महादेव बेटिंग ऐप क्या है, जिस मामले में रणबीर कपूर हैं ईडी के रडार पर

रणबीर कपूर

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के कार्यालय के ठीक सामने, सड़क के दूसरी ओर फलों का रस बेचने वाली एक छोटी-सी दुकान है, जिसका नाम है-जूस फ़ैक्ट्री.

कुछ साल पहले भिलाई में इस नाम की पहली दुकान खोली गई थी, जिसके मालिक का नाम था सौरभ चंद्राकर.

अब ईडी 28 साल के इसी सौरभ चंद्राकर को पिछले कई महीनों से तलाश रही है.

भिलाई शहर के रहने वाले सौरभ पर अपने एक साथी रवि उप्पल के साथ ‘महादेव गेमिंग-बेटिंग’ नामक ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप का दुबई से संचालन करने का आरोप है, जिसका सालाना कारोबार 20 हज़ार करोड़ से अधिक का बताया जाता है.

इसी सिलसिले में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय ने अभिनेता रणबीर कपूर को पूछताछ के लिए बुलाया है.

ईडी के एक अधिकारी के अनुसार, फ़िल्म इंडस्ट्री के कम से कम दो दर्जन शीर्ष कलाकारों को आने वाले दिनों में पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.

ईडी की रेड

महादेव ऐप

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ईडी इस मामले में देश के कई शहरों में छापामारी कर चुकी है और कई सौ करोड़ की संपत्ति बरामद कर चुकी है.

पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के क़रीबी लोगों समेत सैकड़ों लोगों से पूछताछ जारी है.

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प्रवर्तन निदेशालय की जाँच के दायरे में शीर्ष पुलिसकर्मी हैं, नौकरशाह हैं, फ़िल्म इंडस्ट्री के बड़े लोग हैं, राजनेता हैं, समाजसेवी हैं, मीडियाकर्मी हैं और तरह-तरह के दलाल हैं.

हालाँकि सौरभ के वकीलों का दावा है कि महादेव ऐप के संचालन से सौरभ चंद्राकर का कोई लेना-देना नहीं है.

वह तो महज़ एक जूस सेंटर का संचालन करते रहे हैं, जिसकी एक से बढ़ कर 25 जूस सेंटर तक पहुँचने की सफलता की एक बड़ी ‘प्रेरणादायक’ कहानी है.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि चुनावी साल में उनके क़रीबी लोगों को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि अगर केंद्रीय एजेंसियाँ और केंद्र सरकार इस ऑनलाइन सट्टा के ऐप को लेकर गंभीर है तो वह इस ऑनलाइन ऐप को ब्लॉक करने की पहल क्यों नहीं कर रही हैं? इसे बंद करना तो अंततः केंद्र सरकार के हाथ में है.

लेकिन विपक्षी दल भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री का इस ऐप का संचालन करने वालों से कोई न कोई रिश्ता ज़रूर है.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने बीबीसी से कहा, "ईडी अगर कार्रवाई कर रही है और मुख्यमंत्री निर्दोष हैं तो भला उन्हें विचलित होने की क्या ज़रूरत है? ईडी की कार्रवाई से होने वाली उनकी बौखलाहट बताती है कि कोई न कोई बात ज़रूर है, जिससे वे डरे हुए हैं. अभी तो जाँच चल ही रही है. मुख्यमंत्री अगर सही हैं, तो उन्हें जाँच एजेंसी को मदद करनी चाहिए."

भिलाई से दुबई तक का सफ़र

छत्तीसगढ़

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छत्तीसगढ़ का भिलाई अपने इस्पात संयंत्र के लिए पूरे देश में चर्चित रहा है. इसी भिलाई के केएच मेमोरियल स्कूल से पढ़ाई करने वाले सौरभ चंद्राकर ने नगर निगम में काम करने वाले अपने पिता के पैसों से भिलाई में जूस की एक दुकान की शुरुआत की.

भिलाई पुलिस का दावा है कि जूस का कारोबार चलाने के दौरान सौरभ चंद्राकर ने सट्टा बाज़ार में हाथ-पैर मारना शुरू किया.

स्थानीय स्तर पर कुछ साथियों के साथ सट्टा का काम करते हुए उसे दक्षिण भारत के रेड्डी अन्ना की जानकारी हुई.

इसके बाद सौरभ ने अपने भिलाई के ही साथी रवि उप्पल के साथ मिल कर ऑनलाइन सट्टा ऐप की शुरुआत की.

किसी ज़माने में भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करने वाले एक शीर्ष अफ़सर के बेटे रवि उप्पल के साथ ने सौरभ चंद्राकर के धंधे को एक नई ऊँचाई दी.

इस कारोबार में कई साथी जुड़ते चले गए. आरोप है कि बड़ी संख्या में राज्य के कई पुलिसकर्मियों ने न केवल इस धंधे को संरक्षण दिया, बल्कि इस कारोबार का हिस्सा भी बन गए.

