रसोई में स्पंज से बर्तन धोना क्या ख़तरनाक है, इसकी जगह क्या इस्तेमाल करना चाहिए?

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- Author, जैस्मीन फॉक्स स्केली
हम स्पंज का इस्तेमाल उन बर्तनों को धोने के लिए करते हैं जिनमें हम खाना खाते हैं. लेकिन रसोई के स्पंज में बैक्टीरिया के पनपने के लिए माकूल वातावरण होता है.
तो क्या बर्तन धोने के लिए स्पंज की बजाए ब्रश का इस्तेमाल किया जाना चाहिए?
बैक्टीरिया की कई प्रजातियां पनपने का तरीक़ा जानती हैं. कुछ पृथ्वी की परत के नीचे उबलते हाइड्रोथर्मल वेंट्स में पनपती हैं तो कुछ ठंडी जगहों पर पनपने के तरीके़ खोजती हैं.
लेकिन अगर उनसे पूछा जाए कि वो कहां रहना चाहते हैं तो उनके लिए रसोई का स्पंज सबसे टॉप पर होगा.

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स्पंज को प्लेट्स और कांच के बर्तनों को साफ़ करने के टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. स्पंज बैक्टीरिया के लिए स्वर्ग है. इसमें बैक्टीरिया के लिए पौष्टिक भोजन के टुकड़े रह जाते हैं.
जर्मनी की फर्टवांगेन यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट मार्कस ऐगरट्स ने रसोई के स्पंज में बैक्टीरिया पर नया डेटा पब्लिश किया था. इन्होंने स्पंज में बैक्टीरिया की 362 प्रजातियों की खोज की.
कुछ स्थानों पर बैक्टीरिया का घनत्व 54 अरब प्रति वर्ग सेंटीमीटर तक पहुंच गया.
ऐगरट्स ने कहा, "ये बहुत बड़ा नंबर है. ये इतना ही बैक्टीरिया है जितना इंसानों की शौच में मिलता है."
स्पंज छिद्रों से भरे हुए होते हैं और हर में बैक्टीरिया को रहने के लिए जगह मिलती है.


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ड्यूक यूनिवर्सिटी में सिन्थेटिक बायोलॉजिस्ट लिंगचोंग यू और उनकी टीम ने 2022 में स्पंज का जटिल वातावरण का मॉडल बनाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया.
उन्होंने पाया कि जिन स्पंज में छिद्र और पॉकेट्स होते हैं वो सूक्ष्म जीवों की ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं. उनकी टीम ने स्पंज में बैक्टीरिया के अलग अलग स्ट्रेन के ज़रिए इन रिज़ल्ट को दोहराया.
ऐगरट्स कहते हैं, "रसोई में रखे स्पंज में मौजूद छिद्रों का साइज़ मायने रखता है, बैक्टीरिया की बढ़ोतरी के लिए."
"कुछ ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो अपने आप बढ़ते हैं, जबकि कुछ को बढ़ने के लिए माहौल की ज़रूरत होती है. लेकिन स्पंज के अंदर ऐसा संरचनाएं होती हैं जो सभी बैक्टीरिया के लिए परफेक्ट होती हैं."
ज़ाहिर तौर पर स्पंज बैक्टीरिया के लिए बेहतर घर मुहैया करवाते हैं. हालांकि ये ज़रूरी नहीं है कि इन बर्तनों से हमारे स्वास्थ्य को खतरा है. बैक्टीरिया हर जगह है, चाहे हमारी त्वचा हो या हमारे आस-पास मौजूद मिट्टी. सभी नुकसानदायक नहीं होते हैं. कुछ की भूमिका बल्कि अहम होती है.
सवाल ये है कि स्पंज में जो बैक्टीरिया मौजूद है उससे हमें चिंता करने की ज़रूरत है या नहीं?
ऐगरट्स ने 2017 की अपनी स्टडी में बैक्टीरिया की कॉमन प्रजातियों के डीएनए का क्रम बनाया. हालांकि हर बैक्टीरिया की प्रजाति का पता लगा पाना मुमकिन नहीं होता. इस स्टडी में 10 में से पांच बैक्टीरिया की ऐसी प्रजातियां मिलीं जो कि इंसानों में इन्फेक्शन फैला सकती हैं.

