कोरोना दौर में दिहाड़ी मज़दूर, आत्महत्या को मजबूर : NCRB

Stranded workers

इमेज स्रोत, Getty Images

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

साल 2020 की जब बात होगी, कोरोना महामारी का जिक्र ज़रूर आएगा.

कोरोना का जिक्र आते ही आँखों के सामने तस्वीरें आती हैं इलाज के लिए तरसते लोगों की, एम्बुलेंस की, शमशान घाट की, ऑक्सीजन सिलेंडर की और एक शहर से दूसरे शहर पैदल निकले मजदूरों की.

मजदूरों ने बीमारी के साथ साथ भुखमरी की दोहरी मार झेली थी.

अब नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के साल 2020 की 'एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुइसाइड' रिपोर्ट आई है, जिससे पता चलता है कि साल 2020 में आत्महत्या सबसे ज़्यादा दिहाड़ी मजदूरों ने की है.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, Shadab/BBC

मज़दूरों पर कोरोना की मार?

एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे. जान लेने वालों में सबसे ज़्यादा तमिलनाडु के मज़दूर थे. फिर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात के मजदूरों की संख्या है.

हालांकि इस रिपोर्ट में मजदूरों की आत्महत्या के पीछे कोरोना महामारी को वजह नहीं बताया गया है.

लेकिन मार्च के अंत में भारत में लगे पूर्ण लॉकडाउन के बाद मजदूरों के पलायन की तस्वीरे सबने देखी थी.

कैसे भूखे लोग प्यासे पैदल ही अपने गाँव की तरफ़ निकल पड़े थे.

कुछ राज्य सरकारों ने दूसरे राज्यों में काम कर रहे अपने लोगों के लिए ट्रेनों और बस का इंतजाम भी किया था. केंद्र सरकार ने ग़रीबों में मुफ़्त राशन बटवाने का एलान भी किया था. लेकिन मजदूरों के दुख, परेशानी और भुखमरी के आगे वो कोशिशें नाकाफ़ी थीं.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, Shadab/BBC

भारत में 2017 के बाद से साल दर साल आत्महत्या के मामलों में इज़ाफ़ा देखने को मिल रहा है. 2019 के मुकाबले 2020 में 10 फ़ीसदी मामले ज़्यादा सामने आए हैं.

आत्महत्या के मामले स्कूली छात्रों के मामले भी ज़्यादा देखने को मिले हैं.

कोरोना महामारी के दौरान स्कूल कॉलेज भारत में बंद थे. स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था तो की थी, लेकिन लैपटॉप, स्मार्टफोन और इंटरनेट की व्यवस्था ना होने के कारण कई छात्र स्कूलों से बाहर होने को मजबूर हो गए थे.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, Shadab/BBC

आत्महत्या के ताज़ा आँकड़ों से पता चलता है कि परीक्षा में फे़ल होने की वजह से भी कई छात्रों ने अपनी जान ले ली.

आत्महत्या के मामले में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों और लड़कों के व्यवहार में भी साफ़ अंतर देखने को मिलता है.

प्रेम प्रंसग की वजह से लड़कियों ने अपनी ज़्यादा जान गवाईं.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, Shadab/BBC

रिपोर्ट में आत्महत्या के अलग अलग कारणों का भी जिक्र किया गया है. जिसमें पारिवारिक कलह सबसे बड़ी वजह बताई गई है. मानसिक बीमारी, ड्रग्स, शादी से जुड़ी दिक़्क़तें भी आत्महत्या के लिए जिम्मेदारी वजहें बताई गई हैं.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, SHADAB/BBC

किसानों की स्थिति

आँकड़ों में किसानों की आत्महत्या का भी जिक्र है, जिसमें महाराष्ट्र सबसे आगे है.

नए कृषि क़ानून के विरोध में देश के कुछ हिस्सों में पिछले 11 महीने से किसान आंदोलन कर रहे हैं.

उनके मुताबिक नए कानून किसान विरोधी हैं और उससे उनका काफ़ी नुक़सान होगा. केंद्र सरकार से 11 दौर की बातचीत बेनतीजा रही है. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, कमेटी का गठन भी हुआ और उनकी रिपोर्ट भी आई. लेकिन अभी रिपोर्ट पर सुनवाई बाक़ी है.

हालांकि रिपोर्ट में उस आंदोलन से किसानों की आत्महत्याओं को नहीं जोड़ा गया है.

आत्महत्या

इमेज स्रोत, Shadab/BBC

कर्नाटक में लगातार आत्महत्या के मामले में गिरावट देखने को मिल रही है.

आबादी के लिए लिहाज से उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है लेकिन आत्महत्या के मामले अनुपात में कम हैं.

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)