गुरपतवंत सिंह पन्नू मामला: निखिल गुप्ता के वकील बोले - अमेरिका ने कोई सबूत नहीं दिया

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- Author, जुगल आर पुरोहित
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले महीने, अमेरिका ने कहा था कि उसने एक सिख अलगाववादी नेता, जो अमेरिकी नागरिक भी है, उनकी हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया है.
कथित तौर पर हत्या की इस साजिश के केंद्र में एक भारतीय सरकारी कर्मचारी और भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता हैं.
मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ वो अमेरिकी नागरिक जिनकी हत्या की कोशिश को नाकाम किया गया वो गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं.
पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक हैं. वो अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन के मुखर समर्थक हैं. ये आंदोलन एक अलग सिख राज्य की वकालत करता है.
भारत ने पन्नू को आतंकवादी घोषित किया है, लेकिन वह इन आरोपों से इनकार करते हुए खुद को एक कार्यकर्ता बताते हैं.
वहीं निखिल गुप्ता को इस साल जून में अमेरिका के अनुरोध पर चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था. अमेरिका ने उन पर एक भारतीय सरकारी कर्मचारी के निर्देश पर पन्नू की हत्या के लिए हत्यारों की व्यवस्था करने की कोशिश का आरोप लगाया है.
निखिल गुप्ता के स्थानीय वकील पेट्र स्लेपिचका ने बताया कि वो इस समय चेक गणराज्य के पैंक्रैक की जेल में बंद हैं.
वहीं उनके वकील ने बीबीसी को बताया कि अमेरिका ने इस संबंध में कोई सबूत साझा नहीं किया है.
अमेरिका ने क्या-क्या सबूत दिए हैं?
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में पेट्र स्लेपिचका ने कहा, "हमें कोई सबूत नहीं मिला है. चेक अदालत की फ़ाइल में केवल एक अमेरिकी एजेंट का बयान है इसलिए हम नहीं जानते कि उनके दावे सही हैं या नहीं."
अमेरिकी अभियोग से जुड़े दस्तावेज़ों में गुप्ता को साजिश से जोड़ने के लिए कम्युनिकेशन डिटेल के साथ-साथ फ़ोटो के रूप में सबूत होने का दावा किया गया है.
इस पर स्लेपिचका ने कहा, "कुछ पैसों के लेनदेन की एक तस्वीर है, लेकिन वो तस्वीर कुछ नहीं कहती. इसे भारत, पाकिस्तान या अमेरिका या चेक गणराज्य में कहीं भी शूट किया जा सकता है. किसी भी मामले में, अभी मेरे देश में यह उनके अपराध के बारे में नहीं है. यह सिर्फ उनके प्रत्यर्पण के लिए है. हमारे पास केवल अमेरिकी एजेंट का एक बयान है. कुछ अधिक नहीं है."
स्लेपिचका ने स्वीकार किया कि अतीत में इस तरह के बयानों के आधार पर प्रत्यर्पण की इजाज़त दी गई है. उन्होंने कहा, "प्रत्यर्पण पर फै़सला लेने के लिए चेक अदालत के लिए एजेंट का बयान ही पर्याप्त हो सकता है."

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अपनी क़ानूनी रणनीति पर बात करते हुए वकील स्लेपिचका ने कहा कि उन्होंने अब अपनी रणनीति बदल दी है.
उन्होंने कहा, "अब तक हम कह रहे थे कि गुप्ता अमेरिकी मामले से जुड़े नहीं थे. हमने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि पहले अभियोग में उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. दरअसल अमेरिकी अभियोग में उनकी लंबाई, वजन और वो कैसा दिखते हैं इसको लेकर कुछ गलतियाँ थीं, इसलिए मेरी नज़र में उनकी गिरफ्तारी ग़लती का मामला हो सकती है."
"लेकिन अब मामला बदल गया है. पिछले महीने दिए गए अमेरिकी अभियोग पत्रों के बाद, कथित अपराध के बारे में अधिक जानकारी है, इसलिए अब लगता है कि यह एक राजनीतिक मामला हो सकता है. मुझे लगता है कि यह हमारे लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन केवल चेक अदालत ही इस पर फै़सला कर सकती हैं."
वो कहते हैं, "अभियोग पत्र आम लोगों के साथ साझा नहीं किए जाते, कम से कम मेरी समझ में तो नहीं. यहां ऐसा नहीं होता. अमेरिकी इसे सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं, जो मुझे अजीब लग रहा है, भले ही मैं इसका विशेषज्ञ नहीं हूं."
पेट्र स्लेपिचका ने बताया कि गुप्ता चेक गणराज्य की म्युनिसिपल कोर्ट में अपने प्रत्यर्पण का मामला हार गए थे. उन्होंने कहा कि वो अब हाई कोर्ट का रुख़ करने की योजना बना रहे हैं.
चेक गणराज्य में प्रत्यर्पण की कार्रवाई

