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हमास प्रमुख से मिले तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन, क्या हुई बात
ग़ज़ा में हमास के ख़िलाफ़ इसराइल के हमलों के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने फ़लस्तिनियों से अपील की है कि वो एकजुट हों.
राजधानी इस्तांबुल में हमास की राजनीतिक विंग के प्रमुख इस्माइल हानिया के साथ कई घंटों की बातचीत के बाद उन्होंने ये बात कही.
इसराइली विदेश मंत्री इसराइल कात्ज़ ने इस मुलाक़ात की निंदा की है और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने दोनों नेताओं की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की और लिखा कि अर्दोआन को शर्म आनी चाहिए.
लंबे वक्त से हमास और इस्माइल हानिया के साथ तुर्की सरकार के अच्छे संबंध रहे हैं.
दो दिन पहले हमास और इसराइल के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहे क़तर ने कहा था कि वो इसमें अपनी भूमिका को लेकर फिर से विचार कर रहा है.
इस्माइल हानिया के तुर्की जाने से अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि तुर्की दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर सकता है.
इस्तांबुल में हानिया
शनिवार को अर्दोआन के दफ्तर ने ये ख़बर दी कि इस्माइल हानिया और उनके बीच हुई मुलाक़ात कई घंटों तक चली जिसके बाद अर्दोआन ने कहा कि मौजूदा दौर में फ़लस्तीनियों का 'एकजुट' होना बेहद ज़रूरी है.
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया बोस्फोरस की खाड़ी के पास दोलाम्बाचे पैलेस में दोनों नेताओं के बीच क़रीब ढाई घंटे तक बातचीत हुई.
इसके बाद जारी बयान में कहा गया कि इसराइल को जवाब और जीत के लिए फलस्तीनियों को एकता और अखंडता दिखानी होगी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ग़ज़ा पर इसराइल के हमले के बाद इस्माइल हानिया और अर्दोआन की ये पहली मुलाक़ात है. इससे पहले हानिया ने दोहा में इसराइली विदेश मंत्री से मुलाक़ात की थी.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार इसराइल-ग़ज़ा युद्ध अब नए दौर में प्रवेश कर रहा है और नए इलाक़े में फैल सकता है.
एक तरफ इसराइल, ग़ज़ा पर और हमले करने के लिए कमर कस रहा है तो दूसरी तरफ ईरान पर भी उसने जवाबी हमला किया है. अर्दोआन इस मामले में मध्यस्थता नहीं कर सके थे.
इसराइल-हमास युद्ध के दायरे में मध्य पूर्व के आने की आशंका के बीच अर्दोआन ने कहा कि ईरान और इसराइल के बीच जो हुआ उसके बाद "इसराइल को इस इलाक़े में पैर पसारने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए और ये ज़रूरी है कि ध्यान ग़ज़ा पर रहे."
इसराइल ने क्या दी प्रतिक्रिया?
इसराइली विदेश मंत्री इसराइल कात्ज़ ने अर्दोआन और हानिया के बीच हुई मुलाक़ात की निंदा की है.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मुस्लिम ब्रदरहुड का गठबंधन: बलात्कार, हत्या, शवों को क्षत-विक्षत करना और बच्चों को जलाना. अर्दोआन आपको शर्म आनी चाहिए."
हमास 1987 में उस वक्त अस्तित्व में आया था जब मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों ने इसे एक फ़लस्तिनीयों के हक़ों के लिए लड़ने वाले संगठन के तौर पर बनाया था.
इसका उद्देश्य इसराइल की जगह पर एक फ़लस्तीनी राष्ट्र बनाना है.
अमेरिका, इसराइल और अन्य यूरोपीय देश हमास को एक आतंकवादी गुट मानते हैं. हमास का प्रतिद्वंद्वी फ़तेह नाम का गुट वेस्ट बैंक के फ़लस्तीनी इलाक़ों में शासन करता है.
इसराइल कात्ज़ के पोस्ट का उत्तर तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओन्कु कसिली ने दिया.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "इसराइली विदेश के एक सोशल मीडिया पोस्ट के संबंध में- ये इसराइली अधिकारी हैं जिन्हें शर्म आनी चाहिए. उन्होंने लगभग 35,000 फ़लस्तीनियों की हत्या की है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं."
"एजेंडा बदलने की इसराइली सरकार के अधिकारियों की कोशिशों बेनतीजा रहेगी. तुर्किये की प्राथमिकता ग़ज़ा में हो रहा जनसंहार ख़त्म करना और इस इलाक़े में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए फ़लस्तीनी राज्य की स्थापना करना है."
"हम इस दिशा में काम करना जारी रखेंगे और इसराइली अधिकारियों के किए गुनाहों के बारे में सच्चाई बताते रहेंगे."
कैसे बढ़ा मामला?
