याह्या सिनवार: हमास के पूर्व प्रमुख के शव पर क्या सौदेबाज़ी कर रहा इसराइल?

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- Author, शहज़ादी अब्बास
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
जैसे-जैसे हमास और इसराइल के बीच बंधकों और क़ैदियों की अदला-बदली का काम आगे बढ़ रहा है, हमास के पूर्व प्रमुख याह्या सिनवार के शव के बारे में भी बात हो रही है.
सऊदी अल-अरबिया चैनल ने वार्ता से जुड़े नज़दीकी सूत्रों के हवाले से बताया था कि हमास ने समझौते के शुरुआती चरण में सिनवार की लाश पाने के लिए बातचीत करने की कोशिश की थी.
इसराइली मीडिया के दावों के अनुसार हमास की इस कोशिश को इसराइल ने ठुकरा दिया था. लेकिन यह भी कहा गया कि इसराइल और हमास ने अभी तक इस मामले में औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
अब जब इसराइल और हमास के बीच क़ैदियों और लाशों की अदला-बदली हो रही है तो याह्या सिनवार की लाश पाने की संभावनाओं के बारे में क्या उम्मीद है? क्या ऐसा निकट भविष्य या उसके कुछ बाद होने की संभावना है या फिर यह मुमकिन ही नहीं?

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याह्या सिनवार को इसराइल पर 7 अक्तूबर 2023 के हमले का योजनाकार कहा जाता है.
सिनवार एक साल से अधिक समय से अंडरग्राउंड थे लेकिन वह उस दौरान इसराइली हमले में ही मारे गए जो असल में इसराइल के लिए भी एक सरप्राइज़ था.
अक्तूबर 2024 में इसराइली ड्रोन से फ़िल्माई गई फ़ुटेज में ड्रोन ग़ज़ा में मिस्र की सीमा के पास रफ़ाह के इलाक़े में एक पूरी तरह ध्वस्त इमारत के सामने चक्कर लगाता दिख रहा है. जब उसे इमारत की ऊपरी मंज़िल में सोफ़े पर एक नक़ाबपोश शख़्स युद्ध का लिबास पहने नज़र आता है तो ड्रोन खिड़की से इमारत के अंदर जाता है.
पास जाने पर देखा जा सकता है कि सोफ़े पर बैठा शख़्स घायल है मगर उस हालत में भी वह हरकत करता है और ड्रोन पर छड़ी जैसी चीज़ मारता है जिससे ड्रोन को लड़खड़ाते देखा जा सकता है.
उस वक़्त तक इसराइली सैनिकों को इस झड़प के बारे में कोई असामान्य बात नहीं दिखी.
लेकिन अगले दिन सुबह जब सैनिक उस जगह पर वापस गए जहां लाशों का मुआयना किया जा रहा था तो उनमें से एक शख़्स हमास के नेता से बहुत अधिक मिलता -जुलता नज़र आ रहा था.
उस लाश को बारूदी सामग्री की संभावित मौजूदगी की वजह से उस जगह से तो नहीं हटाया गया लेकिन उसकी एक उंगली काटकर इसराइल भेजी गई ताकि डीएनए से उसका मिलान किया जा सके.
फिर यह पुष्टि हो गई कि यह लाश हमास के नेता याह्या सिनवार की है.
इसराइल के पास उनके दांतों का रिकॉर्ड और डीएनए के नमूने थे जिससे सिनवार की मौत की पुष्टि हुई.
सिनवार के पोस्टमार्टम को देखने वाले वाले डॉक्टर के अनुसार हमास के नेता याह्या सिनवार की मौत सिर में गोली लगने से हुई थी.
लेकिन हमास के दूसरे नेताओं के उलट जिन्हें इसराइल ढूंढ कर निशाना बनाता रहा है, याह्या सिनवार जिस हमले में मारे गए वह टारगेटेड ऑपरेशन या एलिट कमांडोज़ की ओर से की गई सैनिक कार्रवाई नहीं थी. बल्कि यह उस इलाक़े में जारी सामान्य सैनिक कार्रवाई थी.
इसराइली सेना का दावा है कि सिनवार किसी भी बंधक को इंसानी ढाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर रहे थे जिसकी वजह शायद यह थी कि वह नज़रों में आए बिना वहां से निकलना चाहते थे या उनके अधिकतर सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके थे.


