चीन के राजदूत ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के आगे ऐसा क्या कहा जिसे विश्लेषक बता रहे ‘तू-तू मैं-मैं’

चीन पाकिस्तान

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इमेज कैप्शन, 16 अक्तूबर को इस्लामाबाद में एससीओ की बैठक से दस दिन पहले ही चीनी नागरिकों को निशाना बनाते हुए चरमपंथी हमला हुआ था.

इस्लामाबाद में चीन के राजदूत के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पाकिस्तान को फटकार लगाने की चर्चाएं हैं.

राजदूत ने कार्यक्रम में पाकिस्तान को जल्द से जल्द चीन विरोधी चरमपंथी ग्रुपों पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी.

पाकिस्तान के अख़बार द ट्रिब्यून का कहना है कि किसी राजदूत की ओर से विदेश मंत्री की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से झिड़की देना, एक दुर्लभ घटना है.

जबकि अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि यह टिप्पणी 'राजनयिक मानदंड' के अनुरूप नहीं है.

बीते मंगलवार को चीनी राजदूत जियांग जायदोंग ने ‘चाइना ऐट 75’ के शीर्षक वाले एक सेमिनार में कहा था कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपेक) में सबसे बड़ी बाधा सुरक्षा चिंताएं हैं और बिना सुरक्षित और शांत माहौल के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता.

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यह सेमिनार पाकिस्तान चाइना इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित किया गया था.

पिछले छह महीने में चीन के सहयोग वाले प्रोजेक्टों पर दो घातक चरमपंथी हमले हो चुके हैं. 26 मार्च 2024 को ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में चीनी इंजीनियरों को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में पांच चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी.

बीते अक्तूबर में चीनी नागरिकों के कारवां को निशाना बनाते हुए चरमपंथी हमला हुआ था, जिसमें दो चीनी नागरिक मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए थे. इसे लेकर चीन की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई थी.

चीनी राजदूत ने क्या कहा

जियांग

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इमेज कैप्शन, राजदूत जियांग ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि चीनी नागरिकों पर चरमपंथी हमले 'अस्वीकार्य' हैं.
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सुरक्षा कितना गंभीर मुद्दा बन चुका है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सेमिनार में राजदूत जियांग दो बार बोले, एक बार उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार से पहले और फिर डार का जवाब देने के लिए, जो कि एक असामान्य बात थी.

राजदूत जियांग ने कहा, “यह हमारे लिए अस्वीकार्य है कि केवल छह महीने में ही दो बार हमला हो चुका है और इन हमलों में लोग हताहत भी हुए हैं.”

उन्होंने कहा कि 'बीजिंग ने उम्मीद की थी कि चीन के कर्मचारियों, संस्थाओं और परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की ओर से और कड़े इंतज़ाम किए जाएंगे.'

डार के भाषण के बाद उन्होंने दूसरी बार हस्तक्षेप करते हुए कहा, “पाकिस्तान को अपराधियों को गंभीर सज़ा देनी चाहिए और सभी चीन विरोधी आतंकवादी ग्रुपों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. पाकिस्तान में सीपेक की राह में सुरक्षा सबसे बड़ा रोड़ा है और चीन के लिए यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है.”

राजदूत जियांग ने कहा कि पाकिस्तान के नेताओं से मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री ली ने आर्थिक विकास और सहयोग के लिए सुरक्षा की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा था कि “चीन आर्थिक सहयोग को और गहरा करेगा लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तानी पक्ष चीनी नागरिकों के लिए सुरक्षित और कामकाजी माहौल बनाएगा.”

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति शी हमेशा से कहते रहे हैं कि सुरक्षा, विकास की गारंटी है और विकास, सुरक्षा की गारंटी है. संयुक्त कोशिशों के साथ, हम उन आतंकवादी ग्रुपों पर कार्रवाई कर सकते थे.”

उप प्रधानमंत्री डार ने क्या कहा था

उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक़ डार

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार (फ़ाइल फ़ोटो)

दरअसल उप प्रधानमंत्री डार ने अपने भाषण में चीन की पाकिस्तान नीति को ‘अपवाद’ बताते हुए हमलों से संबंधों पर पड़ने वाले असर को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की थी.

डार ने कहा, “चीनी इस बात को लेकर बहुत साफ़ हैं कि चाहे कितना ही आकर्षक निवेश हो, अगर वहां सुरक्षा का मामला गंभीर है तो वे चीनी कर्मचारी नहीं भेजते हैं. केवल आपका देश अपवाद है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से चीनी नेतृत्व ने मेरी मौजूदगी में ये बात कही थी.”

इसके बाद राजदूत जियांग ने स्पष्ट किया, “राष्ट्रपति शी, चीनी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और लोगों की ज़िंदगियों को सबसे ऊपर रखते हैं. पाकिस्तान में चीनी लोगों की सुरक्षा पर उनका ख़ास ध्यान है. जब भी वो पाकिस्तानी नेताओं से मिलते हैं वो चीनी कर्मचारियों, संस्थाओं और परियोजनाओं की सुरक्षा के उपाय किए जाने को कहते हैं.”

डार ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है और अगले हफ़्ते राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक में इस बारे में सूचनाएं साझा की जाएंगी.

डार ने कहा, “चीनी नागरिकों पर हमलों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है क्योंकि पाकिस्तान-चीन दोस्ती, दुनिया के कुछ शक्तियों को हजम नहीं हो रही है.”

उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद, हालिया मुलाक़ातों में पाकिस्तान और चीन सीपेक को अगले मंजिल तक ले जाने के लिए व्यापार, औद्योगिकरण, डिजिटल इकोनॉमी, कृषि और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए थे.

