अमेठी, रायबरेली से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव लड़ने को लेकर कांग्रेस के भीतर कैसी हलचल?- प्रेस रिव्यू

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी

इमेज स्रोत, Getty Images

उत्तर प्रदेश की अमेठी और रायबरेली सीट पर 20 मई को मतदान होना है. तीन मई यानी शुक्रवार को इस सीट से नामांकन भरने की आखिरी तारीख है.

मगर कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश की इन हाई-प्रोफ़ाइल सीट से इस बार कौन चुनावी मैदान में होगा, इसे लेकर अब तक सस्पेंस बना हुआ है.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने इसी पर एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें बताया गया है कि कांग्रेस के भीतर इसे लेकर किस तरह की चर्चा है.

अख़बार लिखता है कि रायबरेली और अमेठी सीट के लिए नामांकन भरने में कम समय बचा है और अब तक कांग्रेस की ओर से कोई सुगबुगाहट नहीं है और ना ही कोई संकेत मिल रहे हैं कि इन दोनों सीटों पर उनका उम्मीदवार कौन होगा.

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ये अधिकार देती है कि वो उम्मीदवार को नाम पर आखिरी मुहर लगाएं.

रमेश ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मुझे लगता है कि अगले 24 से 30 घंटे में पार्टी अध्यक्ष फैसला कर लेंगे कि इन दोनों सीट से चुनाव कौन लड़ेगा और उनके तय किए गए नामों का एलान हो जाएगा. जब तक ये नहीं होता तब तक सभी अनुमान और पार्टी के जो ऑर्डर सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं- सब फेक हैं.”

रायबरेली और अमेठी से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं.

कहा जा रहा है कि कांग्रेस की इस पारंपरिक सीट पर कांग्रेस परिवार से ही उम्मीदवार उतारे जाने चाहिए, कांग्रेस का यही बेहतर दांव होगा.

प्रियंका गांधी-राहुल गांधी

इमेज स्रोत, Getty Images

अमेठी से प्रियंका और रायबरेली से राहुल गांधी को उतारने की चर्चा

अख़बार लिखता है कि पार्टी के कुछ रणनीतिकार पार्टी हाई कमान को ये सुझाव दे रहे हैं कि वह अमेठी सीट से प्रियंका गांधी को उतारे और रायबरेली से राहुल गांधी को टिकट दें.

अमेठी सीट से राहुल गांधी साल 2004 से लड़ रहे हैं.

साल 2019 में राहुल गांधी इस सीट से हार गए थे और बीजेपी की स्मृति ईरानी की इस सीट पर जीत हुई थी.

वहीं रायबरेली सीट से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी चुनाव लड़ती रही हैं. इस बार उन्होंने चुनावी राजनीति को अलविदा कहा है और राज्यसभा सांसद हैं.

ऐसे में कांग्रेस की ये हाई प्रोफ़ाइल सीट भी खाली है.

हालांकि इन सुझावों पर गांधी परिवार ने क्या फ़ैसला लिया है, पार्टी का अपना फैसला क्या है, इस पर सस्पेंस बरकरार है.

लेकिन कार्यकर्ता भी इसी बात की मांग कर रहे हैं कि यूपी की इन दो सीटों से दोनों को ही लड़ना चाहिए.

राहुल गांधी, प्रियंका गांधी

इमेज स्रोत, Getty Images

‘दोनों को मनाने की कोशिश जारी’

कांग्रेस में इस मामले से परिचित लोगों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों ने ही शुरुआती दौर में चुनाव ना लड़ने की इच्छा ज़ाहिर नहीं की थी क्योंकि वो चुनाव कैंपेन पर फोकस करना चाहते थे.

पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर अख़बार को बताया, “ खड़गे जी राहुल गांधी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं.”

एक दूसरे पदाधिकारी ने बताया, “खड़गे जी ने प्रियंका और राहुल दोनों को चुनाव लड़ने के लिए मनाने में लगे हैं और वो सोनिया गांधी से भी बात कर रहे हैं. ”

दो मई को राहुल गांधी कर्नाटक के शिवमोगा और रायपुर में रैली करेंगे. वहीं प्रियंका गांधी छ्त्तीसगढ़ के कोरबा और मध्य प्रदेश के मुरैना में रैली करेंगी.

तीन मई यानी अमेठी- रायबरेली में नामांकन वाले दिन राहुल गांधी की पुणे में रैली की योजना है तो वहीं प्रियंका गांधी गुजरात के बनासकांठा और यूपी के फतेहपुर सीकरी में रैली करने वाली हैं.