अप्रैल के महीने की शुरुआत में सीरिया में मौजूद ईरान के वाणिज्य दूतावास पर एक मिसाइल गिरी थी जिसमें 13 लोगों की मौत हुई. मामला यहीं से आगे बढ़ा.
ईरान ने इस हमले के लिए इसराइल को जिम्मेदार बताया, हालांकि इसराइल ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
ईरान के समर्थन वाले हिज़्बुल्लाह और हूती विद्रोही पहले ही इसराइल के ख़िलाफ़ हमले कर रहे थे, लेकिन ईरान सीधे-सीधे लड़ाई में शामिल नहीं था.
एक अप्रैल को अपने वाणिज्य दूतावास पर हमले के बाद ईरान ने कहा कि वो इसका बदला लेगा और 13 अप्रैल को ईरान ने 300 ड्रोन और मिसाइल इसराइल पर दाग़े. इनमें से अधिकतर इसराइल पहुंचने से पहले गिरा दिए गए लेकिन इसके बाद इसराइल ने ये स्पष्ट कर दिया कि वो बदला लेगा.
यहीं से ये चिंता जताई जाने लगी कि युद्ध अब मध्य पूर्व तक फैल सकता है.
अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप हरकत में आए और उन्होंने ईरान पर प्रतिबंध लगाए.
उन्होंने इसराइल और ईरान दोनों से ही संयम बरतने की अपील की. भारी दबाव और तनाव के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि इसराइल ने ईरान पर मिसाइल हमला किया है. हालांकि इसराइल ने इसे लेकर कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया.
ईरान ने इससे किसी तरह के नुक़सान से इनकार किया, लेकिन बीते 24 घंटों में जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के एयरबेस पर हुए नुक़सान के सबूत नज़र आ रहे हैं.
बीबीसी वेरीफ़ाई ने ऐसी दो तस्वीरों का विश्लेषण किया है जिनमें ईरान के इस्फ़हान शहर के एयरबेस पर एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट नज़र आ रहा है.
इस्माइल हानिया और तुर्की के रिश्ते
ईरान पर इसराइल के मिसाइल दाग़ने की ख़बर के बाद क़तर के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश इसराइल और हमास के बीच बातचीत में अपनी भूमिका की नए सिरे से समीक्षा कर रहा है.
क़तर के पीएम शेख़ अब्दुल रहमान अल-थानी ने कहा कि यु्द्धविराम के लिए चल रही बातचीत की कामयाबी पर सवालिया निशान लगाए और कहा कि बातचीत को ‘बेहद नाज़ुक’ दौर में है.
इसके बाद अर्दोआन ने अपने विदेश मंत्री हकान फिदान को दोहा रवाना किया जिससे ये कयास लगाए जाने लगे कि मध्यस्थता में तुर्की अपनी भूमिका खोज रहा है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्री हकान फिदान ने दोहा में हानिया से मुलाक़ात की जिसके तीन दिन बाद ही हानिया ने इस्तांबुल का दौरा किया, जहां उन्होंने अर्दोआन से मुलाक़ात की.
इस्माइल हानिया के इस्तांबुल दौरे की घोषणा करते हुए अर्दोआन ने कहा, "ईश्वर जब तक मुझे सांस लेने की इजाज़त देगा तब तक मैं फ़लस्तीनी लोगों के संघर्ष में उनका साथ दूंगा और फ़लस्तीनियों की आवाज़ बनने की कोशिश करूंगा."
2011 के बाद से तुर्की में हमास का एक दफ्तर काम करता है. इसराइली सैनिक गिलाद शालित को रिहा करने के मामले में तुर्की ने हमास से बातचीत भी की थी.
अर्दोआन और इस्माइल हानिया के बीच अच्छे संबंध हैं और हानिया अक्सर तुर्की जाते रहते हैं.
दोहा दौरे के अलावा बीते दिनों हकान फिदान ने मिस्र के विदेश मंत्री सामे शूक्री से मुलाक़ात कर ग़ज़ा की स्थिति के बारे में उनसे चर्चा की. दोनों के बीच ग़ज़ा में मानवीय राहत पहुंचाने और वहां के हालात पर चर्चा हुई.
शनिवार को अर्दोआन ने भी शूक्री से मुलाक़ात की जिसके बाद तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा, "राष्ट्रपति का कहना है कि मध्य पूर्व इस युद्ध की चपेट में न आए इस के लिए ज़रूरी है कि सभी मुस्लिम देश मिलकर काम करें."
तुर्की नेटो का सदस्य है. जहां नेटो के बाक़ी सदस्यों ने इसराइल पर हुए हमास के हमले की तो वहीं तुर्की ने ग़ज़ा पर इसराइल के हमलों की आलोचना की थी.
अर्दोआन हमास को "आज़ादी की लड़ाई" कहते हैं, साथ ही वो इसराइल के समर्थन के लिए पश्चिमी मुल्कों की आलोचना करते हैं
तुर्की ने इसराइल पर कई तरह के व्यापार प्रतिबंध भी लगाए हैं.
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