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स्लेपिचका कहते हैं, "हमारी प्रणाली में प्रत्यर्पण के लिए चार चरण हैं, पहले नगर निगम, फिर हाई कोर्ट, फिर संवैधानिक न्यायालय और आख़िर में न्याय मंत्रालय. हमारे मामले में, नगरपालिका अदालत का निर्णय अमेरिकियों के अनुकूल था, लेकिन यह क़ानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं था. इसलिए अब हम अपील कर रहे हैं."
इस महीने की शुरुआत में, गुप्ता के परिवार ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.
गुप्ता के परिवार ने अपनी याचिका में उनका पता लगाने और उन्हें चेक गणराज्य से अदालत के समक्ष पेश करने और प्रत्यर्पण की कार्रवाई में भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है. इस याचिका को 4 जनवरी 2024 के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
गुप्ता को जून में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. मैंने स्लीपिचका से पूछा कि उनके परिवार ने अब अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया है.
वो कहते हैं, "गुप्ता सितंबर में मेरे मुवक्किल बने. मेरे हस्तक्षेप के बाद गुप्ता ने अपने परिवार से संपर्क किया है, लेकिन मैं भारत में उनके परिवार को सलाह नहीं दे रहा हूं क्योंकि मैं भारतीय क़ानूनों या सरकार के बारे में नहीं जानता."

यह पूछे जाने पर कि क्या वो चेक गणराज्य में भारतीय दूतावास से बात कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि दूतावास उनसे बात नहीं करना चाहता है.
वो कहते हैं, "भारतीय दूतावास से मेरा कोई संपर्क नहीं है. मैं कोशिश कर रहा था लेकिन वे मुझसे बात नहीं करना चाहते. मेरी फ़ीस का भुगतान गुप्ता का परिवार कर रहा है, भारत सरकार नहीं."
"पहले मैं जेल में गुप्ता की मदद करने के लिए दूतावास से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उनसे मिलने के लिए मुझे दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा और दबाव डालने की कोशिश के बाद ही कोई मुझसे मिला."
निखिल गुप्ता के परिवार की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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दरअसल, गुप्ता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में भारतीय अधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं. उन्होंने भारतीय अधिकारियों को 'मूकदर्शक' बताया है.
चेक जेल में निखिल गुप्ता के एकांत कारावास का हवाला देते हुए उनकी याचिका में कहा गया है, "याचिकाकर्ता पर आरोप कबूल करने और अमेरिका प्रत्यर्पित होने की इजाज़त देने को लेकर अनुचित दबाव डाला गया था. हालाँकि, याचिकाकर्ता ने इनकार कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि भारत सरकार की ओर से भारतीय दूतावास यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्यर्पण का मुकदमा स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चलाया जाए."
"लेकिन याचिकाकर्ता और उनके परिवार को विदेश मंत्रालय से बड़ी निराशा हुई, क्योंकि विदेश मंत्रालय अपने कर्तव्यों को पूरा करने और गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक भारतीय नागरिक की सहायता करने में विफल रहा है."

इस पर अधिक जानकारी के लिए बीबीसी ने विदेश मंत्रालय और चेक गणराज्य में भारतीय मिशन से संपर्क किया, लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
गुरुवार को विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "हम अमेरिका द्वारा दिए गए इनपुट को गंभीरता से लेते हैं. जो उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है वह इस मामले के सभी पहलुओं पर गौर करेगी. हमारे पास इसकी टाइमलाइन या निष्कर्षों पर साझा करने के लिए कोई अपडेट नहीं है."
"लेकिन हम ये बता सकते हैं कि एक भारतीय नागरिक को चेक अधिकारियों ने गिरफ्तार किया गया है. उनका अमेरिका प्रत्यर्पण का मामला लंबित है. हमें कॉन्सुलर एक्सेस मिल गया है. हमें अब तक तीन बार एक्सेस मिल चुका है. वह जो मांग रहे है, हम उपलब्ध करा रहे हैं. उनका परिवार सुप्रीम कोर्ट गया है इसलिए टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. हम इस पर सुप्रीम कोर्ट के फै़सले का इंतजार करेंगे."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा है?

