हरियाणा से नौकरी की ख़ातिर जर्मनी के लिए निकले दो भाई कैसे पहुंच गए रूस की जेल

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- Author, कमल सैनी
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी के लिए
हरियाणा के करनाल ज़िले के अपने घर से जब मुकेश कुमार विदेश जाने के लिए निकले तो उन्हें भरोसा था कि वे अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पाएंगे.
बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनस्ट्रेशन (बीबीए) की पढ़ाई कर चुके मुकेश कुमार को पारिवारिक जान-पहचान के एक एजेंट ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे उन्हें वहां ढाई लाख रुपये प्रति माह की नौकरी दिला देंगे.
लेकिन मुकेश कुमार कभी जर्मनी नहीं पहुंच पाए. आमदनी की जगह 35 लाख रुपये ख़र्च करने के बाद भी वे एक दिन रूस की जेल में पहुंच गए. उनको सुरक्षित वापस लाने के लिए परिवार को ज़मीन और मवेशी तक बेचना पड़ा.
मुकेश कुमार के साथ साथ उनके फुफेरे भाई सनी भी इस धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं.
हरियाणा पुलिस ने अब इस पूरे मामले में धोखाधड़ी और बेईमानी का आपराधिक मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है.
बीते 28 मार्च को मुकेश कुमार अपने फुफेरे भाई सनी के साथ रूस से वापस लौट आए हैं.
क्या दावा कर रहा है परिवार?

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स्थानीय पुलिस में परिवार वालों ने जो एफ़आईआर दर्ज़ कराई है उसमें 35 साल की महिला बलजीत कौर सहित छह लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.
राज कुमार, अली ख्वाजा जैसे ट्रैवल एजेंट और कॉर्डिनेटर अब्बास राशिद, चरणजीत और सतनाम को अभियुक्त बनाया गया है. मुकेश कुमार की मां रेशमा देवी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है.
करनाल के मूनक पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर अशोक कुमार ने इस पूरे मामले के बारे में बताया, "इस मामले में कुल 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है. सात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है और जल्द ही इन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. "
पुलिस की एफ़आईआर के मुताबिक़, जुलाई, 2023 में राजकुमार ने मुकेश को ढाई लाख रुपये महीने की नौकरी का लालच दिया. राजकुमार ने मुकेश को भरोसा दिलाया कि अगर वे 14 लाख रुपये ख़र्च करें तो उन्हें जर्मनी का वर्क परमिट मिल जाएगा. इसमें से दो लाख रुपये जाने से पहले, आठ लाख रुपये रूस पहुंचने पर और बाक़ी जर्मनी पहुंचने पर देने थे.
मुकेश कुमार के विदेश रवाना होने से पहले उनके परिवार ने अभियुक्त राजकुमार को पांच लाख रुपये दिए.
शुरुआती योजना के मुताबिक मुकेश कुमार को दिल्ली से मॉस्को के रास्ते जर्मनी जाना था. लेकिन अभियुक्त चरणजीत और अली ने मुकेश को बताया कि मॉस्को की फ्लाइट कैंसिल हो गई है और अब उन्हें थाईलैंड के रास्ते मॉस्को जाना होगा.
सितंबर, 2023 में मुकेश थाईलैंड पहुंचे. चरणजीत और अली ने उन्हें फ़ोन पर बताया कि यहां से उन्हें मॉस्को ले जाया जाएगा और फिर जर्मनी. मुकेश को बताया गया कि वीज़ा और वर्क परमिट मॉस्को में मिलेगा लेकिन इससे पहले आठ लाख रुपये देने होंगे.
एफ़आईआर के मुताबिक परिवार के इनकार करने पर बलजीत कौर ने परिवार वालों को फ़ोन कॉल किया और बताया कि मुकेश कुमार को बंधक बना लिया गया है और पैसे नहीं देने पर उनकी हत्या तक हो जाएगी.
बेटे की जान बचाने के लिए परिवार वालों ने सितंबर, 2023 से मार्च, 2024 तक तीन किस्तों में दस लाख रुपये अदा किए और मुकेश को मॉस्को से वापस भेजने का अनुरोध किया.
वे लोग मेरी गर्दन पर चाकू रख देते थे और मेरे परिवार वालों को वीडियो कॉल करते हैं. अगर परिवार वालों की ओर से पैसे भेजने में देरी होती है, वे लोग सिगरेट से मेरे शरीर को दागते थे.
एफ़आईआर के मुताबिक, एजेंटों ने मुकेश को मॉस्को तो भेज दिया, लेकिन ब्लैकमेलिंग और यातना का दौर ख़त्म नहीं हुआ. दरअसल, मुकेश कुमार को मानव तस्करी करने वालों ने बंधक बना लिया था.
मुकेश कुमार ने बीबीसी से कहा, "वे लोग मेरी गर्दन पर चाकू रख देते थे और मेरे परिवार वालों को वीडियो कॉल करते थे. अगर परिवार वालों की ओर से पैसे भेजने में देरी होती है, वे लोग सिगरेट से मेरे शरीर को दागते थे."
मुकेश कुमार के मुताबिक एजेंट और 'डंकी', भारत और पाकिस्तान के ही थे. मुकेश कुमार ने बताया, "वे हमें डंडे और रॉड से पीटते थे."
मुकेश कुमार के पिता श्याम लाल ने एफ़आईआर में बताया कि उन्होंने अभियुक्त अब्बास को दस लाख रुपये भेजे. बीबीसी ने बलजीत कौर और अब्बास से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन फ़ोन पर उनसे संपर्क नहीं हो सका.
रूस में जेल की यात्रा

