ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ में कौन चमका, कौन चूका मौक़ा?

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
बेंगलुरु में खेले गए पांचवें टी20 मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को एक कड़े मुकाबले में 6 रनों से हराकर सिरीज़ 4-1 से जीत ली.
पहले बैटिंग करते हुए भारतीय टीम तेज शुरुआत के बावजूद डगमगा गई और श्रेयस अय्यर के 37 गेंदों पर 53 रनों की मदद से टीम ने आठ विकेट पर 160 का स्कोर खड़ा किया.
भारतीय गेंदबाज़ों ने इस स्कोर की जी-तोड़ रक्षा की.
मुकेश कुमार, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई की धारदार बॉलिंग की मदद से टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 20 ओवरों में 154 पर ही रोक दिया.
इस तरह भारत ने सिरीज़ 4-1 से जीत ली. टीम को सिरीज़ में इकलौती हार तीसरी टी-20 मैच में मिली थी.
सिरीज़ की टाइमिंग की हुई निंदा

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इस सिरीज़ की टाइमिंग की कई ऑस्ट्रिलियाई खिलाड़ियों ने निंदा की थी.
पांचवें मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया के मिचेल मार्श ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि ट्रैविस हेड ने क्या गलती की है कि उन्हें ये सिरीज़ खेलनी पड़ रही है?
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और कमेंटेटर माइकल वॉन ने भी इस ट्वीट को आगे बढ़ाया और कहा कि ये सबसे वाहियात सिरीज़ है, इसमें किसी खिलाड़ी को नहीं खेलना चाहिए था.
दरअसल वॉन वर्ल्ड कप के ठीक बाद इस सिरीज़ में खेलने को लेकर हैरान हुए थे.
उन्होंने वर्ल्ड कप के ठीक बाद भी एक्स पर कहा था कि फाइनल के चार दिन बाद दोनों फाइनल खेलने वाली टीमें 5 मैचों की टी20 सिरीज़ खेलेंगी और खिलाड़ियों को आराम का मौका भी नहीं मिलेगा.
वॉन के मुताबिक ये सिरीज़ खेलना अति हो गई और इसमें सिर्फ लालच छुपा बैठा था.
वैसे तो ये सिरीज़ वर्ल्ड कप के ठीक बाद खेली गई लेकिन सच्चाई ये भी है कि अगले साल के टी20 वर्ल्ड कप से पहले भारत को लगभग 11 टी20आई मैच खेलने हैं और उसमें 5 मैच इसी सिरीज़ में खेले गए.
इसलिए वर्ल्ड कप की टीम बनाने के लिहाज़ से ये सिरीज़ भारत के लिए अहम हो जाती है.
एक नज़र डालते हैं इस सिरीज़ में हासिल हुई भारत की उपलब्धियों और उजागर हुई कमज़ोरियों पर.
गायकवाड़ की परिपक्व बैटिंग

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इस सिरीज़ में भारतीय टीम के लिए सबसे सुखद बात रही ओपनर ऋतुराज गायकवाड़ का फॉर्म.
गायकवाड़ ने पांच पारियों में 55.75 की औसत से 223 रन बनाए जिसमें एक शतक और एक अर्द्धशतक शामिल रहे.
उन्होंने तीसरे टी20आई में सिर्फ 57 गेंदों पर 123 रन बना डाले और इस दौरान 7 छक्के और 13 चौके लगाए.
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ टी20आई में किसी भारतीय की ओर से सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया.
हाल ही में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल विजेता भारतीय टीम की कप्तानी करने वाले गायकवाड़ ने अगले साल होने वाली टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका के लिए मज़बूत अर्जी दे दी है.
जायसवाल ने गंवाए मौके

