उत्तर प्रदेश: एक ही गांव के तीन लोगों के आठ दिन के अंदर 'आत्महत्या' का क्या है मामला

पीड़ित परिवार के घर का चूल्हा

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, हमीरपुर और घाटमपुर से

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ज़िले के एक नामालूम से गांव के उबड़-खाबड़ रास्तों को समतल करने में मज़दूर दिन-रात लगे हैं.

बीती 28 फरवरी से 6 मार्च के बीच, यानी आठ दिनों के अंदर यहां कथित तौर पर आत्महत्या की तीन घटनाएं हुई हैं. आत्महत्या करने वालों में 14 और 16 साल की दो बच्चियां और उनमें से एक लड़की के पिता ने कथित तौर पर ख़ुदकुशी की है. ये दोनों चचेरी बहनें थीं.

बच्चियों के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके साथ बलात्कार किया गया था. हालांकि, पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच कर रही है.

गांव में काली–सफ़ेद रंग की एसयूवी गाड़ी से नेताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है. गांवभर में जितनी कुर्सियां थीं सबको एक कच्चे घर के सामने जमा कर लिया गया है ताकि यहां आने वाले लोगों को बिठाया जा सके.

एक औरत जिन्होंने अपनी बेटी और पति दोनों को खोया है, वो सफ़ेद रजाई ओढ़े लेटी हैं. उनका शरीर बुखार से तप रहा है और साड़ी का कोर आंसुओं से गीला है.

वो कहती है, "मेरा कमाने वाला चला गया, बिटिया चली गई. अब मेरे बच्चों का क्या होगा, कौन मुझे खिलाएगा. सरकार मेरी मदद करें."

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है.

अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

ईंट भट्ठे पर काम करती एक महिला

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नवंबर 2023 में हमीरपुर के एक गांव में रहने वाले ठेकेदार रामरूप अपने गांव से 45 लोगों को कानपुर नगर की घाटमपुर तहसील के एक ईंट भट्ठे पर पथाई के काम के लिए ले गए थे.

कच्ची ईंट को तैयार करना पथाई का काम कहलाता है. दोनों मृत बच्चियों के परिवार भी इसी काम के लिए रामरूप के साथ ईंट भट्ठे पर गए थे. रिश्ते में चचेरी बहन लगने वाली ये बच्चियां भी मज़दूरी करती थीं.

इन भट्ठों पर प्रत्येक 15 दिन में एक बार मज़दूरी मिलती है. इसके बाद मज़दूर अपनी ज़रूरत का सामान लेने स्थानीय बाज़ार जाते हैं. बीती 27 फरवरी को भी मज़दूरों को मज़दूरी मिली और वो स्थानीय बाज़ार गए.

एक मृत बच्ची की छोटी बहन जो इस घटना की चश्मदीद होने का दावा करती हैं, वो बताती हैं, "सभी लोग बाज़ार चले गए थे. तब रामरूप के बेटे और भांजे ने मेरी मड़ई (झोपड़ी) में आकर मेरी बहनों को जबरन बीड़ी और सिगरेट पिलाई."

"इसके बाद उन लोगों ने उनके साथ ग़लत काम किया. उन लोगों ने ये सब कुछ अपने मोबाइल में रिकार्ड किया और धमकाया कि अगर हम लोग ये सब किसी को बताएंगे तो वो लोग मेरे पापा, भाई और हमें मार देंगे."

वीडियो कैप्शन, उत्तराखंड के इस जंगल में सैकड़ों पेड़ों पर ये निशान क्यों लगाए और किसने लगाए?

'रात में घरवालों के लिए खाना बनाया और आत्महत्या कर ली'

आत्महत्या करने वाली एक बच्ची की मां

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बाद में जब परिवार के अन्य सदस्य बाज़ार से लौटे तो मृत बच्ची की बहन ने उन्हें सारी बात बताई. इसके बाद से ही पीड़ित परिवार और रामरूप के परिवार के बीच मारपीट की स्थिति बन गई.

इस भट्ठे के मालिक मोहम्मद शाकिर बताते हैं, "28 फरवरी की सुबह से ही मेरे मुनीम का फ़ोन आना शुरू हो गया था. उस दिन ईंट भट्ठा मजदूरों की छुट्टी रहती है. फिर भी मैं आया और इन लोगों को समझाया. जिस पर इन लोगों ने कहा कि आप चिंता मत करिए, ये हमारे आपस की बात है."

"लेकिन रात में फिर मुनीम की फ़ोन आया और उसने बताया कि विवाद बहुत बढ़ गया है. जब तक मैं भट्ठे पर पहुंचता मुझे बच्चियों की आत्महत्या की सूचना मिली. बाद में मौके़ से ही पुलिस ने रामरूप, उसके बेटे और भांजे को गिरफ़्तार कर लिया."

मृत बच्चियों की मां में से एक बीबीसी को बताती हैं, "उसने 28 फरवरी को रात का खाना बनाया, भाई को खाना खिलाया और कहा कि मैं पेशाब करने जा रही हूं. दूसरी बच्ची ने शौच जाने की बात कही. ये दोनों बहुत देर तक वापस नहीं आई तो हम लोग ढूंढने निकले. तब मालूम चला कि घर से 200 मीटर दूर पर एक बेर के पेड़ पर उन दोनों ने एक ही दुपट्टे को दो भाग में फाड़ कर फांसी लगा ली है."

