दस लाख साल पुरानी खोपड़ी ने बदल दी इंसानों के विकास की कहानी

चीन में मिली दस लाख साल पुरानी एक मानव खोपड़ी
इमेज कैप्शन, चीन में मिली दस लाख साल पुरानी एक मानव खोपड़ी से शुरुआती इंसान के बारे में हैरतअंगेज़ बातें सामने आई हैं.
    • Author, पल्लब घोष
    • पदनाम, विज्ञान संवाददाता

चीन में मिली दस लाख साल पुरानी एक मानव खोपड़ी से पता चलता है कि हमारी प्रजाति होमो सेपियन्स की शुरुआत अब तक माने गए समय से करीब पांच लाख साल पहले हो गई थी.

यह दावा शोधकर्ताओं ने एक नई स्टडी में किया है.

उनका कहना है कि इस खोज से यह भी समझ आता है कि हम नियंडरथल्स जैसी दूसरी मानव प्रजातियों के साथ पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा लंबे समय तक साथ रहे.

वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका विश्लेषण " मानव के विकास की हमारी समझ को पूरी तरह बदल देता है." अगर यह सही साबित होता है तो शुरुआती मानव इतिहास की एक अहम कहानी बदल जाएगी.

लेकिन इस सेक्टर के कुछ और एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये नतीजे मुमकिन तो हैं, पर अभी पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं.

यह खोज मशहूर मैगज़ीन 'साइंस' में छपी है.

रिसर्च टीम इस खोज को लेकर हैरान थी. इस टीम में चीन की एक यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम के वैज्ञानिक शामिल थे.

इस रिसर्च का सहनेतृत्व करने वाले फ़ुदान यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर शीजुन नी कहते हैं, ''शुरू में जब हमें यह नतीजा मिला तो हमने सोचा यह यक़ीन करने लायक नहीं है. यह इतना पुराना कैसे हो सकता है?"

उन्होंने कहा, "लेकिन हमने बार-बार हर तरीके से टेस्ट किया. सभी मॉडल और तरीके इस्तेमाल किए. अब हमें नतीजे पर पूरा भरोसा है और हम बहुत उत्साहित हैं."

खोपड़ी और उसका वर्गीकरण

चीन में मिली दस लाख साल पुरानी एक मानव खोपड़ी

इमेज स्रोत, Fudan University

इमेज कैप्शन, मानव खोपड़ी पर रिसर्च करने वालों में चीन की एक यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम के वैज्ञानिक शामिल थे

जब वैज्ञानिकों ने इस खोपड़ी को खोजा, जिसे युनशियन 2 नाम दिया गया, तो उन्होंने माना कि यह हमारे शुरुआती पूर्वज होमो इरेक्टस की है.

होमो इरेक्टस बड़े दिमाग़ वाले शुरुआती इंसान थे.

ऐसा इसलिए सोचा गया क्योंकि यह खोपड़ी करीब दस लाख साल पुरानी थी, यानी उस दौर की जब यह नहीं माना जाता था कि और एडवांस ह्यूमन सामने आए थे.

होमो इरेक्टस ने बाद में विकास किया और करीब छह लाख साल पहले दो हिस्सों में बंट गया. एक तरफ नियंडरथल्स बने और दूसरी तरफ हमारी प्रजाति होमो सेपियन्स.

लेकिन युनशियन 2 की नई जांच, जिसे रिसर्च टीम से अलग विशेषज्ञों ने भी परखा, बताती है कि यह होमो इरेक्टस नहीं है.

अब माना जा रहा है कि यह होमो लॉन्गी का शुरुआती रूप है. यह नियंडरथल्स और होमो सेपियन्स की तरह ही एक सिस्टर स्पीशीज़ थी और लगभग उसी स्तर तक विकसित थी.

जेनेटिक सबूत और टाइमलाइन

जेनेटिक सबूत बताते हैं कि यह प्रजाति उनके साथ ही रहती थी.

इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर युनशियन 2, दस लाख साल पहले धरती पर था, तो संभव है कि नियंडरथल्स और होमो सेपियन्स का शुरुआती रूप भी उसी समय मौजूद रहा हो.

नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम के प्रोफेसर क्रिस स्ट्रिंगर, जो इस रिसर्च के को-लीड हैं, कहते हैं कि इस चौंकाने वाले विश्लेषण ने बड़े दिमाग वाले इंसानों के विकास की टाइमलाइन को कम से कम पांच लाख साल पीछे खिसका दिया है.

उन्होंने कहा, "हमारी धरती पर कहीं न कहीं होमो सेपियन्स के दस लाख साल पुराने जीवाश्म मौजूद होंगे, बस हमने अभी तक उन्हें खोजा नहीं है."

रिसर्च पर असहमति

किसी शुरुआती इंसान की प्रजाति तय करने और यह जानने के दो तरीके होते हैं, पहला, खोपड़ी के आकार का विश्लेषण और दूसरा, जेनेटिक डेटा.

