चुनाव में जीत के बाद बोले पीएम मोदी, 'वो कहते हैं मर जा मोदी...देश कह रहा है मत जा मोदी' - प्रेस रिव्यू

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भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर-पूर्वी राज्यों नगालैंड और त्रिपुरा के विधानसभा चुनावों में अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाने की ओर क़दम बढ़ा दिया है. मेघालय में भी पार्टी ने अपना प्रदर्शन बरक़रार रखा है और पिछले बार की तरह ही दो सीट जीत कर सत्ता के खेल में दमखम आज़मा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, त्रिपुरा में जहां बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है. वहीं, शेष दो राज्यों में वह एक जूनियर पार्टनर के रूप में सरकार में शामिल हो सकती है.

त्रिपुरा में बीजेपी ने लेफ़्ट-कांग्रेस गठबंधन को पछाड़ते हुए 32 सीटों पर जीत हासिल की है जो बहुमत के आंकड़े से एक सीट ज़्यादा है.

नगालैंड में बीजेपी ने अपने सीनियर पार्टनर नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ सरकार में वापसी की है. इस चुनाव में एनडीपीपी को 25 और बीजेपी को 12 सीटें हासिल हुई हैं.

वहीं, मेघालय में पांच सालों से मिलकर सरकार चला रही नेशनल पीपल्स पार्टी और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए कुल 28 सीटें हासिल की हैं. इनमें से एनपीपी को 26 और बीजेपी को दो सीटें मिली हैं. दोनों दलों ने कहा है कि वे एक बार फिर मिलकर सरकार बनाएंगे.

बीजेपी की चुनौती - तिपरा मोथा

त्रिपुरा के चुनावी नतीजों ने ये स्पष्ट किया है कि त्रिपुरा के मतदाताओं के बीच बीजेपी को लेकर स्वीकार्यता बन गयी है. ये वो राज्य है जहां कुछ सालों पहले तक वामपंथी दलों का दबदबा रहा करता था.

लेकिन इन चुनावों में सीपीआई (एम) को 11 और कांग्रेस को मात्र 3 सीटों पर जीत हासिल हुई है. बीजेपी ने इस चुनाव में सत्ता-विरोधी लहर और कांग्रेस-वामपंथी दलों के गठबंधन के बावजूद अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा (31 सीटें) पार किया है.

लेकिन वह अपने पुराने प्रदर्शन से पीछे रही है. बीजेपी ने पिछले चुनाव में त्रिपुरा में 36 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

लेकिन इससे भी ज़्यादा चिंता की बात उसका वोट प्रतिशत 43.59 फ़ीसद से घटकर 38.97 फ़ीसद पर पहुंचना है. यही नहीं, बीजेपी तिपरा मोथा के उभार को लेकर भी चिंतित हो सकती है.

क्योंकि त्रिपुरा में बीजेपी का सबसे बड़ा आदिवासी चेहरा उप-मुख्यमंत्री जिश्नू देब बर्मा चरिलम विधानसभा सीट से मात्र 858 वोटों से तिपरा मोथा के उम्मीदवार सुबोध देब बर्मा से चुनाव हार गए हैं.

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मेघालय में बीजेपी की वापसी

मेघालय में एनपीपी को 26 और बीजेपी को दो सीटें हासिल हुई हैं. यहां कांग्रेस और टीएमसी को पांच-पांच सीटें हासिल हुई हैं.

इस चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी 11 सीटों के साथ दूसरा सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है.

लेकिन एनपीपी और बीजेपी के पास सरकार बनाने के लिए 31 सीटें नहीं हैं.

लेकिन इस बात की उम्मीद कम है कि एनपीपी और बीजेपी साथ मिलकर भी सरकार बना सकें.

एनपीपी नेता कोनराड संगमा की जीत का जश्न मनाते लोग

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क्योंकि बीजेपी ने मेघालय के मौजूदा मुख्यमंत्री और एनपीपी नेता कोनराड संगमा को अपना समर्थन दे दिया है और संगमा ने अपनी ओर से शुक्रिया भी अदा कर दिया है.

