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तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने इसराइल में घुसने की बात कही, जवाब मिला- सद्दाम की राह पर ना बढ़ें
तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने रविवार यानी 28 जुलाई को कहा है कि तुर्की इसराइल में घुस सकता है.
अर्दोआन ने कहा है कि तुर्की अतीत में जैसे लीबिया और अज़रबैजान के नार्गोनो-काराबाख में घुसा था, वैसे ही वो इसराइल जा सकता है.
हालांकि अर्दोआन ने इस बारे में नहीं बताया कि वो किस तरह के दखल की बात कर रहे थे.
इसराइल के ग़ज़ा पर किए हमलों में आम लोगों के मारे जाने की अर्दोआन आलोचना करते रहे हैं. अर्दोआन ने ताज़ा बयान तब दिया, जब वो एक कार्यक्रम में देश की डिफेंस इंडस्ट्री की तारीफ़ कर रहे थे.
अर्दोआन ने कहा, ''हमें बहुत मज़बूत रहना होगा ताकि इसराइल फ़लस्तीन में ऐसी घटिया चीज़ें ना कर सके. जिस तरह हम काराबाख में घुसे, जिस तरह हम लीबिया में घुसे, हम इसराइल के मामले में भी ऐसा कर सकते हैं.''
अर्दोआन के इस बयान पर इसराइली विदेश मंत्री इसराइल काट्ज़ ने सद्दाम और अर्दोआन की तस्वीरों को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ''अर्दोआन सद्दाम हुसैन के क़दमों पर चल रहे हैं. अर्दोआन को याद दिलाएं कि वहां क्या हुआ था और कैसे अंत हुआ.''
अर्दोआन ने नेतन्याहू की हिटलर से की तुलना
अर्दोआन ने कहा, ''ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते. हमें मज़बूत रहना होगा ताकि हम ये क़दम उठा सकें.''
ये भाषण टीवी पर भी प्रसारित हुआ.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जब अर्दोआन की पार्टी के प्रतिनिधियों से इस बारे में ज़्यादा जानकारी मांगी तो कोई जवाब नहीं मिला.
अर्दोआन के इस बयान के बाद इसराइल के मीडिया में एक और बयान की चर्चा है.
द टाइम्स ऑफ इसराइल की रिपोर्ट के मुताबिक़, अर्दोआन ने इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की है.
अर्दोआन ने कहा, ''जिस तरह से जनसंहार करने वाले हिटलर का अंत हुआ, वैसे ही जनसंहार करने वाले नेतन्याहू का अंत होगा.''
द टाइम्स ऑफ इसराइल के मुताबिक़ अर्दोआन ने कहा, ''जिन लोगों ने फ़लस्तीनियों को मारने की कोशिशें की, उनको वैसे ही ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा जैसे नाज़ियों को ठहराया गया था. मानवता फ़लस्तीन के साथ खड़ी रहेगी. आप फ़लस्तीनियों को मार नहीं सकेंगे.''
हिटलर के दौर में 60 लाख यहूदियों की हत्या की गई थी. दूसरे विश्वयुद्ध के ख़त्म होने पर नाज़ी अधिकारियों के ख़िलाफ़ केस चला था और उन्हें सज़ा सुनाई गई थी.
सात अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इसराइल ने ग़ज़ा में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी.
हमास के हमले में क़रीब 1200 इसराइली नागरिक मारे गए थे.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इसराइली कार्रवाई में 39 हज़ार से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं. मारे गए लोगों में बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या रही.
अर्दोआन ने अतीत में कई बार इसराइल की तुलना हिटलर से की है.
तुर्की और अर्दोआन पर ये रिपोर्ट्स भी पढ़ें:-
अर्दोआन के बयान पर प्रतिक्रियाएं
इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री येर लैपिड ने अर्दोआन के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है.
लैपिड ने कहा, ''राष्ट्रपति अर्दोआन अनाप-शनाप बोल रहे हैं. वो मध्य-पूर्व के लिए ख़तरा हैं. दुनिया और ख़ासकर नेटो सदस्यों को इस धमकी की निंदा करनी चाहिए और हमास से समर्थन वापस लेने पर ज़ोर देना चाहिए. हम तानाशाह बनना चाह रहे शख़्स की धमकियां बर्दाश्त नहीं करेंगे.''
इसराइल के सोशल मीडिया पर भी अर्दोआन के बयान पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
कोशर नाम के शख़्स ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''अर्दोआन ने हमेशा हमास और उसके नेताओं से दोस्ती दिखाई है. अगर अर्दोआन देश का नेतृत्व कर रहे हैं तो तुर्की को नेटो से बाहर कर देना चाहिए.''
तुर्की नेटो का सदस्य है. ग़ज़ा पर हमले के मामले में इसराइल की तरफ़ खड़े कई देश भी नेटो के सदस्य हैं.
नेतन्याहू की बढ़ती मुश्किलें
हाल ही में इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू अमेरिका के दौरे पर थे.
इस दौरान राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस ने कहा था, ''अब समय आ गया है कि युद्ध को ख़त्म किया जाए और ऐसे किया जाए कि इसराइल सुरक्षित रहें. सारे बंधकों को रिहा किया जाए. ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों की तकलीफ़ें ख़त्म हों और फ़लस्तीनी अपनी आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल कर सकें.''