युनशियन 2 के मामले में दोनों तरीके अपनाए गए और दोनों से एक ही नतीजा निकला.

लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉ. ऐल्विन स्कैली जैसे कुछ अन्य रिसर्चर्स का कहना है कि दोनों तरीकों में काफी अनिश्चितता है.

उन्होंने कहा, "समय का अनुमान लगाने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि यह बेहद मुश्किल काम है. चाहे सबूत जेनेटिक हो या फ़ॉसिल का."

उन्होंने आगे कहा कि प्रोफेसर नी और स्ट्रिंगर के नतीजे संभव तो लगते हैं, लेकिन अभी पूरी तरह पक्के नहीं हैं और इसकी पुष्टि के लिए और सबूतों की ज़रूरत है.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "यह तस्वीर अभी हमारे लिए काफी अस्पष्ट है. अगर इस शोध के नतीजों को दूसरे विश्लेषणों से, खासकर जेनेटिक डेटा समर्थन मिलता है तो मुझे लगता है कि हमें इस पर और भरोसा होने लगेगा."

अफ़्रीका और एशिया में शुरुआती सबूत

सफेद खोपड़ियां मूल, विकृत जीवाश्म हैं और भूरे रंग की खोपड़ियां उसकी प्रतिकृतियां हैं जिन्हें कंप्यूटर से सही किया गया है

इमेज स्रोत, Fudan University

इमेज कैप्शन, सफेद खोपड़ियां मूल, विकृत जीवाश्म हैं और भूरे रंग की खोपड़ियां उसकी प्रतिकृतियां हैं जिन्हें कंप्यूटर से सही किया गया है

अफ़्रीका में शुरुआती होमो सेपियन्स का सबसे पुराना सबूत 3 लाख साल पुराना है.

इसलिए यह सोचना आकर्षक लगता है कि हमारी प्रजाति शायद सबसे पहले एशिया में विकसित हुई हो.

लेकिन प्रोफेसर स्ट्रिंगर के मुताबिक़, ''अभी इस चरण में पक्का कहना संभव नहीं है, क्योंकि अफ़्रीका और यूरोप में भी करीब दस लाख साल पुराने मानव जीवाश्म मौजूद हैं, जिन्हें इस विश्लेषण में शामिल करना ज़रूरी है.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "कुछ जेनेटिक सबूत ऐसे हैं जो हमारी प्रजाति के और पहले उभरने की ओर इशारा करते हैं, जो शायद हमारी वंशावली में शामिल हुए हों, लेकिन यह अभी साबित नहीं हुआ है."

तीन प्रजातियां और 'बीच का झोल'

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पहली टाइमलाइन का मतलब है कि तीनों मानव प्रजातियां धरती पर लगभग 8 लाख साल तक साथ रहीं, जो पहले माने गए समय से कहीं ज़्यादा है.

संभव है कि इस दौरान वे आपस में मिले-जुले हों और प्रजनन भी किया हो.

पहले उभरने की यह टाइमलाइन उन दर्जनों मानव जीवाश्मों को समझने में भी मदद करती है जो 8 लाख साल से लेकर 1 लाख साल पहले के बीच के हैं और जिन्हें वैज्ञानिक अब तक सही तरह से वर्गीकृत नहीं कर पाए थे.

लेकिन होमो सेपियन्स, होमो लॉन्गी और नियंडरथल्स के पहले उभरने से यह समस्या काफी हद तक हल हो जाती है.

प्रोफ़ेसर नी के मुताबिक, अब उन जीवाश्मों को इन "बिग थ्री" प्रजातियों या फिर उनके शुरुआती पूर्वजों, एशियाई होमो इरेक्टस और हाइडलबर्गेंसिस के हिस्से के रूप में रखा जा सकता है.''

उन्होंने कहा, "मानव विकास एक पेड़ की तरह है. इस पेड़ में कई शाखाएं थीं, और तीन बड़ी शाखाएं आपस में काफी जुड़ी हुई थीं. इनमें आपसी मेलजोल और प्रजनन भी हुआ होगा, और वे लगभग 10 लाख साल तक साथ रहीं. यह नतीजा वाकई अविश्वसनीय है."

यह खोपड़ी हुबेई प्रांत से मिली थी, जहां से दो और खोपड़ियां भी निकलीं. लेकिन वे टूट-फूट और दबाव में बुरी तरह क्षतिग्रस्त थीं.

यही वजह थी कि युनशियन 2 को पहले होमो इरेक्टस मान लिया गया था.

प्रोफ़ेसर नी की टीम ने इन खोपड़ियों को असली आकार में लाने के लिए स्कैन किया, फिर कंप्यूटर मॉडलिंग तकनीक का इस्तेमाल करके उनका सही स्वरूप तैयार किया और थ्री डी प्रिंटर से उनकी प्रतिकृतियां बनाई.

इन खोपड़ियों को असली रूप में देखने के बाद वैज्ञानिक उन्हें एक अलग और ज्यादा एडवांस ग्रुप में रखने में सफल हुए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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