अख़बार से बात करते हुए सूत्रों ने बताया है कि 'ये तब हो रहा है जब चुनाव के दौरान बीजेपी और एनपीपी के बीच तीख़ी बयानबाज़ी हुई. लेकिन एनपीपी भी केंद्र में बीजेपी की मज़बूत स्थिति से अनभिज्ञ नहीं है.'

ममता बनर्जी की सरकार ने मेघालय में काफ़ी जोर-शोर से चुनावी कैंपेन किया था, लेकिन इसके बाद भी उसे सिर्फ़ पांच सीटें हासिल हुईं जितनी कांग्रेस पार्टी को हुई हैं. टीएमसी के नेता मुकुल संगमा को दो में से एक सीट पर हार का सामना करना पड़ा है.

बीजेपी समर्थक

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नगालैंड में बीजेपी के लिए असहजता

नगालैंड में बीजेपी और एनडीपीपी गठबंधन ने अपने पिछले प्रदर्शन 29 सीटों से आगे बढ़ते हुए 37 सीटों पर जीत दर्ज की है.

उत्तरी अंगामी तृतीय विधानसभा सीट पर 92.78 फ़ीसद वोट पाने वाले नेफ़ियू रियो पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में वापसी करने जा रहे हैं.

एनपीपी-बीजेपी गठबंधन का आंकड़ा बढ़ने की वजह नागा पीपल्स फ़्रंट का ख़राब प्रदर्शन रहा है जिसका फ़ायदा एनडीपीपी को मिला है.

बीजेपी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उसे 12 सीटों पर जीत हासिल हुई. इस चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत 15.31 फ़ीसद से बढ़कर 18.8 फ़ीसद हो गया है.

हालांकि, एनडीपीपी और बीजेपी के बीच सबकुछ ठीक नहीं है.

एनडीपीपी के महासचिव अबु मेथा ने प्रेस वार्ता में कहा है कि "एनडीपीपी ये स्पष्ट करना चाहती है कि बीजेपी और एनडीपीपी के बीच 40-20 का गठबंधन आपसी विश्वास पर टिका हुआ है. और जहां तक नयी सरकार के गठन का सवाल है तो पिछले पांच सालों के अनुभव के आधार पर देखा जाए तो हमें लगता है कि सरकार गठन और उसके स्वरूप पर नए सिरे से विचार करना चाहिए. एनडीपीपी इस मामले में बीजेपी के नेतृत्व के संपर्क में है."

नगालैंड के चुनाव में जो सबसे उल्लेखनीय बात निकलकर आई है, वो दो महिलाओं का पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना है.

एनडीपीपी की महिला उम्मीदवारों हेकानी जाखलू और सलहौतुओनुओ ने इस चुनाव में जीत दर्ज करके इतिहास रचा है.

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'वो कहते हैं मर जा मोदी...देश कह रहा है मत जा मोदी'

पीएम मोदी ने गुरुवार शाम बीजेपी मुख्यालय में दिए अपने विजयी भाषण में इन महिला उम्मीदवारों की उपलब्धि का ज़िक्र किया है.

त्रिपुरा में अपनी पार्टी की जीत को अहम बताते हुए उन्होंने कहा, "पहले त्रिपुरा में ये हाल था कि एक पार्टी के अलावा दूसरी पार्टी का एक झंडा तक नहीं लगाया जा सकता था. अगर किसी ने लगाने की कोशिश की तो उसे लहूलुहान कर दिया जाता था. इस बार इन चुनावों में हमने कितना बड़ा परिवर्तन देखा है.

अब हम नई दिशा पर चल पड़े पूर्वोत्तर को देख रहे हैं. मुझे इस बात का संतोष है कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बार-बार नॉर्थ-ईस्ट जाकर मैंने दिलों को जीता है और यही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है. मुझे यह संतोष भी है कि पूर्वोत्तर के लोगों को यह एहसास हो रहा है कि अब उनकी उपेक्षा नहीं होती."

