तेलंगाना में झील का पानी लाल हुआ, पूरा मामला जानिए

झील का पानी लाल
इमेज कैप्शन, तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में झील से निकलकर खेतों तक पहुंचे लाल पानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं
    • Author, अमरेंद्र यारलगड्डा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

तेलंगाना के संगारेड्डी ज़िले के एक किसान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.

इस वीडियो में किसान यह आरोप लगा रहा है कि नल्लाकुंटा झील का पानी बदरंग और ज़हरीला हो चुका है, इससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है.

बीबीसी ने इस दावे की सच्चाई जानने के लिए संगारेड्डी ज़िले की गुम्मडिदला नगरपालिका के दोमडुगु गांव का दौरा किया.

गांव के एक किसान ने वीडियो में आरोप लगाया कि केमिकल्स से मिला गंदा पानी नल्लाकुंटा झील को प्रदूषित कर रहा है और वही पानी खेतों में भर रहा है.

झील के पास दम घुटने जैसी बदबू

झील का पानी लाल
इमेज कैप्शन, लाल पानी के कारण पूरे इलाके में बदबू फ़ैल रही है.

यह गांव हैदराबाद-नरसापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है.

बीबीसी की टीम जब झील पहुंची तो इतनी बदबू थी कि दो मिनट भी वहां रुकना मुश्किल हो गया. नाक पर रुमाल बांधकर ही स्थिति का जायजा लिया जा सका.

झील का पानी पूरी तरह लाल रंग में बदल चुका था. करीब 22 एकड़ में फैली इस झील के तीनों ओर पानी का यही हाल था.

स्थानीय किसान स्वेच्छा रेड्डी ने कहा, "हवा और पानी दोनों की स्थिति बहुत खराब है. पर्यावरण बिगाड़ने का अधिकार किसी को नहीं है."

हेटेरो पर आरोप और सफाई

हेटेरो ड्रग्स यूनिट-1
इमेज कैप्शन, किसानों का आरोप है कि ड्रग कंपनी के केमिकल वेस्ट से पानी का रंग बदल गया है.

किसानों का आरोप है कि नल्लाकुंटा झील का पानी पास की फैक्ट्री के केमिकल वेस्ट से गंदा हुआ है.

करीब पांच एकड़ में धान की खेती करने वाले किसान स्वेच्छा रेड्डी ने बताया, "प्रदूषित पानी हेटेरो ड्रग्स यूनिट-1 से एयरफोर्स एकेडमी में आता है और वहां से नल्लाकुंटा झील तक पहुंचता है."

जब बीबीसी की टीम झील पहुंची तो कई किसानों ने भी यही दावा किया. हालांकि, हेटेरो ड्रग्स ने इन आरोपों से इनकार किया है.

कंपनी के इंजीनियर नागराजू ने कहा, "हमारी यूनिट से कोई गंदा पानी बाहर नहीं जाता. हमारे पास ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम है, जिसमें पानी साफ़ करके फैक्ट्री के अंदर ही इस्तेमाल होता है."

बीबीसी स्वतंत्र रूप से इस बात की जांच नहीं कर सका कि झील का लाल पानी वास्तव में हेटेरो से आ रहा है या नहीं.

झील और फैक्ट्री के बीच एयरफोर्स का इलाका है, जो घने पेड़ों से घिरा हुआ है और यहां अंदर जाने की अनुमति नहीं है.

इसी वजह से यह देख पाना संभव नहीं था कि गंदा पानी कहां से झील तक पहुंच रहा है.

300 एकड़ फसल पर बुरा असर

झील से निकलकर खेतों में पहुंचा बदबूदार लाल पानी
इमेज कैप्शन, प्रदूषित पानी की वज़ह से किसानों की करीब 300 एकड़ ज़मीन में धान और सब्ज़ियों की खेती प्रभावित हुई है.

नल्लाकुंटा झील का गंदा पानी खेतों से होते हुए करीब 2 किलोमीटर दूर राजनाला झील में चला जाता है.

