हमास का दावा- बंधक छुड़ाने के इसराइल के मिशन में 274 फ़लस्तीनियों की हुई मौत

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- Author, थॉमस मैकिनटोश
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि चार बंधकों को छुड़ाने के लिए हुए इसराइल के बचाव अभियान के दौरान शरणार्थी शिविर पर हुए हमलों में 274 फ़लस्तीनियों की मौत हुई है. इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.
शनिवार को इसराइली सेना ने भीषण हवाई हमलों के साथ नुसेरात शरणार्थी शिविर के नज़दीक हमास के साथ भीषण गोलीबारी की और उसके क़ब्ज़े में मौजूद चार बंधकों को छुड़ाया था.
इसराइली सेना ने जिन चार लोगों को हमास की क़ैद से छुड़ाया उन्हें 7 अक्टूबर को इसराइल में हो रहे नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल से हमास के लड़ाकों ने अगवा कर लिया था.
शनिवार को इसराइली सेना ने नोआ अरगामनी (27), अलमोग मीर (22), एंद्रेई कोज़लोव (27) और सलोमी ज़ीव (41) को छुड़ाया था. अब आठ महीनों बाद ये लोग वापस इसराइल लौटे हैं.

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हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इसराइल के बचाव अभियान के दौरान शरणार्थी शिविर में और उसके आसपास बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी लोगों की मौत हुई है. इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.
अब्देल सलाम दरवेश नाम के एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि जिस वक़्त उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों और गोलियों की आवाज़ सुनी उस वक़्त वो बाज़ार में सब्ज़ियां ख़रीद रहे थे.
उन्होंने बताया, "इसके बाद, सड़कों पर लोगों के शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे और दीवारें ख़ून से सनी हुई थीं."
बंधकों के वापस इसराइल पहुंचने के बाद इसराइल में लोगों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन समेत दुनिया के और नेताओं ने इस ख़बर का स्वागत किया है.
लेकिन ग़ज़ा के भीतर इसराइल के इस घातक रेस्क्यू मिशन को लेकर कड़ी आलोचना की जा रही है.
यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख जुसेप बोरेल ने कहा कि वह "कड़े शब्दों में" इसकी निंदा करते हैं.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "ग़ज़ा से आम लोगों के जनसंहार की कुछ और रिपोर्टें आ रही हैं, जो भयावह हैं."
वहीं इसराइल के एक मंत्री ने कहा है कि जुसेप बोरेल को रेस्क्यू मिशन की जगह हमास की निंदा करनी चाहिए.
हमास ने जारी की 86 नामों की लिस्ट
नुसेरात शरणार्थी शिविर के आसपास की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि इलाक़े में भारी बमबारी हुई है और लोग शवों के पास बैठे रो रहे हैं.
ग़ज़ा के दो अस्पतालों अल-अक्सा अस्पताल और अल-अव्दा अस्पताल ने कहा कि उन्होंने अब तक 70 शवों की गिनती की है.
हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने 86 नामों की एक सूची जारी की है. मंत्रालय का कहना है कि दो घंटे के इसराइल के बचाव अभियान में 274 लोगों की मौत हुई है जिनमें से कुछ के नाम उन्होंने जारी किए हैं. वहीं हमास के मीडिया दफ्तर के अनुसार मरने वालों की संख्या कम से कम 210 है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हगारी का आकलन है कि हमले में 100 से कम लोग मारे गए होंगे.
उन्होंने इसराइल के इस अभियान को 'बेहद जोखिम वाला जटिल मिशन' बताया है. उनका कहना है कि ये अभियान 'ख़ुफ़िया और सटीक जानकारी' पर आधारित था.
रक्षा मंत्री योआल गैलांट ने कहा है कि "भारी गोलीबारी के बीच" विशेष बलों ने बंधकों को हमास के कब्ज़े से छुड़ाया है. इस अभियान में विशेष सुरक्षाबल के एक अधिकारी घायल हुए, बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
तबाही का मंज़र