डार ने चीन को वैश्विक महाशक्ति बनाने से रोकने की कोशिश करने के लिए अमेरिका की आलोचना की.

उन्होंने कहा, “अपने ख़िलाफ़ तमाम हथियार इस्तेमाल किए जाने के बावजूद चीन आने वाले समय में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा. उसके उत्पादों पर लगातार टैक्स बढ़ाए गए और 200% तक कर दिए गए.”

“आयात शुल्क को 25% से 200% करना कुछ और नहीं, चीन को वैश्विक सुपर पॉवर बनने से रोकने के लिए पक्षपात वाले तरीक़े अपनाने की राजनीति है.”

पीटीआई पर फोड़ा ठीकरा

इस्लामाबाद

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इमेज कैप्शन, इस्लामाबाद के बाहरी इलाक़े में चीनी नागरिकों को ले जा रहे कारवां पर अक्तूबर में हमला हुआ था.

डार ने सुरक्षा हालात में मौजूदा गिरावट के लिए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) सरकार और आईएसआई के पूर्व डायरेक्टर जनरल फ़ैज़ हमीद की तीख़ी आलोचना की.

चरमपंथी हमलों के लिए उन्होंने पीटीआई की अफ़ग़ानिस्तान से दोस्ती की नीति को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, “चरमपंथ में उभार के लिए हम ख़ुद ज़िम्मेदार हैं. काबुल में जो हमने चाय पी, उसके लिए हमें खुद को ज़िम्मेदार ठहराना होगा.”

असल में वो लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) फ़ैज़ हमीद के उस काबुल दौरे का ज़िक्र कर रहे थे जो उन्होंने तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के तुरंत बाद किया था.

डार ने कहा, “हमें खुद को दोष देना चाहिए क्योंकि उस मुलाक़ात के बाद ही विभिन्न अपराधों में शामिल रहे 102 दुर्दांत अपराधियों को छोड़ दिया. हमें खुद को दोष देना चाहिए क्योंकि जिन 35 से 40 हज़ार आतंकवादियों ने पाकिस्तान छोड़ दिया था, वे पिछली सरकार द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा को खोले जाने के बाद फिर से लौट आए.”

पाकिस्तान में क्या है प्रतिक्रिया

शहबाज़ शरीफ़ और शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, बीते जून में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने चीन का दौरा किया था.

ये अपवाद है कि किसी विदेशी राजनयिक ने विदेश मंत्री के भाषण के बाद जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया हो.

इस परोक्ष तक़रार ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर अलग अलग नज़रिए को सामने ला दिया है.

अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत-चीन के बीच गतिरोध टूटने के तुरंत बाद गाढ़े दोस्तों के बीच दशकों में पहली बार सार्वजनिक तू तू मैं मैं देखने को मिली.”

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के पत्रकार शाहबाज़ राना ने एक्स पर लिखा, “चीनी राजदूत द्वारा सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को झिड़कना दुर्लभ बात है.”

उत्तरी वज़ीरिस्तान में नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट के चेयरमैन मोहसिन दावड़ ने कहा, “चीनी राजदूत की चिंताएं जायज़ हैं और सार्वजनिक रूप से उनकी झिड़की पाकिस्तान की दोहरी नीतियों को लेकर चीनी हताशा को दर्शाती है. सत्तारूढ़ तंत्र दोधारी तलवार पर चलने की कोशिश कर रहा है और संतुलन बनाने में उसे और मुश्किलें आने वाली हैं.”

चीनी नागरिकों को बीते महीने जो निशाना बनाया गया, वो चीनी प्रधानमंत्री के पाकिस्तान दौरे के 10 दिन पहले हुआ था.

विदेशी मामलों की जानकार नज़मान मिन्हास ने एक्स पर लिखा, “पाकिस्तानी सरकार हवा हवाई ख़्यालों में जी रही है...पैसे और सत्ता के लिए आप खुद को अमेरिकी हाथों में बेच दें और फिर कहें कि चीन मुझसे नाराज़ क्यों है. चीनी राजदूत की इस टिप्पणी पर पाकिस्तान हैरान है कि उसके नागरिकों पर हमले अस्वीकार्य हैं.”

पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर हमले

चरमपंथी हमला

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इमेज कैप्शन, इसी साल मार्च में ख़ैबर पख़्तूनख्वाह के बिशाम में कथित आत्मघाती हमले में पांच चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी.

साल 2021 में भी दासू प्रोजेक्ट के पास चीनी इंजीनियरों की बस पर हमला हुआ था, जिसे पाकिस्तान और चीन में ग़ैर क़ानूनी घोषित तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ा गया था.

उस हमले में नौ चीनी नागरिकों समेत तेरह लोग मारे गए थे. इस मामले में दो को मौत की सज़ा भी सुनाई गई थी.

अप्रैल, 2022 में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने ख़ुद को कराची यूनिवर्सिटी के चीनी सेंटर के सामने उड़ा लिया था जिसके नतीजे में तीन चीनी शिक्षकों की मौत हो गई थी

चीन पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर का पूंजी निवेश कर रहा है जिससे देश भर में विभिन्न परियोजनाओं के ज़रिए सड़कें, डैम, पाइपलाइन और बंदरगाह पर काम जारी है.

सीपेक बीजिंग के बेल्ट ऐंड रोड प्रोजेक्ट का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसकी बुनियाद साल 2013 में मुस्लिम लीग (नवाज़) के दौर में रखी गई थी.

हालांकि पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने साल 2006 में ही चीन के साथ 'एमओयू' पर हस्ताक्षर किए थे जिनमें लगभग पचास परियोजनाओं पर काम होना था.

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