सिसोदिया की ग़ैर-मौजूदगी में केजरीवाल कैसे चलाएँगे दिल्ली की सरकार?

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पाँच दिन ( 4 मार्च तक) की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है.
साल 2021 में लाई गई शराब नीति में कथित घोटाले के आरोप में सीबीआई ने रविवार को घंटों चली पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.
सिसोदिया दिल्ली सरकार में कितने शक्तिशाली मंत्री हैं, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 33 में से 18 सरकारी विभाग का कामकाज मनीष सिसोदिया ही देखते हैं.
आम आदमी पार्टी पर नज़र रखने वाले लोग कहते हैं कि सिसोदिया के होने से ही अरविंद केजरीवाल के लिए ये मुमकिन हो पाया कि वह पार्टी को दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में ला जा सके और इसके विस्तार पर फ़ोकस कर पाए.
नियमों के मुताबिक़ दिल्ली में सात ही मंत्री हो सकते हैं, यानी मुख्यमंत्री को छोड़ कर छह मंत्री कैबिनेट का हिस्सा होते हैं.
सिसोदिया के अलावा गोपाल राय के पास तीन पोर्टफ़ोलियो, इमरान हुसैन के पास दो, राजकुमार आनंद के पास चार और कैलाश गहलोत के पास छह विभाग हैं.
जब पिछले साल मई में सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी हुई तो अरविंद केजरीवाल ने उनकी जगह नया मंत्री नियुक्त करने के बजाय सत्येंद्र जैन के मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी भी मनीष सिसोदिया को सौंप दी थी.
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18 विभागों की ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
ऐसे में 18 विभागों का काम देखने वाले सिसोदिया को अगर लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा तो अरविंद केजरीवाल के लिए उनकी ग़ैर-मौजूदगी कितनी मुश्किल खड़ी करेगी? क्या केजरीवाल कोई नया चेहरा मंत्री पद के लिए चुनेंगे?
इस सवाल पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और पत्रकार अशुतोष कहते हैं, "मनीष सिसोदिया का दिल्ली सरकार में बड़ा पोर्टफ़ोलियो होने से भी ज़्यादा अहम है कि वह भ्रष्टाचार विरोधी 'अन्ना आंदोलन' को अरविंद केजरीवाल के साथ खड़ा करने वालों में शामिल थे.
सिसोदिया एंटी-करप्शन मुहिम के पर्याय हैं और उनका नाम भ्रष्टाचार के केस में सामने आना आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी करने वाली बात तो है."
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उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आम आदमी पार्टी के पास बेहतर विधायक हैं जो इन विभागों को देख सकते हैं. अरविंद केजरीवाल अपने विधायकों को सुपरवाइज़ करके सरकार का काम तो चला ही सकते हैं.
लेकिन एक अहम बात ये है कि सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी के बाद से अब तक सरकार से उनका इस्तीफ़ा नहीं हुआ है, अगर सिसोदिया को जैन की तरह लंबे वक़्त तक ज़मानत नहीं मिलती है, तो अरविंद केजरीवाल को उनका विभाग किसी विधायक को देना ही होगा, नहीं तो दिल्ली रुक जाएगी.
वैसे ही दिल्ली में एलजी और मुख्यमंत्री के बीच पहले ही कई मामलों को लेकर गतिरोध बना हुआ है."
दिल्ली और आम आदमी पार्टी की राजनीति को लंबे वक़्त से कवर करने वाले पत्रकार मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सरकार में कोई मंत्रालय अपने पास नहीं रखा है और वो पार्टी की राजनीति और विस्तार पर केंद्रित रह पाते हैं और इसके पीछे बड़ी वजह है दिल्ली सरकार में मनीष सिसोदिया का होना.
दिल्ली सरकार जिस शिक्षा के मॉडल को विश्व स्तरीय बताती है, वो मनीष सिसोदिया का बनाया हुआ है. यहाँ तक कि उनके पास वित्त, रोज़गार, स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालय की भी ज़िम्मेदारी है.
मुश्किलें
तो क्या इस गिरफ़्तारी का अगले साल होने वाले हरियाणा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की तैयारियों पर असर पड़ेगा?
इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार और दिल्ली की राजनीति को क़रीब से समझने वाले प्रमोद जोशी कहते हैं, "अतीत में हमने देखा है कि अगर किसी व्यक्ति को या पार्टी को टारगेट किया गया है तो इससे कभी दूसरी पार्टी को कोई फ़ायदा नहीं होता.
