ग़ज़ा में इसराइल के सैन्य अभियान पर 'सीमित' रोक के एलान से सामने आए नेतन्याहू सरकार में मतभेद

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    • Author, कैथरीन आर्मस्ट्रॉन्ग
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

इसराइली सेना ने कहा है कि वह दक्षिणी ग़ज़ा से सटी सड़क पर हर रोज़ कुछ वक्त के लिए "सैन्य अभियान को रोकेगी" ताकि इस इलाक़े में अधिक मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके. हालांकि, इसराइली सेना ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ये कोई युद्धविराम नहीं है और रफ़ाह में जंग जारी रहेगी.

शनिवार से लागू इस रोक के तहत स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजे से लेकर शाम सात बजे तक इसराइल की सैन्य कार्रवाई बंद रहेगी. इस सीमित विराम से राहत सामग्री ग़ज़ा के उत्तर की तरफ पहुंचाने में मदद मिलेगी.

इस विराम का असर केवल उस अहम रास्ते पर होगा, जो ग़ज़ा और इसराइल के बीच प्रमुख माने जाने वाले केरेम शलोम क्रॉसिंग से उत्तर की ओर जाती है.

हालांकि इस सीमित युद्धविराम की घोषणा के बाद इसराइल के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

इसराइली सरकार के धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों ने इसका कड़ा विरोध किया है, जिस पर सेना ने भी जवाब दिया है और भरोसा दिलाया है कि इस विराम का मतलब युद्ध ख़त्म होना नहीं है.

इधर सहायता एजेंसी एक्शनएड ने बीबीसी को बताया कि उसे इस बारे में कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं दिखती कि इस विराम के मायने क्या हैं.

ग़ज़ा में मानवीय संकट को और बिगड़ने से रोकने के लिए इसराइल पर अमेरिका सहित उसके सहयोगियों की ओर से लगातार दबाव बन रहा है.

इसराइली सेना की घोषणा

रविवार को इसराइल डिफ़ेंस फोर्सेज़ ने कहा है कि सेना और कोगाट (कोऑर्डिनेशन ऑफ़ गवर्नमेंट एक्टिविटिज़ इन द टेरिटरीज़) की कोशिशों के तहत मानवीय राहत पहुंचाने के लिए मानवीय आधार पर इसराइल ग़ज़ा के दक्षिण में केरेम शलोम क्रॉसिंग से मुख्य हाईवे सलाह-अल दीन रोड तक और फिर उत्तर की ओर ख़ान यूनिस शहर के पास यूरोपियन अस्पताल तक अपने सैन्य अभियान को रोकेगा.

सेना के अनुसार "संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ अतिरिक्त चर्चाओं" के बाद ये फ़ैसला लिया गया है.

स्थानीय समयानुसार सवेरे आठ बजे से लेकर सात बजे रोज़ इस सड़क के आसपास सैन्य गतिविधि को रोका जाएगा. ये रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी.

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आईडीएफ़ ने एक्स पर एक पोस्ट में ये स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिणी ग़ज़ा पट्टी में कोई संघर्षविराम नहीं होगा और रफ़ाह में लड़ाई जारी रहेगी.

ग़ज़ा में ज़रूरी सामान की आपूर्ति में लगे एक्शनएड के एक प्रवक्ता ज़ियाद इसा ने बीबीसी को बताया कि इस रोक से सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी लेकिन उन्हें इस बारे में अधिक जानकारी की ज़रूरत है.

ज़ियाद इसा ने कहा, "हमारे पास अभी भी इस बारे में कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं है कि इस विराम का क्या मतलब है, इससे किस तरह से मदद ग़ज़ा पट्टी के अंदर पहुंचेगी और ज़रूरतमंद नागरिकों के बीच सुरक्षित रूप से इसे कैसे बांटा जा सकेगा."

उन्होंने कहा, "एक्शनएड ने पिछले कुछ हफ़्तों में केरेम शलोम से ग़ज़ा पहुंचने की कोशिश कर रहे काफ़िलों पर बड़े हमले देखे हैं."

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यालय (ओसीएचए) के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि उनका संगठन इस घोषणा का स्वागत करता है.

जेन्स लेर्क ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इससे ग़ज़ा में सार्थक मानवीय सहायता में रुकावट बन रहे मुद्दों को हल करने के लिए इसराइल की ओर से और ठोस कदम उठाए जाएंगे."

सेना के एलान के बाद नेतन्याहू की मुश्किल

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इसराइली मीडिया की ख़बरों के अनुसार, घोषणा से पहले तक प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू या रक्षा मंत्री याओव गैलांट को भी सैन्य अभियान को रोकने वाली इस योजना के बारे में जानकारी नहीं थी.

नेतन्याहू के कार्यालय ने कथित तौर पर कहा कि पीएम ने रविवार को इस योजना के बारे में सुनने के बाद अपने सैन्य सचिव से कहा था कि ये 'अस्वीकार्य' है.

नेतन्याहू को कथित तौर पर ये भी बताया गया है कि युद्ध को लेकर आईडीएफ़ की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और रफ़ाह में लड़ाई योजना के अनुसार ही जारी रहेगी.

लेकिन इसे लेकर पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू अपने कैबिनेट के दो धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों का विरोध झेल रहे हैं.

इन सहयोगियों का कहना है कि अगर हमास के ख़ात्मे से पहले नेतन्याहू युद्ध ख़त्म करते हैं तो वो सरकार को दे रहा सहयोग वापिस ले लेंगे.