नरेंद्र मोदी
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कुछ लोग कट्टरता की पहचान में लगे हुए हैं...ये बेइमानी भी कट्टरता से करते हैं. ये कट्टर लोग कहते हैं- मर जा मोदी...देश कह रहा है... मत जा मोदी.'
नरेंद्र मोदी
भारतीय प्रधानमंत्री

इन तीनों राज्यों में बीजेपी के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने के साथ ही पीएम मोदी ने विरोधी दलों पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, "आज के नतीजों के बाद कांग्रेस ने छोटों के प्रति अपनी नफ़रत को फिर से जगज़ाहिर कर दिया. कांग्रेस कह रही है कि ये तो छोटे राज्य हैं, इनके नतीजे उतने मायने नहीं रखते. जब दिल में ही भारत को जोड़ने की भावना ना हो...तो ऐसे ही बोल निकलते हैं."

पीएम मोदी ने कहा, "ऐसे समय में कुछ लोग मोदी की क़ब्र खोदने की ख़्वाहिश कर रहे हैं. लेकिन जहां मौका पड़ता है कमल खिलता ही जा रहा है...खिलता ही जा रहा है. कुछ लोग कट्टरता की पहचान में लगे हुए हैं. वो बेइमानी भी कट्टरता से करते हैं. ये कट्टर लोग कहते हैं- मर जा मोदी...मर जा मोदी...देश कह रहा है मत जा मोदी."

इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से हाल ही में मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी के बाद पीएम मोदी के ख़िलाफ़ लगाए गए नारों पर भी टिप्पणी की.

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अरविंद केजरीवाल

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प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में की दसवीं गिरफ़्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने बीते गुरुवार आम आदमी पार्टी से जुड़े कथित शराब घोटाले में दसवें शख़्स को गिरफ़्तार किया है.

द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, ये शख़्स ब्रिंडको सेल्स प्राइवेट लिमिडेट के मालिक अमनदीप धाल हैं जिनके ख़िलाफ़ शराब घोटाले में शामिल होने के आरोप हैं.

ईडी ने धाल पर लगाए आरोपों में कहा है कि साल 2021 के मार्च महीने में अमनदीप धाल को तत्कालीन आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर का फ़ोन आया जो इस मामले में अभियुक्त हैं.

एजेंसी के मुताबिक़, नायर ने इस फ़ोन कॉल में धाल से कहा कि वे भारतीय और विदेशी शराब कंपनियों के साथ मीटिंग की व्यवस्था करें. इसके बाद हुई बैठकों में अभियुक्तों ने आबकारी नीति और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय को दिए एक बयान में धाल ने कहा था कि 'उन्होंने साल 2021 के अक्टूबर महीने में दिल्ली आबकारी विभाग के ख़िलाफ़ नाम बताए बिना एक शिकायत दर्ज कराई थी.

इसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली आबकारी विभाग कथित रूप से शराब कारोबार में कार्टेल व्यवस्था खड़ी होने दे रहा है.

बता दें कि धाल को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी के कुछ दिन बाद ही गिरफ़्तार किया गया है.

योगी आदित्यनाथ

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यूपी में बीस इमारतों पर चलेगा बुलडोज़र

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पिछले दिनों हुए उमेश पाल हत्याकांड में राज्य सरकार अतीक अहमद और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने की तैयारी कर रही है.

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, प्रयागराज ज़िला प्रशासन ने अतीक अहमद के 12 सहयोगियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. इस दिशा में अब तक 20 संपत्तियों को चिह्नित किया गया है.

अख़बार के मुताबिक़, इन संपत्तियों को ध्वस्त करने के साथ ही ज़ब्त करने की कार्रवाई की जाएगी.

प्रयागराज के ज़िलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने कहा है कि 'इन्होंने अवैध तरीके से निर्माण कराए हैं जिसे ध्वस्त किया जाएगा.'

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