राष्ट्रपति बाइडन और कमला हैरिस से मुलाक़ात के बाद नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाक़ात की थी.
इस मुलाक़ात के बाद नेतन्याहू ने कहा था कि वो बातचीत के लिए रोम अपना प्रतिनिधि मंडल भेजेंगे. ट्रंप अपने चुनाव प्रचार में कहते रहे हैं कि वो राष्ट्रपति बनते ही ये युद्ध रुकवा देंगे.
नेतन्याहू का ये अमेरिकी दौरा चल ही रहा था, तभी 27 जुलाई को इसराइल नियंत्रित गोलान हाइट्स में रॉकेट से हमला किया गया था. इस हमले में 12 लोग मारे गए थे. मृतकों में ज़्यादातर बच्चे हैं.
नेतन्याहू ने इस हमले के बाद कहा था- हिज़्बुल्लाह को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.
इसके बाद नेतन्याहू अपना अमेरिकी दौरा बीच में ही छोड़कर इसराइल लौट आए थे.
हमास से इसराइली बंधकों को ना छुड़ाए जाने को लेकर नेतन्याहू की अपने देश में आलोचना होती रही है.
ऐसे में गोलान हाइट्स पर हुए हमले के बाद इसराइल लौटे नेतन्याहू को अर्दोआन की धमकी का भी सामना करना पड़ रहा है. इस कारण दोनों देशों के संबंध फिर चर्चा में आ गए हैं.
इसराइल और तुर्की के बदलते रिश्ते
तुर्की और इसराइल के संबंध हमेशा से उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं. अर्दोआन के वक़्त के साथ बदलते बयान भी इसकी गवाही देते हैं.
तुर्की और इसराइल में 1949 से ही राजनयिक संबंध हैं.
तुर्की इसराइल को मान्यता देने वाला पहला मुस्लिम बहुल देश था. हालांकि जब यूएई, मोरक्को, बहरीन और सूडान ने अब्राहम अकॉर्ड्स के ज़रिए इसराइल को मान्यता दी और औपचारिक रिश्ते कायम किए तो तुर्की ने इसका विरोध किया था.
2005 में अर्दोआन कारोबारियों के एक बड़े समूह के साथ दो दिवसीय दौरे पर इसराइल गए थे.
इस दौरे में अर्दोआन ने तत्कालीन इसराइली पीएम एरिएल शरोन से मुलाक़ात की थी और कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से न केवल इसराइल को ख़तरा है बल्कि पूरी दुनिया को है.
2010 में इसराइली कमांडो ने तुर्की के पोत में घुसकर 10 लोगों को मार दिया था. इसके बाद दोनों देशों में कड़वाहट देखने को मिली थी.
2014 में ग़ज़ा संघर्ष में 2300 से ज़्यादा फ़लस्तीनियों की जान चली गई थी. उस समय अर्दोआन ने कहा था- ''इसराइली हिटलर को कोसते हैं, लेकिन इस आतंकवादी देश ने ग़ज़ा में अपनी कार्रवाइयों से हिटलर के अत्याचारों को पीछे छोड़ दिया.''
तब अर्दोआन ने ‘मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए’ अमेरिकी यहूदी कांग्रेस नाम की संस्था से अतीत में दिए गए पुरस्कार को लौटा दिया था.
2018 में दोनों देशों के रिश्तों में तब खटास आ गई थी, जब अर्दोआन ने अमेरिका के अपने दूतावास को यरूशलम ले जाने और इसराइल के हमले में दर्जनों फलस्तीनियों की मौत को लेकर टिप्पणी की थी.
तुर्की ने अपने राजदूत को भी तेल अवीव से वापस बुला लिया था.
साल 2020 के बाद से तुर्की ने इस पूरे क्षेत्र के कई देशों से संबंध बेहतर किए, इन देशों में इसराइल भी शामिल रहा.
तुर्की, इसराइल और कारोबार
तुर्की और इसराइल के बीच संबंध भले ही उतार चढ़ाव वाले रहे हों. मगर कारोबार दोनों देशों के बीच लगातार जारी रहा.
तुर्की इसराइल का पाँचवाँ बड़ा व्यापारिक सहयोगी देश है.
हालांकि ग़ज़ा इसराइल संघर्ष के बाद दोनों देशों के कारोबार में कमी देखने को मिली है.
रॉयटर्स के मुताबिक़, साल 2023 में दोनों देशों के बीच 6.2 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ. ये कारोबार 2022 की तुलना में 23 फ़ीसदी कम है.
तुर्की ने हाल ही में द्विपक्षीय व्यापार पर ग़ज़ा में युद्ध ख़त्म होने तक रोक लगाई थी. इसराइल ने तुर्की के इस कदम को विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन बताया था.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि तुर्की के इस कदम से इसराइल की अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा.
तुर्की के फ़ैसले के बाद कई निर्यातकों ने कहा था कि वो किसी तीसरे देश के ज़रिए सामान निर्यात करने की कोशिश करेंगे. मगर अब तक इस मामले में कुछ बदलाव देखने को नहीं मिले हैं.
मगर इन सबके बीच तुर्की इकलौता ऐसा बड़ा देश है, जिसने ग़ज़ा युद्ध को लेकर इसराइल से अपने व्यापारिक संबंधों पर रोक लगाई.
तुर्की के इस कदम का अब इसराइल पर असर होता दिख रहा है.
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