सट्टा ऐप के प्रमोटर की शादी में 200 करोड़ ख़र्च का हिसाब खंगाल रही ईडी - प्रेस रिव्यू

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ महादेव गेंबलिंग ऐप (ऑनलाइन सट्टा) के दो प्रमोटरों में से एक सौरभ चंद्राकर ने संयुक्त अरब अमीरात में हुई अपनी शादी में 200 करोड़ रुपये ख़र्च किए थे.
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक़ सौरभ चंद्राकर के परिजन प्राइवेट जेट विमानों से नागपुर से दुबई पहुंचे थे.
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 5000 करोड़ रुपए की कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है.
ईडी ने अख़बार को बताया है कि चंद्राकर की शादी में परफॉर्मेंस देने के लिए कई सेलिब्रिटी भी गए थे.
सौरभ चंद्राकर और रवी उप्पल महादेव ऑनलाइन गेंबलिंग एप के प्रमोटर हैं.
दोनों ही मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वांछित हैं.
शुक्रवार को जारी एक बयान में ईडी ने कहा है, “सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने यूएई में अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है. अचानक आये अवैध पैसे की चमक-धमक को ख़ूब प्रदर्शित करते हैं.”
“फ़रवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर की आरएके (रास अल खैमा) में शादी हुई थी. इस शादी समारोह में क़रीब 200 करोड़ रुपये कैश में ख़र्च किए गए थे.”
ईडी ने बताया है, “परिजनों को नागपुर से दुबई ले जाने के लिए प्राइवेट जेट किराये पर लिए गए थे. शादी में परफार्मेंस देने के लिए सेलिब्रिटी बुलाये गए थे. वेडिंग प्लानर, नर्तकों, साज़-सज्जा वालों को मुंबई से बुक किया गया था. इन्हें हवाला चैनलों के ज़रिये कैश में पैसे दिए गए.”
ईडी ने इस मामले की जांच इसी साल शुरू की है और पिछले महीने ही चार लोगों को गिरफ़्तार किया था.
अभी तक प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर, भोपाल, मुंबई और कोलकाता समेत 39 ठिकानों पर छापेमारी की है और 417 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां ज़ब्त की हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ चंद्राकर और उप्पल की गिरफ़्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है.

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'होटल की बुकिंग पर 42 करोड़ रुपये ख़र्च'
ईडी के मुताबिक़ जुए या सट्टे से प्राप्त रक़म को हवाला नेटवर्क के ज़रिये बाहर भेजा जाता है.
भारत में जुआ खिलाने वाली वेबसाइटों के प्रचार पर बड़ी मात्रा में कैश में भी पैसा ख़र्च किया जाता है.
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया है कि उसके पास एक इवेंट मेनेजमेंट कंपनी के पास हवाला नेटवर्क से पहुंचे 112 करोड़ रुपये से जुड़े डिजिटल सबूत हैं.
जांच एजेंसी के मुताबिक़, होटल की बुकिंग पर 42 करोड़ रुपये ख़र्च हुए थे जो संयुक्त अरब अमीरात की करेंसी दिरहम में कैश दिये गए थे.
एजेंसी ने इस संबंध में योगेश पोपट नाम के इवेंट मैनेजर के ठिकानों पर छापेमारी की. इसके बाद हवाला नेटवर्क से जुड़े लोगों को तलाशा गया.
ईडी ने अपनी जांच में पता लगाया है कि कोलकाता के विकास छपारिया महादेव ऐप के सभी हवाला ऑपरेशन को देख रहे थे.
ईडी ने योगेश छपारिया और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की है.
ईडी को जांच के दौरान पता चला है कि कई सेलिब्रिटी जुआ खिलाने की इन ऐप को प्रमोट कर रहे थे.
भोपाल की एक ट्रैवल कंपनी एमएस रेपिड ट्रेवल्स भी ईडी की जांच के दायरे में हैं. इसे धीरज आहुजा और विशाल आहुजा नाम के दो भाई चलाते हैं. ये कंपनी महादेव ऐप से जुड़े लोगों के यात्रा टिकटों का काम देखती थी.
रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी ने कई जुआ खिलाने वाली वेबसाइटों को प्रमोट करने वाले सेलिब्रिटी के लिए भी टिकट उपलब्ध करवाये.
रेपिड ट्रेवल्स ही महादेव बुक ऐप से जुड़े लोगों की यात्रा व्यवस्थाएं करती थी.

