खुद को 'इस्लामिक स्टेट' कहने वाले चरमपंथी संगठन का 2023 में क्या हुआ

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- Author, मीना अल-लामी
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
एक दौर में इस्लामिक स्टेट ग्रुप (आईएस) का उत्तर पूर्वी सीरिया से लेकर उत्तरी इराक़ तक एक बड़े इलाक़े पर क़ब्ज़ा हुआ करता था.
लेकिन बीबीसी मॉनीटरिंग की ओर से जुटाए गए डेटा के अनुसार, 2023 में आईएस के हमलों में काफ़ी हद तक कमी आई है.
पिछले साल के मुकाबले आईएस की गतिविधियां आधे से भी अधिक कम हुई हैं और ग्रुप के नेतृत्व को भी अच्छा ख़ासा नुकसान पहुंचा है.
इस साल मिस्र में इस ग्रुप की गतिविधियां लगभग शांत हो गईं. और इसके लड़ाकों की एक बड़ी संख्या लीबिया और यमन की अन्य निष्क्रिय शाखाओं में शामिल हुई.
वहीं, अफ़ग़ानिस्तान में इससे जुड़े गुटों ने पिछले साल हुए हमलों में से चंद हमलों में शामिल रहने का दावा किया.
ग्रुप की अफ़्रीकी शाखाओं ने भी बहुत कम हमलों का दावा किया.
हालांकि, पूर्वी माली तक अपने नेटवर्क को फ़ैलाए साहेल ग्रुप ने नीजेर में बड़े हमलों का दावा किया और प्रोपेगैंडा गतिविधियों पर फ़ोकस किया.
साल 2023 में आईएस ने अंतरारष्ट्रीय स्तर पर कुल 838 हमलों की ज़िम्मेदारी ली जबकि पिछले साल इसी दरम्यान यह संख्या 1,811 थी. यानी हमलों में 53% कमी आई.
यह आंकड़ा आईएस के खुद के दावों, संदेशों और प्रोपेगैंडा और उसक समर्थकों के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है.
इसलिए हो सकता है कि ये आंकड़े कुछ बढ़ा चढ़ा कर किए गए हों या कमतर करके बताए गए हों.
ये आंकड़े 2023 में एक जनवरी से लेकर 30 नवंबर के बीच किए गए हमलों के हैं.

आईएस के हमलों के बारे में हम क्या जानते हैं?
अपने चरमोत्कर्ष पर इस ग्रुप का सीरिया और इराक़ के एक बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा था, लेकिन 2017 तक इसके हाथ से 95% इलाक़ा निकल गया.
अमेरिका और कुर्दिश चरमपंथियों की अगुवाई वाले एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने 2019 में आईएस के सीरिया में अंतिम गढ़ बाग़ुज़ गांव पर कब्ज़ा कर लिया.
इसके बाद इस ग्रुप को कई जगहों पर पराजय का सामना करना पड़ा जिससे यह काफ़ी कमज़ोर हो गया.
उसके बाद से आईएस ने अफ़्रीका में अपनी शाखाएं फैलाने पर ध्यान दिया और पश्चिम एशिया की हार से ध्यान हटाने की कोशिश शुरू कर दी.
हालांकि, इराक़ और सीरिया में यह ग्रुप अभी भी चरमपंथी घटनाओं को अंजाम देता है और दक्षिण एशिया, अफ़्रीका और पश्चिम एशिया में अपने से जुड़े कम से कम एक दर्जन ग्रुपों का नेटवर्क चलाता है.
लेकिन इनकी गतिविधियों में आई ख़ासी कमी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
बीते मार्च में अपनी गतिविधियों में आई कमी को ये कहते हुए ग्रुप ने सही ठहराया कि वो सुरक्षा कारणों से अपने सभी हमलों की सार्वजनिक रूप से ज़िम्मेदारी नहीं लेता.
मिस्र के सिनाई में मौजूद आईएस के ग्रुप ने इस साल किसी भी हमले का दावा नहीं किया जबकि पिछले साल उसने 102 हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी, जिसमें साल के अंत में स्वेज कैनाल के क़रीब हुआ हमला भी शामिल है. इसका मतलब ये है कि मिस्र की सेना से उसे तगड़ा झटका लगा है.
अफ़ग़ानिस्तान में आईएस की कथित खोरसन प्रांत शाखा (आईएसकेपी) के हमलों में भी कमी आई है और 2023 में इस ग्रुप ने 20 हमलों का दावा किया था. जबकि 2022 में 145 और 2021 में 293 हमलों का दावा किया.
हालांकि हमलों में भले कमी आई हो लेकिन बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं.
जुलाई में आईएसकेपी ने उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में इस्लामिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फ़ज़्ल की एक राजनीतिक रैली में आत्मघाती बम हमले की ज़िम्मेदारी ली थी जिसमें कम से कम 60 लोग मारे गए थे.
इराक़ में आईएस ने 2023 में कुल 141 हमलों का दावा किया, जबकि पिछले साल इसी दरम्यान यह संख्या 401 थी, यानी हमलों में 65% कमी आई.
पिछले साल 292 हमलों के मुक़ाबले इस साल सीरिया में आईएस ने 112 हमलों की ज़िम्मेदारी ली है.