ईडी के अनुसार 2019 में सौरभ और रवि ने अपना पूरा कारोबार दुबई से संचालित करना शुरू किया. इसके लिए सैकड़ों की संख्या में छत्तीसगढ़ के लोगों को दुबई में नौकरी दी गई.

महादेव बुक

छत्तीसगढ़

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इधर ‘महादेव बुक’ से कुछ ही महीनों के भीतर 12 लाख से अधिक सट्टेबाज़ जुड़ गए, जिसका एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ का था.

इस कारोबार को बढ़ाने में सोशल मीडिया की सबसे बड़ी भूमिका रही. सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार करके दुनिया के कई देशों में इसके ग्राहक बनाए गए.

छत्तीसगढ़ में तो बड़ी संख्या में लोग इस ऐप की आईडी और पासवर्ड बेचने के काम में जुट गए.

इस आईडी और पासवर्ड के सहारे क्रिकेट से लेकर चुनाव तक में सट्टा लगाया जाने लगा और हज़ारों की संख्या में खोले गए तरह-तरह के बैंक अकाउंट के ज़रिए सारा लेन-देन होता रहा.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में 2020 में ‘महादेव ऐप’ का कारोबार दिन-दोगुना, रात-चौगुना रफ़्तार से आगे बढ़ा.

जब बिना दर्शकों के आईपीएल क्रिकेट की शुरुआत हुई तो महादेव ऐप पर दो हज़ार करोड़ से अधिक की सट्टेबाज़ी हुई.

इस धंधे की कमाई से कुछ फ़िल्मों में भी निवेश हुआ. बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध नृत्य निदेशक के अभिनय वाली एक फ़िल्म में सौरभ के भाई के भी पैसे लगे. इसके अलावा होटल के कारोबार में भी कुछ करोड़ लगाए गए.

एक शीर्ष अधिकारी ने बीबीसी को बताया, “फरवरी 2020 में आयकर विभाग ने छत्तीसगढ़ में कई नौकरशाहों और राजनेताओं के घर छापा मारा, उसी समय महादेव ऐप की चर्चा सामने आई. लेकिन जब दुबई में हाई प्रोफ़ाइल पार्टियाँ शुरू हुईं और छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में लोगों का उन पार्टियों में जाने का सिलसिला शुरू हुआ, तो प्रवर्तन निदेशालय ने इस ओर ध्यान दिया. जब ईडी ने महादेव ऐप को लेकर आरंभिक जाँच शुरू की तो छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी. बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ़्तार किया जाने लगा.”

लेकिन ‘महादेव ऐप’ के ख़िलाफ़ होने वाली कार्रवाई की सच्चाई ये है कि अख़बारों में एक तरफ़ ऑनलाइन जुआ सट्टा को लेकर चेतावनी देती पुलिस की विज्ञप्ति छप रही थी, इससे जुड़े एजेंटों की गिरफ़्तारी की ख़बरें छप रही थी, वहीं दूसरी ओर रायपुर के शीर्ष अख़बार में इस ऐप के आधे-आधे पन्ने के विज्ञापन छप रहे थे.

जानकार बताते हैं कि एक तरफ़ सौरभ और रवि से जुड़े लोगों द्वारा ही महादेव ऐप से संबंधित जानकारियाँ पुलिस को साझा की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर पुलिस से बचाने के नाम पर इसके संचालकों से लाखों की वसूली हो रही थी.

इन सारी कार्रवाइयों के बीच सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के अधिकांश परिजन धीरे-धीरे भारत छोड़ कर दुबई शिफ़्ट होते चले गए.

शादी, बॉलीवुड और हवाला

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ईडी ने इसी साल अगस्त में मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित क़ानून के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक उप निरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, हवाला ऑपरेटर अनिल दम्मानी और सुनील दम्मानी को गिरफ़्तार करने के बाद पहली बार महादेव ऐप से संबंधित मामलों की जानकारी साझा की.

इसके बाद पिछले महीने की 15 तारीख़ को एक बयान में ईडी ने कहा कि कोलकाता, भोपाल, मुंबई समेत 39 शहरों में छापामारी कर 417 करोड़ नक़दी, संपत्ति और दूसरे प्रमाण जब्त किए हैं.

ईडी ने दावा किया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की मेसर्स महादेव ऑनलाइन बुक, संयुक्त अरब अमीरात में एक केंद्रीय प्रधान कार्यालय से चलती है और 70:30 के लाभ अनुपात पर अपने ज्ञात सहयोगियों को ‘पैनल/शाखाओं’ की फ्रेंचाइजी देकर संचालित होती है.

ईडी के अनुसार सट्टेबाज़ी से होने वाली आय को विदेशी खातों में भेजने के लिए बड़े पैमाने पर हवाला ऑपरेशन किए जाते हैं. इसके साथ ही भारत में सट्टेबाज़ी वेबसाइटों के विज्ञापन के लिए बड़े पैमाने पर नगद ख़र्च भी किया जा रहा है.