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नूंह हिंसाः कांग्रेस विधायक की गिरफ़्तारी के बाद सुरक्षा सख़्त, इंटरनेट बंद
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में गिरफ़्तार हरियाणा कांग्रेस के विधायक मम्मन ख़ान को शुक्रवार को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.
नूंह पुलिस ने गुरुवार रात को नूंह में विश्व हिंदू परिषद की यात्रा के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने के आरोप में मम्मन ख़ान को गिरफ़्तार किया है.
31 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा और उसकी प्रतिक्रिया में हुई घटनाओं में कुल छह लोग मारे गए थे.
फ़िरोज़पुर झिरका से विधायक मम्मन ख़ान को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया.
कांग्रेसी विधायक की गिरफ़्तारी के बाद नूंह और आसपास के इलाक़ों में दो दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं भी बंद कर दी गईं.
नूंह पुलिस का कहना है कि गिरफ़्तार अभियुक्तों के बयानों और टेक्नीकल सबूतों की बुनियाद पर विधायक की गिरफ़्तारी की गई है.
नूंह के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया ने बताया कि हिंसा में सीधे शामिल रहे गिरफ़्तार अभियुक्त मम्मन ख़ान के संपर्क में थे.
एसपी के मुताबिक़ हिंसा शुरू होने से कुछ देर पहले विधायक स्वयं घटना स्थल के पास मौजूद थे.
नूंह हिंसा के मामले में 60 एफ़आईआर दर्ज की गई है और 330 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

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अनंतनाग मुठभेड़ः मारे गए सैनिकों के शव हासिल करना था मुश्किल
द हिंदू ने भारत प्रशासित कश्मीर के अनंतनाग में जारी सेना और चरमपंथियों के बीच एनकाउंटर पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ एनकाउंटर में मारे गए सेना के अधिकारियों और जवानों के शवों को हासिल करना सबसे मुश्किल काम था.
अनंतनाग के कोकेरनाग इलाक़े में सेना और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ 60 घंटे से अधिक चली.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मुठभेड़ में मारे गए भारतीय सेना के एक कर्नल, एक मेजर और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक डीएसपी के शव को हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण था.
अख़बार ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि डीएसपी हुमायूं भट गोली लगने के बाद ज़िंदा थे और छह घंटों तक फ़ोन के ज़रिये अधिकारियों के संपर्क में थे.
डीएसपी भट ने गोली लगने के बाद अपने परिजनों से भी बात की थी. वो एक महीने के बेटे के पिता थे.
अख़बार ने बताया है कि सेना ने हेलीकॉप्टर के ज़रिये घायलों को निकालने की कोशिश की लेकिन मुश्किल भौगोलिक स्थिति और चरमपंथियों की तरफ़ से गोलीबारी के ख़तरे की वजह से ये प्रयास नाकाम हो गया.
बुधवार को पूरा दिन चरमपंथी गोलीबारी करते रहे जिसकी वजह से सैनिक घायलों के क़रीब तक नहीं पहुंच पा रहे थे.
सूत्रों ने अख़बार को बताया है कि मारे गए अधिकारी गोली लगने के बाद घने पेड़ों वाली चोटियों पर गिरे थे.
शुरुआती जांच में पता चला है कि अधिकारियों पर एक गुफा नुमा लोकेशन से चरमपंथियों ने अंधाधुंध फ़ायरिंग की.
रिपोर्ट के मुताबिक़ डीएसपी का शव एक विशेष ऑपरेशन के ज़रिये बुधवार शाम तक बरामद किया जा सका जबकि कर्नल और मेजर की बॉडी बुधवार को नहीं मिल सकी थी.
एक अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि जहां से हमला हुआ उस गुफा और जहां अधिकारियों को गोली लगी उस जगह के बीच क़रीब बीस मीटर का फ़ासला होगा.
सेना को घटनास्थल से शव बरामद करने में चौबीस घंटे तक का समय लग गया.
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