वर्ल्ड कप में भारत की सुपरहिट बल्लेबाज़ी फ़ाइनल में क्यों फ़्लॉप हुई?

विराट कोहली ने 63 गेंदों में 54 रन की पारी खेली और वो पैट कमिंस की गेंद पर बोल्ड हुए

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    • Author, मोहम्मद शाहिद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

20 साल बाद इतिहास ने अपने आपको दोहराया है और क्रिकेट विश्व कप के फ़ाइनल में एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के हाथों भारत को हार मिली है.

ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर जब भारत को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए बुलाया, तो ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम एक मज़बूत लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के सामने रखेगी.

लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता गया, ओवर कम होते गए लेकिन स्कोर बोर्ड पर रन उस तेज़ी से नहीं बढ़ रहे थे.

भारतीय बल्लेबाज़ों ने पूरे 50 ओवर ज़रूर बल्लेबाज़ी की, लेकिन वो ऑस्ट्रेलिया के आगे लक्ष्य के रूप में सिर्फ़ 241 रन ही रख सके.

भारतीय टीम 50 ओवर की आख़िरी गेंद पर 240 रन पर ऑल आउट हो गई.

इस दौरान विराट कोहली (54 रन) और रोहित शर्मा (47) की ओर से ही सधी हुई बल्लेबाज़ी देखने को मिली. जबकि केएल राहुल ने भी 66 रन बनाए लेकिन इसके लिए उन्होंने 107 गेंदें खेलीं.

भारतीय बल्लेबाज़ी के समय एक वक़्त तो ऐसा भी आ गया था कि कोई बाउंड्री लगे एक घंटे से ज़्यादा का समय हो गया था.

इसी पर क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने ट्वीट करते हुए कहा था कि उन्हें नहीं याद है कि उन्होंने एक प्रतिस्पर्धा वाले वनडे मैच में आख़िरी बार 29 ओवर में एक चौका कब देखा था.

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10वें ओवर की अंतिम गेंद पर चौका श्रेयस अय्यर ने लगाया था तब भारत का स्कोर 80/2 था जबकि अगली बाउंड्री (चौका) 27वें ओवर की दूसरी गेंद पर केएल राहुल ने लगाई. उस समय भारत का स्कोर 142/3 था.

अगला चौका 39वें ओवर की आख़िरी गेंद पर लगा जब भारत का स्कोर 192/5 था.

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क्या भारत अटैकिंग नहीं खेल पाया?

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भारतीय टीम का स्कोर इतना धीमे-धीमे आगे बढ़ने को लेकर कहा जा रहा है कि भारत न ही डिफ़ेंसिव और न ही अटैकिंग क्रिकेट खेल पाया. जब-जब भी उसने अटैकिंग क्रिकेट दिखाया तो उसके बल्लेबाज़ कैच आउट होते चले गए.

मैच के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने कहा कि हमने डिफ़ेंसिव नहीं खेला.

उन्होंने कहा, “जब भी हमें लगा कि हमारी कोई जोड़ी टिकेगी तभी विकेट गिर गया. अगर 280 तक का टारगेट होता तो गेम शायद थोड़ा अलग होता. 241 रन बनाने के लिए एक अच्छी साझेदारी की ज़रूरत होती है. हम डर कर नहीं खेले, हमने 2 विकेट खोकर 80 रन बनाए थे.”

इस क्रिकेट वर्ल्ड कप को कवर कर रहे बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव कहते हैं कि फ़ाइनल में भारत की बैटिंग रोहित शर्मा को छोड़कर पूरी तरह डिफ़ेंसिव थी और इस पूरे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने कभी भी डिफ़ेंसिव क्रिकेट नहीं खेला था जो बैकफ़ायर कर गया.

नितिन कहते हैं कि भारत के जैसे ही तीन विकेट गिर गए वैसे ही वो दबाव में आ गया और जब भी कोई बल्लेबाज़ अटैकिंग क्रिकेट खेलना शुरू करता था तो वो आउट हो जाता था.

वहीं वरिष्ठ खेल पत्रकार आदेश कुमार गुप्त भारतीय टीम की नाकाम बल्लेबाज़ी के लिए उसका अफ़रा-तफ़री में अटैकिंग खेल खेलने को ज़िम्मेदार बताते हैं.

वो कहते हैं, “ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ों ने विकेट टू विकेट गेंदबाज़ी की और किसी भी बल्लेबाज़ को खुलकर खेलने का मौक़ा नहीं दिया. यही वजह थी कि जैसे ही स्कोरबोर्ड पर रनों की रफ़्तार कम हुई तो अफ़रा-तफ़री में भारतीय बल्लेबाज़ों ने आक्रामक खेलने की कोशिश की जिससे उनके विकेट गिरे.”

सवा लाख लोगों के शोर से दबाव में आ गए बल्लेबाज़

कप्तान रोहित शर्मा ने 31 गेंदों में 47 रन बनाए

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कहा जा रहा था कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में सवा लाख दर्शकों के आगे ऑस्ट्रेलिया दबाव में होगा और भारत इसका फ़ायदा उठाएगा.

क्योंकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इसी स्टेडियम में खेलते हुए घरेलू दर्शकों के उत्साह के आगे भारतीय टीम ने दबाव से निकलते हुए पाकिस्तान के ख़िलाफ़ शानदार जीत दर्ज की थी.