पिता ने भी 'आत्महत्या' की

ईंट भट्ठे पर बनी मज़दूरों की झोंपड़ी

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शवों के पोस्टमार्टम के बाद पीड़ित परिवार दाह संस्कार के लिए गांव आया.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि रामरूप, उसके बेटे और भांजे की गिरफ़्तारी के बाद रामरूप की पत्नी और मां ने उन्हें धमकाया है.

मृत बच्ची की मां बताती है, "रामरूप की बेटी और पत्नी 5 फरवरी को मेरे घर आई. उन्होनें मेरे पति को धमकाया कि वो उल्टा हम पर केस लगा देंगी. इसके बाद मेरे पति रोने लगे. उन्होंने उस रात खाना नहीं खाया. वो रातभर नहीं सोए और सुबह जाकर जंगल में फांसी लगा ली."

पीड़ित परिवार का घर

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इस घटना के बाद रामरूप की बेटी और पत्नी को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है. रामरूप के परिवार में अब उनके बुजुर्ग मां बाप बचे हैं.

रामरूप की मां बुधिया देवी रोते हुए कहती हैं, "हम उन लोगों से बहुत पहले अलग हो गए थे. उन्होंने क्या किया, इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं."

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इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाएगा. चूंकि पीड़ित परिवार हमीरपुर में रहता है, इसलिए हमीरपुर पुलिस से परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है.
हरीश चंद्र
एडीशनल कमीश्नर (लॉ एंड ऑर्डर), कानपुर नगर

अंतरिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या के संकेत

घाटमपुर में बच्चियों की आत्महत्या मामले में धारा 376 डी, 306, 323, 504, पॉक्सो एक्ट की धारा 3 और 4, आईटी एक्ट की धारा 67ए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

कानपुर नगर के एडीशनल कमीश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) हरीश चंद्र ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इंटरिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चियों के आत्महत्या करने के संकेत मिले हैं."

उन्होंने कहा, "प्राथमिक जांच में कोई शारीरिक चोट नहीं मिली है. मृतक बच्चियों के वैजाइनल स्वैब का स्लाइड और अभियुक्तों से ज़ब्त मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है. मृत बच्चियों का विसरा भी सुरक्षित रखा गया है."

वो कहते हैं, "इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाएगा. पीड़ित परिवार हमीरपुर में रहता है, इसलिए हमीरपुर पुलिस से परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है."

घाटमपुर के ईंट-भट्ठे और महिलाएं

ईंट भट्ठा

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ईंट भट्ठों पर महिलाओं के साथ हिंसा कोई नई बात नहीं है. देश के अलग अलग हिस्सों से ऐसी ख़बरें सामने आती रहती हैं.

इस मामले में भी पीड़ित परिवार ईंट भट्ठे पर मज़दूरी के लिए प्रयागारज, भिंड, शिकोहाबाद और घाटमपुर जाते रहे हैं.

जैसा कि पीड़ित परिवार की एक महिला सदस्य कहती हैं, "हम लोगों के पास खेत नहीं है. हम लोगों को पेट भरना है तो ईंट भट्ठों पर जाकर काम करना होगा."

वो कहती हैं, "हमारे यहां छोटे बच्चे भी मिट्टी का गोला बनाकर ईंट भट्ठे पर मज़दूरी करते हैं क्योंकि जो जितना ज़्याजा कच्चा ईंट बनाएगा, मज़दूरी उतनी ज़्यादा होगी. परिवार के परिवार भट्ठे पर जाते हैं और वहीं झोपड़ी डालकर रह जाते हैं."

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हमारी एसोसिएशन जल्द ही मीटिंग करके कुछ फ़ैसले लेगी. बाकी प्रशासन ने हमसे ईंट भट्ठों का जो डाटा मांगा है, वो हमने उन्हें दे दिया है.
रिज़वान अहमद
कोषाध्यक्ष, घाटमपुर ईंट निर्माता समिति

घाटमपुर की बात करें तो यहां ईंट भट्ठों का सघन जाल है. यहां 50 ईंट भट्ठे हैं जिनका तकरीबन 40 करोड़ का सालाना कारोबार है.

घाटमपुर ईंट निर्माता समिति के कोषाध्यक्ष रिज़वान अहमद बताते हैं, "एक भट्ठे पर औसतन 40 पुरुष और 30 महिलाएं काम करती हैं. दीपावली से भट्ठों पर मज़दूर आ जाते हैं और इसका काम 15 जून तक चलता है. यहां मिट्टी अच्छी है इसलिए यहां का मुख्य कारोबार यही है. इसके लिए मज़दूर बुंदेलखंड तक से यहां आते हैं."

लेकिन क्या ईंट भट्ठों पर काम करने वाली इन महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई योजना उनके पास है?

इस सवाल पर रिज़वान कहते हैं, "हमारी एसोसिएशन जल्द ही मीटिंग करके कुछ फ़ैसले लेगी. बाकी प्रशासन ने हमसे ईंट भट्ठों का जो डाटा मांगा है, वो हमने उन्हें दे दिया है."

महत्वपूर्ण जानकारी-

मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-

समाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)

इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़- 9868396824, 9868396841, 011-22574820

हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000

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