बीपीएससी परीक्षा विवाद: विपक्ष का आरोप, छात्रों की मांग और सरकार का जवाब, पूरा मामला जानिए

बिहार में प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, बीपीएससी की इस परीक्षा को लेकर पेपर लीक के दावे भी सामने आए हैं
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बीपीएससी की 70वीं संयुक्त (प्रारंभिक) परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है.

छात्रों ने परीक्षा में अनियमितताओं, प्रश्न पत्र के स्तरहीन होने और कोचिंग संस्थानों के मॉडल पेपर से सवालों के मेल खाने का आरोप लगाया है.

छात्र पूरी परीक्षा रद्द कर इसे दोबारा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस, भाकपा (माले), जनसुराज जैसे विपक्षी दल भी छात्रों की मांग के समर्थन में हैं और सरकार को घेरते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दे रहे हैं.

बीपीएससी ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए इन्हें 'अतार्किक' बताया है और छात्रों से मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट जाने की अपील की है.

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राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि अगर किसी के पास (अनियमितताओं के) सुबूत हैं, तो सरकार परीक्षा रद्द करने का निर्णय तुरंत ले लेगी.

वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मांग है कि इस मामले की जांच हाईकोर्ट की बेंच से हो.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, ''अगर सरकार बीपीएससी परीक्षा रद्द नहीं करेगी, तो हम 1 जनवरी को 'बिहार बंद' करेंगे.''

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छात्रों का धरना, बीपीएसी ने क्या कहा?

गर्दनीबाग धरनास्थल पर जारी विरोध प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, धरने में शामिल छात्र पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं

बीपीएससी, कोचिंग, उपद्रवी तत्वों और राजनैतिक दलों के बीच चल रही इस खींचतान के बीच कुछ छात्र 18 दिसंबर से पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र धरने में शामिल हैं और पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं.

पश्चिम चंपारण के सौरभ कुमार, अनशन पर बैठे छात्रों में से एक हैं.

सौरभ कहते हैं, "हम सात लोग अनशन पर बैठे थे, जिसमें से पांच की हालत खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मुझे भी चार दिन से पेशाब नहीं हुआ है, लेकिन ये हमारे भविष्य का सवाल है."

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव

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इमेज कैप्शन, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मांग है कि इस मामले की जांच हाईकोर्ट की बेंच से हो.
कोचिंग संचालक का बयान.

सौरभ से कुछ दूरी पर धरने पर बैठी खुशी कुमारी ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की.

खुशी कहती हैं, "आयोग दो अलग-अलग पेपर करवाकर संविधान से मिले समानता के अधिकार का पालन कैसे करेगा? ये तो फिर से नॉर्मलाइज़ेशन ही लागू हो गया."

वहीं, दूसरी तरफ़ बीपीएससी के सचिव सह परीक्षा नियंत्रक सत्य प्रकाश शर्मा इस मांग को ख़ारिज करते हुए बीबीसी से कहते हैं, "आयोग छात्रहित का ध्यान रखता है, लेकिन कुछ उपद्रवी तत्व कोचिंग संचालकों के साथ मिलीभगत करके बिना किसी तथ्य के परीक्षा पर बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं."

"उनकी दोबारा परीक्षा कराने की मांग पूरी तरह से गलत है. स्टूडेंट्स अप्रैल 2025 में संभावित मुख्य परीक्षा की तैयारी में लगें."

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कैसे शुरू हुआ ये पूरा विवाद, अब तक क्या-क्या हुआ?

छात्रों का धरना प्रदर्शन.

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इमेज कैप्शन, बीपीएससी ने सितंबर में भर्ती का विज्ञापन जारी किया था

बीपीएससी की 70वीं संयुक्त (प्रारंभिक) परीक्षा 6 दिसंबर से ही विवादों और सुर्खियों में है.

इस परीक्षा का विज्ञापन सितंबर 2024 में जारी हुआ था. 4 लाख 83 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से 3 लाख 25 हजार ने परीक्षा दी.

यह 2031 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें 200 एसडीएम, 136 डीएसपी और अन्य राजपत्रित अधिकारियों के पद शामिल हैं, जो इसे हाल के वर्षों में सबसे बड़ी वैकेंसी बनाते हैं.

बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 13 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच आयोजित की गई. इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान के 150 प्रश्नों का उत्तर देना था.

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कब क्या हुआ?

