अभिषेक शर्मा सिर्फ़ 37 रन बनाकर कैसे बने मैन ऑफ़ द मैच

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
क्या अभिषेक शर्मा जून के महीने में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का हिस्सा हो सकते हैं?
इस सवाल के ख़त्म होने से पहले शायद ज़्यादातर लोगों का जवाब यही होगा कि फिलहाल ऐसा सोचना बहुत जल्दबाज़ी होगी.
शायद ये सही भी हो, क्योंकि ओपनर के तौर पर टीम इंडिया के पास ना सिर्फ कप्तान रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल का नियमित विकल्प है बल्कि शुभमन गिल भी टीम का हिस्सा होंगे.
लेकिन, सनराइज़र्स हैदराबाद के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने अगर आईपीएल के शुरुआती हफ्तों में जिस तरह की आक्रामकता का जलवा बिखेरा है, टीम इंडिया के चयनकर्ताओं का ध्यान निश्चित तौर पर उनके खेल पर जाएगा.
मार्करम से कम रन बनाने पर भी मिला मैन ऑफ़ द मैच

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टी-20 मैच में बल्लेबाज़ी औसत और रनों के साथ-साथ उसका प्रभाव भी बहुत मायने रखता है.
शायद इसलिए अभिषेक शर्मा को चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ सिर्फ 37 रनों की पारी खेलने के चलते मैन ऑफ द मैच मिल गया जबकि उनके साथी खिलाड़ी एडेन मार्करम ने मैच का इकलौता अर्धशतक जड़ा था और चेन्नई के शिवम दुबे ने भी उनसे ज़्यादा (45 रन) रनों वाली पारी खेली थी.
अभिषेक की पारी की ख़ासियत यह रही कि उन्होंने सिर्फ 12 गेंदों पर 37 रनों की धमाकेदार पारी खेली, जिसमें चार चौके और तीन छक्के शामिल थे. इस पारी में उनका स्ट्राइक रेट 303 से भी ज़्यादा का रहा.
आलम ये रहा कि चेन्नई के इंपेक्ट गेंदबाज़ मुकेश चौधरी के पहले ही ओवर में उन्होंने 27 रन लूट लिए और दोबारा गेंदबाज़ी करने के लिए वापस ही आने नहीं दिया.
पंजाब के इस युवा बल्लेबाज़ जिसके हीरो युवराज सिंह और ब्रायन लारा रहे हैं उसने एक बार फिर से दिखाया कि सनराइज़र्स के लिए इस सीज़न में असली इंपैक्ट वाले खिलाड़ी वहीं हैं.
कुछ ही दिन पहले 22 साल के इस बल्लेबाज़ ने मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ महज़ 16 गेंदों पर अर्धशतक लगाया था.
कप्तान कमिंस की सूझबूझ

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लेकिन, इस मैच में अभिषेक के अलावा किसी एक और खिलाड़ी ने अपनी सूझ-बूझ से विरोधी टीम को छकाया तो वो रहे ऑस्ट्रेलिया के वनडे वर्ल्ड कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जिताने वाले कप्तान पैट कमिंस.
जल्द ही कमिंस ने भांप लिया कि इस पिच पर रन बनाना आसान नहीं होगा.
उन्होंने अपने तेज़ गेंदबाज़ों के ज़रिए स्लो ओवर बाउंसर और बैक ऑफ लेंथ गेंदबाज़ी करने पर ज़ोर दिया.
इससे चेन्नई के युवा कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को रणनीति के मामले में उनके सामने झुकना पड़ा.
चेन्नई के लिए समस्या सिर्फ धोनी की जगह गायकवाड़ का कप्तान होना नहीं बल्कि ओपनर के तौर पर उनके कप्तान का स्ट्राइक रेट भी है.
हैदराबाद के ख़िलाफ़ पहली 13 गेंदों पर 13 रन बनाने के बाद गायकवाड़ आख़िर में 20 गेंदों पर 26 रन बनाकर आउट हो गए.
रविंद्र जडेजा का जादू नहीं चला

