ओडिशा में नेपाली छात्रा की मौत से गहराया विवाद, पीएम ओली से लेकर दूतावासों तक पहुँचा मामला

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- Author, विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ओडिशा के एक निजी विश्वविद्यालय में नेपाल की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है.
इस मामले में विश्वविद्यालय के फ़ैसलों को लेकर भी आलोचना हो रही है. पूरे मामले में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी सामने आना पड़ा.
ओडिशा पुलिस का कहना है कि भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) के होस्टल में रविवार शाम को बी-टेक थर्ड ईयर की छात्रा का शव पाया गया था.
पुलिस के अनुसार, रविवार शाम नेपाल की प्रकृति लामसाल नामक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.

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केआईआईटी यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को जानकारी दी है कि उसने दो सुरक्षा कर्मियों को निष्कासित कर दिया है. साथ ही हॉस्टल के दो वरिष्ठ कर्मियों और इंटरनेशनल रिलेशंस ऑफ़िस के एक सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ़िसर को जांच होने तक निलंबित कर दिया है.
इस घटना के ख़िलाफ़ कैंपस में नेपाल के छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि छात्रा के बैच का ही एक भारतीय छात्र उसे प्रताड़ित कर रहा था लेकिन कई शिकायतों के बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की.
इस मामले में अभियुक्त छात्र को अब पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.
लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन के एक कथित आदेश और उसे वापस लेने के बाद ये मामला कूटनीतिक स्तर तक पहुंच गया.

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विरोध प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी ने कथित तौर पर नेपाली छात्रों को कैंपस ख़ाली करने को कहा था लेकिन सोमवार शाम यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर छात्रों को कैंपस और कक्षाओं में लौटने को कहा है.
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट करके जानकारी दी है कि भारत में नेपाली दूतावास के दो अधिकारियों को नेपाली छात्रों की मदद के लिए ओडिशा भेजा गया है.
साथ ही उन्होंने बताया है कि छात्रों के पास उनकी प्राथमिकता के लिहाज़ से विकल्प हैं कि वो या तो हॉस्टल में ही रहें या फिर घर लौट आएं.
वहीं नेपाल की विदेश मंत्री आरज़ू राणा देऊबा ने कहा है कि इस मामले में कूटनीतिक पहल की जा रही है.

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यूनिवर्सिटी ने अब क्या अपील की
नेपाली छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तनाव बढ़ने पर कथित तौर पर छात्रों को 17 फ़रवरी, 2025 तक कैंपस ख़ाली करने का आदेश दिया था.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया था कि बढ़ते तनाव को देखते हुए यह क़दम उठाया गया. एक अधिकारी ने कहा, "यह फ़ैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर में शांति बहाल करने के लिए लिया गया था."
हालांकि अब केआईआईटी ने छात्रों से कैंपस वापस लौटकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने की अपील की है.
सोमवार शाम को कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक अपील करते हुए लिखा, "कल (रविवार) को केआईआईटी कैंपस में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिसकी पुलिस ने जांच की और मामले के अभियुक्त को पकड़ लिया. केआईआईटी प्रशासन ने कैंपस और होस्टल में सामान्य हालात बहाल करने और पढ़ाई को सुचारू करने के लिए सभी क़दम उठाए हैं."
"उन सभी नेपाली छात्रों के लिए एक अपील जारी की गई है जो कैंपस को छोड़कर जा रहे हैं, या जिन्होंने ऐसी योजना बनाई है, वो वापस आकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करें."
कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ने एक दूसरी पोस्ट में लिखा है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में नेपाली छात्रों को वापस लौटने में सहायता के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है जो दिन रात काम करेगा. छात्रों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है.

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भारतीय दूतावास ने भी जारी किया बयान
केआईआईटी से छात्रों को कथित तौर पर वापस जाने के आदेश के बाद क़रीब 500 नेपाली छात्र और छात्राएं भुवनेश्वर और कटक रेलवे स्टेशन पर घर लौटने को लेकर परेशान होते दिखे थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कटक रेलवे स्टेशन पर एक छात्र ने बताया, "हमें होस्टल के कमरे ख़ाली करने को कहा गया था और रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया था. हमें 28 फ़रवरी को परीक्षा देनी है."
नेपाल के अंग्रेज़ी अख़बार काठमांडू पोस्ट के अनुसार, इस घटना के ख़िलाफ़ नेपाली छात्रों के एक समूह ने काठमांडू में भारतीय दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था.
पीटीआई के मुताबिक़, भारतीय दूतावास ने इस घटना पर एक बयान जारी किया, जिसमें कहा कि वह नेपाली छात्र की मौत से दुखी है और इस मुश्किल वक़्त में मृतक के परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है.
दूतावास ने कहा, "दूतावास केआईआईटी के अधिकारियों के साथ-साथ ओडिशा राज्य सरकार के संपर्क में है. दूतावास को सूचित किया गया है कि स्थानीय अधिकारियों ने दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जांच शुरू कर दी है."
बयान में कहा गया, "भारत में पढ़ने वाले नेपाली छात्र दोनों देशों के बीच संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं. भारत सरकार भारत में नेपाली छात्रों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाना जारी रखेगी."
इस मामले में नई दिल्ली में नेपाली दूतावास ने भी बयान जारी किया है. दूतावास ने बताया कि उसने नेपाली छात्रों की सुरक्षा को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन से संपर्क किया है.
इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि, "ओडिशा के कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के हॉस्टल में एक नेपाली छात्रा की मृत्यु और नेपाली छात्रों को जबरन हॉस्टल से निकाले जाने की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है. इस मामले में सरकार कूटनीतिक तरीके़ से इसे समझने और संपर्क में रहकर काम कर रही है."

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इस मामले में अब तक क्या हुआ है ?
कंप्यूटर साइंस की तीसरे वर्ष की छात्रा प्रकृति लम्साल की मौत के मामले में पुलिस ने अधिक जानकारी दी है.
भुवनेश्वर-कटक के पुलिस आयुक्त सुरेश देव दत्ता सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "हमें सूचना मिली कि एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि उन्हें विश्वविद्यालय के ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष में पढ़ने वाले एक छात्र द्वारा परेशान किया जा रहा था."
पुलिस के अनुसार, पीड़ित छात्रा के रिश्तेदारों ने शिकायत दर्ज कराई है और आरोप लगाया है कि अभियुक्त पीड़ित छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था, जिसकी वजह से उसने यह क़दम उठाया.
पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. साथ ही मृतक छात्रा का मोबाइल और अन्य वस्तुएं ज़ब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई हैं.
पुलिस आयुक्त सुरेश देव दत्ता सिंह ने कहा, "शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर यह पता चला है कि किसी प्रकार की प्रताड़ना हुई थी, जिससे हो सकता है कि छात्रा ने यह क़दम उठाया हो. हमने अभियुक्त को हिरासत में लिया और पूछताछ की. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय में पुलिस बल तैनात किया गया है और अब हालात शांतिपूर्ण हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