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अभियान के बाद ग़ज़ा से आ रहे वीडियोज़ में इस इलाक़े में भारी तबाही देखी जा रही है.
वहीं अल-अक्सा अस्पताल से मिल रहे वीडियो फुटेज में गंभीर रूप से घायल कई लोगों को ज़मीन पर बैठे और लेटे देखा जा सकता है. अस्पताल का फर्श पूरी तरह ख़ून से सना है और मरीज़ों का इलाज कर रहे डॉक्टर ख़ून पर बिना पैर रखे एक मरीज़ से दूसरे मरीज़ तक जा नहीं पा रहे हैं.
कुछ और वीडियो में देखा जा सकता है कि अस्पताल के बाहर एक के बाद एक कारें और एंबुलेंस मरीज़ों के लेकर आ रही हैं जिन्हे अस्पताल के भीतर ले जाया जा रहा है.
नुसेरात में अल-अव्दा अस्पताल के निदेशक डॉक्टर मारवान अबू नसीर ने बीबीसी अरबी सेवा को बताया कि शनिवार को अस्पताल में आने वाले मृतकों की संख्या बढ़ गई थी.
डॉक्टर मारवान अबू नसीर ने कहा कि अस्पताल में लाए गए शवों को रखने के लिए मुर्दाघर में पर्याप्त जगह नहीं है.

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एक व्यक्ति ने कहा कि अक्तूबर में इसराइल की सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से इसराइल के अभियान में उनके परिवार के 40 लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि जिस घर में वो थे वो हमले की चपेट में आ गया था.
उन्होंने कहा, "जैसे ही बच्चे और महिलाएं घर के भीतर दाखिल हुए वहां बम विस्फोट हो गया. इस कारण घर के अंदर मौजूद सभी लोगों की जान चली गई."
"एक वक्त था जब इस घर में 30 लोग रहते थे, फिर ये संख्या बढ़कर 50 हो गई थी. इस घर पर बम गिरा था... केवल मैं, मेरे पिता, मेरी पत्नी और एक युवा व्यक्ति बच गए थे... 50 लोगों में से केवल हम कुछ लोग ही बच गए हैं."
अब तक ये कम ही देखा गया है लेकिन इसराइल का हमला शुरू होने के बाद हो रही मौतों के बाद अब ग़ज़ा में रहने वाले लोग हमास की आलोचना करने लगे हैं.
37 साल के हसन ओमर कहते हैं कि इसराइल के हमलों की वजह से बिना कारण लोगों की जान जा रही है. उन्होंने बीबीसी से कहा, "हर इसराइली बंधक के बदले वो लोग 80 फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा कर सकते थे और वो भी बिना ख़ून बहाए. वो स्थिति सौ लोगों की मौत देखने से तो बेहतर होती."
"हमास के लिए मेरा संदेश ये है कि ये सब बंद होना चाहिए. ये एक तरह से फ़ायदे का सौदा है. हमें उन लोगों से छुटकारा चाहिए जो क़तर के होटलों में बैठे हम पर नियंत्रण कर रहे हैं."
इसराइल बोला- रेस्क्यू अभियान सफल

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इसराइली बंधकों को छुड़ाने की यह कार्रवाई इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम और बंधकों की रिहाई को लेकर समझौते तक पहुंचने की कोशिशों के बीच हुई.
युद्धविराम को लेकर समझौते के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर दबाव बढ़ रहा है लेकिन उनके धुर-दक्षिणपंथी सहयोगी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि बंधकों को छुड़ाने के लिए सैन्य कार्रवाई ज़रूरी है.
जानकार कह रहे हैं कि शनिवार को हुआ इसराइल का रेस्क्यू अभियान अब तक इस युद्ध का सबसे सफल अभियान है. जानकार मानते हैं कि ये अभियान बढ़ते दबाव के बीच फ़ैसले लेने को मजबूर नेतन्याहू के आकलन को बदल सकता है.
नुसेरात शरणार्थी शिविर के नज़दीक इसराइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में, हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया ने कहा कि इसराइल अपने फ़ैसले हमास पर थोप नहीं सकता.
उन्होंने कहा कि हमास तब तक युद्धविराम के लिए सहमत नहीं होगा जब तक वो फ़लस्तीनियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर लेता.
7 अक्टूबर को हमास ने इसराइल के दक्षिणी हिस्से पर हमला किया था. इन हमलों में हमास के लड़ाकों ने लगभग 1,200 इसराइली नागरिकों की हत्या कर दी थी. ये लड़ाके 251 इसराइली नागरिकों को अपने साथ बंधक बनाकर ले गए थे.
इसराइल का कहना है कि इनमें से 116 लोग अभी भी फ़लस्तीनी क्षेत्र में हैं, वहीं सेना के अनुसार 41 की मौत हो चुकी है.
बीते साल नवंबर में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत हमास ने एक सप्ताह के युद्धविराम के बदले में 105 इसराइली बंधकों को रिहा किया था. इसके बदले इसराइली जेलों में बंद 240 फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया गया था.
शनिवार को हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब तक इस युद्ध में ग़ज़ा में 36,801 लोगों की मौत हो चुकी है.
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