बाल्टीमोर पुल हादसा: सात हफ़्ते बाद भी जहाज़ में मौजूद 20 भारतीयों का क्रू कैसा है, कब होगी वापसी?

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- Author, बर्न्ड डिबामन जूनियर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, वॉशिंगटन
सोमवार को जब 'डाली' नाम के जहाज़ को टूट चुके पुल के मलबे से बाहर निकालने के लिए नियंत्रित विस्फोट किए गए, तब क़रीब दो दर्जन चालक दल के सदस्य इस विशाल जहाज़ में मौजूद थे.
एक साथ हुए विस्फोटों से एक समय में बाल्टीमोर के जाने-माने फ़्रांसिस स्टॉट पुल के टुकड़े भी मैरीलैंड की पटाप्सको नदी के पानी में बह गए. सात हफ़्ते पहले जहाज़ के पुल से टकराने की वजह से छह लोगों की मौत हो गई थी.
प्रशासन और चालक दल को उम्मीद है कि ये धमाके एक लंबी प्रक्रिया के अंत की शुरुआत करेंगे. उनका मानना है कि दुनिया से अलग-थलग इस जहाज़ पर मौजूद 21 लोग हज़ारों मील दूर अपने घरों को जा सकेंगे.
हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये लोग अपने घर कब लौट पाएंगे.
298 मीटर लंबे जहाज़ डाली ने बाल्टीमोर से श्रीलंका की ओर जाते हुए अपने 27वें दिन के सफ़र की शुरुआत की ही थी जब वह फ़्रांसिस स्कॉट की ब्रिज से टकराकर फंस गया. नतीजतन इस जहाज़ पर लगा हज़ारों टन स्टील और सीमेंट भी पटाप्स्को नदी में बह गया.
एनटीएसबी की शुरुआती जांच रिपोर्ट में पाया गया कि घटना से पहले जहाज़ पर दो बार ब्लैकआउट हुआ, जिससे इस जहाज़ के कई उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया. रिपोर्ट में ये रेखांकित किया गया कि दुर्घटना से पहले 10 घंटों के भीतर जहाज़ में दो बार बिजली कटी थी.
जहाज़ पर मौजूद चालक दल में 20 भारतीय और एक श्रीलंकाई नागरिक हैं. ये लोग वीज़ा संबंधी प्रतिबंधों, किसी तट पर उतरने के लिए अनिवार्य पास न होने और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी बोर्ड (एनटीएसबी) और एफ़बीआई की जाँच की वजह से जहाज़ से उतर नहीं पाए हैं.
सोमवार को प्रशासन ने जब फंसे हुए जहाज़ को निकालने के लिए जानबूझकर छोटे विस्फोट किए, तब भी ये चालक दल जहाज़ पर ही रहा.
इस नियंत्रित विस्फोट से पहले अमेरिकी कोस्ट गार्ड एडमिरल शैनन गिलरीथ ने कहा कि चालक दल फ़ायर क्रू के साथ डेक के नीचे ही रहेगा.
एडमिरल गिलरीथ ने कहा, "वे जहाज़ का हिस्सा हैं. जहाज़ को चालू रखने के लिए उनका होना ज़रूरी है."
इस सप्ताह जहाज़ के बाहर निकलने की उम्मीद की जा रही है लेकिन ये अस्पष्ट है कि जहाज़ को 3.7 किलोमीटर दूर तट तक कब ले जाया जाएगा.
'दुखद स्थिति'

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जहाज़ पर मौजूद चालक दलों से जो लोग संपर्क में हैं, उनमें से एक जोशुआ मेसिक भी हैं. मेसिक बाल्टीमोर इंटरनेशनल सीफ़ेयरर्स सेंटर के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. ये एक ग़ैर-लाभकारी संस्था है जो मरीनर्स (जहाज़ पर सफ़र करने वालों) के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती है.
मेसिक के अनुसार जांच के लिए एफ़बीआई ने चालक दल के सदस्यों के मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए, जिसके बाद ये लोग कुछ सप्ताह से बाहरी दुनिया से एकदम कट चुके हैं.
उन्होंने कहा, "वे ऑनलाइन बैंकिंग इस्तेमाल नहीं कर सकते. वे अपने घरों के बिल नहीं भर सकते. उनके पास अपना कोई डेटा या किसी का फ़ोन नंबर तक नहीं है तो ये लोग वास्तव में अब अलग-थलग हैं. वे अपने लोगों से बात नहीं कर सकते या सोने से पहले अपने बच्चों की तस्वीर तक नहीं देख पा रहे. ये वाक़ई दुखद स्थिति है."
जहाज़ पर मौजूद चालक दल की इस दुर्दशा ने इन लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो यूनियनों का भी ध्यान खींचा है. इनमें से एक सिंगापुर मैरीटाइम ऑफ़िसर यूनियन है और दूसरा सिंगापुर ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ सीमैन.
11 मई को एक साझा बयान में इन यूनियनों ने कहा था कि "भावनात्मक संकट और आपराधिक मुक़दमे के डर की वजह से लोगों का मनोबल गिरा है."
बयान में क्रू सदस्यों के फ़ोन 'जल्दी वापस करने' की भी मांग की गई है. इसके अनुसार परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत बंद होने से क्रू सदस्यों को काफ़ी परेशानी हो रही है.

