ट्रंप की 'धमकी' के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के ग्रीनलैंड जाने के क्या मायने हैं?

ग्रीनलैंड में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, ग्रीनलैंड में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (दाएं)

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को अपनी पत्नी ऊषा वेंस के साथ ग्रीनलैंड पहुंचे.

जेडी वेंस ने यह यात्रा ऐसे समय में की है जब ट्रंप बीते कुछ दिनों में कई बार ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कह चुके हैं.

सबसे पहले साल 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी. दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ट्रंप लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका अपने 'ग्रीनलैंड प्लान' के लिए अपनी आर्थिक ताक़त या सेना का इस्तेमाल कर सकता है.

हालांकि, वेंस ने कहा, "हमें नहीं लगता कि सैन्य बल की कभी आवश्यकता पड़ेगी."

ग्रीनलैंड की ओर से कहा गया कि वेंस की यात्रा 'सम्मान की कमी' को दर्शाती है.

ग्रीनलैंड एक स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है बल्कि डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है. जेडी वेंस की यात्रा की डेनमार्क में भी तीखी आलोचना हुई है और उनके बयानों पर आपत्ति जताई गई है.

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जेडी वेंस और उनकी पत्नी ऊषा वेंस की तस्वीर

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ग्रीनलैंड को रूस और चीन से ख़तरा: वेंस

शुक्रवार की यात्रा को शुरू में वेंस की पत्नी ऊषा ने एक "सांस्कृतिक" दौरा बताया गया था, उन्होंने वहां कुत्तों की स्लेज़िंग दौड़ देखने की बात कही. हालांकि, ग्रीनलैंड और डेनमार्क की तरफ़ से कहा गया कि उन्हें इस तरह के कार्यक्रम में कोई आमंत्रण नहीं दिया गया था.

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ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए उनकी यात्रा ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित पिटुफ़िक स्पेस बेस तक सीमित रही. यह राजधानी नूक से लगभग 1,500 किलोमीटर दूर है.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने डेनमार्क पर आरोप लगाया कि उसकी वजह से ग्रीनलैंड पर चीन और रूस के हमला करने का ख़तरा पैदा हो गया है. साथ ही उन्होंने वहां के लोगों से अमेरिका के साथ "समझौता करने" का आग्रह किया है.

उन्होंने डेनमार्क पर निशाना साधते हुए कहा, "मेरे हिसाब से, ग्रीनलैंड के लोगों को रूस, चीन और अन्य देशों की आक्रामक घुसपैठ से सुरक्षित रखने के लिए डेनमार्क ने ज़रूरी संसाधन नहीं लगाए हैं."

हालांकि, इस दौरान वेंस के तेवर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बलपूर्वक ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की हाल की धमकियों के मुक़ाबले नरम दिखे.

उन्होंने ग्रीनलैंडवासियों से डेनमार्क के साथ संबंध तोड़ने का आग्रह करते हुए कहा कहा कि डेनमार्क ने इस अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निवेश नहीं किया है. साल 1721 से डेनमार्क ग्रीनलैंड को नियंत्रित करता है.

वेंस ने कहा, "हमें उम्मीद है कि वे (ग्रीनलैंड) संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ साझेदारी करना चुनेंगे, क्योंकि हम धरती पर एकमात्र देश हैं जो उनकी संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करेंगे."

उनके साथ उनकी पत्नी ऊषा वेंस के अलावा इस यात्रा में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज़ और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट भी इस यात्रा में शामिल हुए.

ग्रीनलैंड के बारे में अहम बातें

वेंस के बयान पर डेनमार्क की आपत्ति

बीबीसी को दिए गए एक बयान में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रे़डरिक्सन ने वेंस की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है.

उन्होंने कहा, "कई सालों से हम बहुत मुश्किल परिस्थितियों में अमेरिकियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं. इसलिए उपराष्ट्रपति ने डेनमार्क को जिस तरह बताया है, यह सही तरीका नहीं है."

मेटे फ्रे़डरिक्सन ने कहा कि डेनमार्क ने रक्षा ख़र्च में काफ़ी वृद्धि की है. लेकिन वह अधिक निगरानी, ​​नए आर्कटिक जहाजों, लंबी दूरी के ड्रोन और सैटेलाइट क्षमता के साथ अपने निवेश को और बढ़ाएगा.

उनका कहना है, "हम अमेरिकियों के साथ रात-दिन सहयोग करने के लिए तैयार हैं. ऐसा सहयोग जो आवश्यक अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित होना चाहिए."

डेनमार्क के राजा फ्रे़डरिक एक्स ने भी अमेरिका के घोषित इरादों का विरोध किया.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लिखा, "हम एक बदली हुई वास्तविकता में जी रहे हैं. इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ग्रीनलैंड के लिए मेरा प्यार और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ मेरा जुड़ाव बरकरार है."

वहीं, ग्रीनलैंड के नए प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रे़डरिक नील्सन ने वेंस की यात्रा से पहले कहा कि यह "ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति सम्मान की कमी" दर्शाता है.

ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप के वीडियो का स्क्रीनशॉट.

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इमेज कैप्शन, ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप के वीडियो का स्क्रीनशॉट.