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अगर टॉप ऑर्डर में चेन्नई को कप्तान से मायूसी मिली तो निचले क्रम में अनुभवी रविंद्र जडेजा ने भी कमोबेश वैसा ही रवैया अपनाए रखा.
जडेजा ने 23 गेंदों पर बिना आउट हुए 31 रन बनाए और सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आखिरी के 5 ओवर में उन्होंने 17 गेंदों पर सिर्फ 24 रन ही जोड़े.
जिस जडेजा को टी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए अमेरिका और कैरेबियाई ज़मीं पर एक ऑलराउंडर के तौर पर शामिल होना तय माना जा रहा है.
आईपीएल में 2022 से लेकर अब तक जो गिरावट आई है वो शायद जानकारों की नज़र में इसलिए छिप जाती है, क्योंकि इसी दौरान टेस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर उनका खेल काफी बेहतर हुआ है.
तेज़ गेंदबाज़ों पर भरोसा

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बहरहाल, अगर पूरे मैच का आकलन करें तो पहले 6 ओवर यानी पावर-प्ले के दौरान बल्लेबाज़ी की ताकत का इस्तेमाल करने के एकदम अलग अलग अंदाज़ ने ही इस मैच का नतीजा लगभग तय कर दिया.
अगर चेन्नई ने पहले 6 ओवर में 48 रन बनाए तो हैदराबाद ने 78 रन का स्कोर खड़ा कर दिया. अंक-तालिका में अब चेन्नई के पास भी 4 मैचों के बाद सिर्फ 2 जीत है तो हैदराबाद ने भी 4 मैचों के बाद उतनी ही जीत हासिल कर ली है.
चेन्नई के लिए ऐसा लगता है कि युवा कप्तान गायकवाड़ के लिए आगे की राह काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
वहीं हैदराबाद के लिए शायद आगे की राह उनके अनुभवी और चालाक कप्तान कमिंस की मौजूदगी के चलते थोड़ी बेहतर हो और इसकी झलक शुक्रवार को कमिंस ने बखूबी दिखाई.
ये ठीक है कि चेन्नई के पास उनके दो विदेशी गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान और मथीशा पथिराना नहीं थे, लेकिन उन्होंने भी 7 गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया और कमिंस ने भी इतने ही गेंदबाज़ों का.
कमिंस को जैसे ही ये आभास हुआ कि उनके दो युवा स्पिनर मयंक मार्कंडेय और शाहबाज़ अहमद प्रभाव डालने में नाकाम हो रहे हैं (दोनों ने तीन ओवर में 32 रन दे दिए थे) तो उन्होंने अपने तेज़ गेंदबाज़ों पर भरोसा बढ़ा दिया.
अगर कमिंस ने खुद 4 ओवर में महज़ 29 रन देकर एक कामयाबी हासिल की तो अक्सर चेन्नई के खिलाफ पिटने वाले बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ जयदेव उनादकट का गेंदबाज़ी विश्लेषण भी एकदम अपने कप्तान की ही तरह रहा. 4 ओवर में महज़ 29 रन देकर एक विकेट लिया.
अनुभवी भुवनेश्वर कुमार ने इस मैच में भी कमिंस-उनादकट की ही तरह (4 ओवर में महज़ 28 रन देकर एक विकेट) चेन्नई के बल्लेबाज़ों को किसी तरह की आज़ादी लेने नहीं दी और बची-खुची कसर टी नटराजन (4 ओवर में महज़ 39 रन देकर एक विकेट) जो इंपैक्ट खिलाड़ी के तौर पर खेले उन्होंने पूरी कर दी.
कुल मिलाकर देखा जाय तो हैदराबाद की पेस चौकड़ी के सामने चेन्नई की पेस चौकड़ी ठहर नहीं पाई.
शायद गायकवाड़ को इस बात का मलाल हो कि उन्होंने रविंद्र जडेजा, रचिन रविंद्र और मोईन अली की स्पिन तिकड़ी (तीनों ने मिलकर 8 ओवर में 56 रन देकर 2 विकेट लिए) से कुछ और ओवर ज़्यादा डलवा लिए होते.
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