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मुकेश कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें मॉस्को से बेलारूस ले जाया गया और बंधक बनाने वाले समूह ने उन्हें बेलारूस में रूसी सेना के हवाले कर दिया.
मुकेश और उनके भाई सन्नी को रूसी सेना ज्वाइन करके यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ने को कहा गया या फिर दस साल कैद की सज़ा भुगतने को कहा गया.
मुकेश कुमार ने बताया, "हमने 10 साल की सज़ा काटने का फ़ैसला किया और इस बीच, जब मैं वहां बीमार पड़ गया, तो उन्होंने मुझे अस्पताल में भर्ती कराया."
''इसी बीच मेरे साथ के लड़कों को जेल भेज दिया गया और जब मैं 12-13 दिन बाद अस्पताल से आया तो मुझे भी जेल ले जाया गया.''
उन्होंने हमें शेंगेन वीजा के बारे में बताया था. लेकिन उन्होंने हमें बेलारूस में फंसा दिया. जहां हमें प्रताड़ित किया गया
मुकेश का कहना है कि इस दौरान वह एक-दो बार परिवार से संपर्क कर पाए.
मुकेश के फुफेरे भाई सनी ने अपने शरीर के दाग दिखाए जो उन्हें जलती सिगरेट से दागे गए थे, चाकू से काटे जाने के निशान भी थे.
सनी भी भारत से मॉस्को के लिए चार अक्टूबर, 2023 को निकले थे. वे भी थाईलैंड के रास्ते मॉस्को पहुंचे थे. सनी के परिवार वालों का दावा है कि उन लोगों ने 25 लाख रुपये चुकाए.
सनी ने बताया, "उन्होंने हमें शेंगेन वीज़ा के बारे में बताया था. लेकिन उन्होंने हमें बेलारूस में फंसा दिया. जहां हमें प्रताड़ित किया गया."
आंखों के सामने साथियों के शव

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सनी का दावा है कि उन्होंने कई लोगों के शव को देखा, जो उनके साथ मॉस्को में थे. ये वे लोग थे जिनके परिवार वाले पैसे नहीं भेज पाए. हालांकि स्वतंत्र रूप से बीबीसी इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.
वहीं सनी की मां मीना देवी कहती हैं, "हमारे बच्चों को धोखा दिया गया है. वे हमारे बच्चों को पीटते थे. वे हमसे पैसे की मांग करते थे. सनी के पिता दिल के मरीज़ हैं, वह काम नहीं कर सकते."
"हमने अपनी ज़मीन बेच दी और पैसे भेज दिए. हमें पूरी रात नींद नहीं आई. हम पूरी रात बच्चों के संदेशों का इंतज़ार करते थे."
मुकेश का कहना है कि एजेंटों को पता था कि "हम जेल में हैं, इसलिए उन्होंने घर पर किसी से फ़ोन करवाया कि आपका बेटा जेल में है. एजेंटों ने घरवालों से कहा कि वे वकील के माध्यम से मुकेश को जेल से बाहर लाएंगे."
मुकेश के मुताबिक एजेंटों ने उनके परिवार के साथ इस बारे में एक समझौता किया और छुड़ाने के लिए भी पैसे लिए और फिर फोन ब्लॉक कर लिया.
मुकेश के मुताबिक़ परिवारवालों ने दूसरा वकील करके उनकी ज़मानत कराई और निर्वासित कराया और उस वकील ने परिवार से छह लाख रुपये लिए.
परिवारवालों का दावा है कि उन्हें मुकेश और सनी को वापस लाने के लिए पैतृक ज़मीन, मवेशी और घर तक बेचना पड़ा. मुकेश और सनी 28 मार्च को भारत पहुंचे. दोनों का कहना है कि वे अब विदेश जाना नहीं चाहते हैं.
भारत में मानव तस्करी का नेटवर्क
हालाँकि, यह इस तरह का पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई युवा रूस-यूक्रेन में फंसे होने के वीडियो देख चुके हैं और भारत सरकार से मदद की गुहार लगा चुके हैं.
हाल ही में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि सरकारी एजेंसियों ने मानव तस्करी के ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है जो यूक्रेन के खिलाफ रूस की सेना में शामिल होने के लिए युवाओं की तस्करी कर रहा है.
सीबीआई की ओर से कहा गया है कि अब तक 35 युवाओं को रूस भेजा जा चुका है
इस संबंध में विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने 23 फरवरी को कहा कि वे रूसी अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनसे रूस में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द वापस भेजने के लिए कहा गया है.
रूस और यूक्रेन के युद्ध में तेलंगाना के मोहम्मद अफ़सान और गुजरात के हामिल मांगुकिया की मौत हो चुकी है. सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते हुए कई युवाओं ने अपने वीडियो जारी किए हैं. एक ऐसे वीडियो में सात लोगों ने दावा किया है कि वे टूरिस्ट वीज़ा पर रूस आए थे और अब उन्हें जबरन सेना में शामिल किया जा रहा है.
बीबीसी पंजाबी ने भी गगनदीप नाम के एक युवा से बात की है जो इन दिनों रूस- यूक्रेन की सीमा पर फंसे हैं और मदद मांग रहे हैं.
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