क्या अफ़्रीका में आईएस का ज़ोर बढ़ रहा है?
साल 2019 में बाग़ुज़ में आईएस को जो झटका लगा है उसके बाद आईएस ने सब सहारा अफ़्रीका के इलाक़ों में अपने 'विस्तार' और 'विजयों' पर केंद्रित प्रोपेगैंडा फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया.
यहां इसकी पांच शाखाएं हैं- नाइजीरिया में वेस्ट अफ़्रीकन प्रोविंस (आईएसडब्ल्यूएपी), डीआर कांगों में सेंट्रल अफ़्रीका प्रोविंस, जो अक्सर युगांडा में भी घुसपैठ करती है, साहेल शाखा, मोज़ाम्बीक़ शाखा और सोमालिया शाखा.
इसमें सबसे सक्रिय शाखा आईएसडब्ल्यूएपी है, जिसकी आम तौर पर उत्तर पूर्वी नाइजीरिया और लेक चाड के इलाक़े में गतिविधि रही है.
लेकिन 2023 में इसमें भी काफ़ी कमी आई. साल 2022 में 470 हमलों के मुकाबले 2023 में इसने 266 हमलों के दावे किए.
आईएस के सेंट्रल अफ़्रीका प्रोविंस और मोज़ाम्बीक शाखाओं ने भी चंद हमलों की ज़िम्मेदारी ली, हालांकि ये मुख्य ख़तरा बने रहे. इन दोनों शाखाओं ने स्थानीय और इलाक़ाई सुरक्षा बलों और ईसाई गांवों पर हमले किए.
इस साल आईएस की सेंट्रल अफ़्रीका प्रोविंस शाखा ने युगांडा में चार हमलों की ज़िम्मेदारी ली, इनमें से एक में दो पर्यटक और गाइड मारा गया, लेकिन जून में एक सेकेंड्री स्कूल पर हुए घातक हमले की ज़िम्मेदारी ग्रुप ने नहीं ली, जिसके लिए इसकी चौतरफा आलोचना हुई थी.
सब सहारा अफ़्रीका में आईएस की सभी शाखाओं द्वारा किए गए हमले 2022 में 847 के मुक़ाबले 2023 में गिरकर 508 हो गए.
हालांकि आईएस के कुल अंतरराष्ट्रीय हमलों का यह 60% है. यानी अफ़्रीका में इसके हमले बढ़े हैं.

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आईएस की गतिविधियां कहां बढ़ रही हैं?
इस साल साहेल क्षेत्र और फ़िलीपींस में आईएस की शाखाओं की गतिविधियां बढ़ी हैं.
रिपोर्ट है कि अप्रैल से ही नीजेर की सीमा के पास पूर्वी माली में आईएस अपनी गतिविधि बढ़ा रहा है. साहेल देशों में राजनीतिक और सैन्य उठापटक हो रही है और चरमपंथी इसका फ़ायदा उठाना चाहते हैं.
जुलाई से अक्टूबर के बीच आईएस ने ऐसी रिपोर्टें और तस्वीरें जारी कीं जिसमें मई से ही कथित रूप से ‘सैन्य अभियान’ चलाने और ‘अपराध ख़त्म’ कर ‘इंसाफ़ लागू’ करने की ग्रुप की कार्रवाईयों के दावे किए गए हैं.
उनकी प्रोपेगैंडा सामग्रियों में ऐसी बाते हैं जिनसे पता चलता है कि माली और नीजेर के बीच सीमांत इलाक़ों में वे स्वयंभू स्थानीय प्रशासन के रूप में शरिया क़ानून लागू करने की योजना पर काम कर रहे हैं.
नीजेर में जुलाई में हुए तख़्तापलट के बाद आईएस ने देश के पश्चिमी हिस्से में सेना पर हुए हमले का दावा किया जिसमें बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए थे.
अक्टूबर के शुरू में हुए एक हमले में कथित तौर पर 60 के क़रीब सैनिक मारे गए, नीजेर सरकार ने इस घटना के बाद तीन दिन का शोक घोषित किया था.
2014 से ही दक्षिण एशिया के चरमपंथी ग्रुप भी आईएस के प्रति अपनी वफ़ादारी घोषित करते रहे हैं.
आईएस से जुड़े ग्रुप, ख़ासतौर पर ईसाई बहुल फ़िलीपींस के मुस्लिम बहुल दक्षिणी द्वीपों के इलाक़ों में सक्रिय हैं.
ग्रुप की शाखाओं ने इस साल जुलाई के बाद 20 हमलों के दावे किए, जबकि 2022 में इनकी संख्या महज सात थी.
तीन दिसम्बर को दक्षिणी फ़िलीपींस में एक कैथोलिक प्रार्थना सभा पर हमले की ज़िम्मेदारी आईएस ने ली.
कौन हैं आईएस के नेता?