6 दिसंबर: नॉर्मलाइज़ेशन लागू करने के आरोपों पर छात्रों ने पहला विरोध दर्ज किया.

बीपीएससी ने इसे 'अफ़वाह' करार देते हुए ख़ारिज किया और कहा कि नॉर्मलाइज़ेशन लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

नॉर्मलाइज़ेशन

13 दिसंबर: पटना के बापू परीक्षा परिसर में प्रश्न पत्र देर से मिलने पर हंगामा हुआ. पटना जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद बीपीएससी ने इस केंद्र के 12 हजार परीक्षार्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया, जो 4 जनवरी 2025 को होगी.

18 दिसंबर: छात्रों ने गर्दनीबाग धरनास्थल पर प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें पूरी परीक्षा रद्द कर फिर से आयोजित करने की मांग की गई. ठंड के बावजूद छात्र धरने पर बैठे हुए हैं, और यह प्रदर्शन अब भी जारी है.

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क्या सिर्फ़ पटना के बापू परीक्षा परिसर में ही अनियमितता हुई?

बापू परीक्षा परिसर
इमेज कैप्शन, पटना का बापू परीक्षा परिसर, जहां की परीक्षा को आयोग ने रद्द कर दिया
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बीपीएससी ने अब तक केवल पटना के बापू परीक्षा परिसर में प्रश्नपत्र वितरण में देरी को स्वीकार किया है. हालांकि, अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी गड़बड़ी के दावे छात्रों की तरफ़ से किए जा रहे हैं.

मधुबनी के रितेश कुमार, जिनका परीक्षा केंद्र उत्क्रमित उच्च विद्यालय, शंभूपट्टी, समस्तीपुर था.

वो बताते हैं, "मेरे कमरे में एक बेंच पर सेम सेट का पेपर दिया गया. शिकायत करने पर परीक्षा ले रही मैडम ने इसे सामान्य करार दिया."

गया के धर्मवीर, जिनका केंद्र उगम पांडेय कॉलेज, मोतिहारी में था. उनका कहना है, "सेंटर पर मेटल डिटेक्टर नहीं था, छात्र मोबाइल ले जा सकते थे. पेपर मिलने के बाद भी परीक्षार्थी आपस में बात करते रहे."

इसी तरह, राजन कुमार तिवारी, जिनका केंद्र आर.के. कॉलेज, मधुबनी था.

वो कहते हैं, "परीक्षा 15 मिनट तक बाधित रही क्योंकि परीक्षार्थियों को बाथरूम जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी. आयोग चाहे तो सीसीटीवी फुटेज की जांच कर सकता है."

वहीं, संतोष कुमार, जिनका केंद्र नेहरू स्मारक हाईस्कूल, बक्सर में था.

उन्होंने बताया, "हमारे कमरे को दिव्यांग परीक्षार्थियों का रूम बताया गया, लेकिन वहां अधिकतर दिव्यांग नहीं थे. मैंने इसकी शिकायत की है."

इस पर बीबीसी से बातचीत में बीपीएससी के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे "हीयरसे" यानी अफ़वाह बताया.

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क्या पेपर लीक भी हुआ था?

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह

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इमेज कैप्शन, बिहार के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह भी छात्रों से मिलने पहुंचे थे

बीपीएससी की इस परीक्षा को लेकर पेपर लीक के दावे भी सामने आए हैं.

हालांकि, राज्य की आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा, "हमें पेपर लीक का कोई सुबूत नहीं मिला है."

लेकिन यह भी सच है कि बिहार का पेपर लीक के मामलों में रिकॉर्ड बहुत साफ नहीं रहा है.

साल 2012 से अब तक आर्थिक अपराध इकाई ने पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े 10 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 545 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है.

वर्तमान में इकाई के रडार पर तीन कोचिंग माफिया भी हैं, जिनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

साल 2022 में बीपीएससी की 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, जिसकी जांच अभी तक जारी है. इसी साल बीपीएससी ने शिक्षक भर्ती परीक्षा को भी पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया था.

छात्र आंदोलन से जुड़े कोचिंग संचालक एम. रहमान उर्फ गुरू रहमान ने बीबीसी से कहा, "बिहार में पेपर लीक के मामले में कोचिंग माफिया, अधिकारी और पक्ष-विपक्ष दोनों के नेता शामिल रहते हैं."