इन झीलों के बीच करीब 300 एकड़ ज़मीन है, जहां किसान धान और सब्ज़ियां उगाते हैं.

किसानों ने कहा कि झील पूरी तरह गंदी हो गई है.

किसान मंगैया ने बताया, "पहले झील साफ रहती थी. जंगल से पानी आता था. लेकिन कंपनी आने के दस साल बाद से प्रदूषण और कचरे ने हालत खराब कर दी है."

उन्होंने कहा कि वे यह समस्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी बता चुके हैं.

स्वेच्छा रेड्डी ने कहा, "लाल रंग का गंदा पानी खेतों में जाने से धान की फ़सल खराब हो रही है. अभी दाना बनने का वक्त है, लेकिन दाना नहीं बन रहा. धान की फ़सल में सिर्फ़ पत्ते आ रहे हैं. फ़सल बर्बाद हो रही है. लागत भी नहीं निकल रही."

2013 में झील से हटाया गया था गंदा पानी

विरोध प्रदर्शन करते हुए किसान
इमेज कैप्शन, ग्रामीण और किसान हेटेरो ड्रग्स कंपनी पर प्रदूषण फैलाने का आरोप लगा रहे हैं.
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समाप्त

किसानों ने बताया कि इससे पहले भी 2012 में भी नल्लाकुंटा झील प्रदूषित हो गई थी. तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस बात की शिकायत दी गई थी.

जांच के बाद मार्च 2013 में हेटेरो कंपनी को नोटिस मिला और झील से दूषित पानी हटाने का आदेश दिया गया.

कंपनी के इंजीनियर ने बताया कि अक्तूबर 2013 में झील से सारा गंदा पानी निकाल दिया गया.

गांव के किसान कृष्णा रेड्डी बताते हैं, "उस वक्त हमने आंदोलन किया था. सरकार के आदेश पर कंपनी ने टैंकर से झील का पानी निकलवाया था."

किसान जयपाल रेड्डी ने बताया, "उसके बाद भी कई बार यही समस्या आई है. हर साल दिक्कत होती है, लेकिन इस बार हालात ज़्यादा खराब हैं. झील के पानी का रंग पूरा बदल चुका है."

क्या बैक्टीरिया और शैवाल से भी बदल सकता है झील का रंग?

हेटेरो ड्रग्स कंपनी के इंजीनियर नागराजू ने बताया कि झील का पानी सिर्फ़ प्रदूषण से लाल नहीं हुआ है.

वह बताते हैं, "इसका कारण बैक्टीरिया, शैवाल और फंगस भी हो सकते हैं. रंग बस ऊपर की सतह पर दिख रहा है."

जब बीबीसी ने पूछा कि झील से तेज़ रासायनिक बदबू क्यों आ रही है, तो उन्होंने कहा कि यह घरों का गंदा पानी मिलने से भी हो सकता है.

और झाग को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी से झील में कोई रासायनिक गंदगी नहीं जाती है.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्या कहा?

दो व्यक्ति खेतों के किनारे चर्चा करते हुए
इमेज कैप्शन, किसानों का आरोप है कि नल्लाकुंटा झील का पानी बदरंग और ज़हरीला हो चुका है, इससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है.

बीबीसी ने नल्लाकुंटा झील के मामले पर संगारेड्डी ज़िला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंजीनियर कुमार पाठक से बात की.

उन्होंने कहा, "झील को लेकर पहले भी शिकायतें आई हैं. टास्क फोर्स ने जाकर जांच की है और कंपनी और झील की स्थिति देखी है. इसकी सुनवाई पूरी हो चुकी है, अब रिपोर्ट आनी बाकी है."

बीबीसी के सवाल पर कि क्या पानी में बैक्टीरिया, फंगस या शैवाल पाए गए?

उन्होंने कहा, "अभी कहना मुश्किल है. इसके लिए बड़े संस्थानों से जांच करानी होगी."

उन्होंने बताया कि झील के पानी को लेकर आगे की कार्रवाई टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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