लेकिन ये भी एक गौर करने वाली बात है कि नेताओं के ऐन मौक़े पर चुनावी दौरे बदल जाते हैं.

बीजेपी ने भी रायबरेली और कैसरगंज सीट पर नहीं खोले पत्ते

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अमेठी सीट पर तो बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उतारा है. साल 2019 के चुनाव में ईरानी ने 55000 वोटों से उस समय के सासंद राहुल गांधी को हरा कर सबको हैरान कर दिया था.

इस बार फिर वो मैदान में हैं. लेकिन बीजेपी ने रायबरेली सीट पर अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयराम रमेश ने कहा था, “ नामों के एलान में कई देरी नहीं हो रही है. अब तक बीजेपी ने भी रायबरेली से अपने उम्मीदवार का एलान नहीं किया है.”

यूपी में बीजेपी ने कैसरगंज से भी अब तक अपने उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है. इस सीट पर बीजेपी के सांसद हैं बृजभूषण शरण सिंह, जिन पर देश की शीर्ष महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.

अख़बार के अनुसार, समाजवादी पार्टी जो इंडिया गठबंधन का हिस्सा है- उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को अमेठी-रायबरेली सीट को लेकर बात की दी गई है.

समाजवादी पार्टी के नेता ने बताया कि बीते महीने जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने एक साथ रैली की थी तो उस दौरान राहुल गांधी ने अखिलेश यादव से पूछा था कि क्या उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए?

जिसके जवाब में अखिलेश ने राहुल गांधी को इस सीट के लिए सबसे फिट बताया था और कहा था कि ग्राउंड पर भी उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है.

अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस के ज़िला कार्यालयों का कहना है कि उन्होंने तैयारियां कर ली हैं और वो आखिरी फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं.

रायबरेली मे पार्टी के प्रमुख पंकज तिवारी ने कहा- “ हमने नामांकन की तैयारी पूरी कर ली है और उम्मीद है कि इस सीट से गांधी परिवार का ही कोई उम्मीदवार होगा.”

वहीं अमेठी के पार्टी प्रमुख प्रदीप सिंघल ने भी कहा है कि वो पार्टी के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं और तीन मई के लिए तैयारियां पूरी हैं.

माना जा रहा है कि गुरुवार को इस राजनीतिक सस्पेंस से पर्दा उठ जाएगा.

मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

कोविड वैक्सीन के सर्टिफिकेट से हटा पीएम मोदी का चेहरा

द हिंदू की एक रिपोर्ट कहती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर कोविड-19 के सर्टिफिकेट से हटा दी गई है.

ये सर्टिफिकेट कोविन प्लेटफॉर्म पर होते हैं जिन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय जारी करता है.

कोविड-19 की वैक्सीन लगवाने के बाद जो सर्टिफिकेट मिलता है, उस पर प्रधानमंत्री की तस्वीर होती है.

हालांकि अतीत में जब कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव थे तो भी वैक्सीन सर्टिफिकेट से पीएम मोदी की तस्वीर आचार संहिता लागू होने के बाद हटा दी गई थी.

मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट पर भारत सरकार में हलचल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में भारतीय "खुफिया अधिकारियों" के कथित ऑपरेशन को लेकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट ने भारत सरकार को परेशान कर दिया है और नई दिल्ली में बेचैनी बढ़ गई है.

अख़बार कहता है कि एक सूत्र ने बताया है कि इन रिपोर्ट्स को भारत और उसके प्रमुख पश्चिमी रणनीतिक साझेदारों के साथ उसके रिश्तों को लगे " ठोस धक्के" के रूप में देखा जा रहा है.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि "संवेदनशील रक्षा परियोजनाओं और हवाई अड्डे की सुरक्षा के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संबंधों पर वर्गीकृत जानकारी चुराने की कोशिश करते हुए पकड़े जाने के बाद भारतीय जासूसों को ऑस्ट्रेलिया से बाहर निकाल दिया गया था."

ऑस्ट्रेलियन और सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने रिपोर्ट किया है कि दो भारतीय "जासूसों" को देश छोड़ने के लिए कहा गया.

इससे पहले इसी सप्ताह वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि “अमेरिकी नागरिक और खालिस्तान समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश- जिसे फेल कर दिया गया उसमें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ शामिल थी.”

एबीसी की रिपोर्ट पर भारत सरकार का अब तक कोई जवाब नहीं आया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)