अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के तीन नेता वैश्विक आतंकवादी, अमेरिका ने किया एलान

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इस्लामिक स्टेट की अफ़ग़ानिस्तान शाखा इस्लामिक स्टेट ख़ुरासान (IS-K) से जुड़े तीन नेताओं पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है. इनके अलावा एक और व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाया गया है, उस पर आरोप हैं कि वो इस समूह के आर्थिक सहायक के तौर पर काम कर रहा था.

अमेरिका ने यह क़दम ऐसे समय पर उठाया है जब काबुल में सिलसिलेवार जानलेवा हमले हुए हैं और इसकी ज़िम्मेदारी IS-K ने ली है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि उसने इस संगठन के अमीर (प्रमुख) सनाउल्लाह ग़फ़्फ़ारी, प्रवक्ता सुल्तान अज़ीज़ आज़म और काबुल प्रांत के नेता मौलाव रजब को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डाल दिया है.

इसकी जानकारी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बयान जारी करते हुए दी.

वीडियो कैप्शन, इस्लामिक स्टेट में शामिल होने गईं मां-बेटियों का हाल

और किस पर लगा प्रतिबंध

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इस्मातुल्लाह ख़ालोज़ई को भी ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है. उन पर आरोप हैं कि वो तुर्की से पैसे देने का नेटवर्क चला रहे हैं और यह पैसा हवाला के ज़रिए इस्लामिक स्टेट-ख़ुरासान प्रांत तक जाता था.

वित्त मंत्रालय में फ़ॉरेन असेट्स कंट्रोल की निदेशक एंड्रिया गेकी ने कहा, "आज किया गया काम आईएसआईएस-के और उसके सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग कर अफ़ग़ानिस्तान और उसके बाहर आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने से रोकने के लिए अमेरिका के दृढ़ संकल्प को दिखाता है."

अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के दूत ने तालिबान के क़ब्ज़े के बाद पिछले सप्ताह स्थिति का आंकलन पेश किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों में बढ़ोतरी हुई है और अब यह तक़रीबन सभी 34 प्रांतों में मौजूद हैं.

बीते सप्ताह अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल में एक शिया मुस्लिम बहुल इलाक़े में दो धमाकों की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी. इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि कम से कम छह लोग घायल हुए थे.

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सुन्नी चरमपंथी समूह ने हाल के दिनों में जो हमले किए हैं उसमें काबुल में हुआ यह ताज़ा हमला था. देश के पश्चिमी हिस्सों में शिया बहुल इलाक़ों में यह संगठन पहले भी कई बार हमले कर चुका है.

उत्तरी शहर कुंदुज़ और दक्षिणी शहर कंधार में इस्लामिक स्टेट ने कई शिया मस्जिदों पर हमले किए थे.

इन हमलों ने देश का नियंत्रण संभाल रही तालिबान की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है क्योंकि इस समय देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अफ़ग़ानिस्तान में चले दशकों लंबे युद्ध के बाद उसने दावा किया था कि उसने सुरक्षा बहाली कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित

वहीं संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान के बैंकों को बचाने के लिए तुरंत मदद की अपील की है.

काबुल में इस्लामिक बैंक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान का मुख्यालय

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संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि क़र्ज़ों की अदायगी न करना, कम राशि जमा होना और नक़दी की कमी के कारण कुछ महीनों में आर्थिक सिस्टम ढह सकता है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने अफ़ग़ानिस्तान की बैंकिंग और आर्थिक प्रणाली पर अपनी तीन पेज की रिपोर्ट में यह डर ज़ाहिर किया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकिंग सिस्टम ढहने के साथ-साथ इसके नकारात्मक सामाजिक प्रभाव भी हो सकते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में यूएनडीपी के प्रमुख अब्दुल्ला अल दरदरी ने रॉयटर्स से कहा, "हमें रास्ता तलाशना होगा ताकि हम बैंकिंग सेक्टर को समर्थन दे सकें, हम तालिबान का समर्थन नहीं कर रहे हैं."

"हम एक विकट स्थिति में हैं जहां हमें सोचने की ज़रूरत है कि हम सभी संभावित विकल्पों पर सोचें और हमें बने बनाए ढर्रे से आगे की सोचना होगा."

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