राजस्थान में परिवर्तन यात्रा से पार्टी के अंदर और बाहर किन समीकरणों को साध रही है बीजेपी

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इमेज कैप्शन, राजस्थान में परिवर्तन यात्रा के दौरान बीजेपी सांसद मनोज तिवारी
    • Author, कमलेश मठेनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उदयपुर से

राजस्थान की उदयपुर सिटी में मंच सजा है और बीजेपी के बैनर पोस्टर के साथ लोग जैसे किसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.

फिर पता चलता है कि यहाँ दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी आ रहे हैं.

मनोज तिवारी अक्सर दिल्ली और यूपी में बीजेपी के प्रचार कार्यक्रम में नज़र आते हैं.

लेकिन, उनका उदयपुर में होना थोड़ा हैरान करने वाला था.

मनोज तिवारी नौ सितंबर को उदयपुर सिटी में बीजेपी की ‘परिवर्तन यात्रा’ का नेतृत्व करने वाले थे और इससे पहले उन्हें एक जनसभा को संबोधित करना था.

देर रात क़रीब 10 बजे वो मंच पर आए और राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर कई ज़ुबानी हमले किए.

उन्होंने कहा कि जनता अब कांग्रेस से ऊब चुकी है.

अगले कुछ महीनों में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी-कांग्रेस यात्राओं और रैली के ज़रिए जनता तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं.

बीजेपी राजस्थान में चार दिशाओं से ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाल रही है.

पहली यात्रा- दो सितंबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सवाईमाधोपुर में त्रिनेत्र मंदिर से शुरू की.

दूसरी यात्रा- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन सितंबर को आदिवासी बहुल बेणेश्वर धाम से शुरू की. ये इलाक़ा बांसवाड़ा ज़िले में आता है.

तीसरी यात्रा- रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर के रामदेवरा से हरी झंडी दिखाई.

चौथी यात्रा- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हनुमानगढ़ी ज़िले के गोगामड़ी मंदिर से यात्रा की शुरुआत की.

ये यात्राएँ नौ हज़ार किमी का सफ़र तय करेंगी और लगभग हर विधानसभा से होकर निकलेंगी.

चारों दिशाओं से होते हुए यात्राएँ जयपुर पहुँचेंगी और वहाँ पीएम मोदी एक जनसभा को संबोधित करेंगे.

परिवर्तन यात्रा के पीछे की रणनीति

बीजेपी की परिवर्तन यात्रा

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बीजेपी की परिवर्तन यात्रा को जानकार राजस्थान में अहम सीटों और जातीय समीकरणों का मेल बता रहे हैं.

इस यात्रा को क़रीब से देखें, तो इसमें बीजेपी की रणनीति और अंदरूनी टकराव भी साफ़ नज़र आते हैं.

पहली परिवर्तन यात्रा में सवाई माधोपुर के ज़रिए बीजेपी पूर्वी राजस्थान को साधना चाहती है.

इस सीट पर पिछली बार कांग्रेस के दानिश अबरार ने जीत हासिल की थी. यहां पर लंबे समय से एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस जीत रही है.

वहीं, बांसवाड़ा की बात करें तो ये आदिवासी बहुल इलाक़ा है. आदिवासियों के तीर्थ स्थल बेणेश्वर धाम में पीएम मोदी भी जनसभा कर चुके हैं.

मेवाड़ के नज़दीक वागड़ में आने वाले इस इलाक़े में कुल 11 सीटें आती हैं. इन सीटों का प्रभाव मेवाड़ की आदिवासी सीटों पर भी पड़ता है.

राजस्थान की राजनीति में कहा जाता है कि जो मेवाड़ जीत गया, वो राजस्थान जीत गया है.

मेवाड़ और वागड़ में कुल 33 सीटें हैं जिनमें से 16 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं.

यहाँ आदिवासियों को कांग्रेस का समर्थक वर्ग भी कहा जाता है. ऐसे में बीजेपी आदिवासियों का विश्वास हासिल कर पूरे मेवाड़ को साधने की कोशिश कर रही है.

जैसलमेर और हनुमानगढ़

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जैसलमेर के रामदेवरा की बात करें, तो इस मंदिर के दर्शन के लिए राजस्थान ही नहीं बल्कि गुजरात और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं.

राजस्थान में सड़कों पर कोई ना कोई रामदेवरा के झंडे लिए आसानी से दिख जाता है.

वहीं, जैसलमेर सीमावर्ती इलाक़ा है और राजपूत बहुल है. इसके ज़रिए बीजेपी की पश्चिमी राजस्थान पर नज़र है.

जैसलमेर सीट पर बीजेपी 2003, 2008 और 2013 में लगातार चुनाव जीती है लेकिन पिछली बार कांग्रेस ने बीजेपी से ये सीट छीन ली थी.

उत्तरी राजस्थान में हनुमानगढ़ ज़िला पंजाब और हरियाणा से लगता है.

