बांसुरी स्वराज कौन हैं, जिनके बीजेपी उम्मीदवार बनने पर हो रहा है विवाद

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- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दो मार्च को बीजेपी ने लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी पहली सूची में 195 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की.
इस सूची में जहाँ हिंदी पट्टी के दो अहम राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ज़्यादातर सांसदों को टिकट दिए गए हैं, वहीं पार्टी ने दिल्ली और छत्तीसगढ़ में कई सांसदों को टिकट नहीं दिया है.
दिल्ली की बात की जाए, तो साल 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी सात सीटों पर जीत हासिल की थी.
दिल्ली में सात लोकसभा सीटें हैं- चांदनी चौक, उत्तर पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली.
लेकिन इस बार दिल्ली की लोकसभा सीटों से बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों में बड़े बदलाव किए हैं.
बीजेपी ने दो मार्च को दिल्ली की पाँच सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें से एक मनोज तिवारी को छोड़कर सभी मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए गए हैं.
पार्टी ने इस बार दिल्ली में जिन नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा हैं, उनमें प्रमुख हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज.
बांसुरी को मीनाक्षी लेखी की जगह नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. मीनाक्षी लेखी के अलावा परवेश वर्मा, डॉक्टर हर्षवर्धन और रमेश बिधूड़ी को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है.

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वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामासेशन बीजेपी की तरफ़ से दिल्ली में उम्मीदवारों को लेकर किए गए बदलाव की वजह बताते हुए कहती हैं कि मदनलाल खुराना के जाने के बाद बीजेपी को कोई ऐसा नेता नहीं मिला, जो दिल्ली का नेतृत्व कर सके.
मदनलाल खुराना बीजेपी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री थे. नब्बे के दशक में मदनलाल खुराना बीजेपी की दिल्ली इकाई का चेहरा थे. कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें 'दिल्ली का शेर' कहा जाता था.
राधिका रामासेशन के अनुसार, ''बीजेपी हालांकि मोदी के नाम पर लोकसभा चुनाव तो जीत रही है लेकिन दिल्ली विधानसभा में पार्टी कोई कमाल नहीं दिखा पाई है. ऐसे में लोकसभा सीटों में फेरबदल करके वे दिल्ली में परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहे हैं.''
वहीं वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं कि दिल्ली में बदलाव का कारण आप और कांग्रेस का साथ आना है, क्योंकि बीजेपी को कहीं न कहीं ये लगता है कि पिछली बार की तरह वे सात की सात सीटों पर काबिज़ नहीं हो पाएगी, इसलिए कोई मौक़ा नहीं छोड़ना चाहती है.
'आप' को क्यों है बांसुरी से नाराज़गी

बीजेपी ने जो सूची जारी की है उसमें दिल्ली से पाँच सीटों के लिए उम्मीवारों की घोषणा की गई है.
उनमें बांसुरी स्वराज (नई दिल्ली), कमलजीत सहरावत (पश्चिमी दिल्ली), रामवीर सिंह बिधूड़ी (दक्षिणी दिल्ली), मनोज तिवारी (उत्तर पूर्वी दिल्ली), प्रवीण खंडेलवाल (चांदनी चौक) शामिल हैं.
इस सूची में बांसुरी स्वराज का नाम आने के बाद दिल्ली में आप की नेता और वर्तमान सरकार में शिक्षा और पीडब्लूडी मंत्री आतिशी ने कई सवाल उठाए और बीजेपी को अपना उम्मीदवार बदलने को कहा.
आतिशी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा, ''नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी का टिकट काटकर बीजेपी ने ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है जो बार-बार कोर्ट में देशहित के ख़िलाफ़ खड़ी रही हैं. देश के विरोधियों का बचाव करती रही हैं. मैं बांसुरी स्वराज की बात कर रही हूँ. एक वकील, जनता के हित की लड़ाई के लिए होता है लेकिन वो किसके हक़ की लड़ाई लड़ती आई हैं.''
आतिशी ने बांसुरी स्वराज के क़ानूनी केसों की सूची गिनाई, जिनमें से ललित मोदी का मामला भी है.
उन्होंने आरोप लगाया कि 'ये व्यक्ति देश के लाखों, करोड़ रुपये गबन करने के मामले में फ़रार हैं और बांसुरी स्वराज इस मामले में उनका बचाव कर रही थीं. इस मामले में ललित मोदी ने ट्वीट कर धन्यवाद भी किया था.'
इसके बाद आतिशी ने मणिपुर और पंजाब में हुए मेयर चुनाव का मुद्दा उठाया.
उन्होंने कहा, ''मणिपुर में हुई हिंसा में जब दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके परेड कराया गया, तो इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से बांसुरी स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा. ऐसे में वे किस मुँह से नई दिल्ली लोकसभा सीट से महिलाओं से वोट मांगने जाएँगी. वहीं चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी के झूठे मेयर की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में खड़ी थीं और इन सभी केसों के लिए बांसुरी को देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.''
ललित मोदी को लेकर आरोप

