प्रज्ञा सिंह ठाकुर का टिकट क्यों कटा, भोपाल से टिकट कटने पर वह क्या बोलीं

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मध्य प्रदेश के भोपाल से लोकसभा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बीजेपी ने इस बार टिकट नहीं दिया है.
बीजेपी ने पिछले हफ़्ते शनिवार को लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी. इनमें मध्य प्रदेश की कुल 29 लोकसभा सीटों में से 24 सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा भी की गई थी.
इन 24 सीटों में भोपाल लोकसभा सीट भी शामिल है लेकिन यहाँ की मौजूदा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जगह बीजेपी ने भोपाल के पूर्व मेयर आलोक शर्मा को उम्मीदवार बनाया है.
भोपाल से टिकट कटने पर प्रज्ञा सिंह ठाकुर से रविवार को पत्रकारों ने पूछा कि गोडसे को लेकर विवादित बयान के कारण पीएम मोदी ने कहा था कि वह मन से कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे. क्या इस वजह से उन्हें टिकट नहीं मिला?

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टिकट कटने पर प्रज्ञा ठाकुर का बयान
इस सवाल के जवाब में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ''मैंने कभी विवादित बयान नहीं दिया. जो कहा, सत्य कहा. राजनीति में रहकर अगर सत्य कहना ग़लत है तो मुझे लगता है कि सत्य कहने की आदत डाल लेनी चाहिए. जो सत्य हो उससे समाज को अवगत कराना चाहिए.''
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ''मीडिया वाले विवादित बयान कहते थे लेकिन जनता इसे सच मानती है. हमारी जानता ने हमेशा मुझे सच कहा. विरोधियों के लिए यह हथियार बना. कहीं अगर हमारे मानदंडों से अलग कोई शब्द हो गया है तो माननीय प्रधानमंत्री जी को यह कहना पड़ा कि मन से माफ़ नहीं करेंगे. उसके लिए मैं पहले ही क्षमा मांग चुकी थी.''
''किसी के मन को ठेस पहुँचाने का मेरा कोई विचार नहीं रहता. प्रधानमंत्री मोदी जी के मन को कष्ट हुआ था, इसलिए उन्हें कहना पड़ा कि मन से माफ़ नहीं कर पाएंगे. मेरा इस प्रकार का कोई भाव नहीं था कि उनके मन को कष्ट पहुँचाऊं. उसके बाद मैंने कभी कष्ट पहुँचाया भी नहीं.''
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ''टिकट नहीं देने का निर्णय संगठन का है और उसका निर्णय सर्वोपरि होता है. हमारे यहाँ संगठन ही अहम होता है. उसका निर्णय सहज स्वीकार्य होता है. आलोक शर्मा को मेरा आशीर्वाद और शुभकामनाएं हैं. मैंने 2019 में भी टिकट नहीं मांगा था लेकिन तब भी संगठन का ही फ़ैसला था कि मैं चुनाव लड़ूँ.''

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पीएम मोदी ने क्या कहा था?
नाथूराम गोडसे पर प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान को लेकर पीएम मोदी से मई 2019 में सवाल पूछा गया था तब उन्होंने कहा था, ''गांधी जी या गोडसे के संबंध में जो भी बातें कही गई हैं, वे भयंकर ख़राब हैं. हर प्रकार से घृणा के लायक हैं. सभ्य समाज में इस तरह की भाषा नहीं चलती है. इस प्रकार की सोच नहीं चल सकती है. इसलिए ऐसा करने वालों को 100 बार आगे सोचना पड़ेगा. दूसरा, उन्होंने माफ़ी मांग ली अलग बात है. लेकिन मैं अपने मन से माफ़ नहीं कर पाऊंगा. मन से कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगा.''
2019 में प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल से दिग्विजय सिंह को तीन लाख से ज़्यादा वोटों से हराया था.
इस सीट पर 2019 में मुक़ाबला काफ़ी दिलचस्प रहा था क्योंकि एक तरफ़ राज्य की कांग्रेस सरकार में दो बार मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह थे और दूसरी तरह प्रज्ञा ठाकुर उस सीट से जो बीते 30 सालों से बीजेपी का गढ़ रही.
मध्य प्रदेश लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में छठा सबसे बड़ा राज्य है. 29 सीटों में 10 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए रिज़र्व हैं. 19 सीटें सामान्य हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश की 29 में 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