यहाँ किसान आंदोलन का भी असर रहा था. यहाँ पर एमएसपी और भाखड़ा नहर के पानी को लेकर किसान धरना प्रदर्शन करते रहे हैं.

यहाँ लोक देवता गोगाजी महाराज का समाधि स्थल है. उन्हें वीर योद्धा और गौभक्त कहा जाता है.

ये सीट कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के पास रही है लेकिन उत्तरी राजस्थान में बीजेपी अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है.

बीजेपी की हर यात्रा की शुरुआत किसी मंदिर या धाम से हो रही है. इसे भी जानकार एक संकेत की तरह मानते हैं.

राजस्थान की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में मास कम्यूनिकेशन के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर कुंजन आचार्य कहते हैं, ‘‘वैसे तो ईश्वर को स्मरण करते हुए किसी कार्यक्रम की शुरुआत करना भारतीय परंपराओं में शामिल है. हर पार्टी ऐसा करती दिखती है. लेकिन जैसे कि बीजेपी का चेहरा हिंदुत्ववादी है तो मंदिरों से शुरुआत करना उसका एक आध्यात्मिक पक्ष भी है और एक संदेश देने की कोशिश भी है कि हम आपके साथ हैं. हम एक ऐसे भारतीय और हिंदुत्ववादी चेहरे को लेकर चल रहे हैं जो कहीं ना कहीं विजय दिलाएगा.’’

वसुंधरा राजे और परिवर्तन यात्रा

वसुंधरा राजे

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बीजेपी राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा’ निकालती रही है, जिसे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हरी झंडी दिखाती थीं.

लेकिन, इस बार बीजेपी चार परिवर्तन यात्राएँ निकाल रही है, जिनमें केंद्रीय मंत्रियों की भरमार है.

इसे राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे को किनारे करने की रणनीति भी माना जा रहा है.

हालाँकि, बीजेपी वसुंधरा राजे के बिना भी राजस्थान के चुनाव में उतरना नहीं चाहती है.

इसके लिए हर परिवर्तन यात्रा में वसुंधरा राजे ने जनता को संबोधित किया है.

पर टकराव साफ़ नज़र आता है क्योंकि बीजेपी की परिवर्तन यात्रा से ठीक पहले वसुंधरा राजे ने धार्मिक यात्रा निकाल दी थी.

उदयपुर के वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र शर्मा कहते हैं बीजेपी नहीं चाहती कि राज्य में कोई भी चेहरे के तौर पर सामने आए.

वह कहते हैं, ‘‘बीजेपी और कांग्रेस में चेहरे का संकट चल रहा है. कांग्रेस में दो चेहरों का संघर्ष है और बीजेपी में कई चेहरों का. इसकी वजह है कि इस बार बीजेपी ने वसुंधरा राजे को किनारे कर दिया है.’’

‘‘केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान में नया चेहरा चाहता है लेकिन चुनाव जीतने तक वो किसी को पूरी तरह नाराज़ भी नहीं करना चाहता. इसलिए वसुंधरा राजे को भी महत्व दिया जा रहा है.’’

वहीं, कुंजन आचार्य कहते हैं, ‘‘बहुत जल्दी आचार संहिता लगने वाली है. ऐसे में बीजेपी चाहती है कि जितना जल्दी हो सके राजस्थान कवर हो जाए ताकि पार्टी की सक्रियता दिखाई जा सके.’’

साथ ही कुंजन आचार्य का ये भी मानना है कि बीजेपी वसुंधरा राजे से किनारा नहीं कर सकती. अगर ऐसा करना है तो राजस्थान में उनसे बड़े चेहरे की ज़रूरत होगी.

फ़्री की रेवड़ी या सहायता

परिवर्तन यात्रा के लिए उदयपुर पहुंचे बीजेपी सांसद मनोज तिवारी

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उदयपुर सिटी से जब ट्रक रूपी रथ पर सवार मनोज तिवारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी निकले तो बाइक और कारों का काफ़िला भी उनके साथ चल पड़ा.

मनोज तिवारी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘राजस्थान महिला अपराध, भ्रष्टाचार, दलितों के साथ अत्याचार और पेपर लीक के मामले में पूरे देश में नंबर वन है. मुख्यमंत्री ख़ुद बेचैन हैं कि उनकी सरकार जा रही है.’’

सरकार की राशन और मोबाइल की योजना को लेकर उन्होंने कहा कि चुनाव के कारण जल्दी-जल्दी घोषणाएँ करके गहलोत सरकार ने राज्य पर क़र्ज़ बढ़ा दिया है. मुफ़्त देना गलत नहीं है लेकिन इसके लिए पैसा कहाँ से लाओगे ये भी सोचना चाहिए.

इसके जवाब में उदयपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता रघुवीर सिंह मीणा कहते हैं, ‘‘इसे रेवड़ी नहीं कह सकते. महंगाई के ज़माने में ये एक सहायता है. बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं क्योंकि आधुनिक जमाने में डिजिटल पढ़ाई के लिए इसकी ज़रूरत है. आज सिलेंडर 1160 रुपए का हो गया है. अगर इसे 500 रुपए में दे रहे हैं तो ये रेवड़ी नहीं कहलाती.’’

