गुड़गाँव में सांप्रदायिक हिंसा के डर से घर छोड़ जा रहे लोग क्या कह रहे हैं?- प्रेस रिव्यू

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हरियाणा के नूंह में सोमवार से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा के कारण गुरुग्राम और आसपास के इलाक़ों में डर का माहौल बना हुआ है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, खुली धमकियाँ मिलने के एक दिन बाद, बुधवार को गुरुग्राम के सेक्टर 70 ए के पालरा गांव की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले ज़्यादातर लोग पलायन कर गए हैं.
ये लोग मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे. जो लोग अब भी इस बस्ती में रह रहे हैं वो काफ़ी डर के साए में जी रहे हैं और रात पास के जंगल में बीता रहे हैं.
हालांकि गुरुग्राम पुलिस ने यहाँ ऐसी कोई घटना होने से इनकार किया है.
अख़बार लिखता है कि मेवात क्षेत्र के नूंह में सोमवार को शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा की लपटें गुरुग्राम और दक्षिणी हरियाणा के अन्य ज़िलों में फैल रही हैं.
मंगलवार को कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों की भीड़ ने पलरा गांव की झुग्गियों में रहने वाले लोगों को धमकी दी और कहा- “इलाक़ा छोड़ कर वापस वहीं जाओ जहाँ से आए हो".
देर रात इस इलाक़े की कुछ टायर और पंक्चर बनाने की दुकान जला दी गई.
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 800 से 900 परिवार इन झुग्गियों में किराए पर रहते हैं, जिनमें से ज़्यादातर पास की सोसायटी से कचरा बीनने, घरों में काम और हाउसकीपिंग स्टाफ़ के रूप में काम करते हैं.

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‘महिलाओं को ज़्यादा पीटा गया’
अख़बार ने इस इलाक़े में रहने वाले लोगों से बात की.
नबील अहमद (बदला हुआ नाम) पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के रहने वाले हैं जो नौकरी की तलाश में गुरुग्राम आए, यहाँ वो लोगों की कारें साफ़ करते हैं.
उन्होंने कहा, “सुबह 11 बजे के आसपास लगभग 25 मोटरसाइकिलें, हर एक पर दो से तीन आदमी बैठे हुए थे, वो आए.”
अहमद ने कहा, “जो लोग आए थे उनमें से ज्यादातर के पास लाठियाँ थीं, वहीं कुछ के पास तलवारें और बंदूकें थीं. उन्होंने हमारा नाम पूछा और आईडी कार्ड मांगे और फिर हमें पीटना शुरू कर दिया. हमें शाम 4 बजे तक घरों को ख़ाली करने की चेतावनी दी और कहा कि अगर हम नहीं गए तो वे हमारे घरों में आग लगा देंगे. ''
उन्होंने बताया कि इन लोगों ने महिलाओं को ज़्यादा पीटा. "शायद वो ये बताना चाह रहे थे कि महिलाओं को भी बख़्शा नहीं जाएगा."
उन्होंने कहा कि हालांकि पुलिस तुरंत आ गई, लेकिन जब भीड़ शाम क़रीब साढ़े पांच बजे फिर आई तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की लेकिन उन पर बलप्रयोग नहीं किया गया.
घरों में काम करने वाली शबाना बीबी ने द हिंदू के बताया कि लगभग आठ से 10 परिवारों ने पास के एक जंगल के इलाक़े में रात बिताई.
डायबिटीज़ के मरीज़ शफ़ीउद्दीन अली लगभग सात महीने पहले कोलकाता के पास पड़ने वाले अपने गाँव से अपने बेटे के साथ रहने गुरुग्राम थे.
उन्होंने कहा, “ बस्ती के लगभग 90 फ़ीसदी मुस्लिम परिवार जा चुके हैं.”
“जो लोग अब भी यहां हैं, उनके पास या तो बुधवार के टिकट हैं या ट्रेन टिकट ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं. मेरे जैसे कुछ लोगों के पास वापस जाने की कोई जगह नहीं है, क्योंकि हम अपने गाँव में सब कुछ बेचकर यहाँ आए हैं.”

