एचएमपीवी ने कैसे बढ़ाई दुनिया की चिंता? इस वायरस से संक्रमित होने के लक्षण क्या हैं?

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एचएमपीवी यानी ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस की चर्चा है. चीन में इसके केस बढ़ने की ख़बरें हैं.
कर्नाटक में भी इस संक्रमण के दो केस मिले हैं. इसके बाद भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि लोगों को इस वायरस से घबराने की ज़रूरत नहीं है.
पीआईबी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की. इसमें कहा गया कि साल 2001 से वैश्विक स्तर पर मौजूद एचएमपीवी को लेकर लोगों को चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है.
ये नया वायरस कितना ख़तरनाक है? इसके क्या लक्षण हैं? इससे कैसे बचा जा सकता है? विशेषज्ञ इस वायरस को लेकर क्या कह रहे हैं?
इस स्टोरी में इन्हीं सारी बातों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे.

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एचएमपीवी क्या है?
एचएमपीवी का पूरा नाम ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस है. कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने इसके लक्षणों के बारे में जानकारी दी है.
इसके मुताबिक, इस वायरस के संक्रमण के लक्षणों में खांसी, बुख़ार, नाक बंद होना, सांस लेने में तकलीफ़ होना और फ़्लू शामिल हैं. ज़्यादा गंभीर मामलों में इससे ब्रोंकाइटिस या निमोनिया भी हो सकता है.

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एचएमपीवी फैलता कैसे है?
ये वायरस छींक से निकली बूंदों, क़रीबी संपर्क और दूषित जगहों को छूने के बाद मुंह, नाक या आंखों को छूने से भी फैलता है. इसका असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों पर ज़्यादा होता है.
एचएमपीवी संक्रमण से कैसे बचें?

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भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशकडॉक्टर अतुल गोयल के अनुसार एमएमपीवी वायरस संक्रमित व्यक्ति या अगर किसी को सर्दी ज़ुक़ाम है तो उससे दूरी बनाएं.
खांसते-छींकते वक़्त मुंह पर रुमाल या कपड़ा रखें. खांसने और छींकने के लिए अलग रुमाल या तौलिए का इस्तेमाल करें, जिसे कुछ घंटों के बाद साबुन से धो दें.
अगर आपको सर्दी ज़ुक़ाम है, तो मास्क पहन कर रखें. घर पर रहें और आराम करें. बाहर न जाएं.
पानी पीते रहें और पोषक खाद्य पदार्थ खाएं. पहले से ही सांस की कोई बीमारी है, तो अपना ख़ास ख़्याल रखें. बिना डॉक्टर के परामर्श से दवाएं न लें.
एचएमपीवी की उत्पत्ति कैसे हुई?

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माना जाता है कि एचएमपीवी वायरस की उत्पत्ति 200 से 400 साल पहले चिड़ियों से हुई थी. तब से लेकर अब तक, यह वायरस खुद को बार-बार बदलता रहा है.
अब यह वायरस चिड़ियों को संक्रमित नहीं कर सकता. यह जानकारी साइंस डाइरेक्ट में दी गई है.
वहीं, अमेरिकी सरकार की सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के अनुसार, मनुष्यों में इसकी खोज साल 2001 में हुई. मतलब यह कि इस साल पता चला कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है.
और द गार्डियन की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि एचएमपीवी कोविड जैसा नहीं है. ये वायरस कई दशकों से मौजूद है.
इसलिए, इसे लेकर लोगों में एक स्तर तक की इम्युनिटी मौजूद थी. इसकी तुलना में कोविड-19 एक नई बीमारी थी, जिससे इंसान पहले कभी भी संक्रमित नहीं हुआ था, इसलिए वो महामारी बन गई थी.
एचएमपीवी कितना ख़तरनाक है?