"आप देखिए, रंजीत डॉन को छोड़कर किसी बड़े नाम की गिरफ्तारी नहीं हुई है. सिर्फ छोटे-छोटे सॉल्वर गिरफ्तार होते हैं. ज्यादा पुरानी बात नहीं, लेकिन संजीव मुखिया की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई?"

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परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों पर भी उठ रहे हैं सवाल, आख़िर क्यों?

राजद नेता तेजस्वी यादव

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इमेज कैप्शन, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर परीक्षा रद्द करने की मांग की है

बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न पत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं.

परीक्षार्थियों का कहना है कि इस परीक्षा में सवाल 'सिपाही बहाली' के स्तर के थे और कोचिंग संस्थानों के मॉडल प्रश्न पत्र से कई सवाल सीधे तौर पर उठाए गए थे.

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग करते हुए इस पर सवाल उठाया है.

तेजस्वी ने अपने पत्र में लिखा, "कुछ निजी कोचिंग संस्थानों के मॉडल प्रश्न पत्र में से 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों का मिल जाना क्या महज संयोग है? इसकी गहन जांच होनी चाहिए."

इस पर बीपीएससी के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने कहा, "बीपीएससी का पेपर स्वतंत्र विशेषज्ञों के पैनल द्वारा सेट किया जाता है. अगर प्रश्न पत्र सरल था तो कट-ऑफ अधिक जाएगा, इसमें परेशानी क्या है?"

"जहां तक कोचिंग के मॉडल प्रश्न पत्र से सवालों के मेल खाने की बात है, तो ऐसे कुछ ही सवाल हैं. इनसे कोई परीक्षार्थी परीक्षा पास नहीं कर सकता."

इन आरोपों पर राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले पर कहा, "जिस आदमी के पास भी सुबूत है, वो लाए. दो मिनट में सरकार परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लेगी."

वहीं, जेडीयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा, "बीपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और हमें उसकी पारदर्शिता पर पूरा विश्वास है. हमारे नेता नीतीश कुमार के हाथों में नौजवानों का भविष्य सुरक्षित है और यहां योग्यता के अनुसार न्याय होता है. ये लालू यादव का जंगल राज नहीं है."

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बापू परीक्षा सभागार पर क्यों उठ रहे सवाल?

बीपीएससी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

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इमेज कैप्शन, 16 दिसंबर को बीपीएससी की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी. इसमें आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई और सचिव सत्य प्रकाश शर्मा (दाएं) मौजूद थे

पटना के कुम्हरार स्थित बापू परीक्षा परिसर, जिसे 2023 में बिहार सरकार ने तैयार किया था, पर भी सवाल उठ रहे हैं.

बिहार सरकार का दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा परीक्षा परिसर है, जहां एक साथ 20,000 छात्र परीक्षा दे सकते हैं.

इस परीक्षा के आयोजन में बीपीएससी, पटना जिला प्रशासन और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति तीन प्रमुख स्टेकहोल्डर्स थे.

बीपीएससी ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया, "बापू परीक्षा परिसर पूर्ण रूप से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के प्रशासनिक नियंत्रण में है. आयोग का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है."

पटना जिला प्रशासन ने 13 दिसंबर को हुए बवाल की जांच रिपोर्ट में कहा, "परीक्षा परिसर के पांचों फ्लोर को पांच अलग-अलग परीक्षा केंद्रों के रूप में देखा जाना चाहिए और प्रत्येक केंद्र पर अलग केंद्राधीक्षक और दंडाधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए."

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया, "13 दिसंबर की परीक्षा में तीनों स्टेकहोल्डर्स (बीपीएससी, जिला प्रशासन, और परीक्षा समिति) के बीच तालमेल की कमी थी. बाद में इसी परिसर में 10,000 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों की परीक्षा हुई, जिसमें कोई दिक्कत नहीं आई."

कुल मिलाकर पिछले कुछ सालों से बिहार में सरकारी परीक्षाओं और विवादों का गहरा रिश्ता बन गया है.

हर परीक्षा से पहले जिन अभ्यर्थियों को तैयारी में समय लगाना चाहिए, वे अक्सर अपनी किसी न किसी मांग को लेकर आंदोलनरत नज़र आते हैं.

पटना जिला प्रशासन ने हाल ही में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आंदोलन कर रहे परीक्षार्थियों को 'गंभीर परीक्षार्थी नहीं' बताया है.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि खुद बिहार सरकार और उसका प्रशासनिक अमला साफ-सुथरी परीक्षाओं के आयोजन के लिए कितना गंभीर है?

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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