इसराइली सेना की घोषणा पर राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतेमार बेन ग्विर ने कहा कि लड़ाई रोकने का फ़ैसला किसी 'मूर्ख' ने लिया है जो 'दुष्ट' है.

वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मॉट्रिच ने कहा है कि ग़ज़ा पहुंच रही राहत सामग्री के कारण हमास तो ताकत मिली है और इससे "युद्ध में अब तक मिली क़ामयाबी बेकार हो जाएगी."

एक महीने पहले इसराइली सैनिकों की एंट्री के बाद सैकड़ों-हज़ारों फ़लस्तीनी लोगों ने रफ़ाह छोड़ा है. इसराइल ने मिस्र के साथ रफ़ाह क्रॉसिंग के ग़ज़ा की ओर वाले हिस्से को अपने नियंत्रण में लेकर बहुत से लोगों को यहां से निकलने के लिए कहा था.

एक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए सबसे अहम एंट्री प्वॉइंट रफ़ाह क्रॉसिंग तबसे लेकर अब तक बंद है.

इसराइल का कहना है कि हमास को मिटाने के लिए रफ़ाह में उसका अभियान ज़रूरी है. इसराइल रफ़ाह को हमास का 'आख़िरी बड़ा गढ़' मानता है.

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने ग़ज़ा में गंभीर मानवीय हालात की चेतावनी दी है और बार-बार यहां अधिक सहायता पहुंचाने की मांग की जा रही है.

ओसीएचए ने बताया कि मई में ग़ज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाने वाले ट्रकों की दैनिक औसत संख्या 97 थी. इनमें ईंधन आपूर्ति वाले ट्रक शामिल नहीं थे. अप्रैल में ये संख्या 169 और मार्च में 139 थी.

सात अक्टूबर को जंग छिड़ने से पहले ईंधन समेत सहायता पहुंचाने वाले करीब 500 ट्रक रोज़ाना ग़ज़ा जाते थे.

ओसीएचए ने बताया कि सात मई के बाद से वह केरेम शलोम क्रॉसिंग के माध्यम से प्राइवेट सेक्टर से आने वाली सहायता पर सीधे तौर पर नज़र नहीं रख पाया है.

आईडीएफ़ ने कहा कि शनिवार को रफ़ाह में हुए विस्फ़ोट से आठ इसराइली सैनिक मारे गए थे. जनवरी के बाद से ये सेना के लिए सबसे अधिक जानलेवा दिन साबित हुआ है.

जिस विस्फ़ोट में सैनिकों की जान गई वो रफ़ाह के बगल में स्थित तल अल-सुल्तान में एक सैन्य अभियान के दौरान हुआ. ये इलाक़ा हालिया सप्ताहों में इसराइली सेना का अहम निशाना रहा है.

हमास के सशस्त्र गुट ने कहा कि उसने घात लगाकर एक बख्तरबंद वाहन पर रॉकेट दागा.

नेतन्याहू ने हमास के ख़िलाफ़ जंग जारी रखने की कसम खाई है. उन्होंने इसराइलियों से कहा है कि वे किसी भी सूरत में अपने स्पष्ट और सीधे लक्ष्य से न भटकें. उन्होंने इसराइलियों से आग्रह किया है कि भारी क़ीमत के बावजूद युद्ध के लक्ष्यों पर अड़े रहें.

उन्होंने कहा, "हमास की राजनीतिक और सैन्य क्षमताओं का सफ़ाया, हमारे सभी बंधकों की वापसी, ये सुनिश्चित करना कि ग़ज़ा इसराइल के लिए ख़तरा पैदा नहीं करेगा और उत्तर तथा दक्षिण दोनों जगहों पर हमारे लोगों की सुरक्षित वापसी हमारा लक्ष्य है."

अब तक 37,000 फ़लस्तीनियों की मौत

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सहायता एजेंसियों ने ग़ज़ा के आसपास मदद बांटने में हो रही कठिनाइयों के बारे में बार-बार ज़िक्र किया है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ़ ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को मदद ले जा रहे एक काफ़िले को सभी ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद उत्तरी ग़ज़ा में घुसने से रोक दिया गया.

यूनिसेफ़ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर इस काफ़िले के साथ थे. उन्होंने बताया कि ऐसे वाहनों को अब रोका जाना बहुत आम हो गया है.

वहीं आईडीएफ़ ने कहा कि कागज़ी कार्रवाई ठीक से नहीं की गई थी. आईडीएफ़ ने एल्डर पर 'अधूरी बात' पेश करने का आरोप भी लगाया.

बीती सात अक्टूबर को हमास के इसराइल पर हमले के बाद ये जंग शुरू हुई थी. इस हमले में क़रीब 1200 लोग मारे गए थे और हमास के लड़ाके क़रीब 251 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा ले गए थे.

हमास ने नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जंग शुरू होने के बाद से अब तक 37,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं. साथ ही हज़ारों लोग घायल हुए हैं और उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.

इसराइल और हमास के बीच बंधकों की रिहाई और संभावित युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है. अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की थी कि गैलांट जल्द ही वार्ता के लिए अमेरिका जाएंगे.

इस सप्ताह की शुरुआत में हमास ने अमेरिका समर्थित योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और कई बिंदुओं पर अपना प्रस्ताव रखा था.

अमेरिका का कहना है कि ये प्रस्ताव इसराइल की ओर से आया है. हालांकि, इसराइल ने सार्वजनिक तौर पर प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है. लेकिन इस योजना के तहत ग़ज़ा के लिए मानवीय सहायता में 'बढ़ोतरी' ज़रूर होगी.

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