बीजेपी की परिवर्तन यात्रा की भीड़ को कम बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी परिवर्तन यात्रा निकाल रही है. उसमें आने वाली संख्या अपेक्षित नहीं है. वो बहुत कम है. उससे उन्हें आभास हो गया है कि जनता हमारे साथ नहीं है. राहुल गांधी जी कुछ समय पहले पदयात्रा लेकर निकले थे. उसमें इतनी भीड़ उमड़ी थी कि मैं ख़ुद तक चोटिल हो गया था.’’

क्या कहते हैं लोग

राजस्थान

उदयपुर सिटी और उदयपुर ग्रामीण को बीजेपी का गढ़ माना जाता है.

उदयपुर के नया संभाग बनने के बाद से इसमें उदयपुर, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर, राजसमंद और भीलवाड़ा ज़िले आते हैं.

इस इलाक़े में फ़िलहाल 22 सीटें हैं जिनमें से बीजेपी के पास कुल 14 और कांग्रेस के पास 8 सीटें हैं.

कांग्रेस और बीजेपी की सीटों का ये अंतर उदयपुर के लोगों की बातों में भी झलकता है.

बापू बाज़ार में नारायण फास्ट फूड दुकान चलाने वाले छोगालाल साहू कहते हैं, ‘‘हमें यहाँ बीजेपी ही चाहिए. उन्होंने अच्छा काम किया है. उदयपुर में टूरिज़्म आ रहा है, लोग बाहर से आते हैं, सब अच्छा चल रहा है.’’

कांग्रेस के महंगाई राहत कैंप और फ़्री राशन किट के बारे में पूछने पर वो इसे अच्छा तो बताते हैं लेकिन सरकार बीजेपी की चाहते हैं.

उदयपुर में डेंटल की पढ़ाई कर रहे राहुल का कहना है, ‘‘यहाँ से निकली परिवर्तन यात्रा को हमने देखा था. उसमें कई लोग आए थे. बीजेपी यहाँ से अच्छा काम कर रही है.’’

लेकिन, सब्जी का ठेला लागने वालीं एक महिला गहलोत सरकार की योजनाओं के फ़ायदे भी गिनाती हैं.

वह कहती हैं, ‘‘राज्य सरकार हमें राशन मुफ़्त दे रही है. पढ़ने वालों को मोबाइल फ़्री दे रही है, इलाज दे रहे हैं तो हमें अशोक गहलोत जी ही पसंद हैं. हालाँकि, गुलाब चंद कटारिया ने भी अच्छा काम किया. पर कटारिया जी यहाँ हैं नहीं तो हम गहलोत सरकार से ख़ुश हैं.’’

अलीपुरा में रहने वालीं एक अन्य महिला का कहना है कि ‘बीजेपी ने तो सभी इंसानों को ख़ाली कर दिया है. पैसा ही नहीं है. दिलासा देकर गए कि हम पैसा देंगे आप मकान बनाओ लेकिन पैसा मिला ही नहीं. मकान बनाने के लिए सिर्फ़ 30 हज़ार रुपए दिए. उससे क्या होता है.’

उदयपुर के ही एक दुकानदार का कहना है कि अभी चुनाव आ रहे हैं इसलिए गहलोत साहब कभी मोबाइल और मसाला मुफ़्त दे रहे हैं. चिरंजीवी योजना अच्छी है लेकिन मोबाइल की क्या ज़रूरत है.

उदयपुर ग्रामीण के लोगों की बात करें तो यहाँ लोगों को बीजेपी की परिवर्तन यात्रा की ख़ासी जानकारी नहीं हैं. लोग इसी बात से परेशान हैं कि उन्हें कोई पूछने नहीं आता है.

मोरवानिया गाँव के गणेश वैष्णव कहते हैं कि फूल चंद मीणा हमारे विधायक हैं लेकिन वो आते नहीं हैं. यहाँ की ज़मीन तलाब में डूबी हुई है. हम खेती नहीं कर पाते. मज़दूरी भी रोज की है नहीं लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है.

उन्हीं के साथ बैठे एक शख़्स ने बताया कि वो जानते तो हैं कि यात्रा निकली थी लेकिन उन्होंने देखी नहीं. उनका कहना है हम यात्रा से क्या करें. हमारी तो खेती के लिए ज़मीन ही नहीं बची.

विधानसभा चुनाव में अब लगभग दो महीनों का समय है. एक तरफ़ बीजेपी की परिवर्तन यात्रा चल रही है तो दूसरी तरफ़ राहुल गांधी भी अक्तूबर में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू कर रहे हैं.

अब देखना ये है कि राजस्थान की जनता कांग्रेस के साथ जुड़कर फिर से सरकार बनाने का मौक़ा देती है या परिवर्तन कर बीजेपी को सत्ता में लाती है.

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