अमेरिका ग्रीनलैंड के साथ खड़ा है: ट्रंप

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क की आलोचना पर प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने ट्रंप प्रशासन के 'लहजे' की आलोचना करते हुए कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड में पहले से ही निवेश कर रहा और अमेरिका के साथ अधिक सहयोग करने के लिए तैयार है.

रासमुसेन ने कहा, "कई आरोप लगाए गए हैं और निश्चित रूप से हम आलोचना के लिए तैयार हैं. लेकिन मैं पूरी तरह से ईमानदार होना चाहता हूं कि हम इस लहजे की सराहना नहीं करते हैं. आप अपने क़रीबी सहयोगियों से इस तरह बात नहीं करते हैं. मैं अभी भी डेनमार्क और संयुक्त राज्य अमेरिका को क़रीबी सहयोगी मानता हूं."

डेनमार्क और अमेरिका के बीच 1951 के रक्षा समझौते को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि 1945 के बाद से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति 17 ठिकानों और अहम जगहों पर हज़ारों सैनिकों से घटकर आज उत्तर-पश्चिम में सुदूर पिटुफिक स्पेस बेस पर लगभग 200 सैनिकों तक पहुँच गई है.

रासमुसेन का कहना है कि "आज हमारे पास जो ढांचा है, उसके अंतर्गत हम और अधिक, बहुत कुछ कर सकते हैं. आइए हम सब मिलकर यह काम करें."

ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर डेढ़ मिनट का एक वीडियो जारी किया है.

इस वीडियो में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को रूस और चीन से ख़तरा बताया है. हालांकि बीते दिनों व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा बयान दिया था, जिसे ऐसे देखा जा रहा है, जैसे पुतिन ने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के प्लान का समर्थन किया हो.

पुतिन ने कहा था, "ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का प्लान बहुत गंभीर है. उनकी ऐतिहासिक जड़ें बहुत मज़बूत हैं और यह साफ़ है कि अमेरिका आर्कटिक में अपनी भू-रणनीतिक सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक हितों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाता रहेगा. जहां तक ग्रीनलैंड की बात तो यह देश अलग-अलग देशों का मामला है इसका हमसे कोई लेना-देना नहीं है."

अतीत को याद करते हुए ट्रंप के वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे नाज़ियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की कोशिश की और एक अमेरिकी जहाज़ को टारपीडो से उड़ा दिया. यह जहाज़ नाज़ी आक्रमण को रोकने के लिए ग्रीनलैंड जा रहा था.

वीडियो के अंत में कहा गया है, "अब एक बार फिर साथ खड़े होने का समय आ गया है. शांति के लिए, सुरक्षा के लिए, भविष्य के लिए. अमेरिका ग्रीनलैंड के साथ खड़ा है."

शनिवार को अमेरिकी न्यूज़ चैनल एनबीसी न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा है कि मुझे लगता है कि इस बात की अच्छी संभावना है कि हम बिना सैन्य बल के भी ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल कर सकते हैं.

यह पूछे जाने पर कि ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने से रूस और बाकी दुनिया को क्या संदेश जाएगा, ट्रंप ने कहा, "मुझे वास्तव में इस बारे में परवाह नहीं है. ग्रीनलैंड एक बहुत ही अलग विषय है, बहुत अलग. यह अंतरराष्ट्रीय शांति है. यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ताक़त है. हमें ग्रीनलैंड मिलेगा. हां, शत प्रतिशत."

ग्रीनलैंड के बारे में ग्राफ़िक्स

ग्रीनलैंड क्यों चाहते हैं ट्रंप?

उत्तरी अमेरिका से यूरोप जाने के सबसे छोटे रूट पर ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. ये अमेरिका की बड़े स्पेस सुविधा का केंद्र भी है.

अमेरिका काफ़ी लंबे समय से ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है. उसने शीत युद्ध के दौरान थ्यूली में एक रडार बेस स्थापित किया था.

इसके साथ ही दुनिया के कई दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार भी यहां मौजूद हैं जो बैटरी और हाई-टेक डिवाइस बनाने में इस्तेमाल होते हैं.

ट्रंप का मानना है कि 'सभी जगह मौजूद' रूसी और चीनी जहाज़ों की निगरानी के लिए सेना की कोशिशों के लिए ये द्वीप बेहद ज़रूरी है.

21 लाख स्क्वेयर किलोमीटर के क्षेत्रफल की आबादी वाले ग्रीनलैंड द्वीप की आबादी सिर्फ़ 57 हज़ार है. कई तरह की स्वायत्तता वाले ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था डेनमार्क की सब्सिडी पर निर्भर है और ये किंगडम ऑफ़ डेनमार्क का हिस्सा है.

इस द्वीप के 80 फ़ीसदी हिस्से पर स्थाई रूप से तक़रीबन 4 किलोमीटर मोटी बर्फ़ जमी रहती है.

हालांकि, ट्रंप ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं जिन्होंने ग्रीनलैंड को ख़रीदने का सुझाव दिया है. 1860 के दशक में अमेरिका के 17वें राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन ने पहली बार ये विचार रखा था.

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