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‘फ़ेक न्यूज़ और असर’
डीसीपी (दक्षिणी गुरुग्राम) सिद्धांत जैन ने लोगों के इस इलाक़े को छोड़ कर जाने की वजह के पीछे सोशल मीडिया को दोषी ठहराया है, इनका कहना है कि अफ़वाहों के कारण लोग बस्ती छोड़ रहे हैं.
अख़बार से जैन ने कहा है, “यह सोशल मीडिया पर चल रही फ़र्ज़ी ख़बर का असर है. किसी भी समुदाय के लोगों को ऐसी कोई धमकी नहीं दी गई है. मंगलवार को कुछ छिटपुट घटनाएं हुई होंगी, लेकिन हमारे पास किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बलों की तैनाती है. सब कुछ शांतिपूर्ण है. ”
उन्होंने कहा कि 12 एफ़आईआर दर्ज की गई हैं और दक्षिण गुरुग्राम में सीआरपीसी की धारा 107 और 151 के तहत छह लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.

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किसी ने हमारा यक़ीन नहीं किया, भगवान की देन है कि वीडियो वायरल हुआ
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने मणिपुर से एक रिपोर्ट छापी है.
रिपोर्ट में वायरल वीडियो में जिन महिलाओं के साथ यौन हिंसा हुई उनमें से एक ने कहा है कि चार मई को उन्हें निर्वस्त्र करके परेड कराई गई और इसका वीडियो का वायरल होना भगवान की देन है ताकि सच बाहर आ सके.
65 साल की कुकी महिला के पति सेना में हैं और उन्होंने देश के लिए करगिल की लड़ाई लड़ी है.
अख़बार से बात करते हुए महिला ने कहा, “ जब तक वीडियो सामने नहीं आया था ना तो पुलिस ने हरकत की और ना ही सरकार की ओर से हमें फ़ोन आया. ”
इस मामले की शिकायत ज़ीरो एफ़आईआर के तहत कांकपोकपी ज़िले में 18 मई को ही दर्ज करा गई थी. लेकिन इस मामले में एक्शन 19 जुलाई को वीडियो वायरल होने के बाद लिया गया.
महिला कहती हैं, “कार्रवाई बहुत पहले ही करनी चाहिए थी, लेकिन वीडियो से पहले जब हमने उन्हें (पुलिस) बताया कि क्या हुआ था तो किसी ने हम पर यक़ीन नहीं किया. ”
ये महिलाएं अभी चुराचांदपुर के एक राहत कैंप में रह रही हैं.

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अशोक यूनिवर्सिटी ने ‘चुनाव में धांधली’ के पेपर पर कहा- ये हमारी राय नहीं
अंग्रेज़ी अख़बार टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, चुनाव में कथित धांधली पर एक अप्रकाशित इकॉनमिक्स के रिसर्च पेपर को लेकर ज़बरदस्त चर्चा है.
इस रिसर्च पेपर को लिखने वाले अशोका यूनिवर्सिटी के असिस्टेंड प्रोफेसर हैं.
अब यूनिवर्सिटी ने कहा है, “ अशोका के प्रोफ़ेसर, छात्रों या कर्मचारियों की ओर से अपनी व्यक्तिगत क्षमता में सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट या पब्लिक एक्टिविज़म यूनिवर्सिटी का रुख़ नहीं है. ”
हरियाणा के सोनीपत में अशोक यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक्स के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर सब्यसाची दास ने एक पेपर लिखा है जिसका शीर्षक है- डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग इन द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट डेमोक्रेसी.
रिसर्च पेपर के बारे कहा गया है कि यह भारत के 2019 के आम चुनाव के आंकड़ों में अनियमितता का डॉक्यूमेंटेशन है, जिसमें दिखाया गया है कि मौजूदा पार्टी की जीत के मार्जिन में गड़बड़ी है. जहां बीजेपी की सरकार थी वहां उन सीटों पर बीजेपी जीत गई जहां मुकाबला काफ़ी करीब था. जबकि इससे पिछले आम चुनावों में या एक साथ और उसके बाद हुए राज्य चुनावों में ऐसा कोई पैटर्न नहीं दिखता.”
हालांकि इस पोपर में कहा गया है कि ये एक पैर्टन है लेकिन इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि अनियमितताएं हुईं.
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