हालांकि, उस मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला किया था और पाकिस्तान को 191 रनों पर ऑल आउट कर दिया था.

इसके बाद भारत ने 31 ओवरों में तीन विकेट गँवाकर मैच जीत लिया था. उस मैच में रोहित शर्मा ने 86 और श्रेयस अय्यर ने 53 रनों की पारी खेली थी.

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव कहते हैं, “पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत ने लीग मैच में जीत दर्ज की थी लेकिन ये फ़ाइनल मैच था. और इसमें घरेलू टीम पर भी दबाव होता है. मैनचेस्टर यूनाइटेड जब ओल्ड ट्रैफ़र्ड में खेलती है तो ऐसा नहीं है कि वो वहाँ की भीड़ के शोर से जीत जाती है. फ़ाइनल के प्रेशर को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए था.”

“जिन लोगों से परफ़ॉर्मेंस की उम्मीद थी वो नहीं चल पाए. जैसे कि पिछले मैच (सेमीफ़ाइनल) में गिल ने 80 रन बनाए, श्रेयस अय्यर ने लगातार दो सेंचुरी बनाई लेकिन विराट कोहली और रोहित शर्मा के अलावा भारतीय बल्लेबाज़ी कभी भी एक जैसी नहीं रही.”

फ़ाइनल से पहले वर्ल्ड कप के लगातार 10 मैचों में भारत ने जीत हासिल की थी.

इस दौरान देखने को मिला कि रोहित शर्मा बल्लेबाज़ी में तेज़ी लाते थे और फिर विराट कोहली रन गति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते थे लेकिन मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाज़ी कभी भी एक जैसी नहीं रही.

श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव जैसे मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज़ अलग-अलग मैचों में ही चल पाए.

पिच की वजह से नहीं कर पाए बल्लेबाज़ी

ग्राफ़िक्स

मैच से पहले पिच को लेकर भी बहुत सारे अनुमान लगाए जा रहे थे. कहा जा रहा था कि पिच बेहद धीमी है और उसी के हिसाब से भारतीय बल्लेबाज़ों ने बेहद संभलकर खेलना शुरू कर दिया.

उस पिच पर ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर्स और तेज़ गेंदबाज़ों ने भारतीय बल्लेबाज़ों को दबाव में ला दिया.

नितिन कहते हैं कि भारतीय बल्लेबाज़ों ने पिच पर संभलकर खेलना शुरू किया लेकिन उसी पिच पर तीन विकेट गिरने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ों ने बेहद बेबाक क्रिकेट खेली और ऐसा देखकर लगता है कि भारत ने जिस भी डिपार्टमेंट की स्ट्रैटेजी बनाई वो चली नहीं. और किसी न किसी मैच में ऐसा होता भी है.

“ऑस्ट्रेलिया ने भारत को ड्रॉइंग बोर्ड पर घेर लिया था. उनके गेंदबाज़ों ने पिच के बारे में सोचे बिना विकेट टू विकेट बॉल की. उन्होंने मिडिल और ऑफ़ पर बॉल की और हर बल्लेबाज़ को उसकी कमज़ोरी के हिसाब से गेंदबाज़ी की. जैसे रोहित शर्मा को स्पिनर बॉल लॉफ़्ट करा रहा था ताकि वो उठाकर मारें और सूर्यकुमार यादव को बाउंस बॉल मारी ताकि वो हुक करें क्योंकि वो उनकी कमज़ोरी है. दोनों बल्लेबाज़ इसी तरह से कैच आउट हुए.”

कोहली

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“ऑस्ट्रेलिया ने रणनीति के हिसाब से गेंदबाज़ी की जिससे भारत की बल्लेबाज़ी नहीं चल सकी. ऑस्ट्रेलिया के लिए लक्ष्य कम था लेकिन उन्होंने विकेट गिरने के बावजूद भी अटैकिंग क्रिकेट खेलना छोड़ा नहीं जबकि भारत के विकेट गिरने के बाद बाउंड्री ही लगना बंद हो गई थी.”

आदेश कुमार गुप्त पिच को लेकर कहते हैं कि अगर आपकी टीम में बेहद आक्रामक बल्लेबाज़ हैं तो धीमी पिच पर उनके आउट होने की गुंजाइश बेहद ज़्यादा हो जाती है.

वो कहते हैं, “भारतीय टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव बेहद आक्रामक बल्लेबाज़ हैं. जब गेंद उछाल के साथ जल्दी या तेज़ आती है तो आक्रामक बल्लेबाज़ों को आसानी होती है लेकिन जब गेंद स्लो होती है तो बल्लेबाज़ को फ़ुट वर्क का इस्तेमाल करना होता है और यहीं भारतीय बल्लेबाज़ों से चूक हुई.”

“इसके उलट ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने बेहद ठंडे दिमाग़ से बल्लेबाज़ी करते हुए मौक़ा मिलने पर अच्छी बाउंड्री लगाई. डेविड वॉर्नर ने तेज़ी दिखाई जिसकी वजह से वो मोहम्मद शमी की पहली गेंद पर आउट हो गए. जिस भी बल्लेबाज़ ने पिच के मिज़ाज के विपरीत शॉट खेलने की कोशिश की वो आउट हो गया.”

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