सीफ़ेयरर्स इंटरनेशनल यूनियन के अध्यक्ष डेव हिंडेल ने कहा, "जाँच कितनी भी लंबी चले, चालक दल के सदस्यों के अधिकार और हितों का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए."
वह कहते हैं, "हम अधिकारियों से इस बात का ध्यान रखने की मांग करते हैं कि जहाज़ पर चलने वाले लोग अपने निजी काम, बिल भुगतान वग़ैराह मोबाइल से ही करते हैं. इससे भी अहम ये है कि वे अपने परिवारों को घर चलाने के लिए फ़ोन से ही पैसा भेजते हैं. क्रू सदस्य बुनियादी चीज़ों के अभाव में काफ़ी हतोत्साहित महसूस कर रहे हैं."
बाल्टीमोर से आने वाले जहाज़ों का लेखा-जोखा रखने वाले एक प्रोग्राम एपोस्टलशिप ऑफ़ सी चलाने वाले एंड्रयू मिडलटन ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने दो सप्ताह पहले चालक दल के लोगों से मुलाक़ात की और इतनी चिंता के बावजूद उनमें एक 'सकारात्मकता' देखी.
उन्होंने कहा, "एक बार जब हमने उनसे नाम पूछा और ये जानना चाहा कि वे भारत के किस हिस्से से हैं. उनसे ये बात की कि क्या वे शादीशुदा हैं या उनके बच्चे हैं, तो फिर हमें सफलता मिल गई. इसके बाद वे एक-दूसरे से थोड़ा हंसी-मज़ाक करने लगे. कुछ पलों के लिए उनका ध्यान चिंता भरे घटनाक्रम से हटाने के लिए हमने पूरी कोशिश की."
आगे क्या?

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मेसिक बताते हैं कि फ़िलहाल जहाज़ पर मौजूद लोगों को सिम कार्ड और टेंपररी मोबाइल फ़ोन दिए गए हैं, जिसमें इंटरनेट नहीं है.
इन्हें अलग-अलग कम्युनिटी ग्रुप्स और कुछ लोगों ने भी खाने-पीने की चीज़ें, रज़ाई वगैराह पहुंचाई हैं.
बीबीसी ने डाली और पुल के ढहने के बाद सरकारी कार्रवाई की निगरानी करने वाली 'यूनिफ़ाइड कमांड' से संपर्क किया ताकि ये स्पष्ट हो सके कि चालक दल के सदस्य जहाज़ से कब बाहर निकल पाएंगे और इन्हें कब वापस घर भेजा जाएगा.
डाली का संचालन देखने वाली सिंगापुर की कंपनी सिनर्जी मरीन के प्रवक्ता डैरेल विलसन ने बीबीसी को बताया कि "अच्छी तरह से स्थिति का सामना कर रहे हैं और बाल्टीमोर भेजे गए कंपनी के प्रतिनिधि पहले दिन से लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं."
विलसन ने कहा, "हमारी क्षमता के अनुसार उनकी हर ज़रूरत का अच्छे से ध्यान रखा जा रहा है. भारत में बना खाना भी जहाज़ पर भेजा जा रहा है ताकि वहां खाना बनाने वालों को आराम मिल सके."
तमाम धर्मगुरु जहाज़ पर सवार लोगों की सेवा करने के साथ-साथ उन्हें भावनात्मक रूप से संबल भी दे रहे हैं.
विलसन कहते हैं, "ये हमारे लिए बहुत छोटी चीज़ है लेकिन इनसे बहुत हिम्मत मिलती है."
हालांकि, वह ये नहीं बता पाते कि क्रू सदस्य कब जहाज़ छोड़ेंगे. वो कहते हैं कि जाँच जारी है और जहाज़ को इन लोगों से बेहतर कोई नहीं जान सकता. ये लोग जहाज़ के संचालन का अभिन्न हिस्सा हैं.
मेसिक कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि जहाज़ शिपिंग चैनल से जैसे ही बाहर निकलेगा, वह इमोशनल सपोर्ट देने के लिए जहाज़ पर चढ़ पाएंगे.
उनका मानना है कि चालक दल के छोटे-छोटे समूह, शायद पाँच-पाँच लोगों को जल्द ही किसी तट पर उतरने के लिए ज़रूरी पास मिल जाएगा. हालांकि, उनकी गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां होंगी.
उदाहरण के लिए, हो सकता है वे जब तक तटीय इलाके में रहें, उन्हें हर समय अपने साथ किसी एक सुरक्षाकर्मी को रखना पड़े.
उन्होंने कहा, "मैं ये पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं कि जहाज़ पर मौजूद लोग क्या करना चाहते हैं. मैं नहीं चाहता कि वे उन चीज़ों में उलझें जो उन्हें नापसंद हों. इसलिए मैंने एक स्थानीय क्रिकेट क्लब से संपर्क किया है ताकि वे ये बता सकें कि क्या कोई मैच आयोजित किया जा सकता है."
मेसिक ने कहा कि चालक दल के कुछ सदस्यों जैसे जहाज़ के कप्तान ने प्रकृति के बीच बस शांतचित्त मन से बैठने की रुचि दिखाई है.
वह कहते हैं, "हम बस उन्हें खुली हवा में सांस लेने में मदद करना चाहते हैं. वे पूरा समय जहाज़ में बंद हैं. उन्हें भी उस आज़ादी का आनंद लेना चाहिए, जिसका आनंद हम रोज़ लेते हैं."
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