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गौरतलब है कि जब सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थीं तो उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व प्रमुख ललित मोदी को ब्रिटेन यात्रा को लेकर दस्तावेज़ हासिल करवाने में मदद की थी.
ललित मोदी पर दर्जनभर से ज़्यादा मामलों में वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.
सुषमा स्वराज ने कहा था कि उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ललित मोदी की मदद की थी क्योंकि ललित मोदी की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं.
ये मामला संसद में गूँजा था और कांग्रेस ने सुषमा स्वराज के इस्तीफ़े की मांग की थी.
उस दौरान कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था, ''सुषमा जी ने जो काम किया वो छिपकर किया है और मंत्रालय में किसी को नहीं पता कि सुषमा ये करने वाली हैं. सुषमाजी के परिवार- उनके पति और बेटी को ललित मोदी ने पैसा दिया है वो बता दें कि उन्हें कितना पैसा मिला है.''
हालाँकि उस समय गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह ने कहा था, ''हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि सुषमा स्वराज ने जो किया वो सही थीं. हमारी सरकार उनके साथ है.''
इंडियन प्रीमियर लीग के फ़ाउंडर ललित मोदी पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं. वो 2010 में देश छोड़कर चले गए थे और फ़िलहाल लंदन में रह रहे हैं. ललित मोदी का दावा है कि उन्हें ‘भगोड़ा’ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उनको किसी भी कोर्ट ने दोषी नहीं क़रार दिया है.
ललित मोदी को स्वदेश लाने की कोशिशें की गई हैं. साल 2017 में ईडी की उन्हें वापस लाने के निवेदन को इंटरपोल ने ख़ारिज कर दिया था. इंटरपोल का कहना था कि ललित मोदी के ख़िलाफ़ अपर्याप्त सुबूत हैं.

वहीं अपनी उम्मीदवारी पर बांसुरी स्वराज ने बीजेपी नेताओं का शुक्रिया अदा किया और कहा कि दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार से त्रस्त है और अगर भारत और दिल्ली की जनता उन्हें चुनकर लाती है, तो वे पुरज़ोर तरीके से इस मुद्दे को संसद में उठाएँगी.
उनका कहना था, ''आप की सरकार एंटी करप्शन के मुद्दे पर आई थी लेकिन आज वो सिर से लेकर पाँव तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है चाहे वो शराब घोटाला हो, क्लास रूम घोटाला, नकली दवाओं का वितरण, चाहे जल बोर्ड का स्कैम हो या फिर मुख्यमंत्री के आलीशान बंगले का मामला हो. ये बीजेपी या जनता नहीं कह रही लेकिन कोर्ट कह रहे हैं कि शराब घोटाले में शुरुआती सबूत उनके नेताओं के ख़िलाफ़ सामने आ रहे हैं.''
बांसुरी स्वराज ने अपनी माँ को अपनी प्रेरणा बताया और उन्हीं के संस्कारों को ख़ुद का अंश बताया.
कौन हैं बांसुरी स्वराज

- बांसुरी स्वराज, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल की बेटी हैं.
- वे सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और उन्हें वकालत में 15 साल का अनुभव है.
- वे अंग्रेज़ी साहित्य में स्नात्क हैं और लंदन से उन्होंने वकालत की पढ़ाई की है.
- उन्हें 2023 में दिल्ली बीजेपी के लीगल सेल का सह-संयोजक बनाया गया था.

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सुषमा स्वराज दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थी और उनका जन्म हरियाणा में हुआ था.
वे भी वकील थीं और आपातकाल के बाद जनता पार्टी में शामिल हुई थी.
1977 में पहली बार हरियाणा में विधानसभा चुनाव जीता और 80 के दशक में बीजेपी में शामिल हो गई.
वे केंद्रीय सूचना प्रसारण और विदेश मंत्री भी रहीं. वे एक अच्छी वक्ता मानी जाती थी.
राधिका रामासेशन का कहना है कि जब किसी युवा चेहरे को लाया जाता तो विरोध होता ही है और ये भी कहा जा रहा है कि वंशवाद है लेकिन उन्होंने खुद को साबित किया है.
उनके अनुसार, ''बांसुरी में उनकी मां सुषमा की झलक दिखाई देती है और मुझे नहीं लगता कि कार्यकर्ताओं को उन्हें अपनाने में कोई दिक्कत होगी.''

सुषमा स्वराज को लालकृष्ण आडवाणी का क़रीबी माना जाता था. वो सात बार सांसद, तीन बार विधायक रहीं और दिल्ली की पाँचवीं मुख्यमंत्री बनीं.
नीरजा चौधरी कहती हैं कि जब कुछ महीनों के लिए ही सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं थीं तो उन्होंने कहा था, "'अब दिल्ली सोएगी और मैं जागूंगी.' आज के युवाओं में तो नहीं पर लोगों के ज़हन में ये यादें ज़रूर होंगी."
वे कहती हैं, ''मेरे लिए बांसुरी का नाम इस चुनाव में आना बहुत रुचिकर है. वो युवा हैं. वे उभरता सितारा हो सकती हैं. वहीं दिल्ली में सुषमा स्वराज की विरासत को इनकैश करने की कोशिश हो रही है जिसमें मक़सद केवल जीतना है.''
हालांकि जानकारों का मानना है कि हर्षवर्धन की दिल्ली में पैठ रही है वहीं मीनाक्षी लेखी ने भी काम किया है लेकिन वो अप्रोचेबल नहीं रहीं, ऐसे में विनेबलिटी फ़ैक्टर को देखते हुए दिल्ली में बीजेपी ने उम्मीदवार उतारे हैं.
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी कहते हैं, "हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि आम आदमी पार्टी की पूरी राजनीति दिल्ली पर आधारित है. हालांकि पंजाब में भी आप की सरकार है लेकिन उनके प्राण दिल्ली में बसते हैं."
ऐसे में लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए आप के लिए दिल्ली का चुनाव अहम हो जाता है और वो भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है.
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