सिंध: पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा हिंदू आबादी वाले इलाक़े का इतिहास

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पाकिस्तान ने सिंध प्रांत को लेकर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे 'विस्तारवादी सोच' करार दिया है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे 'उकसावे वाला और तोड़-मरोड़कर पेश' किया गया बयान बताया है.
रविवार को राजनाथ सिंह ने कहा था कि "सिंध भले ही भारत का हिस्सा न हो, लेकिन सभ्यता की दृष्टि से यह हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा."
उन्होंने कहा कि "सीमाएं तो बदल सकती हैं और क्या पता कि कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए."
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राजनाथ सिंह ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी की लिखी क़िताब के हवाले से बताया कि न केवल सिंध, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते थे.
1947 के बंटवारे के बाद सिंध, पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था और उस समय हुए पलायन में लाखों हिंदू सिंधी परिवार, वहां से भारत में आकर बस गए थे.
लालकृष्ण आडवाणी का बचपन सिंध में ही बीता था. उनका परिवार पलायन कर भारत आ गया था. साल 2005 में उन्होंने सिंध का दौरा किया था और कराची गए थे.
विभाजन में सिंध पाकिस्तान को मिला

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ब्रिटिश इंडिया में सिंध का इलाक़ा बॉम्बे प्रोविंस के तहत आता था.
विभाजन के बाद भारत ने जो राष्ट्रगान अपनाया, उसमें भी सिंध के नाम का ज़िक्र आता है.
एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका के अनुसार, मौजूदा समय में सिंध की सीमा पूर्व में भारत के गुजरात और राजस्थान से जुड़ती है, उत्तर-पश्चिम में बलूचिस्तान सीमा से और उत्तर-पूर्व में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से लगी है.
यह इलाक़ा सिंधु डेल्टा में बसा है और इस नदी के नाम पर ही इसे सिंध के रूप में जाना जाता है.
सिंध सरकार के मानवाधिकार आयोग के अनुसार, इस प्रांत में 30 ज़िले आते हैं और कुल आबादी क़रीब 5.5 करोड़ है.
सिंध प्रांत का कुल क्षेत्रफल एक लाख 40 हज़ार वर्ग किलोमीटर है.
साल 2017 की जनगणना के अनुसार, इस प्रांत में 91.3 प्रतिशत मुसलमान आबादी है और 6.5 प्रतिशत हिंदू आबादी. सिंध का उमरकोट ज़िला आज भी हिंदू बहुसंख्यक है.
बीबीसी उर्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान में बसे ज़्यादातर हिंदुओं का ठिकाना सिंध प्रांत है.
सिंधु सभ्यता का केंद्र

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वर्तमान के सिंध प्रांत को प्राचीन भारत का एक अहम केंद्र माना जाता है. सिंधु नदी के किनारे प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता विकसित हुई.
यहां के प्राचीन शहर मोहनजोदड़ो को दुनिया की सबसे पुरानी नगरीय व्यवस्था माना जाता है. सिंधु नदी के किनारे बसे क़रीब चार हज़ार साल पुराने इस शहर की खोज पिछली सदी में ही हुई थी.
मोहनजोदड़ो के खंडहरों को यूनेस्को ने साल 1980 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था.
ब्रिटैनिका के अनुसार, 711 ईसवीं में सिंध पर अरबों का कब्ज़ा हुआ. 16वीं और 17वीं सदी में सिंध पर मुगलों (1591-1700) और फिर कई स्वतंत्र सिंधी राजवंशों का शासन रहा.
साल 1542 में सिंध के उमरकोट क़िले में ही मुग़ल बादशाह अकबर का जन्म हुआ था.
साल 1843 में इस इलाक़े पर अंग्रेजों ने कब्ज़ा कर लिया था.
यहां के सिंधी हिंदू परिवारों का व्यापार और वित्तीय मामलों में काफ़ी दख़ल था. लेकिन विभाजन के बाद हुए पलायन के दौरान बहुत सारे परिवार भारत या अन्य देशों में चले गए.
सिंधु नदी की वजह से यह इलाक़ा पहले से संपन्न रहा है. यहां विशेषकर कपास की खेती होती है और आज भी प्रांत की राजधानी कराची, पाकिस्तान के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है.
सिंध का सांस्कृतिक केंद्र है मकली नेक्रोपोलिस

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यह इलाक़ा सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है और यूनेस्को ने यहां के कई प्राचीन स्थलों को विश्व धरोहर घोषित किया है.
कराची से 140 किलोमीटर दूर स्थित मकली हिल नेक्रोपोलिस में बहुत सारे प्राचीन मकबरे हैं.
यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ठट्टा के पास स्थित मकली नेक्रोपोलिस दुनिया के सबसे बड़े और अनोखे कब्रगाह में से एक है.
इसे संतों, कवियों, रईसों, गवर्नरों, राजकुमारों, शहंशाहों और रानियों की कब्रों, मकबरों और स्मारकों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कब्रग़ाहों में गिना जाता है.
ठट्टा के मकली में स्थित ये ऐतिहासिक स्मारक लगभग 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं और यहां क़रीब पांच लाख कब्रें और मक़बरे मौजूद हैं.
यहां की वास्तुकला मुस्लिम, हिंदू, फ़ारसी, मुग़ल और गुजराती प्रभावों का समृद्ध मेल दिखाती है. इन मक़बरों को खास तौर पर उनकी नीली चमकदार टाइलों, बारीक़ नक्काशी, सुंदर कैलीग्राफी और आकर्षक ज्यामितीय डिज़ाइन के लिए जाना जाता है, जो कभी यहां फली-फूली जीवंत सभ्यता की रचनात्मकता और आध्यात्मिकता को दिखाते हैं.
यहां साम्मा काल (1351-1524) के शेख़ जियो का मकबरा भी स्थित है.
ठट्टा 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच ज्ञान, कला और संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र रहा और सिंध क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
धर्मांतरण को लेकर सुर्खियों में भी रहा
हिंदू धर्मस्थलों पर हमलों और धर्म परिवर्तन को लेकर भी सिंध प्रांत सुर्खियों में रहा है.
साल 2021 में अमेरिकी कांग्रेसमैन ब्रैड शेरमैन ने आरोप लगाया कि सिंध में हिंदू और ईसाई परिवारों को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन का निशाना बनाया जा रहा है.
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में सिंध में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन का ज़िक्र किया गया है.
साल 2023 में पाकिस्तान से भारत आईं सीमा हैदर की मुल्क वापसी को लेकर सिंध प्रांत में डकैतों ने हिंदुओं के धार्मिक स्थलों और घरों पर हमला करने की धमकी दी थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.