तमाम कोशिशों के बावजूद एमसीडी चुनाव में बीजेपी को हार मिली. मुझे नहीं लगता कि वर्तमान में जो हो रहा है उससे बीजेपी को कोई राजनीतिक लाभ होने वाला है. बीजेपी या किसी भी पार्टी को फ़ायदा तब होगा, जब इस मामले में मनीष सिसोदिया पर आरोप सिद्ध हों या सीबीआई की ओर से कोई पुख़्ता सबूत पेश कर दिया जाए."
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उन्होंने कहा, "जिन लोगों की गिरफ़्तारी आबकारी मामले में हुई है उनके और मनीष सिसोदिया के बीच पैसों का लेनदेन साबित हो जाता है, तो ही इसका राजनीतिक लाभ बीजेपी या किसी पार्टी को मिलेगा."
दिल्ली सरकार के पास एक बड़ा चैलेंज ये भी है कि इस मार्च में होने वाला बजट कौन पेश करेगा?
साल 2015 से दिल्ली सरकार का बजट मनीष सिसोदिया ही पेश कर रहे हैं.
ऐसे में ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या ख़ुद केजरीवाल बजट पेश करेंगे या कोई मौजूदा मंत्री इसकी ज़िम्मेदारी उठाएगा या फिर एक नया चेहरा दिल्ली सरकार आगे करेगी.
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प्रतिक्रिया
मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी के बाद कई राजनीतिक पार्टियाँ आम आदमी पार्टी के समर्थन में खड़ी हुई हैं.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी को विपक्ष को डराने की कोशिश बताया है.
सीपीआई(एम) ने भी बयान जारी कर रहा है कि बीजेपी सरकार केंद्रीय एजेंसियों को एक हथियार की तरह विपक्ष के खिलाफ़ इस्तेमाल कर रही है.
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा- दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले मनीष सिसोदिया जी को गिरफ़्तार करके भाजपा ने साबित कर दिया है कि भाजपा शिक्षा ही नहीं बल्कि दिल्ली के बच्चों के भविष्य के ख़िलाफ़ भी है. दिल्ली की जनता इसका जवाब अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को सातों सीटें हराकर देगी.
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आशुतोष कहते हैं- ये स्वयं सिद्ध है कि केंद्र सरकार हर उस आवाज़ को दबा रही है जो उसके ख़िलाफ़ है. आज देखिए कि अदानी पर इतने गंभीर आरोप लगे क्या इस सरकार की कोई एजेंसी चाहे ईडी हो, इनकम टैक्स हो या फिर सीबीआई समूह के किसी दफ़्तर पर जाँच करने पहुँची? नहीं.
पवन खेड़ा ने इतना बड़ा क्या बोल दिया कि उन्हें फ़्लाइट से उतार कर गिरफ़्तार किया गया, लेकिन अदानी समूह के किसी दफ़्तर पर सरकार की कोई जाँच एजेंसी नहीं गई. इतने सालों में किसी ने नहीं सुना कि कोई केंद्रीय एजेंसी बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ इस्तेमाल की गई हो. जहाँ हुई हैं, वहाँ कोर्ट के आदेश के बाद एजेंसियों को जाँच की ज़िम्मेदारी मिली है."
सोमवार को दिल्ली, चंडीगढ़ और भुवनेश्वर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे.
आशुतोष कहते हैं, "आम आदमी पार्टी के इतने बड़े क़द का नेता गिरफ्तार किया गया है, लेकिन आज दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन बहुत बड़ा नहीं दिखता. आंदोलन से पैदा हुई इस पार्टी ने 'अन्ना आंदोलन' जब किया, तो उस वक़्त मनमोहन सिंह कि सरकार थी, आंदोलन करना इतना मुश्किल नहीं था, लेकिन आज मोदी सरकार की पुलिस है और प्रदर्शन करना बहुत मुश्किल हो चुका है."

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आशुतोष मानते है कि ऐसे वक़्त में अरविंद केजरीवाल को विपक्ष के नेताओं को साथ में लेना चाहिए.
वह कहते हैं, "उन्हे ये समझना होगा कि अकेले आम आदमी पार्टी बीजेपी को टक्कर नहीं दे सकती और ये तभी मुमकिन है जब अरविंद केजरीवाल अखिलेश यादव, केसीआर, ममता बनर्जी सहित प्रमुख नेताओं को अपने साथ लाएँ."
प्रमोद जोशी मानते हैं कि सिसोदिया के ख़िलाफ़ क्या-क्या सबूत सीबीआई सामने लाएगी, इससे तय होगा कि मामला केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को कितना नुक़सान पहुँचा पाएगा.
फ़िलहाल केजरीवाल के लिए एक ऐसा शख़्स खोजना, जो सिसोदिया की तरह दिल्ली सरकार की ज़िम्मेदारी संभाल सके, ये एक बड़ी चुनौती है.
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