उसने कई कदम उठाए.
इसराइली सेना का कहना है कि वह आसमान से निगरानी कर रही थी और साथ ही सटीक खुफ़िया जानकारियों का भी इस्तेमाल किया गया.
उनका कहना है कि इस इलाके में हमास के लड़ाके छिपे हुए थे, जिन्हें खत्म करने के लिए यह हमला किया गया.
इसराइल ने कहा है, "हमास बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से नागरिक ठिकानों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है. वो इसराइल के ख़िलाफ अपनी आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए नागरिक इलाकों को मानव कवच के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है."
जबकि हमास ने अपने टेलीग्राम चैनल पर हमले को निहत्थे और विस्थापित लोगों का नरसंहार करार दिया है.
हमास ने कहा है कि मरने वालों में कई बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं.
समझौते के आसार के बीच हमला

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ये हमला ऐसे वक़्त में हुआ है जब इसराइल और हमास में समझौते की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं.
इसराइल ने एलान किया है कि वो अपने बंधकों की रिहाई के लिए हमास से बातचीत के लिए एक टीम अगले सप्ताह भेजेगा.
दरअसल ये ख़बर अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के उस दावे के बाद आई है कि हमास संभावित युद्धविराम की शर्तों पर काफी कुछ तालमेल बिठाने के लिए तैयार हो गया है.
हमास के एक वरिष्ठ सूत्र ने शनिवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उनका संगठन इसराइली बंधकों की रिहाई के लिए बातचीत के लिए तैयार हो गया है.
हमास, गज़ा में युद्ध ख़त्म करने के लिए प्रस्तावित पहले दौर के समझौते के 16 दिन बाद इन बंधकों की रिहाई पर बातचीत के लिए राजी हुआ है.
इसराइली हमले में अब तक 38 हजार से ज़्यादा मौतें: हमास

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पिछले आठ महीनों से ज्यादा वक़्त से चल रहे ग़ज़ा युद्ध के दौरान घर छोड़ कर भागे 17 लाख लोग स्कूलों और संयुक्त राष्ट्र की इमारतों को शेल्टर होम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
जून महीने में भी नुसरत में संयुक्त राष्ट्र की ओर से चलाए जा रहे स्कूल पर किए गए हमले में कम से कम 35 लोग मारे गए थे. स्थानीय पत्रकारों ने उस समय बीबीसी को बताया था कि एक लड़ाकू विमान से स्कूल की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने क्लासरूम पर दो मिसाइलें दागी गई थीं.
हमले के बाद इसराइली सेना ने दावा किया कि स्कूल में बने हमास के कंपाउंड पर सटीक हमला किया गया था. इसराइली सेना का कहना था कि हमले के दौरान वहां हमास के 20 से 30 लड़ाके मौजूद थे.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली यूएन एजेंसी कई स्कूल चलाती है. उसने जून के हमले को भयावह बताया था.
उसका दावा था कि हमले के दौरान हमास लड़ाकों के वहां मौजूद होने की बात चौंकाने वाली थी लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी.
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में बंदूकधारियों ने इसराइली में घुसकर हमला किया था, जिसमें 1200 लोगों की मौत हो गई थी. बंदूकधारियों ने 251 लोगों को बंधक बना लिया था.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इसके बाद से चल रही इसराइली सैन्य कार्रवाई में ग़ज़ा में अब 38,098 फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है.