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इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत अमेरिका में हत्या की साजिश के कथित संबंधों पर उपलब्ध कराए गए किसी भी सबूत पर निश्चित रूप से गौर करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इन आरोपों से भारत-अमेरिका के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
गुप्ता के वकील से जब यह पूछा कि क्या वह या उनका मुवक्किल भारत की प्रतिक्रिया से निराश हैं, उन्होंने कहा, "मैं अपना काम कर रहा हूं. मैं भारत या चेक या अमेरिकी अधिकारियों के रवैये से निराश नहीं हो सकता. गुप्ता की मानसिकता मुझसे अलग है. मैं पेशेवर बनने की कोशिश कर रहा हूं. मैं उनके विचार नहीं बल्कि केवल मामले के बारे में पूछ रहा हूं."
वकील ने कहा कि यह साफ नहीं है कि चेक गणराज्य के जेल अधिकारियों को गुप्ता की सुरक्षा को ख़तरे के बारे में कब जानकारी मिली थी.
उन्होंने कहा, "जेल को स्थानीय पुलिस से जानकारी मिली कि गुप्ता की सुरक्षा को ख़तरा है. मैं नहीं जानता किससे, यह कोई नहीं जानता. अब उनको सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. यहां की जेलें ज्यादा सुरक्षित हैं. वह संतुष्ट हैं. जेल अधिकारी उनके साथ हैं. अब वो अपने परिवार को कॉल करने में सक्षम हैं."
दिल्ली में क्या काम करते थे निखिल गुप्ता?

स्लेपिचका से जब गुप्ता के भारत में जीवन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वो दिल्ली से थे और बिल्डिंग मैटेरियल के व्यापारी के रूप में काम करते थे.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में गुप्ता के परिवार ने उन्हें एक हस्तशिल्प के सामान का व्यापारी बताया है. वहीं अमेरिकी दस्तावेजों के मुताबिक़ गुप्ता नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में शामिल हैं.
जब स्लेपिचका से अमेरिकी दस्तावेजों में बताए गए गुजरात में गुप्ता के मामले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता. मैंने इसे केवल अमेरिकी अभियोग पत्र में पढ़ा है. उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा है."
जब उनसे पूछा गया कि क्या गुप्ता का भारत सरकार से संपर्क था. इस सवाल पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी.
उन्होंने स्वीकार किया कि गुप्ता पहले अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं.
उन्होंने कहा, "गुप्ता के पासपोर्ट से पता चलता है कि वह पहले भी अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन यह 7-8 साल पहले था. मुझे नहीं पता कि उनका वहां कोई संबंधी या दोस्त है या नहीं."
कितने डॉलर में 'सौदा' करने का आरोप है?

गुप्ता के ख़िलाफ़ अमेरिका ने क्या आरोप लगाए हैं-
मई 2023 के आसपास, भारत सरकार के एक कर्मचारी ने अमेरिका में हत्या की साजिश रचने के लिए गुप्ता से संपर्क किया.
इसके बाद गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वो एक अपराधी का सहयोगी मानते थे. लेकिन वास्तव में वह एक अमेरिकी मुखबिर था.
गुप्ता ने इस व्यक्ति के ज़रिए हत्या के लिए एक हिटमैन तक पहुंचने की कोशिश की. अमेरिकी दस्तावेज़ कहते हैं कि हिटमैन वास्तव में एक अमेरिकी अंडरकवर एजेंट था.
इसके बाद गुप्ता ने इस काम के लिए भारतीय के सरकारी कर्मचारी और हिटमैन के बीच 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का सौदा कराया. गुप्ता ने 9 जून, 2023 के आसपास हिटमैन को नकद में 15,000 अमेरिकी डॉलर का अग्रिम भुगतान भी करवाया.
अमेरिकी अभियोजन पक्ष का कहना है कि अधिकारियों ने इन लोगों की बातचीत पर नज़र रखी, गुप्ता की चेक गणराज्य की यात्रा की योजना के बारे में जानने के बाद 30 जून, 2023 को अमेरिकी अनुरोध पर चेक अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
हालांकि गुप्ता का परिवार इससे इनकार करता है.
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