अपनी विज्ञप्ति में ईडी ने दावा किया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने संयुक्त अरब अमीरात में अपने लिए एक साम्राज्य बना लिया है.

उनके द्वारा अचानक आए अवैध धन का खुल कर प्रदर्शन किया जा रहा है.

फरवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर ने संयुक्त अरब अमीरात के रास अल-खैमा में शादी की और आरोप है कि इस शादी समारोह के लिए महादेव ऐप के प्रमोटरों ने लगभग 200 करोड़ रुपए नकद ख़र्च किए.

परिवार के सदस्यों को नागपुर से संयुक्त अरब अमीरात तक ले जाने के लिए प्राइवेट जेट किराए पर लिए गए. शादी में मशहूर हस्तियों को बुलाया गया था.

शादी समारोह का प्रबंधन देखने वाले, नर्तक, सजावट करने वालों को मुंबई से बुलाया गया था. आरोप है कि इन सबको नक़द भुगतान के लिए हवाला संपर्कों का उपयोग किया गया था.

इस मामले में डिजिटल सबूत जुटाने का दावा करते हुए ईडी ने कहा कि योगेश पोपट की मेसर्स आर-1 इवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को हवाला के ज़रिए, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा दिरहम में 112 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए गए और 42 करोड़ रुपए होटल बुकिंग भुगतान के लिए दिए गए.

ईडी ने पोपट, मिथिलेश और इससे जुड़े अन्य आयोजकों की तलाशी में 112 करोड़ रुपए की हवाला के लेन-देन से संबंधित सबूत इकट्ठा करने का दावा किया है. इसके अलावा योगेश पोपट की निशानदेही पर 2.37 करोड़ की बेहिसाब नकदी बरामद की गई.

चर्चित हस्तियाँ महादेव ऐप के साथ

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सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के कारोबार को लेकर ईडी ने दावा किया कि कई चर्चित हस्तियाँ, इन सट्टेबाज़ी संस्थाओं का समर्थन कर रही हैं और इस काम के बदले, संदिग्ध लेन-देन के रुप में मोटी रकम प्राप्त कर रही हैं.

लेकिन ये भुगतान ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की कमाई से ही किया जाता है.

ईडी ने भोपाल के धीरज आहूजा और विशाल आहूजा की मेसर्स रैपिड ट्रैवल्स की तलाशी में पाया कि यह कंपनी महादेव ऐप के प्रमोटरों, परिवार, इस धंधे के सहयोगियों और उन सभी चर्चित हस्तियों के लिए टिकट कराने का काम करती थी, जो फ़ेयरप्ले डॉट कॉम, रेड्डी अन्ना ऐप, महादेव ऐप जैसी सट्टेबाज़ी वेबसाइटों को समर्थन दे रहे थे.

महादेव ऐप के मनी लॉंन्ड्रिंग के धंधे में शामिल लोगों की पहचान करने का दावा करते हुए ईडी ने कहा कि कोलकाता का विकास छापरिया, महादेव ऐप के सारे हवाला कारोबार को संभाल रहा था.

ईडी ने उनके ठिकानों के साथ-साथ उनके सहयोगियों के ठिकानों की भी तलाशी ली और पाया कि छापरिया ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के साथ-साथ मेसर्स टेकप्रो आईटी सॉल्यूशंस एलएलसी, मेसर्स परफेक्ट प्लान इंवेस्टमेंट्स एलएलपी और मेसर्स एक्ज़िम जनरल ट्रेडिंग एफजेडसीओ जैसी अपनी संस्थाओं के जरिए, भारतीय शेयर बाज़ार में भारी निवेश किया.

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ईडी का कहना है कि उसकी जाँच जारी है.

चुनावी साल में, छत्तीसगढ़ के इस सबसे बड़े ऑनलाइन अपराध की जाँच की दिशा और दशा जो भी हो, हर दिन भिलाई से लेकर रायपुर तक अफ़वाहें तैरती रहती हैं.

किसी दिन इन अफ़वाहों में किसी तेज़ तर्रार आईपीएस के दबोचे जाने की ख़बर आती है तो किसी दिन सिंगापुर में जा कर इस धंधे में पार्टनर बनने की कथित पेशकश करने वाले विधायक के भाई की गिरफ़्तारी की अफवाह सामने आती है.

सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके परिजनों के श्रीलंका से लेकर मलेशिया तक में देखे जाने का दावा करने वालों की भी कहीं कोई कमी नहीं है.

नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर भिलाई के एक कारोबारी कहते हैं-इस मामले में कई लोगों के ख़िलाफ़ साफ़-साफ़ सबूत हैं. राज्य की पुलिस के पास भी और ईडी के पास भी.

जाने वो किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं. कई बार तो लगता है कि इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता, बस इस मुद्दे को कुछ दिन फ़ाइलों और ख़बरों में ज़िंदा रखने की कोशिश हो रही है. इसके बाद सब कुछ शांत हो जाएगा.

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