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याह्या अल-सिनवार 61 साल के थे और उन्हें आमतौर पर 'अबू इब्राहिम' के नाम से जाना जाता था. वह ग़ज़ा पट्टी के उत्तर में ख़ान यूनुस के एक शरणार्थी कैंप में पैदा हुए थे.
अल-सिनवार को साल 1982 में पहली बार इसराइल ने उस समय गिरफ़्तार किया था जब वह 19 साल के थे. उन्हें 'अतिवादी गतिविधियों' में शामिल होने की वजह से साल 1985 में दोबारा गिरफ़्तार किया गया था.
अल-सिनवार ने साल 1988 से साल 2011 तक यानी लगभग 22 साल इसराइल की जेलों में बिताए. वहां उनका कुछ समय बिल्कुल अकेले बीता जिसकी वजह से उनमें चरमपंथी भावनाएं और मज़बूत हो गईं.
साल 2013 में उन्हें ग़ज़ा में हमास के राजनीतिक ब्यूरो का सदस्य चुना गया जिसके बाद साल 2017 में उन्हें इसका प्रमुख बना दिया गया.
सिनवार उन एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनियों में से थे जिन्हें साल 2011 में क़ैदियों की अदला-बदली के दौरान एक इसराइली सैनिक के बदले रिहा किया गया था.


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जेल से रिहाई के बाद सिनवार ने धीरे-धीरे हमास में कई ज़िम्मेदारियां संभालीं. यहां तक कि वह 2017 में ग़ज़ा में इस आंदोलन के जनरल कमांडर के तौर पर चुने गए और 2021 में उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया.
7 अक्तूबर 2023 को सिनवार और उनके लड़ाकों ने इसराइल पर हमला किया जो इसराइल की सबसे बुरी नाकामी साबित हुई.
इसराइल में यह सदमा आज भी महसूस किया जा रहा है. उस हमले में 1200 इसराइलियों की मौत हुई और दर्जनों को बंधक बना लिया गया. इससे कई इसराइलियों के लिए 'होलोकॉस्ट' की याद ताज़ा हो गई थी.
7 अक्तूबर के हमले के बाद याह्या अल-सिनवार को यूरोपीय यूनियन की 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों' की सूची में डाल दिया गया.
इससे पहले अमेरिका और इसराइल ने उन्हें मोस्ट वॉन्टेड लोगों की लिस्ट में रखा था.


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हमने उन रिपोर्ट्स पर टिप्पणी करने के लिए हमास से संपर्क करने की कोशिश की कि सिनवार की लाश लेना इसराइल के साथ वार्ता में शामिल है लेकिन हमें अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका है.
लेकिन इस्तांबुल से संबंध रखने वाले फ़लस्तीनी शोधकर्ता मामून अबू आमिर ने बीबीसी को बताया कि युद्ध विराम की वार्ता के पहले चरण में सिनवार की लाश के बारे में बात हुई थी.लेकिन इसराइल लाश सौंपने से मना कर रहा था.
उन्होंने कहा, "शायद उस व्यक्ति की हैसियत और नेतृत्व की स्थिति की वजह से, या इससे जुड़ी दूसरी राजनीतिक चिंताओं की वजह से क्योंकि यह समझौता एक निर्णायक चरण में था."
अबू आमिर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमास ने ख़ास तौर पर सिनवार की लाश के लिए अनुरोध नहीं किया जैसा कि आंदोलन के बाक़ी लोगों की लाशों की तरह हमास "उन सबको इस्लामी क़ानून के अनुसार दफ़नाना चाहता है."
अबू आमिर ने इस मामले को समझाते हुए कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके शारीरिक अवशेष (हमास के मरने वालों के) कहां हैं और उनके लिए प्रतीकात्मक मातमी जुलूस निकाला जाता है."
लेकिन अबू आमिर इस संभावना से इनकार नहीं करते कि हमास भविष्य में दोबारा सिनवार की लाश की मांग करेगा.
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इसराइल इस समय हमास की मांग को पूरा करेगा.
वो समझते हैं कि उसमें देरी हो सकती है और कहते हैं, "मैं उम्मीद करता हूं की लाश की क़िस्मत उन हालात के हिसाब से तय की जाएगी जो ग़ज़ा के समझौते के चरणों को बताते हैं."