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हाल के दिनों में आईएस के नेतृत्व को काफ़ी नुकसान पहुंचा है. साल भर में सीरिया में फ़रवरी 2022 से अप्रैल 2023 के बीच इसके तीन नेता मारे गए.
27 अक्टूबर 2019 को अमेरिकी हमले में अबू बकर अल-बग़दादी की मौत के बाद ग्रुप के नेता अबू इब्राहिम अल-हाशिमी अल-कुरैशी बने, इसके बाद अबू अल-हसन अल-क़ुरैशी और फिर अबू अल-हुसैन अल-क़ुरैशी बने.
इन नामों में ‘अल-कुरैशी’ का मतलब ये नहीं कि ये संबंधी हैं, असल में पैग़म्बर मोहम्मद की मक्का में क़ुरैश जानजाति से जुड़ाव को दर्शाता है.
जून 2014 में इस ग्रुप ने ख़ुद की ‘ख़िलाफ़त’ घोषित की थी और उसके बाद अपने नेताओं को ‘ख़लीफ़ा’ कहना शुरू कर दिया, और पहले ख़लीफ़ा अल बग़दादी थे.
अगस्त में आईएस के नए नेता बने अबू हफ़्स अल हाशिमी अल-क़ुरैशी, लेकिन इनके बारे में कम ही जानकारी है.
सीरिया और इराक़ में अमेरिकी नीत गठबंधन के हमलों में इसके कई कमांडर भी मारे जा चुके हैं.
अगस्त में मोज़ाम्बीक़ की सेना ने कहा था कि उसने देश में आईएस के प्रमुख को मार डाला लेकिन ग्रुप अपने ख़लीफ़ा और प्रवक्ता के अलावा ऐसे मामलों में कोई बयान नहीं देता है.
ग़ज़ा में जंग का असर?
सोमालिया, साहेल, लेक चाड क्षेत्र और सीरिया में सैन्य कार्रवाईयों की वजह से आईएस की गतिविधियां कम हुई हैं.
स्थापित नेताओं के मारे जाने और मौजूदा नेताओं के बारे में कम जानकारी भी गतिविधियों में गिरावट के लिए एक बड़ा कारण मानी जा रही है.
ग़ज़ा युद्ध को आईएस और अन्य चरमपंथी गुटों के लिए एक ‘मौके’ के रूप में देखा जा रहा है जो अपने दुश्मनों के ख़िलाफ़ गुस्से का इस्तेमाल कर सकते हैं.
युद्ध शुरू होने के बाद से ग़ज़ा में 20,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 52,000 से अधिक घायल हुए हैं.
सात अक्टूबर को हमास के इसराइल पर हमले में 1200 लोगों को मौत हो गई थी और 240 लोगों को बंधक बना लिया गया था.
हालांकि अल-क़ायदा ने फ़लस्तीनी चरमपंथियों के साथ मिलकर लड़ने के लिए मुस्लिमों का आह्वान किया था, लेकिन आईएस ने फ़लस्तीनी ग्रुपों की न तो तारीफ़ की न ही मुस्लिमों से हमास का समर्थन करने का आह्वान किया.
ग्रुप ने ग़ज़ा पट्टी में हमास पर अपने समर्थकों के दमन का आरोप लगाया था. और समर्थन की बजाय आईएस ने बदला लेने के अरब देशों समेत दुनिया भर में हमलों पर फ़ोकस किया है.
उसका मानना है कि अरब सरकारें इसराइल को ‘बचा’ रही हैं.
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