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लेकिन जहां ऋतुराज गायकवाड़ ने अपने बल्ले से जलवे दिखाए, वहीं उनके साथी ओपनर यशस्वी जायसवाल कई अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद चल नहीं पाए.
आखिरी मैच में भी वो लगभग हर गेंद को हवा में मारते दिखे और इसी कोशिश में एलिस की एक गेंद को मिसटाइम कर दिया और डीप स्क्वैयर लेग पर कैच आउट हो गए.
उन्होंने इस पारी में 21 रन बनाए थे. इससे पहले की दो पारियों में भी वो शॉर्ट गेंद को छेड़छाड़ करते हुए कैच आउट हुए थे.
कुल पांच पारियों में सिर्फ एक बार यशस्वी अपनी तेज शुरुआत का फ़ायदा उठा सके और उन्होंने 57 रन बनाए. लेकिन 5 मैचों में 27 की औसत से कुल 138 रन उनकी प्रतिभा से न्याय नहीं कर पाते.
रिंकू सिंह हैं तैयार

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गायकवाड़ के अलावा एक दूसरे बल्लेबाज़ जिसने सबसे ज्यादा सम्मान हासिल किया वो रिंकू सिंह हैं. पूरी सिरीज़ में वो ज़बरदस्त फॉर्म में दिखे और 52.50 की औसत से 106 रन बनाए.
जिस गति से उन्होंने रन बनाए हैं उसने उन्हें वर्ल्ड कप की टीम में फ़िनिशर की भूमिका के लिए एक मज़बूत दावेदार बना दिया है.
दूसरे टी20आई में उन्होंने 31 नाबाद रन सिर्फ 9 गेंदो पर बनाए जिसकी मदद से भारत वो मैच जीत सका था.
चौथे मैच में उन्होंने 29 बॉल पर 45 रन बनाए और भारत को सिरीज़ में 3-1 से बढ़त लेने में बड़ी भूमिका निभाई.
पूर्व क्रिकेटर आशीष नेहरा का मानना है कि वर्ल्ड कप की टीम के लिए सेलेकटर्स उनकी नाम पर चर्चा ज़रूर करेंगे और अगर कुछ सीनियर खिलाड़ी बाहर बैठ गए तो उनका खेलना तय है.
नेहरा मानते हैं कि टी20आई में फिनिशर के रोल के लिए तिलक वर्मा, जितेश शर्मा और रिंकू सिंह में कड़ी टक्कर हो सकती है.
बोलिंग यूनिट में दिखी कमियां
हालांकि इस सिरीज़ में कुछ मैचों में मुकेश कुमार या रवि बिश्नोई की बढ़िया बॉलिंग देखने को मिली.
लेकिन साथ ही भारतीय बोलर्स ने जमकर रन भी लुटाए और पहले तीन मैचों में भारत ने 200 से ज्यादा रन खर्च कर दिए. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज की गैर-मौजूदगी में अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा और आवेश खान ने तेज़ गेंदबाज़ी का बीड़ा उठाया लेकिन उनमें कमजोरी साफ़ दिखी. कृष्णा ने 13 की औसत से, अर्शदीप ने 10.6 की औसत से और आवेश खान ने 9.08 की औसत से रन खर्च किए.
इनमें से भारत का स्ट्राइक बॉलर कौन है ये पता लगाना मुश्किल रहा क्योंकि तीनों में से किसी ने भी 5 पारियों में 4 से ज्यादा विकेट नहीं लिए और रन भी खूब खर्च किए.
मुकेश कुमार की स्विंग