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इसके उलट एक पूर्व इसराइली राजनीतिक मेयर कोहन ने बीबीसी अरबी को बताया, "मैं उस समझौते के बारे में नहीं जानता कि वह कैसा होगा जो सिनवार की लाश देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है."
वो कहते हैं, "हम केवल सिनवार का नाम ही नहीं बल्कि कुल मिलाकर हमास का नाम मिटाने के बारे में सोच रहे क्योंकि यह एक आतंकवादी संगठन है जिसने हमारे साथ हमारे बंधकों का सौदा किया और कई अवसरों पर हमारे लोगों की लाशें बरसों तक अपने पास रखी है. यह उसकी परंपराओं में से एक है."
उन्होंने कहा कि इसराइल 2014 में ग़ज़ा पट्टी में पकड़े जाने के बाद सार्जेंट आरोन शाल के शारीरिक अवशेष को नहीं ला सका और उन्हें इसराइली सेना के एक विशेष ऑपरेशन से लाया गया.
मेयर कोहन कहते हैं कि इसके बाद लेफ़्टिनेंट गोल्डन की लाश नहीं मिली जिसे एक दशक से अधिक समय तक ग़ज़ा से वापस नहीं लाया गया और इसराइल उसे लाने के लिए काम जारी रखे हुए है.
यहां सवाल यह भी है कि इसराइल सिनवार की लाश को किस तरह और कब इस्तेमाल कर सकता है? मिस्टर कोहन ने इसके जवाब में कहा कि इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, "इसके बारे में पूरी जानकारी आमतौर पर नहीं दी जाती लेकिन अनुमान है कि उन्हें किसी अज्ञात जगह पर दफ़न किया गया हो. सिनवार की लाश को सुरक्षित रखना निस्संदेह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रेशर कार्ड है."
ग़ज़ा में हाल के युद्ध और पिछले विवादों में इसराइल और हमास ने 'दुश्मन की लाशें' रखने की नीति अपनाई थी.
'न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार ऐसी सेटेलाइट तस्वीरें और फ़ुटेज मौजूद हैं जिनमें कथित तौर पर इसराइल को अपने मरने वालों की लाशों की तलाश में कुछ क़ब्रों समेत ग़ज़ा की ज़मीन खोदते हुए देखा गया.
अमेरिकी अख़बार का कहना है कि इसराइली सेना ने इसके बारे में किए जाने वाले सवाल का जवाब नहीं दिया.
'टाइम्स ऑफ़ इसराइल' के राजनीतिक और कूटनीतिक संवाददाता टिल श्नाइडर ने बीबीसी अरबी को बताया कि सिनवार की लाश के बारे में कोई बात नहीं की जा रही.
उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में फंसी इसराइली लाशों की क़िस्मत का फ़ैसला करने से पहले सिनवार की लाश की क़िस्मत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है लेकिन वह इस बात को नहीं मानते हैं कि सिनवार के अवशेष को सौंपने के फ़ैसले को जनता का कोई ख़ास समर्थन मिलेगा.


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बीबीसी ने यरूशलम लीगल एड ऐंड ह्यूमन राइट्स सेंटर के डायरेक्टर असाम अरूरी से बात की जो फ़लस्तीनियों की लाशों को सौंपने पर काम कर रहे हैं.
अरूरी कहते हैं कि उनकी संस्था ने लाशों की रिहाई के लिए कई मुक़दमे किए हैं जिनमें अधिकतर फ़लस्तीनी के हैं.
उन्होंने बताया, "हमने जिन केसों को निपटाया उनमें कुछ आम नागरिक के थे और बाक़ी चरमपंथी या आत्मघाती हमलावरों के थे. वेस्ट बैंक से फ़लस्तीनियों की लाशें थीं, बाक़ी ग़ज़ा की पट्टी या इसराइल के अंदर से लाशें थीं."
यह संस्था हाल के युद्ध से पहले अदालती तरीक़े से क़ब्रों से 700 से अधिक लाशों को निकालने में कामयाब हुई जिन पर कोई नाम नहीं बल्कि केवल नंबर हैं.
उन्होंने कहा कि यह ऐसा ही है जैसे वहां पड़ा हुआ शख़्स केवल एक नंबर है. हालांकि यहूदी क़ानून लाश की सुरक्षा और उसके दफ़न की पवित्रता के हिसाब से बहुत कड़ा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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