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जब संसद में गोडसे को बताया था देशभक्त
सासंद बनने के बाद प्रज्ञा ठाकुर अपने कामों से ज़्यादा अपने बयानों के कारण चर्चा में रहीं.
लोकसभा में जब स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (संशोधन) विधेयक पर बहस हो रही थी तो डीएमके सांसद ए राजा ने नाथूराम गोडसे के एक बयान का ज़िक्र किया ये बताने के लिए कि आख़िर गोडसे ने गांधी को क्यों मारा. इस बहस को बीच में रोकते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, “आप एक देशभक्त का इस तरह उदाहरण नहीं दे सकते.”
इस बयान के बाद बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल करना शुरू किया था. प्रज्ञा ठाकुर को रक्षा पर सलाहकार समिति से हटा दिया था. 2019 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान संसदीय दल की बैठक में भाग लेने से भी प्रज्ञा ठाकुर को रोक दिया गया था.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रज्ञा ठाकुर के बयान से पार्टी को अलग करते हुए लोकसभा में कहा था, “नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा जाना तो दूर अगर उन्हें देशभक्त माने भी जाने के बारे में कोई सोच रहा है तो इस सोच की हमारी पार्टी पूरी तरह निंदा करती है.”
उनके बयान को संसद के रिकॉर्ड से हटा दिया गया. कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया और प्रज्ञा ठाकुर पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उस समय एक्स पर लिखा, “आतंकवादी प्रज्ञा ने आतंकवादी गोडसे को देशभक्त बताया. ये भारतीय संसद के इतिहास में एक दुखद दिन है.”
प्रज्ञा ठाकुर गोडसे को लेकर दिए गए अपने बयानों के अलावा अपने मेडिकल दावों को लेकर भी आचोलनाओं से घिर चुकी हैं.

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हेटस्पीच और हिंदुओं को हथियार रखने की सलाह
कोविड-19 की दूसरी लहर के समय प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था कि 'गोमूत्र पीने से कोरोना से बचा जा सकता है और ये फेफड़ों को भी संक्रमण से बचाता है.'
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, “गोमूत्र अर्क फेफड़ों के संक्रमण से दूर रखता है. मैं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी झेल रही हूं लेकिन हर दिन 'गोमूत्र अर्क' लेती हूँ. इसके बाद मुझे कोरोनो वायरस के लिए कोई दवा देने की ज़रूरत नहीं. मैं कोरोनोवायरस संक्रमित नही होऊंगी.”
सांसद रहते हुए प्रज्ञा ठाकुर पर हेट स्पीच देने के भी आरोप लगे. दिसंबर 2022 में प्रज्ञा ठाकुर के बयान से तब विवाद मच गया जब उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अपनी रक्षा के लिए हथियार रखने चाहिए.
उन्होंन एक भाषण में कहा, “अपने घरों में हथियार रखें और कुछ नहीं तो कम से कम सब्ज़ियां काटने वाले चाकू तो तेज़ रखिए...पता नहीं कब क्या स्थिति आ जाए...आत्मरक्षा का अधिकार हर किसी को है. यदि कोई हमारे घर में घुसकर हम पर हमला करता है तो उसका मुँहतोड़ जवाब देना हमारा अधिकार है.”
इस बयान को लेकर प्रज्ञा ठाकुर के ख़िलाफ़ पुलिस ने शिकायत दर्ज की. इस एफ़आईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (धर्म और नस्ल के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295 ए (जानबूझकर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करना) की धारा लगाई गई.

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मालेगाँव धमाका (2008) की स्पेशल प्रॉसिक्युटर रोहिणी सालियन ने 2015 में आरोप लगाया था कि इस हमले के अभियुक्तों को लेकर नरमी बरतने के लिए उन पर दबाव बनाया गया.
रोहिणी ने एनआईए के एसपी सुहास वर्के पर यह आरोप लगाया था. रोहिणी ने कहा था कि ऐसा केस को कमज़ोर बनाने के लिए किया गया ताकि सभी अभियुक्त बरी हो जाएं. इस ब्लास्ट में भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी अभियुक्त हैं.
रोहिणी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा था, ''एनडीए सरकार आने के बाद मेरे पास एनआईए के अधिकारियों का फ़ोन आया. जिन मामलों की जांच चल रही थी उनमें हिन्दू अतिवादियों पर आरोप थे. मुझसे कहा गया वो बात करना चाहते हैं. एनआईए के उस अधिकारी ने कहा कि ऊपर से इस मामले में नरमी बरतने के लिए कहा गया है.''
2016 में एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा का नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं करते हुए क्लीन चिट दे दी थी. 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को ज़मानत दी. इसी साल इस मामले के मुख्य अभियुक्त कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली.
विवादित बयानों के अलावा बतौर सांसद अगर प्रज्ञा ठाकुर का परफॉर्मेंस देखें तो वो बहुत सक्रिय नहीं थीं. पीआरएस लेजिस्लेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, इनकी लोकसभा में उपस्थिति 66 फ़ीसदी रही जो देश को औसत 79 फ़ीसदी से 13 फ़ीसदी कम है.
बतौर सासंद प्रज्ञा ठाकुर ने 19 बहसों के हिस्सा लिया. उन्होंने कोई निजी सदस्य बिल भी पेश नहीं किया.
उन्होंने सासंद रहते हुए सिर्फ़ 36 सवाल संसद में पूछे जबकि सांसदों के सवालों राष्ट्रीय औसत 210 सवालों का है.
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