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इन तीनों के अलावा पेस डिपार्टमेंट में दीपक चाहर और मुकेश कुमार को भी आज़माया गया.
उन सभी में सबसे कम अनुभवी मुकेश कुमार ही सबसे परिपक्व पेसर नज़र आए और कम से कम आखिरी मैच में उनकी स्पेल ने ही भारत को एक कड़े मुकाबले में जीत दिलवाई.
चार पारियों में उन्होंने 36 की औसत और 9 की इकॉनमी से 4 सफलताएं हासिल की. बेंगलुरु में खेले गए आखिरी मैच में उन्होंने 4 ओवरों में 32 रन देकर 3 विकेट लिए जिनमें फिलीप, शॉर्ट और ड्वारशियस के विकेट शामिल रहे.
मुकेश कुमार ने इस सिरीज़ में जता दिया की मोहमम्द शमी की तर्ज पर वो टीम में एक शानदार स्विंगर की भूमिका निभा सकते हैं.
अगर उन्हें सही मौके मिले और मैनेजमेंट उन्हें लगातार सपोर्ट भी करे तो मुकेश कुमार आने वाले समय में टीम के सीनियर बॉलर की जगह ले सकते हैं.
स्पिनर्स ने दिलाया भरोसा
इस सिरीज़ में मुकेश कुमार को छोड़कर बाकी पेसर्स पिट गए लेकिन भारतीय स्पिनर्स ने टीम को हर मैच में बनाए रखा.
रवि बिश्नोई टीम के मुख्य हथियार के रूप में में उभरे और अक्षर पटेल ने भी उनका अच्छा साथ दिया.
इस सिरीज में बिश्नोई ने 18 की औसत से 9 विकेट लिए और किसी टी20 सिरीज में भारत के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले रविचंद्रन अश्विन के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
अश्विन ने सिरीज़ में 9 विकेट का ये रिकॉर्ड श्रीलंका के खिलाफ बनाया था.
बिश्नोई के पार्टनर के रूप में अक्षर पटेल ने भी बड़ी भूमिका निभाई. जहां बिश्नोई एक छोर से विकेट निकाल रहे होते, वहीं पटेल दूसरी छोर पर रन रोक रखते.
उन्होंने 4 पारियों में 20.6 की औसत से 6 विकेट लिए और उनका इकॉनमी सिर्फ़ 6.2 रन प्रति ओवर रहा जो इस सिरीज का किसी भी सफल बोलर के लिए सबसे बढ़िया इकॉनमी रही. टी20 वर्ल्ड कप के लिए इन दोनों ने भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है.
सूर्यकुमार की एक और औसत सिरीज़

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इस सिरीज़ में कप्तानी सूयर्कुमार यादव को मिली क्योंकि रोहित शर्मा को आराम दिया गया और हार्दिक पंड्या अभी भी मैच खेलने के लिए फिट नहीं हुए हैं.
पांच मैचों की सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया को 4-1 से हराना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है, खासकर तब जब कुछ दिनों पहले ही वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था.
लेकिन जीत की उपलब्धि के बावजूद सूर्यकुमार यादव खुद अपने फॉर्म से संतुष्ट शायद ही हुए हों. बीता वर्ल्ड कप भी उनकी बैटिंग की लिहाज से भुला देने वाला ही रहा और इस सिरीज़ में भी स्काई का वैसा जलवा देखने को नहीं मिला जिसके लिए वो पूरी दुनिया में मशहूर हैं.
हालांकि इस सिरीज़ में उन्होंने 28.80 की औसत से 144 रन बनाए और एक मैच में 80 रन भी बनाए. लेकिन अगर उस पारी के हटा दें तो ऐसा लगा कि सूर्या किसी दबाव में खेल रहे हों.
भारतीय फ़ैन्स जानते हैं कि सूर्यकुमार यादव टी20 में टीम के लिए कितने अहम खिलाड़ी हैं इसलिए उनकी उम्मीद होगी की वो जल्द ही अपनी बैटिंग में लग रहे जालों को हटाकर दोबारा आक्रामक क्रिकेट खेलते नज़र आएंगे.
भारतीय टीम इस सिरीज़ के बाद साउथ अफ्रीका में 3 मैचों की टी20 सिरीज़ खेलने जाएगी. सिरीज़ में 3 वनडे और 2 टेस्ट मैच भी खेले जाएंगे.
भारतीय टीम मैनजमेंट ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मिली सफलता को ध्यान में रखकर साउथ अफ्रीका में अपनी वर्ल्ड कप की टीम को लगभग पक्का कर लेना चाहेगी.
साउथ अफ्रीका की टी20आई सिरीज़ में भी रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को आराम दिया गया है और टीम की कमान एक बार फिर सूर्यकुमार यादव के हाथों में होगी.
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