कुछ और तरीके जैसे गर्म पानी का इस्तेमाल करना कुछ बैक्टीरिया को ख़त्म कर सकता है, लेकिन इसमें भी बैक्टीरिया बचे रहते हैं और वो इससे बचे रहने वाले स्ट्रेन बनाते हैं.
ऐगरट्स ने कहा, "हमारा मानना है कि सफाई के लिए अलग-अलग सिलेक्शन प्रोसेस हो सकती है. जहां कुछ बचे हुए बैक्टीरिया बड़ी संख्या में बढ़ सकते हैं. बैक्टीरिया की पहचान से सफाई करने के तरीके का सिलेक्शन किया जा सकता है."
ये जानना भी महत्वपूर्ण है कि ऐगरट्स की रिपोर्ट में जो बैक्टीरिया मिले उनसे फूड प्वाइज़निंग या फिर कोई गंभीर बीमारी नहीं होती है. खाने से होने वाली 90 फीसदी बीमारियों से लिए पांच रोगाणु ज़िम्मेदार होते हैं जिनमें से तीन बैक्टीरिया कैम्पिलोबैक्टर, साल्मोनेला और ई कोली हैं. इन तीनों बैक्टीरिया का स्पंज में मिलना दुर्लभ है.
ऐगरट्स कहते हैं, "हमें ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं जो उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर है या फिर वो बुर्जुग या बच्चे हैं. स्वथ्य लोगों के लिए स्पंज में मिलने वाला बैक्टीरिया नुकसानदायक नहीं है."
ए एंड एम यूनिवर्सिटी में फूड सेफ्टी की प्रोफेसर जेनीफर कुनलन और उनके सहयोगियों ने फिलाडेल्फिया के 100 घरों के स्पंज जमा किए. उनमें से एक या दो फीसदी ही ऐसे थे जिनकी वजह से इंसानों में फूड प्वाइज़निंग होने की आशंका वाले बैक्टीरिया मिले. हालांकि उनमें भी बैक्टीरिया की मात्रा बेहद कम थी.
नॉर्वे के फ़ूड रिसर्च इंस्टीट्यूट नोफिमा में वैज्ञानिक सॉल्विग लैंग्सरुड की 2022 में सामने आई स्टडी भी इस बात का समर्थन करती है. उनकी स्टडी में भी स्पंज में ऐसे बैक्टीरिया मिले जो नुकसानदायक नहीं है.


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हालांकि ब्रश में स्पंज के मुकाबले बहुत कम बैक्टीरिया होते हैं.
कुनलन ने कहा, "स्पंज में मौजूद ज्यादातर बैक्टीरिया नुकसानदायक नहीं होते. उनसे सिर्फ महक पैदा हो सकती है. वक्त गुजरने के साथ ये आपको अच्छी नहीं लगेगी."
"ऐसी आशंका है कि आप स्पंज से बर्तन पर चिपका हुआ कच्चा मांस साफ करें तो उसकी वजह से नुकसान पहुंचाने वाला बैक्टीरिया स्पंज में रह जाए."
स्पंज में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जिनके बढ़ने से आपको नुकसान नहीं पहुंचे. लेकिन साल्मोनेला बैक्टीरिया अगर आपकी स्पंज में पहुंच गया तो नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने के लिए बेहतर स्पेस मिलेगा.
इस बात के सबूत भी हैं. लैंग्सरुड की स्टडी में पाया गया कि जब साल्मोनेला बैक्टीरिया स्पंज में पहुंचे तो उनमें बढ़ोतरी हुई, जबकि ब्रश से साफ करने पर ये बैक्टीरिया खत्म हो गए.
ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रश में नमी नहीं होती और यह साल्मोनेला को मिटाने में कारगर साबित होती है. लेकिन स्पंज के साथ ऐसा नहीं होता है.
ये नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया स्पंज से आपके बर्तनों तक पहुंच सकते हैं.
तो क्या हमें स्पंज को बदलते रहना चाहिए? इसके जवाब में कुनलन ने कहा कि हफ्तेभर में आपको अपना स्पंज बदल लेना चाहिए और इसे आदत भी बनाएं.
कुनलन ने कहा, "इन्हें साफ करने के दो आसान रास्ते हैं. आप इन्हें शाम में इस्तेमाल करने के बाद डिशवॉशर में रखें या फिर आप कुछ देर के लिए माइक्रोवेव में रख दें जिससे इसकी नमी ख़त्म हो जाए और अधिकतर नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया ख़त्म हो जाएं."
स्टडी में पता चला है कि डिशवॉशर या फिर माइक्रोवेव में रखने से बैक्टीरिया की संख्या में कमी आ जाती है.
लेकिन ऐगरट्स की स्टडी इस बात की वकालत नहीं करती. उनका मानना है कि एक वक्त के बाद बैक्टीरिया इससे बचे रहने का स्ट्रेन पैदा कर लेंगे.
गर्म पानी में स्पंज रखने से अधिकतर नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं जबकि कुछ बच जाते हैं. लेकिन इसका उदाहरण मिला है कि नुकसान पहुंचाने वाला साल्मोनेला बैक्टीरिया इस तरीके से खत्म हो जाता है.
एक तरीका ये भी हो सकता है आप स्पंज को सिंक के अंदर ना रखें. सिंक से बाहर रखने पर स्पंज की नमी खत्म होगी और बैक्टीरिया को बढ़ने वाला वातावरण नहीं मिलेगा.
लेकिन कुछ का मानना है कि बर्तन साफ करने के लिए दूसरे टूल का इस्तेमाल किया जाएगा.
ऐगरट्स कहते हैं, "मैं रसोई के स्पंज का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करूंगा. इसके इस्तेमाल का कोई सेंस नहीं बनता है. ऐसी चीज़ रसोई में नहीं होनी चाहिए. ब्रश बेहतर है क्योंकि उसमें कम बैक्टीरिया होता है और उससे साफ करना बेहद आसान है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