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जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉ. वी रवि ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इस वायरस की खोज 15-16 साल पहले हुई थी. यह एक मौसमी संक्रमण है."
"यह आमतौर पर इनफ्लुएंजा के मामलों के साथ-साथ होता ही होता है और सबसे पहले बच्चे ही इससे संक्रमित होते हैं."
डॉ. गगनदीप कांग वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में सहायक प्रोफ़ेसर हैं. वो गेट्स फाउंडेशन, यूएस के ग्लोबल हेल्थ डिवीज़न की डायरेक्टर हैं.
उन्होंने बताया, "चीन से जो रिपोर्टें आ रही हैं, उसके अनुसार वहां एचएमपीवी के अलावा दूसरे वायरस भी हैं. ये एक नॉर्मल घटना है कि आपके पास संक्रमण पैदा करने वाले अलग-अलग वायरस का मिश्रण हो."
"आमतौर पर सर्दियों और वसंत के दौरान ऐसे संक्रमण अधिक हो सकते हैं. इनका अलग-अलग इलाक़ों में अलग-अलग असर होता है. हमें घबराने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है.''
कोविड-19 से कितना अलग है एचएमपीवी?

केरल वन हेल्थ सेंटर फॉर निपाह रिसर्च एंड रेजिलिएंस के नोडल अधिकारी हैं डॉ. अनीश टी.एस. उन्होंने बीबीसी हिंदी से इस वायरस को लेकर बातचीत की.
डॉ. अनीश ने बताया, "एचएमपीवी कोविड-19 से अलग है. कोविड एक नया वायरस था. इस वजह से किसी भी इंसान में इसके प्रति दूसरे वायरस की तरह प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी."
जबकि डॉ. कांग ने कहा, "अगर बच्चों को ख़तरे वाले वायरस की रैंकिंग की जाए, तो मैं आरएसवी या रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस को नंबर एक वायरस के रूप में रखूंगी."
"एचएमपीवी का पता सांस की तकलीफ़ के कारणों की जांच के दौरान चला. इसलिए, शुरू में इसके बारे में ज़्यादा जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन अब साफ़ है कि ये एचएमपीवी है."
आरएसवी एक आम, लेकिन अत्यधिक संक्रमण वाला वायरस है, जो दिसंबर-जनवरी के दौरान अपने चरम पर होता है.
यह फेफड़ों, नाक और गले को संक्रमित करता है और कमज़ोर व्यक्तियों में गंभीर बीमारी या मृत्यु का कारण भी बन सकता है.
डॉ. अनीश और डॉ. कांग दोनों इस बात पर सहमत हैं कि जब बच्चा पाँच साल या उससे ज़्यादा उम्र का हो जाता है, तो वह इस वायरस से मुकम्मल इम्युनिटी हासिल कर लेता है.
डॉ. कांग ने कहा, "इस वायरस का दोबारा संक्रमण हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह एक हल्का संक्रमण होता है."
"यह बहुत छोटे बच्चों, वयस्कों या उन लोगों में गंभीर हो सकता है, जिनके फेफड़े क्षतिग्रस्त हो गए हैं या जिन्हें क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ है या जिनकी इम्युनिटी कमज़ोर है."
"बाक़ी लोगों में इसके कारण लंबे समय तक खांसी हो सकती है. लेकिन, हमारे लिए चिंता करने लायक कोई बड़ी बात नहीं है."




एचएमपीवी पर क्या बोला चीन?

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अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट ग्लोबल टाइम्स को चीन की सत्ताधारी पार्टी का मुखपत्र माना जाता है.
इसके अनुसार, उत्तरी चीन के इलाक़ों के अलावा बीजिंग, दक्षिण पश्चिमी शहर चोंगकिंग, दक्षिणी चीन के गुआंगदोंग प्रांत में एचएमपीवी के मामले मिले हैं.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने पिछले सप्ताह हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस वायरस से जुड़े सवाल के जवाब में कहा था कि उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के मौसम में सांस की नली में संक्रमण के मामले ज़्यादा सामने आते हैं.
इस बीच, 27 दिसंबर 2024 को समाचार एजेंसी रॉयटर्स में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी.
इसके मुताबिक़, चीन की स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा है कि सर्दियों में सांस की बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए वो पायलट सर्विलांस सिस्टम शुरू कर रहे हैं.
इसके बारे में चीन के नेशनल डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के प्रमुख ली जेंगलॉन्ग ने कहा था कि इससे अज्ञात कारणों से होने वाले निमोनिया के मामलों की निगरानी की जाएगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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